पारिस्थितिकी तंत्र शब्द किस वैज्ञानिक ने दिया था?
- A.ए. जी. टैंसले
- B.चार्ल्स डार्विन
- C.रेमंड लिंडेमान
- D.चार्ल्स एल्टन
सही उत्तर
A. ए. जी. टैंसले
व्याख्या
सही उत्तर A, ए. जी. टैंसले है। ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक आर्थर जॉर्ज टैंसले ने 1935 में पारिस्थितिकी तंत्र शब्द का प्रयोग उस इकाई के लिए किया जिसमें जीव और उनका निर्जीव परिवेश एक ही तंत्र के रूप में ऊर्जा तथा पदार्थ का आदान-प्रदान करते हैं। यही विचार आधुनिक पारिस्थितिकी की नींव है।
विकल्प B, चार्ल्स डार्विन प्राकृतिक चयन द्वारा विकास के सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं, जो उन्होंने जीवों की उत्पत्ति संबंधी अपनी कृति में रखा। विकल्प C, रेमंड लिंडेमान ने 1942 में ऊर्जा स्थानांतरण का दस प्रतिशत नियम दिया और ऊर्जा प्रवाह के संदर्भ में यही नाम याद रखना है, शब्द के प्रवर्तक के रूप में नहीं। विकल्प D, चार्ल्स एल्टन ने खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक पिरामिडों पर कार्य किया तथा संख्या का पिरामिड प्रायः उन्हीं के नाम से जोड़ा जाता है। ये चारों नाम इस प्रश्न में साथ रखे जाते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य श्रृंखला: घटक एवं पिरामिड
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंखाद्य श्रृंखला में हरे पौधों को क्या कहा जाता है?
- A.उत्पादक
- B.प्राथमिक उपभोक्ता
- C.अपघटक
- D.द्वितीयक उपभोक्ता
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. उत्पादक
व्याख्या
सही उत्तर A, उत्पादक है। हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड और जल द्वारा प्रकाश संश्लेषण करके अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, इसीलिए उन्हें स्वपोषी भी कहा जाता है। वे प्रथम पोषी स्तर बनाते हैं और तंत्र के शेष सभी जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके बनाए भोजन पर निर्भर रहते हैं।
विकल्प B, प्राथमिक उपभोक्ता वे शाकाहारी हैं जो पौधे खाते हैं, जैसे टिड्डा, हिरण और गाय। विकल्प C, अपघटक जीवाणु और कवक हैं, जो मृत शरीर तथा अपशिष्ट को तोड़कर पोषक तत्व मृदा में लौटाते हैं। विकल्प D, द्वितीयक उपभोक्ता वे मांसाहारी हैं जो शाकाहारियों को खाते हैं, जैसे घास, टिड्डा, मेंढक, सांप, बाज वाली श्रृंखला में मेंढक। इस श्रृंखला का क्रम याद रखें, क्योंकि प्रश्न प्रायः किसी एक जीव का स्तर पूछते हैं।
खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा स्थानांतरण का दस प्रतिशत नियम किसने दिया था?
- A.ए. जी. टैंसले
- B.रेमंड लिंडेमान
- C.ओडम
- D.अर्नस्ट हेकल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रेमंड लिंडेमान
व्याख्या
सही उत्तर B, रेमंड लिंडेमान है, जिन्होंने यह नियम 1942 में प्रस्तुत किया। इसके अनुसार किसी पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का लगभग दस प्रतिशत ही अगले स्तर तक पहुंचता है, क्योंकि शेष श्वसन तथा अन्य जैविक क्रियाओं में प्रयुक्त होकर परिवेश में ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है। इसी से स्पष्ट होता है कि खाद्य श्रृंखला में प्रायः चार या पांच से अधिक कड़ियां क्यों नहीं होतीं।
विकल्प A, ए. जी. टैंसले ने 1935 में पारिस्थितिकी तंत्र शब्द दिया था। विकल्प C, ओडम ने पारिस्थितिकी की मानक पाठ्यपुस्तकें लिखीं और वे तंत्र की संरचना तथा कार्य के अध्ययन से जुड़े हैं, इस नियम से नहीं। विकल्प D, अर्नस्ट हेकल ने उन्नीसवीं शताब्दी में पारिस्थितिकी शब्द दिया था। तीनों नाम समूह में याद करें: पारिस्थितिकी के लिए हेकल, पारिस्थितिकी तंत्र के लिए टैंसले और दस प्रतिशत नियम के लिए लिंडेमान।
निम्नलिखित में से कौन सा पारिस्थितिक पिरामिड सदैव सीधा रहता है?
- A.संख्या का पिरामिड
- B.जैवभार का पिरामिड
- C.ऊर्जा का पिरामिड
- D.तीनों सदैव सीधे रहते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. ऊर्जा का पिरामिड
व्याख्या
सही उत्तर C, ऊर्जा का पिरामिड है। एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक हर स्थानांतरण पर ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है, इसलिए ऊपर का कोई स्तर अपने नीचे वाले स्तर से अधिक ऊर्जा कभी नहीं रख सकता। इसी कारण ऊर्जा का पिरामिड बिना किसी अपवाद के हर पारिस्थितिकी तंत्र में सीधा रहता है।
विकल्प A, संख्या का पिरामिड एकल वृक्ष के तंत्र में उल्टा हो जाता है, जहां एक बड़ा वृक्ष हजारों कीटों को और वे कीट अनेक पक्षियों को पालते हैं। विकल्प B, जैवभार का पिरामिड तालाब अथवा समुद्र में उल्टा रहता है, क्योंकि किसी क्षण उपस्थित पादप प्लवक का भार उन मछलियों से बहुत कम होता है जिनका वे पोषण करते हैं, यद्यपि वे तेजी से बढ़ते रहते हैं। इसलिए विकल्प D गलत है। अध्याय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला बिंदु यही है।
मृत पौधों और जंतुओं का अपघटन करने वाले जीवाणु तथा कवक क्या कहलाते हैं?
- A.उत्पादक
- B.अपघटक
- C.शाकाहारी
- D.सर्वाहारी
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अपघटक
व्याख्या
सही उत्तर B, अपघटक है, जिन्हें मृतोपजीवी भी कहा जाता है। ये मृत शरीरों, गिरी पत्तियों और अपशिष्ट पदार्थों पर पलते हैं, जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं तथा पोषक तत्व पुनः मृदा, जल और वायु में मुक्त कर देते हैं, जहां से पौधे उन्हें फिर ग्रहण कर सकें। इनके बिना मृत पदार्थ ढेर के रूप में जमा होता जाता और पोषक तत्वों की आपूर्ति रुक जाती।
विकल्प A, उत्पादक वे हरे पौधे हैं जो प्रकाश संश्लेषण से भोजन बनाते हैं। विकल्प C, शाकाहारी पौधे खाने वाले जंतु हैं जो दूसरा पोषी स्तर बनाते हैं। विकल्प D, सर्वाहारी वे जंतु हैं जो पौधे और जंतु दोनों खाते हैं, जैसे भालू, कौआ और मनुष्य। यह भी याद रखें कि अपघटक ही अपरद खाद्य श्रृंखला आरंभ करते हैं, जो जीवित पौधों से नहीं, मृत कार्बनिक पदार्थ से शुरू होती है।
पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह कैसा होता है?
- A.एकदिशीय
- B.पोषक तत्वों की भांति चक्रीय
- C.उपभोक्ताओं से उत्पादकों की ओर
- D.प्रत्येक पोषी स्तर पर अपरिवर्तित
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. एकदिशीय
व्याख्या
सही उत्तर A, एकदिशीय है। ऊर्जा सूर्य के प्रकाश के रूप में तंत्र में प्रवेश करती है, हरे पौधों द्वारा स्थिर होती है और फिर उत्पादकों से शाकाहारियों, मांसाहारियों तथा अंत में अपघटकों तक जाती है। हर चरण पर उसका बड़ा भाग परिवेश में ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है और कुछ भी सूर्य को नहीं लौटता, इसलिए प्रवाह केवल एक ही दिशा में चलता है।
विकल्प B ऊर्जा को पोषक तत्वों से मिला देता है। कार्बन, नाइट्रोजन आदि पोषक तत्व अवश्य चक्रों में घूमते हैं, क्योंकि अपघटक उन्हें मृत पदार्थ से मुक्त करके पौधों के लिए उपलब्ध करा देते हैं। विकल्प C दिशा उलट देता है: उपभोक्ता उत्पादकों पर निर्भर हैं, इसका विपरीत कभी नहीं होता। विकल्प D दस प्रतिशत नियम के विरुद्ध है, क्योंकि एक स्तर की लगभग दसवां भाग ऊर्जा ही अगले स्तर तक पहुंचती है। संक्षेप में: पोषक तत्व चक्र में घूमते हैं, ऊर्जा बहती है।