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विधायी विभाग ने शुरू की नेतृत्व संवाद श्रृंखला

विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने अधिकारियों के लिए संवाद श्रृंखला आरंभ की है, जिसका पहला सत्र 5 नवंबर 2026 को कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली में हुआ।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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विधायी विभाग ने शुरू की नेतृत्व संवाद श्रृंखला

चर्चा में क्यों

विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने 7 नवंबर 2026 को बताया कि उसने अपने अधिकारियों के लिए संवाद श्रृंखला आरंभ की है, जिसका पहला सत्र 5 नवंबर 2026 को कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली में हुआ।

विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने अपने ही अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक संवाद श्रृंखला आरंभ की है। इसका मकसद वरिष्ठ अधिकारियों को ऐसा मंच देना है जहाँ वे नेतृत्व, प्रशासन और व्यक्तिगत प्रभावशीलता पर अपना अनुभव, पेशेवर समझ और नजरिया साथी अधिकारियों तक पहुँचा सकें।

पहला सत्र

श्रृंखला का पहला सत्र 5 नवंबर 2026 को कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली के विधायी प्रशिक्षण सभागार में हुआ। अध्यक्षता विभाग के अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार ने की। व्याख्यान विभाग की अपर सचिव श्रीमती अकाली वी. कांगहे ने दिया, जिनका विषय था नेतृत्व में मूल्यों और व्यक्तिगत प्रभावशीलता में सुधार। उन्होंने अपने कामकाजी जीवन के उदाहरण देकर बात रखी। सत्र में विभाग के 80 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।

व्याख्यान का सार

श्रीमती कांगहे का कहना था कि नेतृत्व किसी कुर्सी या औपचारिक पदनाम से बँधा नहीं होता। वह हर व्यक्ति की उस क्षमता में दिखता है जिससे वह अपने आचरण, मूल्यों और कामों से दूसरों को प्रभावित करता है। उनके अनुसार नेतृत्व की शुरुआत खुद में बदलाव से होती है और आगे इसके लिए दूरदृष्टि, स्पष्ट उद्देश्य, साफ संवाद, जवाबदेही, मिलकर काम करने की आदत तथा अपने आसपास के लोगों को तैयार करने की इच्छा चाहिए। जड़ में नेतृत्व अधिकार जताने का नहीं, सेवा का काम है।

उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व के पाँच सी

सत्र में उन्होंने उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व के पाँच सी नाम से एक ढाँचा रखा।

  • कंसिस्टेंसी यानी निरंतरता — सत्यनिष्ठा, विनम्रता, ईमानदारी, करुणा और जवाबदेही को आदत की तरह निभाना
  • कल्चर यानी संस्कृति — संगठन में सकारात्मक और प्रेरक माहौल बनाना
  • कंट्रीब्यूशन यानी योगदान — अपनी विशिष्ट प्रतिभा, रुचि, क्षमता और साधनों को पहचानकर सार्थक काम में लगाना
  • कम्युनिटी यानी समुदाय — व्यापक समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव रखना
  • क्यूरियोसिटी यानी जिज्ञासा — सुझावों के लिए खुला रहना और लगातार सीखते रहना

कार्यकुशलता से आगे

वक्ता ने कहा कि व्यक्तिगत प्रभावशीलता का अर्थ काम जल्दी निपटा लेना नहीं है, बल्कि ऐसा इंसान बनना है जिसकी मौजूदगी दूसरों के जीवन में फर्क डालती हो। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि वे ईमानदारी से अपने आचरण, साथियों पर पड़ने वाले असर और समाज को दिए जा रहे योगदान को देखें। उनके मुताबिक नेतृत्व का सच्चा पैमाना यही है कि किसी ने दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाया और आगे के नेतृत्वकर्ताओं को कितना तैयार किया।

आगे भी चलने वाली पहल

विभाग ने इस संवाद श्रृंखला को एक बार का आयोजन नहीं, बल्कि लगातार चलने वाली व्यवस्था के रूप में सोचा है। इसका उद्देश्य विभाग के भीतर ज्ञान फैलाना, सार्थक बातचीत को बढ़ावा देना और अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बीच अनुभव एवं कारगर तरीकों का आदान-प्रदान कराना है। पहले सत्र ने प्रतिभागियों को नैतिक मूल्यों, उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व, निजी विकास और सामूहिक जिम्मेदारी पर सोचने का अवसर दिया, चाहे बात दफ्तर की हो या निजी जीवन की।

महत्वपूर्ण तथ्य

पहलविधायी विभाग की संवाद श्रृंखला
मंत्रालयविधि एवं न्याय मंत्रालय
पहला सत्र5 नवंबर 2026
स्थानविधायी प्रशिक्षण सभागार, कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली
अध्यक्षताडॉ. मनोज कुमार, अपर सचिव, विधायी विभाग
वक्ताश्रीमती अकाली वी. कांगहे, अपर सचिव, विधायी विभाग
विषयनेतृत्व में मूल्यों और व्यक्तिगत प्रभावशीलता में सुधार
प्रस्तुत ढाँचाउद्देश्यपूर्ण नेतृत्व के पाँच सी: निरंतरता, संस्कृति, योगदान, समुदाय, जिज्ञासा
प्रतिभागीविधायी विभाग के 80 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें: विभाग (विधायी विभाग), मंत्रालय (विधि एवं न्याय), पहल का नाम (संवाद श्रृंखला), पहले सत्र की तारीख और स्थान (5 नवंबर 2026, कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली), अध्यक्षता और व्याख्यान किसने दिया, सत्र का विषय, तथा उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व के पाँच सी: निरंतरता, संस्कृति, योगदान, समुदाय और जिज्ञासा।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

किस विभाग ने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए संवाद श्रृंखला शुरू की है?

  1. A.विधि कार्य विभाग
  2. B.विधायी विभाग
  3. C.न्याय विभाग
  4. D.राजभाषा विभाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विधायी विभाग

सही उत्तर विधायी विभाग है, जो विधि एवं न्याय मंत्रालय के अधीन काम करता है और जिसने यह संवाद श्रृंखला शुरू की है, ताकि वरिष्ठ अधिकारी नेतृत्व, प्रशासन और व्यक्तिगत प्रभावशीलता पर अपना अनुभव तथा पेशेवर समझ आगे पहुँचा सकें।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व के पाँच सी में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है?

  1. A.निरंतरता
  2. B.जिज्ञासा
  3. C.प्रतिस्पर्धा
  4. D.समुदाय
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. प्रतिस्पर्धा

उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व के पाँच सी हैं निरंतरता, संस्कृति, योगदान, समुदाय और जिज्ञासा; इसलिए विकल्प A, B और D इस समूह का हिस्सा हैं और केवल तीसरा विकल्प बाहर है।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

विधायी विभाग की संवाद श्रृंखला का पहला सत्र कहाँ आयोजित हुआ?

  1. A.कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली
  2. B.विज्ञान भवन, नई दिल्ली
  3. C.शास्त्री भवन, नई दिल्ली
  4. D.भारत मंडपम, नई दिल्ली
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली

सही उत्तर कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली है, जहाँ विधायी प्रशिक्षण सभागार में 5 नवंबर 2026 को यह सत्र हुआ।

Q4.राष्ट्रीयकठिन

विधायी विभाग की संवाद श्रृंखला के पहले सत्र की अध्यक्षता किसने की?

  1. A.श्रीमती अकाली वी. कांगहे, अपर सचिव
  2. B.डॉ. मनोज कुमार, अपर सचिव
  3. C.केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री
  4. D.सचिव, विधायी विभाग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. डॉ. मनोज कुमार, अपर सचिव

सही उत्तर डॉ. मनोज कुमार, अपर सचिव, विधायी विभाग है, जिन्होंने पहले सत्र की अध्यक्षता की।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किस विभाग ने अपने अधिकारियों के लिए संवाद श्रृंखला शुरू की है?

विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग ने। इस श्रृंखला में वरिष्ठ अधिकारी नेतृत्व, प्रशासन और व्यक्तिगत प्रभावशीलता पर अपना अनुभव और नजरिया साझा करते हैं, और इसे आगे भी चलने वाली पहल के रूप में सोचा गया है।

उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व के पाँच सी कौन से हैं?

निरंतरता, संस्कृति, योगदान, समुदाय और जिज्ञासा। यह ढाँचा अपर सचिव श्रीमती अकाली वी. कांगहे ने संवाद श्रृंखला के पहले सत्र में 5 नवंबर 2026 को कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली में प्रस्तुत किया।

संवाद श्रृंखला का पहला सत्र कब और कहाँ हुआ?

5 नवंबर 2026 को कर्तव्य भवन 2, नई दिल्ली के विधायी प्रशिक्षण सभागार में। अध्यक्षता अपर सचिव डॉ. मनोज कुमार ने की और विभाग के 80 से अधिक अधिकारी तथा कर्मचारी इसमें शामिल हुए।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CHSLIBPS