तालाब के पारिस्थितिकी तंत्र में जैवभार का पिरामिड कैसा होता है?
- A.सीधा
- B.उल्टा
- C.सदैव आयताकार
- D.ऊर्जा के पिरामिड के समान
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B, उल्टा है। तालाब में उत्पादक पादप प्लवक हैं, अर्थात तैरते हुए सूक्ष्म पौधे, जिनका किसी एक क्षण का कुल भार बहुत कम होता है। किंतु वे अत्यंत तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए समय के साथ कहीं अधिक भार के प्राणी प्लवक तथा मछलियों का पोषण कर लेते हैं। किसी एक क्षण का जैवभार मापने पर पिरामिड उल्टा दिखाई देता है।
विकल्प A वन के लिए सही है, जहां आधार पर वृक्षों का विशाल भार अपने से बहुत कम भार के जंतुओं का पोषण करता है। विकल्प C किसी वास्तविक पिरामिड का वर्णन नहीं करता। विकल्प D गलत है, क्योंकि तालाब में भी ऊर्जा का पिरामिड सीधा ही रहता है; हर स्थानांतरण पर ऊष्मा के रूप में होने वाला क्षय उसे कभी उल्टा नहीं होने देता। अपवाद याद रखें: वृक्ष तंत्र में संख्या उल्टी, तालाब में जैवभार उल्टा, ऊर्जा कभी उल्टी नहीं।
पूरा लेख पढ़ें: पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य श्रृंखला: घटक एवं पिरामिड
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंपारिस्थितिकी तंत्र शब्द किस वैज्ञानिक ने दिया था?
- A.ए. जी. टैंसले
- B.चार्ल्स डार्विन
- C.रेमंड लिंडेमान
- D.चार्ल्स एल्टन
उत्तर देखें
ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक आर्थर जॉर्ज टैंसले ने 1935 में पारिस्थितिकी तंत्र शब्द का प्रयोग उस इकाई के लिए किया जिसमें जीव और उनका निर्जीव परिवेश एक ही तंत्र के रूप में ऊर्जा तथा पदार्थ का आदान-प्रदान करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खाद्य श्रृंखला में हरे पौधों को क्या कहा जाता है?
- A.उत्पादक
- B.प्राथमिक उपभोक्ता
- C.अपघटक
- D.द्वितीयक उपभोक्ता
उत्तर देखें
हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड और जल द्वारा प्रकाश संश्लेषण करके अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, इसीलिए उन्हें स्वपोषी भी कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा स्थानांतरण का दस प्रतिशत नियम किसने दिया था?
- A.ए. जी. टैंसले
- B.रेमंड लिंडेमान
- C.ओडम
- D.अर्नस्ट हेकल
उत्तर देखें
इसके अनुसार किसी पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का लगभग दस प्रतिशत ही अगले स्तर तक पहुंचता है, क्योंकि शेष श्वसन तथा अन्य जैविक क्रियाओं में प्रयुक्त होकर परिवेश में ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन सा पारिस्थितिक पिरामिड सदैव सीधा रहता है?
- A.संख्या का पिरामिड
- B.जैवभार का पिरामिड
- C.ऊर्जा का पिरामिड
- D.तीनों सदैव सीधे रहते हैं
उत्तर देखें
एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक हर स्थानांतरण पर ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है, इसलिए ऊपर का कोई स्तर अपने नीचे वाले स्तर से अधिक ऊर्जा कभी नहीं रख सकता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मृत पौधों और जंतुओं का अपघटन करने वाले जीवाणु तथा कवक क्या कहलाते हैं?
- A.उत्पादक
- B.अपघटक
- C.शाकाहारी
- D.सर्वाहारी
उत्तर देखें
ये मृत शरीरों, गिरी पत्तियों और अपशिष्ट पदार्थों पर पलते हैं, जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं तथा पोषक तत्व पुनः मृदा, जल और वायु में मुक्त कर देते हैं, जहां से पौधे उन्हें फिर ग्रहण कर सकें।
पूरी व्याख्या पढ़ें →