संघ लोक सेवा आयोग का व्यय, जिसमें उसके कर्मचारियों के वेतन और पेंशन शामिल हैं:
- A.प्रत्येक वर्ष लोक सभा द्वारा मतदान से स्वीकृत होता है
- B.भारत की संचित निधि पर भारित होता है
- C.भारत की आकस्मिकता निधि से पूरा किया जाता है
- D.संघ और राज्यों के बीच बांटा जाता है
सही उत्तर
B. भारत की संचित निधि पर भारित होता है
व्याख्या
सही उत्तर B, भारत की संचित निधि पर भारित होता है। अनुच्छेद 322 संघ लोक सेवा आयोग के व्यय को, जिसमें उसके सदस्यों और कर्मचारियों के वेतन, भत्ते तथा पेंशन भी शामिल हैं, भारत की संचित निधि पर भारित व्यय बनाता है। भारित व्यय पर संसद में चर्चा हो सकती है पर मतदान नहीं होता, जिससे विधानमंडल आयोग का बजट घटाकर उस पर दबाव नहीं बना सकता और यही उसकी स्वतंत्रता की एक गारंटी है। इसलिए विकल्प A गलत है, क्योंकि मतदान से बचाना ही अनुच्छेद 322 का उद्देश्य है। विकल्प C गलत है क्योंकि आकस्मिकता निधि राष्ट्रपति के पास अग्रदाय के रूप में अप्रत्याशित व्यय के लिए रखी जाती है, किसी संवैधानिक निकाय का स्थायी स्रोत नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि राज्य आयोग का व्यय उस राज्य की संचित निधि पर और संघ आयोग का व्यय भारत की संचित निधि पर भारित होता है, बंटवारा नहीं होता।
पूरा लेख पढ़ें: संघ और राज्य लोक सेवा आयोग: अनुच्छेद 315 से 323
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से किस अधिकारी को हटाने में संसद की कोई भूमिका नहीं होती है?
1. उच्च न्यायालय के न्यायाधीश
2. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश
3. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष
4. भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
2. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश
3. संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष
4. भारत के नियंत्रक महालेखापरीक्षक
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 3 और 4
- C.केवल 1, 2 और 3
- D.केवल 3
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. केवल 3
व्याख्या
सही उत्तर D, केवल 3 है। संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष को अनुच्छेद 317 के अंतर्गत राष्ट्रपति हटाते हैं, और कदाचार के आधार पर तभी जब राष्ट्रपति के निर्देश पर उच्चतम न्यायालय जांच करके उसे हटाने की सिफारिश करे। इस पूरी प्रक्रिया में किसी सदन के संकल्प की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए संसद की कोई भूमिका नहीं है। विकल्प 1 और 2 में दिए उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश दोनों सदनों के विशेष बहुमत से पारित समावेदन के बाद ही राष्ट्रपति द्वारा हटाए जाते हैं, इसलिए वहां संसद केंद्रीय है। विकल्प 4 में दिए नियंत्रक महालेखापरीक्षक को भी उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की ही रीति से हटाया जाता है, जिसमें दोनों सदनों का समावेदन आवश्यक है। इसलिए A, B और C गलत हैं क्योंकि उनमें से प्रत्येक या तो आयोग अध्यक्ष को छोड़ देता है या न्यायाधीशों तथा महालेखापरीक्षक को गलत ढंग से जोड़ देता है।
संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों का कार्यकाल होता है:
- A.6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो
- B.6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु
- C.5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
- D.4 वर्ष या 62 वर्ष की आयु
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो
व्याख्या
सही उत्तर A, छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु, जो पहले हो है। अनुच्छेद 316(2) कहता है कि संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य पद ग्रहण की तारीख से छह वर्ष की अवधि तक, या 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, इनमें से जो पहले हो, पद धारण करता है। विकल्प B में कार्यकाल सही है पर आयु गलत है: 62 वर्ष की सीमा राज्य लोक सेवा आयोग या संयुक्त लोक सेवा आयोग के सदस्य पर लागू होती है, और इन दोनों को मिला देना ही इस प्रश्न में सबसे आम भूल है। विकल्प C गलत है क्योंकि कार्यकाल पांच वर्ष नहीं बल्कि छह वर्ष है। विकल्प D दोनों दृष्टि से गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 316 में न चार वर्ष का कार्यकाल आता है और न चार वर्ष के साथ 62 वर्ष का यह मेल।
उत्तर प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यों का विस्तार किसके द्वारा किया जा सकता है?
- A.प्रधानमंत्री
- B.केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय
- C.राष्ट्रपति
- D.उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल
व्याख्या
सही उत्तर D, उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल है। अनुच्छेद 321 लोक सेवा आयोग को अतिरिक्त कार्य सौंपने की अनुमति देता है और दोनों प्रकार के आयोगों के लिए अलग अलग प्राधिकारी बताता है: संघ लोक सेवा आयोग के कार्यों का विस्तार संसद कर सकती है, जबकि किसी राज्य के लोक सेवा आयोग के कार्यों का विस्तार उस राज्य का विधानमंडल करता है। इसलिए उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के कार्य उत्तर प्रदेश विधानमंडल के अधिनियम से बढ़ाए जाते हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि संविधान प्रधानमंत्री को ऐसी कोई शक्ति नहीं देता। विकल्प B गलत है क्योंकि कोई केंद्रीय मंत्रालय राज्य आयोग के लिए विधि नहीं बना सकता। विकल्प C गलत है क्योंकि राष्ट्रपति नियुक्ति, निष्कासन और सेवा शर्तों से जुड़े हैं, पर कार्यों का विस्तार अनुच्छेद 321 के अंतर्गत विधायी कार्य है।
राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य को हटाया जा सकता है:
- A.विधान सभा में महाभियोग के आधार पर राज्यपाल द्वारा
- B.उच्चतम न्यायालय की जांच के बाद राज्यपाल द्वारा
- C.उच्चतम न्यायालय की जांच के बाद राष्ट्रपति द्वारा
- D.उच्च न्यायालय की जांच के बाद राज्यपाल द्वारा
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. उच्चतम न्यायालय की जांच के बाद राष्ट्रपति द्वारा
व्याख्या
सही उत्तर C, उच्चतम न्यायालय की जांच के बाद राष्ट्रपति द्वारा है। अनुच्छेद 317(1) उपबंध करता है कि लोक सेवा आयोग, चाहे संघ का हो या किसी राज्य का, के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को कदाचार के आधार पर केवल राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जाएगा, और वह भी तब जब राष्ट्रपति के निर्देश पर उच्चतम न्यायालय जांच करके यह प्रतिवेदन दे कि उसे हटाया जाना चाहिए। विकल्प A, B और D तीनों यह शक्ति राज्यपाल को देते हैं, जो इस प्रश्न का सामान्य जाल है: राज्यपाल राज्य आयोग के सदस्य की नियुक्ति करते हैं और जांच लंबित रहते उसे निलंबित कर सकते हैं, पर हटा नहीं सकते। इस पद के लिए विधान सभा में महाभियोग की कोई व्यवस्था नहीं है, इसलिए A दोहरी दृष्टि से गलत है, और D उच्चतम न्यायालय के स्थान पर उच्च न्यायालय रखकर गलत हो जाता है।
भारत के संविधान का कौन सा अनुच्छेद संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों का उपबंध करता है?
- A.अनुच्छेद 312
- B.अनुच्छेद 315
- C.अनुच्छेद 320
- D.अनुच्छेद 324
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 315
व्याख्या
सही उत्तर B, अनुच्छेद 315 है। यह लोक सेवा आयोगों वाले समूह का पहला अनुच्छेद है और कहता है कि संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा, तथा यह भी कि दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद उनके लिए संयुक्त आयोग बना सकती है। विकल्प A यानी अनुच्छेद 312 राज्य सभा के संकल्प पर संसद द्वारा अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन से संबंधित है, जो पूरी तरह अलग विषय है। विकल्प C यानी अनुच्छेद 320 आयोगों के कार्य बताता है, जैसे परीक्षाएं आयोजित करना और भर्ती तथा अनुशासनिक मामलों पर परामर्श देना, पर वह उनका गठन नहीं करता। विकल्प D यानी अनुच्छेद 324 भारत के निर्वाचन आयोग की स्थापना करता है और लोक सेवा आयोगों से उसका कोई संबंध नहीं है।