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GK24
पर्यावरणकठिन

रिवार्ड कार्यक्रम के तहत हुई राष्ट्रीय स्तर की तकनीकी समिति की बैठक की अध्यक्षता किसने की?

  1. A.आईसीएआर के उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन)
  2. B.डॉ. चंद्र शेखर कुमार, सीईओ, एनआरएए
  3. C.भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव (वाटरशेड प्रबंधन)
  4. D.कर्नाटक के वाटरशेड विकास विभाग के आयुक्त

सही उत्तर

B. डॉ. चंद्र शेखर कुमार, सीईओ, एनआरएए

व्याख्या

सही उत्तर डॉ. चंद्र शेखर कुमार, राष्ट्रीय वर्षा आधारित क्षेत्र प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। विज्ञप्ति में उन्हीं को बैठक का अध्यक्ष बताया गया है और उन्हीं का यह निर्देश दर्ज है कि मसौदा दिशानिर्देशों के दावे कार्यक्रम में जुटे आंकड़ों से जांचे जाएं। आईसीएआर के उप महानिदेशक वाला विकल्प गलत है, वे बैठक में मौजूद थे और उन्होंने भूमि संसाधन सूची को जल विज्ञान से जोड़ने पर जोर दिया, पर अध्यक्षता नहीं की। भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव वाला विकल्प भी गलत है, उनका योगदान विस्तृत परियोजना रिपोर्ट का समय घटाने का सुझाव था। कर्नाटक के आयुक्त वाला विकल्प गलत है क्योंकि वे राज्य के प्रतिनिधि के रूप में ऑनलाइन जुड़े थे। ऐसी बैठकों पर प्रश्न अक्सर सुझाव को गलत अधिकारी से जोड़कर पूछे जाते हैं, इसलिए किसने क्या कहा, यह ध्यान रखें।

पूरा लेख पढ़ें: एनआरएए की रिवार्ड बैठक, पीएमकेएसवाई के वाटरशेड दिशानिर्देश

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Q1.पर्यावरणमध्यम

एनआरएए ने जिस रिवार्ड कार्यक्रम के तहत तकनीकी समिति की बैठक की, उसका अर्थ क्या है?

  1. A.नवीन विकास के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए वाटरशेड को दुरुस्त करना
  2. B.कृषि और ग्रामीण विकास के लिए जल संसाधनों का नवीनीकरण
  3. C.पारिस्थितिकी, जल और वर्षा आधारित शुष्क भूमि की बहाली
  4. D.वाटरशेड और वर्षा आधारित विकास से ग्रामीण रोजगार
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. नवीन विकास के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए वाटरशेड को दुरुस्त करना

व्याख्या

सही उत्तर नवीन विकास के माध्यम से जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए वाटरशेड को दुरुस्त करना है। विज्ञप्ति में इसी कार्यक्रम के तहत नई दिल्ली के एनएएससी परिसर में तकनीकी समिति की बैठक होने की बात है और वहीं यह अर्थ दिया गया है। दूसरा विकल्प गलत है, इसमें शब्द भरोसेमंद लगते हैं पर दिए गए अर्थ से मेल नहीं खाते और सबसे बड़ी बात यह कि इसमें जलवायु-अनुकूल होने का भाव छूट जाता है, जो कार्यक्रम के उद्देश्य के केंद्र में है। तीसरा विकल्प भी इसी कारण गलत है और इसमें पारिस्थितिकी तथा शुष्क भूमि जैसे शब्द जोड़ दिए गए हैं जो नाम में नहीं हैं। चौथा विकल्प गलत है क्योंकि यह रोजगार की योजना नहीं है, और इसे ग्रामीण रोजगार कार्यक्रमों से मिला देना एक आम भूल है। कार्यक्रम के साथ उसे चलाने वाली संस्था और मंत्रालय भी याद रखें।

Q2.पर्यावरणमध्यम

एनआरएए जो राष्ट्रीय तकनीकी दिशानिर्देश तैयार कर रहा है, वे किस योजना के घटक के तहत लागू होंगे?

  1. A.प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 का वाटरशेड विकास घटक
  2. B.प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
  3. C.सतत कृषि के लिए राष्ट्रीय मिशन
  4. D.राष्ट्रीय कृषि विकास योजना
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 का वाटरशेड विकास घटक

व्याख्या

सही उत्तर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का वाटरशेड विकास घटक है, और वह भी इसके तीसरे चरण में। विज्ञप्ति में कहा गया है कि तैयार हो रहे दिशानिर्देश देश में आने वाली पीढ़ी के वाटरशेड विकास के लिए इसी घटक के तहत उपयोग होंगे, इसीलिए बैठक का ज्यादातर समय मसौदे के दावों की जांच और दोनों राज्यों के आंकड़ों पर लगा। दूसरे विकल्प वाली फसल बीमा योजना गलत है, वह फसल के नुकसान की भरपाई करती है और वाटरशेड दिशानिर्देश बनाने से उसका कोई संबंध नहीं। तीसरे विकल्प वाला सतत कृषि मिशन गलत है, यह अलग कार्यक्रम है और विज्ञप्ति में इसका नाम कहीं नहीं आता। चौथे विकल्प वाली कृषि विकास योजना भी इसी कारण गलत है। दिशानिर्देशों को वाटरशेड घटक और उसके चरण के साथ जोड़कर याद रखें।

Q3.पर्यावरणआसान

'स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर' 5.0 के तहत तटीय सफाई कितने स्थानों पर की गई?

  1. A.131
  2. B.231
  3. C.331
  4. D.431
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 231

व्याख्या

सही उत्तर 231 है। स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0 का आयोजन 12 से 19 सितंबर 2026 तक हुआ, और इसकी तटीय सफाई 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 231 स्थानों पर की गई। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 21 सितंबर 2026 को अभियान की समीक्षा की और इसमें जनभागीदारी के पैमाने की सराहना की।

बाकी आंकड़े सही उत्तर के आसपास गढ़े गए भ्रम हैं। इस अभियान पर प्रश्न आम तौर पर तीन आंकड़ों को साथ परखते हैं, इसलिए इन्हें एक समूह के रूप में याद करें: 231 स्थान, 13 राज्य/केंद्र शासित प्रदेश और महासागर संरक्षण शपथ लेने वाले 15 लाख लोग। अभियान में नागरिक, विद्यार्थी, तटीय समुदाय, सरकारी एजेंसियां, वैज्ञानिक संस्थान और स्वयंसेवक स्वच्छ तटों और सुरक्षित समुद्र के लिए एक राष्ट्रीय प्रयास में साथ आए।

Q4.पर्यावरणमध्यम

भारत के स्वायत्त वैज्ञानिक संस्थानों के काम को सामने लाने वाली मासिक व्याख्यान शृंखला 'विज्ञान की बात' किसने शुरू की?

  1. A.जैव प्रौद्योगिकी विभाग
  2. B.वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद
  3. C.विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
  4. D.पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग

व्याख्या

सही उत्तर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग है। 'विज्ञान की बात' डीएसटी द्वारा शुरू की गई मासिक व्याख्यान शृंखला है, जिसका उद्देश्य देश के स्वायत्त वैज्ञानिक संस्थानों के काम को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाना है। 29 अगस्त 2026 को हुए इसके पहले संस्करण में शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग जगत के 7,500 से अधिक लोग शामिल हुए, और 26 सितंबर 2026 को दूसरे संस्करण में एस.एन. बोस राष्ट्रीय मूलभूत विज्ञान केंद्र के निदेशक मूलभूत भौतिक विज्ञान और क्वांटम प्रौद्योगिकी पर बात करेंगे।

बाकी विकल्प उसी समीक्षा बैठक का हिस्सा थे, इसलिए भ्रमित करते हैं। जैव प्रौद्योगिकी विभाग और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय संयुक्त डिजिटल आउटरीच प्रयास में शामिल हैं, और सीएसआईआर अपने सीएसआईआर@85 कार्यक्रम की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित वैज्ञानिक उपलब्धियों की डिजिटल लाइब्रेरी के लिए नोडल संस्थान सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर है, डीएसटी नहीं।

Q5.पर्यावरणमध्यम

'स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर' 5.0 के दौरान कितने लोगों ने महासागर संरक्षण शपथ ली?

  1. A.5 लाख
  2. B.10 लाख
  3. C.15 लाख
  4. D.25 लाख
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 15 लाख

व्याख्या

सही उत्तर 15 लाख है। 12 से 19 सितंबर 2026 तक चले स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0 के दौरान 15 लाख लोगों ने महासागर संरक्षण शपथ ली, यानी समुद्र और तट को कचरे से मुक्त रखने का संकल्प। डॉ. जितेंद्र सिंह ने अभियान की समीक्षा करते हुए इस आंकड़े का विशेष उल्लेख किया और कहा कि जनभागीदारी की यह गति बनी रहनी चाहिए।

बाकी विकल्प भ्रम के लिए हैं। शपथ वाला आंकड़ा पूछे जाने की सबसे अधिक संभावना है, क्योंकि यह सरकारी विज्ञप्ति के शीर्षक में ही है, साथ में 13 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 231 सफाई स्थान भी। समुद्री कचरे में सबसे बड़ा हिस्सा प्लास्टिक का होता है, जो टूटकर माइक्रोप्लास्टिक बनता है और समुद्री खाद्य शृंखला में पहुंच जाता है। ऐसे अभियान तटों की सफाई के साथ-साथ ज़मीन पर लोगों का व्यवहार बदलने का भी लक्ष्य रखते हैं, जहां से यह कचरा शुरू होता है।