राज्यसभा का पदेन सभापति कौन होता है?
- A.उपराष्ट्रपति
- B.प्रधानमंत्री
- C.राष्ट्रपति
- D.भारत के महान्यायवादी
सही उत्तर
A. उपराष्ट्रपति
व्याख्या
सही उत्तर है A, उपराष्ट्रपति। अनुच्छेद 64 के अनुसार भारत का उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति होता है। वह ऐसे सदन की अध्यक्षता करता है जिसका वह सदस्य नहीं है, इसलिए उसे सामान्य मत नहीं मिलता, केवल बराबरी की स्थिति में निर्णायक मत देता है। उसे वेतन राज्यसभा के सभापति के रूप में मिलता है, उपराष्ट्रपति के रूप में नहीं, और जब वह राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है तब सदन की अध्यक्षता नहीं करता। इसके उलट उपसभापति को अनुच्छेद 89 के तहत राज्यसभा अपने सदस्यों में से चुनती है। B गलत है क्योंकि प्रधानमंत्री आमतौर पर लोकसभा का सदस्य होता है और सरकार का नेतृत्व करता है, राज्यसभा की कार्यवाही का नहीं। C गलत है क्योंकि राष्ट्रपति अनुच्छेद 79 के तहत संसद का अंग है, पर किसी भी सदन का सदस्य नहीं है और किसी सदन की अध्यक्षता नहीं करता। D गलत है क्योंकि महान्यायवादी अनुच्छेद 88 के तहत किसी भी सदन में बोल सकता है, पर न मत दे सकता है, न अध्यक्षता कर सकता है। परीक्षा टिप: लोकसभा में सदस्यों द्वारा चुना गया अध्यक्ष (स्पीकर); राज्यसभा में उपराष्ट्रपति पदेन सभापति।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंभारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या भारत सरकार और किसी राज्य या राज्यों के बीच कोई भी विवाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय के _______ क्षेत्राधिकार में आता है।
- A.सलाहकारी
- B.अपीलीय
- C.अनन्य मूल
- D.रिट
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. अनन्य मूल
व्याख्या
सही उत्तर है C, अनन्य मूल। अनुच्छेद 131 के तहत भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या राज्यों के आपसी विवाद केवल सर्वोच्च न्यायालय ही सुन सकता है, कोई दूसरी अदालत नहीं। ऐसा मामला सीधे सर्वोच्च न्यायालय में शुरू होता है, इसलिए इसे मूल क्षेत्राधिकार कहते हैं, और चूँकि कोई उच्च न्यायालय इसे नहीं सुन सकता, इसलिए यह अनन्य है। विवाद किसी कानूनी अधिकार से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल राजनीतिक झगड़ा। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 143 के तहत सलाहकारी क्षेत्राधिकार में राष्ट्रपति किसी कानूनी या तथ्यात्मक प्रश्न पर न्यायालय की राय माँगते हैं। विकल्प B गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 132 से 134 के तहत अपीलीय क्षेत्राधिकार उच्च न्यायालयों के फैसलों के खिलाफ अपीलों से जुड़ा है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 32 के तहत रिट क्षेत्राधिकार मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, और यह शक्ति अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालयों के पास भी है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 131 मूल, अनुच्छेद 132–134 अपीलीय, अनुच्छेद 143 सलाहकारी, अनुच्छेद 32 रिट क्षेत्राधिकार।
2011 के 97वें संविधान संशोधन अधिनियम ने किससे संबंधित एक नया राज्य का नीति निदेशक तत्व जोड़ा है?
- A.मातृत्व अवकाश
- B.बाल श्रम
- C.पर्यावरण
- D.सहकारी समितियाँ
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. सहकारी समितियाँ
व्याख्या
सही उत्तर है D, सहकारी समितियाँ। 97वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2011 ने अनुच्छेद 43B जोड़ा, जो एक नया नीति निदेशक तत्व है और राज्य से कहता है कि वह सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन, स्वायत्त कामकाज, लोकतांत्रिक नियंत्रण और पेशेवर प्रबंधन को बढ़ावा दे। इसी संशोधन ने अनुच्छेद 19(1)(c) में संघ और यूनियन के साथ 'सहकारी समितियाँ' शब्द जोड़कर इन्हें बनाने को मौलिक अधिकार भी बना दिया। यह फरवरी 2012 में लागू हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि मातृत्व सहायता मूल संविधान के अनुच्छेद 42 में पहले से थी, जो काम की न्यायसंगत और मानवीय दशाओं की बात करता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि बाल श्रम से अनुच्छेद 24, जो एक मौलिक अधिकार है, और अनुच्छेद 39 निपटते हैं; यह 97वें संशोधन का विषय नहीं था। विकल्प C गलत है, क्योंकि पर्यावरण की रक्षा वाला अनुच्छेद 48A बहुत पहले, 1976 के 42वें संशोधन से जोड़ा गया था। परीक्षा टिप: 2011 के 97वें संशोधन ने सहकारी समितियों को अनुच्छेद 19(1)(c) और अनुच्छेद 43B में जगह दी।
भारतीय संविधान में निम्नलिखित में से किस रिट के तहत न्यायालय किसी निचली अदालत या अन्य प्राधिकरण को उसके सामने लंबित मामला किसी उच्च प्राधिकरण या न्यायालय को सौंपने का आदेश देता है?
- A.प्रतिषेध
- B.परमादेश
- C.अधिकार पृच्छा
- D.उत्प्रेषण
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. उत्प्रेषण
व्याख्या
सही उत्तर है D, उत्प्रेषण। उत्प्रेषण (सर्टिओरारी) का अर्थ है 'प्रमाणित होना' या 'सूचित किया जाना'। इस रिट से ऊपरी न्यायालय किसी निचली अदालत या न्यायाधिकरण को आदेश देता है कि वह अपने सामने लंबित मामला ऊपर भेजे, या उसका पहले से दिया गया आदेश रद्द कर देता है, जब अधिकार क्षेत्र न हो, अधिकार क्षेत्र से बाहर जाया गया हो या कानून की गलती हुई हो। सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 और उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करते हैं। प्रतिषेध और उत्प्रेषण मिलते-जुलते लगते हैं, इसलिए समय पर ध्यान दें: प्रतिषेध चलते मामले को रोकता है, जबकि उत्प्रेषण दिए जा चुके फैसले को भी रद्द कर सकता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि प्रतिषेध निचली अदालत को केवल अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकता है; मामला स्थानांतरित नहीं करता। विकल्प B गलत है, क्योंकि परमादेश, यानी 'हम आदेश देते हैं', किसी लोक अधिकारी या संस्था को उसका छोड़ा हुआ कर्तव्य करने का आदेश देता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अधिकार पृच्छा, यानी 'किस अधिकार से', किसी व्यक्ति से सार्वजनिक पद पर उसका अधिकार साबित करने को कहती है। परीक्षा टिप: उत्प्रेषण = ऊपर भेजो या रद्द करो; प्रतिषेध = रोको; परमादेश = कर्तव्य निभाओ।
भारतीय संविधान का ______ केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन से संबंधित है।
- A.अनुच्छेद 235
- B.अनुच्छेद 239
- C.अनुच्छेद 233
- D.अनुच्छेद 234
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 239
व्याख्या
सही उत्तर है B, अनुच्छेद 239। अनुच्छेद 239 कहता है कि हर केंद्रशासित प्रदेश का प्रशासन राष्ट्रपति करेंगे, जो इसके लिए अपनी इच्छा से तय पदनाम वाला एक प्रशासक नियुक्त करते हैं। इसी कारण कुछ केंद्रशासित प्रदेशों, जैसे दिल्ली, लद्दाख और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, में उपराज्यपाल हैं, जबकि कुछ में प्रशासक। अनुच्छेद 239 संविधान के भाग VIII की शुरुआत करता है, जो केंद्रशासित प्रदेशों से जुड़ा है। बाद में जोड़े गए अनुच्छेद 239A और 239AA पुडुचेरी और दिल्ली को विधानमंडल देते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 235 अधीनस्थ न्यायालयों पर उच्च न्यायालय के नियंत्रण से जुड़ा है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 233 उच्च न्यायालय से परामर्श करके राज्यपाल द्वारा ज़िला न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 234 ज़िला न्यायाधीशों के अलावा अन्य लोगों की राज्य न्यायिक सेवा में भर्ती से जुड़ा है। परीक्षा टिप: भाग VIII में अनुच्छेद 239 से 241 केंद्रशासित प्रदेशों के लिए हैं, और अनुच्छेद 239AA दिल्ली के लिए खास है।
दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति __________ द्वारा की जाती है।
- A.राज्यपाल
- B.उपराज्यपाल
- C.प्रधानमंत्री
- D.भारत के राष्ट्रपति
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. भारत के राष्ट्रपति
व्याख्या
सही उत्तर है D, भारत के राष्ट्रपति। संविधान का अनुच्छेद 239AA(5) कहता है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करेंगे। अन्य मंत्रियों की नियुक्ति भी मुख्यमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति ही करते हैं, और वे राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहते हैं। किसी राज्य से यही मुख्य अंतर है, जहाँ अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं। अनुच्छेद 239AA 69वें संशोधन अधिनियम, 1991 से जोड़ा गया था, जिसने दिल्ली को विधानसभा दी और उसे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का नाम दिया। दिल्ली की मंत्रिपरिषद विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10% से बड़ी नहीं हो सकती। विकल्प A गलत है, क्योंकि केंद्रशासित प्रदेश होने के कारण दिल्ली में राज्यपाल होता ही नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि उपराज्यपाल प्रशासक हैं और शपथ दिलाते हैं, पर नियुक्ति नहीं करते। विकल्प C गलत है, क्योंकि मुख्यमंत्री की नियुक्ति में प्रधानमंत्री की कोई संवैधानिक भूमिका नहीं है। परीक्षा टिप: राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं (अनुच्छेद 164), दिल्ली के मुख्यमंत्री की राष्ट्रपति (अनुच्छेद 239AA)।