ब्रायोफाइटा को पादप जगत का उभयचर क्यों कहा जाता है?
- A.वे जल तथा रेगिस्तान दोनों में उगते हैं
- B.वे थल पर रहते हैं पर निषेचन के लिए जल चाहिए
- C.उनमें जड़ और मूलाभास दोनों होते हैं
- D.वे प्रकाश संश्लेषण के साथ भोजन अवशोषित भी करते हैं
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B। मार्केंशिया, रिक्सिया, फ्यूनेरिया तथा स्फैग्नम जैसे ब्रायोफाइटा मिट्टी, चट्टान और वृक्षों के तनों पर उगते हैं, परंतु उनके नर युग्मक कशाभिकायुक्त होते हैं और अंड तक पहुंचने के लिए उन्हें जल की परत में तैरना पड़ता है, इसलिए शुष्क दशा में निषेचन नहीं हो सकता। यह नाम उभयचर से तुलना करता है, जो थल पर रहता है पर प्रजनन के लिए जल में लौटता है। विकल्प A गलत है क्योंकि ब्रायोफाइटा रेगिस्तान में जीवित नहीं रह सकते; उन्हें नम तथा छायादार स्थान चाहिए। विकल्प C गलत है क्योंकि ब्रायोफाइटा में सच्ची जड़ें होती ही नहीं, केवल जुड़ाव के लिए मूलाभास होते हैं, और जड़ तथा संवहन ऊतक का अभाव उनका प्रमुख लक्षण है। विकल्प D गलत है क्योंकि ब्रायोफाइटा स्वपोषी हैं और कवक की तरह बना हुआ भोजन अवशोषित नहीं करते।
पूरा लेख पढ़ें: पादप जगत: शैवाल से आवृतबीजी तक परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंआइक्लर के वर्गीकरण में किस समूह में वे पौधे आते हैं जिनमें बीज नहीं बनते?
- A.क्रिप्टोगैमी
- B.फैनरोगैमी
- C.जिम्नोस्पर्मी
- D.एंजियोस्पर्मी
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आइक्लर ने पादप जगत को दो भागों में बांटा: क्रिप्टोगैमी, जिसका अर्थ है छिपे जननांगों वाले बीजरहित पौधे, जिनमें शैवाल अर्थात थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा तथा टेरिडोफाइटा आते हैं; और फैनरोगैमी, अर्थात बीजधारी पौधे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संवहन ऊतक विकसित करने वाला पहला पादप समूह कौन माना जाता है?
- A.शैवाल
- B.ब्रायोफाइटा
- C.टेरिडोफाइटा
- D.अनावृतबीजी
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फर्न तथा उनके संबंधी, जैसे सेलाजिनेला, लाइकोपोडियम, इक्वीसीटम, टेरिस, एडिएंटम और मार्सीलिया, पहले पौधे हैं जिनमें जल तथा खनिज ले जाने के लिए जाइलम और भोजन ले जाने के लिए फ्लोएम है, तथा जिनमें सच्ची जड़, तना और पत्ती मिलती है; इसी कारण उन्हें संवहनी क्रिप्टोगैम भी कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रयोगशाला के संवर्धन माध्यम तथा आइसक्रीम में प्रयुक्त एगार किससे प्राप्त होता है?
- A.हरे शैवाल
- B.भूरे शैवाल
- C.लाल शैवाल
- D.नील-हरित शैवाल
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एगार मुख्यतः रोडोफाइसी वर्ग के जेलिडियम तथा ग्रेसिलेरिया से प्राप्त होता है और इसका उपयोग सूक्ष्मजीव तथा पादप ऊतक उगाने के ठोस माध्यम बनाने में, तथा जेली और आइसक्रीम में होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →क्लोरोफिल ए और क्लोरोफिल बी किस शैवाल वर्ग के मुख्य वर्णक हैं?
- A.क्लोरोफाइसी
- B.फियोफाइसी
- C.रोडोफाइसी
- D.बेसिलेरियोफाइसी
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हरे शैवाल का रंग क्लोरोफिल ए तथा क्लोरोफिल बी के कारण होता है, जिन्हें कोई अन्य वर्णक ढकता नहीं; क्लैमिडोमोनास, वॉल्वॉक्स, स्पाइरोगाइरा, यूलोथ्रिक्स और कारा इसी वर्ग में आते हैं और इनका संचित भोजन स्टार्च है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लैमिनेरिया तथा सारगासम का भूरा रंग किस वर्णक के कारण होता है?
- A.फाइकोएरिथ्रिन
- B.फ्यूकोजैंथिन
- C.फाइकोसायनिन
- D.एंथोसायनिन
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फियोफाइसी वर्ग के भूरे शैवालों में क्लोरोफिल ए तथा सी के साथ जैंथोफिल वर्णक फ्यूकोजैंथिन होता है, और चूंकि फ्यूकोजैंथिन हरे क्लोरोफिल को ढक देता है, पौधा जैतूनी हरे से गहरे भूरे रंग का दिखता है; लैमिनेरिया, सारगासम, फ्यूकस, एक्टोकार्पस और डिक्टयोटा इसके उदाहरण हैं तथा इनमें से अनेक में…
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