आवृतबीजी बीज का भ्रूणपोष त्रिगुणित होता है क्योंकि वह बनता है:
- A.दो नर युग्मकों के संयोजन से
- B.एक नर युग्मक तथा दो ध्रुवीय केंद्रकों के त्रिसंयोजन से
- C.युग्मनज के विभाजन से
- D.अंड तथा सहायक कोशिका के संयोजन से
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B। आवृतबीजी में द्विनिषेचन होता है: परागनलिका लाए गए दो नर युग्मकों में से एक अंड से मिलकर द्विगुणित युग्मनज बनाता है और दूसरा केंद्रीय कोशिका के दो ध्रुवीय केंद्रकों से मिलता है। यह दूसरी घटना तीन अगुणित केंद्रकों को जोड़ती है और त्रिसंयोजन कहलाती है, इसलिए प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक तथा उससे बना भ्रूणपोष ऊतक त्रिगुणित होता है, और भ्रूणपोष बढ़ते भ्रूण का पोषण करता है। विकल्प A गलत है क्योंकि दोनों नर युग्मक आपस में कभी नहीं मिलते। विकल्प C गलत है क्योंकि युग्मनज के विभाजन से भ्रूण बनता है, भ्रूणपोष नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि सहायक कोशिकाएं केवल परागनलिका को अंड तक मार्ग दिखाती हैं और निषेचन में भाग नहीं लेतीं। स्मरण रखें कि युग्मनज द्विगुणित और भ्रूणपोष त्रिगुणित होता है, तथा द्विनिषेचन केवल आवृतबीजी पौधों में मिलता है, अनावृतबीजी में नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: पादप जगत: शैवाल से आवृतबीजी तक परीक्षा नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंआइक्लर के वर्गीकरण में किस समूह में वे पौधे आते हैं जिनमें बीज नहीं बनते?
- A.क्रिप्टोगैमी
- B.फैनरोगैमी
- C.जिम्नोस्पर्मी
- D.एंजियोस्पर्मी
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आइक्लर ने पादप जगत को दो भागों में बांटा: क्रिप्टोगैमी, जिसका अर्थ है छिपे जननांगों वाले बीजरहित पौधे, जिनमें शैवाल अर्थात थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा तथा टेरिडोफाइटा आते हैं; और फैनरोगैमी, अर्थात बीजधारी पौधे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →ब्रायोफाइटा को पादप जगत का उभयचर क्यों कहा जाता है?
- A.वे जल तथा रेगिस्तान दोनों में उगते हैं
- B.वे थल पर रहते हैं पर निषेचन के लिए जल चाहिए
- C.उनमें जड़ और मूलाभास दोनों होते हैं
- D.वे प्रकाश संश्लेषण के साथ भोजन अवशोषित भी करते हैं
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मार्केंशिया, रिक्सिया, फ्यूनेरिया तथा स्फैग्नम जैसे ब्रायोफाइटा मिट्टी, चट्टान और वृक्षों के तनों पर उगते हैं, परंतु उनके नर युग्मक कशाभिकायुक्त होते हैं और अंड तक पहुंचने के लिए उन्हें जल की परत में तैरना पड़ता है, इसलिए शुष्क दशा में निषेचन नहीं हो सकता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →संवहन ऊतक विकसित करने वाला पहला पादप समूह कौन माना जाता है?
- A.शैवाल
- B.ब्रायोफाइटा
- C.टेरिडोफाइटा
- D.अनावृतबीजी
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फर्न तथा उनके संबंधी, जैसे सेलाजिनेला, लाइकोपोडियम, इक्वीसीटम, टेरिस, एडिएंटम और मार्सीलिया, पहले पौधे हैं जिनमें जल तथा खनिज ले जाने के लिए जाइलम और भोजन ले जाने के लिए फ्लोएम है, तथा जिनमें सच्ची जड़, तना और पत्ती मिलती है; इसी कारण उन्हें संवहनी क्रिप्टोगैम भी कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रयोगशाला के संवर्धन माध्यम तथा आइसक्रीम में प्रयुक्त एगार किससे प्राप्त होता है?
- A.हरे शैवाल
- B.भूरे शैवाल
- C.लाल शैवाल
- D.नील-हरित शैवाल
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एगार मुख्यतः रोडोफाइसी वर्ग के जेलिडियम तथा ग्रेसिलेरिया से प्राप्त होता है और इसका उपयोग सूक्ष्मजीव तथा पादप ऊतक उगाने के ठोस माध्यम बनाने में, तथा जेली और आइसक्रीम में होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →क्लोरोफिल ए और क्लोरोफिल बी किस शैवाल वर्ग के मुख्य वर्णक हैं?
- A.क्लोरोफाइसी
- B.फियोफाइसी
- C.रोडोफाइसी
- D.बेसिलेरियोफाइसी
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हरे शैवाल का रंग क्लोरोफिल ए तथा क्लोरोफिल बी के कारण होता है, जिन्हें कोई अन्य वर्णक ढकता नहीं; क्लैमिडोमोनास, वॉल्वॉक्स, स्पाइरोगाइरा, यूलोथ्रिक्स और कारा इसी वर्ग में आते हैं और इनका संचित भोजन स्टार्च है।
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