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GK क्विजपर्यावरण और पारिस्थितिकी

पर्यावरण और पारिस्थितिकी क्विज: पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य श्रृंखलाएं

  • 11 प्रश्न
  • 11 मिनट
  • कठिनाई: मध्यम
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इस क्विज के बारे में

पर्यावरण और पारिस्थितिकी के अंतर्गत "पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य श्रृंखलाएं" विषय पर यह क्विज़ 11 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

11 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

पारिस्थितिकी तंत्र शब्द किस वैज्ञानिक ने दिया था?

  1. A.ए. जी. टैंसले
  2. B.चार्ल्स डार्विन
  3. C.रेमंड लिंडेमान
  4. D.चार्ल्स एल्टन
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ए. जी. टैंसले

व्याख्या

सही उत्तर A, ए. जी. टैंसले है। ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक आर्थर जॉर्ज टैंसले ने 1935 में पारिस्थितिकी तंत्र शब्द का प्रयोग उस इकाई के लिए किया जिसमें जीव और उनका निर्जीव परिवेश एक ही तंत्र के रूप में ऊर्जा तथा पदार्थ का आदान-प्रदान करते हैं। यही विचार आधुनिक पारिस्थितिकी की नींव है।

विकल्प B, चार्ल्स डार्विन प्राकृतिक चयन द्वारा विकास के सिद्धांत के लिए जाने जाते हैं, जो उन्होंने जीवों की उत्पत्ति संबंधी अपनी कृति में रखा। विकल्प C, रेमंड लिंडेमान ने 1942 में ऊर्जा स्थानांतरण का दस प्रतिशत नियम दिया और ऊर्जा प्रवाह के संदर्भ में यही नाम याद रखना है, शब्द के प्रवर्तक के रूप में नहीं। विकल्प D, चार्ल्स एल्टन ने खाद्य श्रृंखला और पारिस्थितिक पिरामिडों पर कार्य किया तथा संख्या का पिरामिड प्रायः उन्हीं के नाम से जोड़ा जाता है। ये चारों नाम इस प्रश्न में साथ रखे जाते हैं।

Q2.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

खाद्य श्रृंखला में हरे पौधों को क्या कहा जाता है?

  1. A.उत्पादक
  2. B.प्राथमिक उपभोक्ता
  3. C.अपघटक
  4. D.द्वितीयक उपभोक्ता
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. उत्पादक

व्याख्या

सही उत्तर A, उत्पादक है। हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड और जल द्वारा प्रकाश संश्लेषण करके अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, इसीलिए उन्हें स्वपोषी भी कहा जाता है। वे प्रथम पोषी स्तर बनाते हैं और तंत्र के शेष सभी जीव प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके बनाए भोजन पर निर्भर रहते हैं।

विकल्प B, प्राथमिक उपभोक्ता वे शाकाहारी हैं जो पौधे खाते हैं, जैसे टिड्डा, हिरण और गाय। विकल्प C, अपघटक जीवाणु और कवक हैं, जो मृत शरीर तथा अपशिष्ट को तोड़कर पोषक तत्व मृदा में लौटाते हैं। विकल्प D, द्वितीयक उपभोक्ता वे मांसाहारी हैं जो शाकाहारियों को खाते हैं, जैसे घास, टिड्डा, मेंढक, सांप, बाज वाली श्रृंखला में मेंढक। इस श्रृंखला का क्रम याद रखें, क्योंकि प्रश्न प्रायः किसी एक जीव का स्तर पूछते हैं।

Q3.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा स्थानांतरण का दस प्रतिशत नियम किसने दिया था?

  1. A.ए. जी. टैंसले
  2. B.रेमंड लिंडेमान
  3. C.ओडम
  4. D.अर्नस्ट हेकल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रेमंड लिंडेमान

व्याख्या

सही उत्तर B, रेमंड लिंडेमान है, जिन्होंने यह नियम 1942 में प्रस्तुत किया। इसके अनुसार किसी पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का लगभग दस प्रतिशत ही अगले स्तर तक पहुंचता है, क्योंकि शेष श्वसन तथा अन्य जैविक क्रियाओं में प्रयुक्त होकर परिवेश में ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है। इसी से स्पष्ट होता है कि खाद्य श्रृंखला में प्रायः चार या पांच से अधिक कड़ियां क्यों नहीं होतीं।

विकल्प A, ए. जी. टैंसले ने 1935 में पारिस्थितिकी तंत्र शब्द दिया था। विकल्प C, ओडम ने पारिस्थितिकी की मानक पाठ्यपुस्तकें लिखीं और वे तंत्र की संरचना तथा कार्य के अध्ययन से जुड़े हैं, इस नियम से नहीं। विकल्प D, अर्नस्ट हेकल ने उन्नीसवीं शताब्दी में पारिस्थितिकी शब्द दिया था। तीनों नाम समूह में याद करें: पारिस्थितिकी के लिए हेकल, पारिस्थितिकी तंत्र के लिए टैंसले और दस प्रतिशत नियम के लिए लिंडेमान।

Q4.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

निम्नलिखित में से कौन सा पारिस्थितिक पिरामिड सदैव सीधा रहता है?

  1. A.संख्या का पिरामिड
  2. B.जैवभार का पिरामिड
  3. C.ऊर्जा का पिरामिड
  4. D.तीनों सदैव सीधे रहते हैं
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. ऊर्जा का पिरामिड

व्याख्या

सही उत्तर C, ऊर्जा का पिरामिड है। एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक हर स्थानांतरण पर ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है, इसलिए ऊपर का कोई स्तर अपने नीचे वाले स्तर से अधिक ऊर्जा कभी नहीं रख सकता। इसी कारण ऊर्जा का पिरामिड बिना किसी अपवाद के हर पारिस्थितिकी तंत्र में सीधा रहता है।

विकल्प A, संख्या का पिरामिड एकल वृक्ष के तंत्र में उल्टा हो जाता है, जहां एक बड़ा वृक्ष हजारों कीटों को और वे कीट अनेक पक्षियों को पालते हैं। विकल्प B, जैवभार का पिरामिड तालाब अथवा समुद्र में उल्टा रहता है, क्योंकि किसी क्षण उपस्थित पादप प्लवक का भार उन मछलियों से बहुत कम होता है जिनका वे पोषण करते हैं, यद्यपि वे तेजी से बढ़ते रहते हैं। इसलिए विकल्प D गलत है। अध्याय का सर्वाधिक पूछा जाने वाला बिंदु यही है।

Q5.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

मृत पौधों और जंतुओं का अपघटन करने वाले जीवाणु तथा कवक क्या कहलाते हैं?

  1. A.उत्पादक
  2. B.अपघटक
  3. C.शाकाहारी
  4. D.सर्वाहारी
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अपघटक

व्याख्या

सही उत्तर B, अपघटक है, जिन्हें मृतोपजीवी भी कहा जाता है। ये मृत शरीरों, गिरी पत्तियों और अपशिष्ट पदार्थों पर पलते हैं, जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं तथा पोषक तत्व पुनः मृदा, जल और वायु में मुक्त कर देते हैं, जहां से पौधे उन्हें फिर ग्रहण कर सकें। इनके बिना मृत पदार्थ ढेर के रूप में जमा होता जाता और पोषक तत्वों की आपूर्ति रुक जाती।

विकल्प A, उत्पादक वे हरे पौधे हैं जो प्रकाश संश्लेषण से भोजन बनाते हैं। विकल्प C, शाकाहारी पौधे खाने वाले जंतु हैं जो दूसरा पोषी स्तर बनाते हैं। विकल्प D, सर्वाहारी वे जंतु हैं जो पौधे और जंतु दोनों खाते हैं, जैसे भालू, कौआ और मनुष्य। यह भी याद रखें कि अपघटक ही अपरद खाद्य श्रृंखला आरंभ करते हैं, जो जीवित पौधों से नहीं, मृत कार्बनिक पदार्थ से शुरू होती है।

Q6.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह कैसा होता है?

  1. A.एकदिशीय
  2. B.पोषक तत्वों की भांति चक्रीय
  3. C.उपभोक्ताओं से उत्पादकों की ओर
  4. D.प्रत्येक पोषी स्तर पर अपरिवर्तित
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एकदिशीय

व्याख्या

सही उत्तर A, एकदिशीय है। ऊर्जा सूर्य के प्रकाश के रूप में तंत्र में प्रवेश करती है, हरे पौधों द्वारा स्थिर होती है और फिर उत्पादकों से शाकाहारियों, मांसाहारियों तथा अंत में अपघटकों तक जाती है। हर चरण पर उसका बड़ा भाग परिवेश में ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है और कुछ भी सूर्य को नहीं लौटता, इसलिए प्रवाह केवल एक ही दिशा में चलता है।

विकल्प B ऊर्जा को पोषक तत्वों से मिला देता है। कार्बन, नाइट्रोजन आदि पोषक तत्व अवश्य चक्रों में घूमते हैं, क्योंकि अपघटक उन्हें मृत पदार्थ से मुक्त करके पौधों के लिए उपलब्ध करा देते हैं। विकल्प C दिशा उलट देता है: उपभोक्ता उत्पादकों पर निर्भर हैं, इसका विपरीत कभी नहीं होता। विकल्प D दस प्रतिशत नियम के विरुद्ध है, क्योंकि एक स्तर की लगभग दसवां भाग ऊर्जा ही अगले स्तर तक पहुंचती है। संक्षेप में: पोषक तत्व चक्र में घूमते हैं, ऊर्जा बहती है।

Q7.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

मृत कार्बनिक पदार्थ से आरंभ होने वाली खाद्य श्रृंखला क्या कहलाती है?

  1. A.चारण खाद्य श्रृंखला
  2. B.अपरद खाद्य श्रृंखला
  3. C.परजीवी खाद्य श्रृंखला
  4. D.परभक्षी खाद्य श्रृंखला
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अपरद खाद्य श्रृंखला

व्याख्या

सही उत्तर B, अपरद खाद्य श्रृंखला है। अपरद का अर्थ है मृत कार्बनिक पदार्थ, जैसे गिरी हुई पत्तियां, मृत शरीर तथा जंतुओं का मल। केंचुए, दीमक, जीवाणु और कवक जैसे जीव इस पर पलते हैं, और उन्हें छोटे पक्षी तथा अन्य जंतु खाते हैं। अनेक तंत्रों में, विशेषकर वनों में, चारण श्रृंखला की तुलना में ऊर्जा का बड़ा भाग इसी श्रृंखला से होकर बहता है।

विकल्प A, चारण खाद्य श्रृंखला जीवित हरे पौधों से आरंभ होती है, जैसे घास, टिड्डा, मेंढक, सांप। विकल्प C और D इस वर्गीकरण की कोई मानक श्रेणी नहीं बताते, यद्यपि परजीविता और परभक्षण दोनों तंत्र के वास्तविक संबंध हैं। दोनों श्रृंखलाएं अलग-अलग नहीं चलतीं: वे जुड़ी रहती हैं, क्योंकि चारण श्रृंखला का अपशिष्ट ही अपरद श्रृंखला की आरंभिक सामग्री बनता है।

Q8.पर्यावरण और पारिस्थितिकीआसान

जो जंतु पौधे और जंतु दोनों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं, वे क्या कहलाते हैं?

  1. A.शाकाहारी
  2. B.मांसाहारी
  3. C.सर्वाहारी
  4. D.स्वपोषी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सर्वाहारी

व्याख्या

सही उत्तर C, सर्वाहारी है। भालू, कौआ, सूअर और मनुष्य पौधों तथा जंतुओं दोनों का भोजन करते हैं, इसलिए वे एक साथ एक से अधिक पोषी स्तर पर रह सकते हैं। यही इस बात का अच्छा उदाहरण है कि प्रकृति का वर्णन एकल खाद्य श्रृंखला से नहीं, खाद्य जाल से ही ठीक ढंग से होता है।

विकल्प A, शाकाहारी केवल पौधे खाते हैं और खाद्य श्रृंखला के प्राथमिक उपभोक्ता होते हैं; गाय, हिरण और टिड्डा इसी वर्ग में आते हैं। विकल्प B, मांसाहारी दूसरे जंतुओं को खाते हैं और ऊंचे पोषी स्तर बनाते हैं; मेंढक, सांप और बाघ इसके उदाहरण हैं। विकल्प D, स्वपोषी जंतु होते ही नहीं: इस शब्द का अर्थ है उत्पादक, अर्थात हरे पौधे और शैवाल, जो प्रकाश संश्लेषण से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं।

Q9.पर्यावरण और पारिस्थितिकीकठिन

तालाब के पारिस्थितिकी तंत्र में जैवभार का पिरामिड कैसा होता है?

  1. A.सीधा
  2. B.उल्टा
  3. C.सदैव आयताकार
  4. D.ऊर्जा के पिरामिड के समान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. उल्टा

व्याख्या

सही उत्तर B, उल्टा है। तालाब में उत्पादक पादप प्लवक हैं, अर्थात तैरते हुए सूक्ष्म पौधे, जिनका किसी एक क्षण का कुल भार बहुत कम होता है। किंतु वे अत्यंत तेजी से बढ़ते हैं, इसलिए समय के साथ कहीं अधिक भार के प्राणी प्लवक तथा मछलियों का पोषण कर लेते हैं। किसी एक क्षण का जैवभार मापने पर पिरामिड उल्टा दिखाई देता है।

विकल्प A वन के लिए सही है, जहां आधार पर वृक्षों का विशाल भार अपने से बहुत कम भार के जंतुओं का पोषण करता है। विकल्प C किसी वास्तविक पिरामिड का वर्णन नहीं करता। विकल्प D गलत है, क्योंकि तालाब में भी ऊर्जा का पिरामिड सीधा ही रहता है; हर स्थानांतरण पर ऊष्मा के रूप में होने वाला क्षय उसे कभी उल्टा नहीं होने देता। अपवाद याद रखें: वृक्ष तंत्र में संख्या उल्टी, तालाब में जैवभार उल्टा, ऊर्जा कभी उल्टी नहीं।

Q10.पर्यावरण और पारिस्थितिकीकठिन

किसी पारिस्थितिकी तंत्र की शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता किसके बराबर होती है?

  1. A.सकल प्राथमिक उत्पादकता जोड़ श्वसन
  2. B.सकल प्राथमिक उत्पादकता घटा पौधों द्वारा श्वसन में प्रयुक्त ऊर्जा
  3. C.तंत्र पर पड़ने वाला कुल सूर्य प्रकाश
  4. D.सभी उपभोक्ताओं का कुल जैवभार
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सकल प्राथमिक उत्पादकता घटा पौधों द्वारा श्वसन में प्रयुक्त ऊर्जा

व्याख्या

सही उत्तर B है। सकल प्राथमिक उत्पादकता वह कुल ऊर्जा है जिसे उत्पादक प्रकाश संश्लेषण से स्थिर करते हैं। इसका एक भाग पौधे अपने श्वसन में खर्च कर देते हैं, और जो शेष पौधों के शरीर में संचित रह जाता है वही शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता है। यही शेष भाग शाकाहारियों को वास्तव में उपलब्ध भोजन है, इसलिए यही तय करता है कि तंत्र कितने जीवन का पोषण कर सकता है।

विकल्प A श्वसन को घटाने के बजाय जोड़ देता है और ऐसा आंकड़ा देगा जो वास्तव में ग्रहण की गई ऊर्जा से भी अधिक होगा। विकल्प C गलत है, क्योंकि हरे पौधे उन तक पहुंचने वाले सूर्य प्रकाश का बहुत छोटा भाग ही ग्रहण करते हैं, शेष परावर्तित हो जाता है या निकल जाता है। विकल्प D उपभोक्ताओं का संचित जैवभार बताता है, जो किसी क्षण का भंडार है, उत्पादन की दर नहीं। उत्पादकता सदैव प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रति इकाई समय में व्यक्त की जाती है।

Q11.पर्यावरण और पारिस्थितिकीमध्यम

खाद्य श्रृंखला के प्रत्येक ऊंचे पोषी स्तर पर डीडीटी जैसे कीटनाशकों की सांद्रता बढ़ जाती है। यह परिघटना क्या कहलाती है?

  1. A.सुपोषण
  2. B.जैव आवर्धन
  3. C.पारिस्थितिक अनुक्रमण
  4. D.जैव निम्नीकरण
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. जैव आवर्धन

व्याख्या

सही उत्तर B, जैव आवर्धन है। डीडीटी तथा पारे के यौगिक शरीर में न तो टूटते हैं और न बाहर निकाले जाते हैं, इसलिए वे हर जीव के ऊतकों में जमा होते जाते हैं और जो उसे खाता है उस तक पहुंच जाते हैं। सांद्रता हर चरण पर बढ़ती है, और मछली खाने वाले पक्षियों तथा मनुष्य जैसे शीर्ष मांसाहारियों को सबसे बड़ी मात्रा मिलती है; पक्षियों में इसी से अंडों के कवच पतले होकर टूटने लगे थे।

विकल्प A, सुपोषण किसी जलाशय में उर्वरकों और मल-जल से पोषक तत्व बढ़ने पर शैवाल की अत्यधिक वृद्धि है, जिससे जल की ऑक्सीजन समाप्त हो जाती है। विकल्प C, पारिस्थितिक अनुक्रमण किसी समुदाय का समय के साथ क्रमशः बदलते हुए स्थिर चरम अवस्था तक पहुंचना है। विकल्प D, जैव निम्नीकरण सूक्ष्मजीवों द्वारा पदार्थों का विघटन है, और डीडीटी की विशेषता यही है कि वह इसका प्रतिरोध करता है।

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