रिवार्ड कार्यक्रम के तहत हुई राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति की बैठक की अध्यक्षता किसने की?
- A.आईसीएआर के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन)
- B.डॉ. चंद्र शेखर कुमार, सीईओ, एनआरएए
- C.भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव (वाटरशेड प्रबंधन)
- D.कर्नाटक के वाटरशेड विकास विभाग के आयुक्त
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर डॉ. चंद्र शेखर कुमार, राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। विज्ञप्ति में उन्हीं को बैठक का अध्यक्ष बताया गया है और उन्हीं का यह निर्देश दर्ज है कि मसौदा दिशानिर्देशों के दावे कार्यक्रम में जुटे आंकड़ों से जांचे जाएं। आईसीएआर के उप महानिदेशक वाला विकल्प गलत है, वे बैठक में मौजूद थे और उन्होंने भूमि संसाधन सूची को जल विज्ञान से जोड़ने पर जोर दिया, पर अध्यक्षता नहीं की। भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव वाला विकल्प भी गलत है, उनका योगदान विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का समय घटाने का सुझाव था। कर्नाटक के आयुक्त वाला विकल्प गलत है क्योंकि वे राज्य के प्रतिनिधि के रूप में ऑनलाइन जुड़े थे। ऐसी बैठकों पर प्रश्न अक्सर सुझाव को गलत अधिकारी से जोड़कर पूछे जाते हैं, इसलिए किसने क्या कहा, यह ध्यान रखें।
पूरा लेख पढ़ें: एनआरएए की रिवार्ड बैठक, पीएमकेएसवाई के वाटरशेड दिशानिर्देश
अभ्यास प्रश्न
एनआरएए ने जिस रिवार्ड कार्यक्रम के तहत तकनीकी समिति की बैठक की, उसका अर्थ क्या है?
- A.नवीन विकास के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए वाटरशेड को दुरुस्त करना
- B.कृषि और ग्रामीण विकास के लिए जल संसाधनों का नवीनीकरण
- C.पारिस्थितिकी, जल और वर्षा आधारित शुष्क भूमि की बहाली
- D.वाटरशेड और वर्षा आधारित विकास से ग्रामीण रोजगार
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विज्ञप्ति में इसी कार्यक्रम के तहत नई दिल्ली के एनएएससी परिसर में तकनीकी समिति की बैठक होने की बात है और वहीं यह अर्थ दिया गया है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एनआरएए जो राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश तैयार कर रहा है, वे किस योजना के घटक के तहत लागू होंगे?
- A.प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 का वाटरशेड विकास घटक
- B.प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
- C.सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन
- D.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
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विज्ञप्ति में कहा गया है कि तैयार हो रहे दिशानिर्देश देश में आने वाली पीढ़ी के वाटरशेड विकास के लिए इसी घटक के तहत उपयोग होंगे, इसीलिए बैठक का ज्यादातर समय मसौदे के दावों की जांच और दोनों राज्यों के आंकड़ों पर लगा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2014-15 से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से कितनी विदेशी मुद्रा बची है?
- A.62,000 करोड़ रुपये से अधिक
- B.1.01 लाख करोड़ रुपये से अधिक
- C.1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक
- D.1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक
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मंत्रालय ने ईएसवाई 2014-15 से कार्यक्रम की चार संचयी उपलब्धियां बताईं - इतनी विदेशी मुद्रा की बचत, लगभग 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रतिस्थापन, लगभग 952 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड में कमी और किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हस्तांतरण।
पूरी व्याख्या पढ़ें →कर्नाटक में जांचे गए नमूनों में एथेनॉल की औसत मात्रा कितनी दर्ज हुई?
- A.19.30 प्रतिशत
- B.21.50 प्रतिशत
- C.26 प्रतिशत
- D.31 प्रतिशत
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कर्नाटक में अलग-अलग स्थानों और तीनों तेल विपणन कंपनियों से लिए गए सभी 56 नमूने निर्धारित विनिर्देश के अनुरूप पाए गए, जिनमें एथेनॉल की मात्रा 19 से 20 प्रतिशत के बीच रही और औसत यही आंकड़ा निकला।
पूरी व्याख्या पढ़ें →एथेनॉल मिश्रित मोटर गैसोलीन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का कौन-सा विनिर्देश लागू होता है?
- A.आईएस 1460
- B.आईएस 2796
- C.आईएस 17021
- D.आईएस 15607
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यह एथेनॉल मिश्रित मोटर गैसोलीन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो का विनिर्देश है और तीनों सार्वजनिक तेल विपणन कंपनियों द्वारा देश भर में आपूर्ति किए जाने वाले ई20 पेट्रोल को इसी के अनुरूप होना जरूरी है।
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