निम्नलिखित में से कौन-सी विधि शहरी वर्षा जल संचयन के लिए उपयुक्त नहीं है?
- A.छत पुनर्भरण गड्ढा (रूफटॉप रिचार्ज पिट)
- B.पुनर्भरण कुएँ
- C.गली प्लग
- D.पुनर्भरण खाई (रिचार्ज ट्रेंच)
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, गली प्लग। गली प्लग पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में किसी प्राकृतिक नाले या धारा के आर-पार बनाया जाने वाला छोटा अवरोध है, इसलिए शहर में इसका उपयोग नहीं होता।
शहरों में खुली जमीन कम होती है और वर्षा का अधिकांश पानी छतों, सड़कों और पक्के आँगनों पर गिरता है। इसलिए शहरी वर्षा जल संचयन में छतों और पक्की सतहों से पानी इकट्ठा करके इमारतों के पास बने छोटे ढाँचों के जरिए जमीन के भीतर पहुँचाया जाता है। गली प्लग ढलान पर बहने वाली छोटी धारा के आर-पार ढीले पत्थर, मिट्टी या झाड़ियाँ रखकर बनाया जाता है। यह बहते पानी की गति कम करता है, गाद रोकता है और पानी को मिट्टी में रिसने देता है। इसके लिए प्राकृतिक जल निकासी मार्ग चाहिए, जो घनी बसावट वाले शहरी क्षेत्र में नहीं होता।
विकल्प A गलत है क्योंकि छत पुनर्भरण गड्ढा शहरों की आम विधि है। विकल्प B गलत है क्योंकि पुनर्भरण कुएँ छत का पानी गहरे जलभृत तक पहुँचाते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि पुनर्भरण खाई बड़ी छत वाली इमारतों के लिए उपयुक्त है।
परीक्षा टिप: शहरी = छत गड्ढा, खाई, पुनर्भरण कुआँ; ग्रामीण = गली प्लग, चेक डैम, कंटूर बंड, परकोलेशन टैंक।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंराष्ट्रीय हरित अधिकरण के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसकी स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी।
- B.यह पर्यावरण संरक्षण और वनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के प्रभावी और शीघ्र निपटारे में लगा है।
- C.यह व्यक्तियों और संपत्ति को हुई क्षति के लिए राहत और मुआवजा देने पर विचार कर सकता है।
- D.यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निर्धारित प्रक्रियाओं से बँधा है।
उत्तर देखें
राष्ट्रीय हरित अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता से बँधा नहीं है; यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों से निर्देशित होता है। NGT की स्थापना 18 अक्टूबर 2010 को राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत हुई, जो अनुच्छेद 21 के स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार से जुड़ा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की 2017-2031 की राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना (NWAP) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है।
2. यह NWAP अनूठी है क्योंकि पहली बार भारत ने वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जुड़ी चिंताओं को मान्यता दी है।
3. इस NWAP के दस घटक हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- A.केवल 1
- B.केवल 1 और 2
- C.केवल 2 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
2017-2031 की योजना भारत की तीसरी राष्ट्रीय वन्यजीव कार्ययोजना है और वन्यजीवों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को संबोधित करने वाली पहली योजना है, पर इसके दस नहीं, पाँच घटक हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल के लिए प्रसिद्ध कार्टाजेना शहर कहाँ स्थित है?
- A.कोलंबिया
- B.वेनेज़ुएला
- C.ब्राज़ील
- D.गुयाना
उत्तर देखें
कार्टाजेना कोलंबिया के कैरिबियाई तट पर स्थित बंदरगाह शहर है, जहाँ 1999 में जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल पर वार्ता हुई थी। कार्टाजेना जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल 1992 के जैव विविधता अभिसमय का एक पूरक समझौता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा एक जैव-नियंत्रण कारक नहीं है?
- A.बैसिलस थुरिंजिएंसिस
- B.लेडीबर्ड भृंग
- C.ट्राइकोडर्मा
- D.एफ़िड
उत्तर देखें
एफ़िड फ़सलों का रस चूसने वाला कीट है, इसलिए वह जैव-नियंत्रण का निशाना है, उसका कारक नहीं। जैव-नियंत्रण का अर्थ है रासायनिक कीटनाशकों के बजाय जीवों या उनके उत्पादों से कीटों और पौधों के रोगों को नियंत्रित करना।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से किसे पर्यावरणीय समस्याओं के शमन (निवारण) से संबद्ध माना जा सकता है?
- A.जैव आवर्धन
- B.त्वरित सुपोषण
- C.नाभिकीय अपशिष्टों को छोड़ना
- D.विभिन्न अपशिष्टों का श्रेणीबद्ध निपटान
उत्तर देखें
कचरे को श्रेणियों में छाँटकर हर श्रेणी का सही तरीके से निपटान करने से प्रदूषण घटता है, इसलिए यह पर्यावरणीय समस्याएँ पैदा नहीं करता बल्कि उन्हें सुलझाने में मदद करता है।
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