सीओपी-26 में घोषित पंचामृत के अंतर्गत भारत ने गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता का कौन-सा लक्ष्य रखा?
- A.2022 तक 175 गीगावाट
- B.2030 तक 450 गीगावाट
- C.2030 तक 500 गीगावाट
- D.2047 तक 1,000 गीगावाट
सही उत्तर
C. 2030 तक 500 गीगावाट
व्याख्या
सही उत्तर है C, 2030 तक 500 गीगावाट, जो 2021 में ग्लासगो के सीओपी-26 के समक्ष रखे पंचामृत का पहला संकल्प था। शेष चार थे: 2030 तक भारत की ऊर्जा आवश्यकता का आधा नवीकरणीय स्रोतों से, 2030 तक अनुमानित उत्सर्जन में एक अरब टन की कटौती, 2005 की तुलना में 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत कमी, और 2070 तक नेट ज़ीरो। A गलत है क्योंकि 2022 तक 175 गीगावाट 2015 में घोषित पुराना नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य था, जो अलग और बहुत छोटा संकल्प है। B गलत है क्योंकि 450 गीगावाट वह आँकड़ा था जिसकी बात भारत ग्लासगो से पहले करता था और यही सबसे प्रचलित भ्रम है; पंचामृत ने उसे बढ़ा दिया। D गलत है क्योंकि ग्लासगो में एक हज़ार गीगावाट का ऐसा कोई संकल्प नहीं रखा गया। ध्यान रहे कि 500 गीगावाट का लक्ष्य समस्त गैर-जीवाश्म क्षमता गिनता है, इसलिए सौर और पवन के साथ बड़ी पनबिजली तथा परमाणु भी इसमें शामिल हैं।
पूरा लेख पढ़ें: कार्बन क्रेडिट, नेट ज़ीरो और हरित वित्त नोट्स
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंएक कार्बन क्रेडिट कितनी ग्रीनहाउस गैस की कटौती को दर्शाता है?
- A.एक किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- B.सौ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- C.एक टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- D.एक हज़ार टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. एक टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
व्याख्या
सही उत्तर है C, एक टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य। टन ही हर कार्बन बाज़ार की, अनुपालन हो या स्वैच्छिक, मानक व्यापार इकाई है और इसे 1 tCO2e लिखा जाता है। समतुल्य शब्द महत्वपूर्ण है: कार्बन डाइऑक्साइड से भिन्न गैसों को उनकी वैश्विक तापन क्षमता से कार्बन डाइऑक्साइड में बदला जाता है, इसलिए मेथेन या नाइट्रस ऑक्साइड की बहुत कम मात्रा भी एक क्रेडिट दिला सकती है। A गलत है क्योंकि किलोग्राम बाज़ार इकाई बनने के लिए बहुत छोटा है; कोई रजिस्ट्री किलोग्राम में क्रेडिट जारी नहीं करती। B इसी कारण गलत है, और सौ किलोग्राम तो वास्तविक इकाई का दसवाँ भाग है, जो आधा-अधूरा याद रखने वाले परीक्षार्थी को फँसाने के लिए रखा जाता है। D गलत है क्योंकि एक हज़ार टन किसी छोटी परियोजना की पूरे वर्ष की बचत का पैमाना है, एक क्रेडिट का नहीं; उतनी बड़ी परियोजना को एक हज़ार अलग-अलग क्रेडिट मिलते हैं, और इसी कारण खरीदार उन्हें छोटी-छोटी मात्रा में खरीद पाते हैं।
स्वच्छ विकास तंत्र किस अंतरराष्ट्रीय समझौते ने बनाया था?
- A.मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल
- B.क्योटो प्रोटोकॉल
- C.कार्टाजेना प्रोटोकॉल
- D.नागोया प्रोटोकॉल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. क्योटो प्रोटोकॉल
व्याख्या
सही उत्तर है B, क्योटो प्रोटोकॉल। यह 1997 में जापान में सीओपी-3 में स्वीकार हुआ और 2005 से प्रभावी हुआ; इसने विकसित देशों के लिए बाध्यकारी उत्सर्जन लक्ष्य रखे और उन्हें पूरा करने के लिए तीन लचीली व्यवस्थाएँ दीं। इनमें से स्वच्छ विकास तंत्र, अनुच्छेद 12 के अंतर्गत, किसी विकसित देश को विकासशील देश में उत्सर्जन घटाने वाली परियोजना में धन लगाकर उस बचत को प्रमाणित उत्सर्जन कटौती के रूप में लेने देता था। A गलत है क्योंकि 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल क्लोरोफ्लोरोकार्बन जैसी ओज़ोन-क्षयकारी गैसों से जुड़ा है और उसमें उत्सर्जन व्यापार की कोई व्यवस्था नहीं है। C गलत है क्योंकि जैव विविधता अभिसमय के अंतर्गत कार्टाजेना प्रोटोकॉल जीवित रूपांतरित जीवों के सीमापार आवागमन का नियमन करता है। D गलत है क्योंकि उसी अभिसमय का नागोया प्रोटोकॉल आनुवंशिक संसाधनों तक पहुँच और लाभ के न्यायसंगत बँटवारे पर है। कार्बन क्रेडिट बनाने वाले जलवायु संधि-परिवार का सदस्य केवल क्योटो प्रोटोकॉल है।
स्वच्छ विकास तंत्र के अंतर्गत बनने वाले क्रेडिट किस नाम से जाने जाते हैं?
- A.उत्सर्जन कटौती इकाई
- B.नियत मात्रा इकाई
- C.प्रमाणित उत्सर्जन कटौती
- D.नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. प्रमाणित उत्सर्जन कटौती
व्याख्या
सही उत्तर है C, प्रमाणित उत्सर्जन कटौती, जिसे सीईआर कहा जाता है। प्रत्येक सीईआर एक टन कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य के बराबर है और किसी मान्यता प्राप्त तीसरे पक्ष के सत्यापन के बाद ही जारी होता है। भारत ने ऐसी बहुत बड़ी संख्या में परियोजनाएँ अपने यहाँ लगवाईं और सीईआर के सबसे बड़े विक्रेताओं में रहा। A गलत है क्योंकि उत्सर्जन कटौती इकाई संयुक्त कार्यान्वयन से बनती है, जिसमें एक विकसित देश दूसरे विकसित देश में परियोजना लगाता है, किसी विकासशील देश में नहीं। B गलत है क्योंकि नियत मात्रा इकाई विकसित देशों को स्वयं दिया गया उत्सर्जन भत्ता है, जो अनुच्छेद 17 के अंतर्गत सरकारों के बीच सीधे बिकता है, किसी परियोजना से कमाया नहीं जाता। D गलत है क्योंकि नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाण-पत्र भारत का घरेलू साधन है जो बाध्य खरीदार को संयंत्र लगाए बिना नवीकरणीय खरीद दायित्व पूरा करने देता है; वह नवीकरणीय बिजली मापता है, टाली गई गैस नहीं, और क्योटो प्रोटोकॉल में उसकी कोई मान्यता नहीं है।
पेरिस समझौते का कौन-सा अनुच्छेद सहयोगात्मक उपायों और केंद्रीकृत क्रेडिट तंत्र की व्यवस्था करता है?
- A.अनुच्छेद 2
- B.अनुच्छेद 6
- C.अनुच्छेद 9
- D.अनुच्छेद 14
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 6
व्याख्या
सही उत्तर है B, अनुच्छेद 6। पेरिस समझौते की सारी बाज़ार व्यवस्था इसी में है: अनुच्छेद 6.2 दो देशों को द्विपक्षीय सहयोग करके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हस्तांतरित शमन परिणाम बेचने देता है, और संगत समायोजन से यह सुनिश्चित करता है कि एक ही टन दो बार न गिनी जाए; अनुच्छेद 6.4 संयुक्त राष्ट्र की किसी संस्था की निगरानी में केंद्रीकृत क्रेडिट तंत्र बनाता है, जो स्वच्छ विकास तंत्र की उत्तराधिकारी है; और अनुच्छेद 6.8 वित्त तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण जैसे गैर-बाज़ार उपाय समेटता है। A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 2 समझौते का उद्देश्य बताता है, जिसमें तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस से काफ़ी नीचे रोकना शामिल है। C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 9 विकसित देशों से विकासशील देशों को जलवायु वित्त पर है। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 14 वैश्विक समीक्षा, यानी सामूहिक प्रगति के समय-समय पर मूल्यांकन, की व्यवस्था करता है। ध्यान रखें कि क्योटो प्रोटोकॉल का अनुच्छेद 6 संयुक्त कार्यान्वयन है, जो अलग विषय है।
भारत ने 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य किस सीओपी में घोषित किया था?
- A.सीओपी-21, पेरिस
- B.सीओपी-24, कातोविचे
- C.सीओपी-26, ग्लासगो
- D.सीओपी-28, दुबई
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. सीओपी-26, ग्लासगो
व्याख्या
सही उत्तर है C, ग्लासगो का सीओपी-26, जो 2021 में हुआ और जिसमें भारत ने सम्मेलन के समक्ष पाँच हिस्सों वाला संकल्प रखा, जिसे पंचामृत कहा जाता है: 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता, 2030 तक ऊर्जा आवश्यकता का आधा नवीकरणीय स्रोतों से, 2030 तक अनुमानित उत्सर्जन में एक अरब टन की कटौती, 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक सकल घरेलू उत्पाद की उत्सर्जन तीव्रता में 45 प्रतिशत कमी, और 2070 तक नेट ज़ीरो। A गलत है क्योंकि 2015 के सीओपी-21 में पेरिस समझौता ही बना, उससे वर्षों बाद भारत ने नेट ज़ीरो का वर्ष बताया। B गलत है क्योंकि 2018 में पोलैंड का सीओपी-24 पारदर्शिता और लेखांकन पर पेरिस नियम-पुस्तिका के लिए याद किया जाता है। D गलत है क्योंकि 2023 का सीओपी-28 पहली वैश्विक समीक्षा, हानि एवं क्षति कोष के क्रियाशील होने और जीवाश्म ईंधन से हटने के आह्वान से जुड़ा है, भारत की नेट ज़ीरो घोषणा से नहीं।