ओज़ोन परत का क्षरण मनुष्यों के लिए चिंता का विषय क्यों है?
- A.यह पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है।
- B.इससे जल प्रदूषण बढ़ता है।
- C.यह परत हमें हानिकारक विकिरण से बचाती है।
- D.यह मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है।
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, यह परत हमें हानिकारक विकिरण से बचाती है। ओज़ोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों से हमारी रक्षा करती है, इसलिए इसके पतला होने पर यह सुरक्षा कम हो जाती है। यह परत समतापमंडल (stratosphere) में धरती से लगभग 15 से 35 किमी ऊपर है और अधिकांश UV-B तथा UV-C विकिरण को सोख लेती है। ज़मीन तक अधिक UV पहुँचने से त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद और कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता जैसी समस्याएँ बढ़ती हैं, और फसलों तथा समुद्री प्लवकों को भी नुकसान होता है। इसके मुख्य दोषी क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) हैं, जो पहले फ्रिज, एसी और एरोसोल स्प्रे में इस्तेमाल होते थे; क्लोरीन का एक परमाणु हज़ारों ओज़ोन अणु नष्ट कर सकता है। 1987 के मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल ने इन रसायनों को चरणबद्ध रूप से बंद कराया। A गलत है क्योंकि अधिक UV पौधों को नुकसान पहुँचाता है और पैदावार घटाता है। B गलत है क्योंकि ओज़ोन क्षरण का संबंध विकिरण से है, जल प्रदूषण से नहीं। D गलत है क्योंकि इससे मिट्टी की उर्वरता नहीं बढ़ती। परीक्षा टिप: ओज़ोन परत = समतापमंडल में धरती का सनस्क्रीन; CFC इसे नुकसान पहुँचाते हैं; मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987; विश्व ओज़ोन दिवस 16 सितंबर।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में शामिल नहीं है?
- A.सल्फर
- B.नाइट्रोजन डाइऑक्साइड
- C.सीसा (लेड)
- D.मीथेन
उत्तर देखें
भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक की गणना में मीथेन शामिल नहीं है। राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक 2014 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत शुरू किया गया था और इसे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चलाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय हरित अधिकरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसकी स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी।
- B.यह पर्यावरण संरक्षण और वनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटारे में लगा है।
- C.यह व्यक्तियों और संपत्ति को हुई क्षति के लिए राहत और मुआवजा देने पर विचार कर सकता है।
- D.यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निर्धारित प्रक्रियाओं से बँधा है।
उत्तर देखें
राष्ट्रीय हरित अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता से बँधा नहीं है; यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होता है। NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत हुई, जो अनुच्छेद 21 के स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की 2017-2031 की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना (NWAP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है।
2. यह NWAP अनूठी है क्योंकि पहली बार भारत ने वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जुड़ी चिंताओं को मान्यता दी है।
3. इस NWAP के दस घटक हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 2
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
2017-2031 की योजना भारत की तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है और वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संबोधित करने वाली पहली योजना है, पर इसके दस नहीं, पाँच घटक हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सी विधि शहरी वर्षा जल संचयन के लिए उपयुक्त नहीं है?
- A.छत पुनर्भरण गड्ढा (रूफटॉप रिचार्ज पिट)
- B.पुनर्भरण कुएँ
- C.गली प्लग
- D.पुनर्भरण खाई (रिचार्ज ट्रेंच)
उत्तर देखें
गली प्लग पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में किसी प्राकृतिक नाले या धारा के आर-पार बनाया जाने वाला छोटा अवरोध है, इसलिए शहर में इसका उपयोग नहीं होता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए प्रसिद्ध कार्टाजेना शहर कहाँ स्थित है?
- A.कोलंबिया
- B.वेनेज़ुएला
- C.ब्राज़ील
- D.गुयाना
उत्तर देखें
कार्टाजेना कोलंबिया के कैरिबियाई तट पर स्थित बंदरगाह शहर है, जहाँ 1999 में जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल पर वार्ता हुई थी। कार्टाजेना जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल 1992 के जैव विविधता अभिसमय का एक पूरक समझौता है।
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