यूएपीए के अंतर्गत किसी संगम को विधिविरुद्ध घोषित करने वाली अधिसूचना किस न्यायालय के एक पदासीन न्यायाधीश वाले अधिकरण को भेजी जाती है?
- A.उच्चतम न्यायालय
- B.उच्च न्यायालय
- C.जिला न्यायालय
- D.सत्र न्यायालय
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है B, उच्च न्यायालय। जब केंद्र सरकार यूएपीए के अंतर्गत किसी संगम को विधिविरुद्ध घोषित करती है, तो वह घोषणा सरकार के कथन मात्र पर नहीं टिकती: उसे एक विधिविरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिकरण को भेजना आवश्यक है, जिसमें उच्च न्यायालय का एक पदासीन न्यायाधीश होता है, और वह अधिकरण छह महीने के भीतर यह तय करता है कि घोषणा की पुष्टि के लिए पर्याप्त कारण है या नहीं। पुष्ट घोषणा पाँच वर्ष तक प्रभावी रहती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि इस अधिकरण का प्रमुख उच्चतम न्यायालय का कोई पदासीन न्यायाधीश नहीं होता, यद्यपि ऐसे मामलों की अपील अंततः उस न्यायालय तक पहुँचती है। विकल्प C और विकल्प D गलत हैं, क्योंकि अधिनियम ने यह समीक्षा जानबूझकर जिला या सत्र न्यायाधीश के स्तर पर नहीं, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के स्तर पर रखी है, क्योंकि प्रतिबंध अनुच्छेद 19(1)(ग) के संगम बनाने के मूल अधिकार को प्रभावित करता है। इस प्रश्न का जाल पदासीन शब्द है, क्योंकि भारत में अनेक अधिकरणों के प्रमुख सेवानिवृत्त न्यायाधीश होते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: आंतरिक सुरक्षा कानून: यूएपीए, अफस्पा, रासुका और एनआईए
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंविधिविरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम किस वर्ष बनाया गया?
- A.1963
- B.1967
- C.1980
- D.2008
उत्तर देखें
विधिविरुद्ध क्रियाकलाप निवारण अधिनियम संसद ने 1967 में राष्ट्रीय एकता परिषद की सिफारिश पर पारित किया, जिसका उद्देश्य विधिविरुद्ध संगमों पर प्रतिबंध लगाना तथा भारत की प्रभुता और अखंडता के विरुद्ध की गई गतिविधियों को दंडित करना था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यूएपीए के किस संशोधन ने केंद्र सरकार को किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करने की शक्ति दी?
- A.2004 का संशोधन
- B.2008 का संशोधन
- C.2012 का संशोधन
- D.2019 का संशोधन
उत्तर देखें
इससे पहले यूएपीए के अंतर्गत सरकार केवल किसी संगठन को आतंकवादी संगठन अधिसूचित कर सकती थी; यूएपीए संशोधन अधिनियम 2019 ने किसी व्यक्ति को आतंकवादी अधिसूचित करने और उसका नाम अधिनियम की चौथी अनुसूची में दर्ज करने की शक्ति जोड़ी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →सशस्त्र बल विशेष शक्तियाँ अधिनियम, 1958 की किस धारा के अंतर्गत किसी क्षेत्र को अशांत क्षेत्र घोषित किया जाता है?
- A.धारा 2
- B.धारा 3
- C.धारा 4
- D.धारा 6
उत्तर देखें
अफस्पा की धारा 3 राज्य के राज्यपाल, संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक अथवा केंद्र सरकार को यह शक्ति देती है कि वह किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्र के संपूर्ण भाग या किसी अंश को अशांत क्षेत्र घोषित करे, और यही घोषणा वह शर्त है जिस पर अधिनियम की प्रत्येक अन्य शक्ति…
पूरी व्याख्या पढ़ें →अफस्पा, 1958 के अंतर्गत कार्य करने वाले व्यक्ति के विरुद्ध अभियोजन के लिए किसकी पूर्व स्वीकृति आवश्यक है?
- A.राज्य का राज्यपाल
- B.राज्य का उच्च न्यायालय
- C.केंद्र सरकार
- D.राज्य सरकार
उत्तर देखें
अफस्पा की धारा 6 कहती है कि अधिनियम द्वारा प्रदत्त शक्तियों के प्रयोग में किए गए किसी कार्य के संबंध में किसी व्यक्ति के विरुद्ध केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना कोई अभियोजन, वाद या अन्य विधिक कार्यवाही आरंभ नहीं की जाएगी।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम, 1980 के अंतर्गत किसी व्यक्ति को अधिकतम कितनी अवधि तक निरुद्ध रखा जा सकता है?
- A.तीन महीने
- B.छह महीने
- C.बारह महीने
- D.चौबीस महीने
उत्तर देखें
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 निरोध की तिथि से अधिकतम बारह महीने तक निवारक निरोध की अनुमति देता है, यद्यपि निरोध प्राधिकारी इससे कम अवधि का आदेश देकर उसी सीमा के भीतर उसे बढ़ा सकता है।
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