निम्नलिखित में से किस विद्वान ने भारत के संविधान को एक 'निर्बाध जाल' (सीमलेस वेब) के रूप में परिकल्पित किया है?
- A.एम. वी. पायली
- B.डी. डी. बसु
- C.ग्रैनविल ऑस्टिन
- D.सुभाष कश्यप
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है C, ग्रैनविल ऑस्टिन। इस अमेरिकी इतिहासकार ने भारतीय संविधान को तीन घनिष्ठ रूप से जुड़े सूत्रों का "सीमलेस वेब" (निर्बाध जाल) कहा था।
ऑस्टिन ने संविधान पर दो प्रसिद्ध अध्ययन लिखे: द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन: कॉर्नरस्टोन ऑफ़ ए नेशन (1966), जो संविधान सभा के काम पर है, और वर्किंग ए डेमोक्रेटिक कॉन्स्टिट्यूशन (1999), जो बताता है कि 1950 के बाद संविधान ने कैसे काम किया। इनमें उन्होंने तर्क दिया कि संविधान के तीन सूत्र — राष्ट्रीय एकता और अखंडता की रक्षा व मज़बूती, लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थापना और सामाजिक क्रांति — एक निर्बाध जाल बनाते हैं, इसलिए किसी एक को दूसरों की कीमत पर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। उन्होंने इसे "सबसे पहले एक सामाजिक दस्तावेज़" भी कहा।
A गलत है: एम. वी. पायली संवैधानिक विद्वान थे, जो कॉन्स्टिट्यूशनल गवर्नमेंट इन इंडिया जैसी पुस्तकों के लिए जाने जाते हैं, इस वाक्यांश के लिए नहीं।
B गलत है: डी. डी. बसु ने बहुपठित इंट्रोडक्शन टू द कॉन्स्टिट्यूशन ऑफ़ इंडिया और संविधान पर भाष्य लिखा।
D गलत है: लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप ने अवर कॉन्स्टिट्यूशन और अवर पार्लियामेंट लिखीं।
परीक्षा टिप: ग्रैनविल ऑस्टिन — "सीमलेस वेब" और "कॉर्नरस्टोन ऑफ़ ए नेशन" (1966)।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंनिम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.भारत का सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है।
- B.भारत में उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं।
- C.भारत में अधीनस्थ न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं।
- D.भारत में सभी न्यायालय अभिलेख न्यायालय नहीं हैं।
उत्तर देखें
संविधान के अनुसार केवल सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय हैं; अधीनस्थ न्यायालय नहीं। अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय घोषित करता है और अनुच्छेद 215 हर उच्च न्यायालय को।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत की संसद के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सी संसदीय समिति इस बात की जाँच कर सदन को प्रतिवेदन देती है कि संविधान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा प्रत्यायोजित विनियम, नियम, उपनियम, उपविधियाँ आदि बनाने की शक्तियों का कार्यपालिका द्वारा ऐसे प्रत्यायोजन की सीमा के भीतर उचित रूप से प्रयोग किया जा रहा है या नहीं?
- A.सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति
- B.अधीनस्थ विधान संबंधी समिति
- C.नियम समिति
- D.कार्य मंत्रणा समिति
उत्तर देखें
यह समिति जाँचती है कि प्रत्यायोजित शक्तियों के अंतर्गत कार्यपालिका द्वारा बनाए गए नियम, विनियम और उपविधियाँ संसद द्वारा तय सीमाओं के भीतर हैं या नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →लोकसभा के उपाध्यक्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. लोकसभा की प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन नियमों के अनुसार उपाध्यक्ष का निर्वाचन उस तिथि को होगा, जो अध्यक्ष नियत करे।
2. यह अनिवार्य प्रावधान है कि लोकसभा उपाध्यक्ष के रूप में निर्वाचित उम्मीदवार या तो प्रमुख विपक्षी दल से हो या सत्तारूढ़ दल से।
3. सदन की बैठक की अध्यक्षता करते समय उपाध्यक्ष को अध्यक्ष के समान शक्ति होती है और उसके निर्णयों के विरुद्ध कोई अपील नहीं होती।
4. उपाध्यक्ष की नियुक्ति के संबंध में सुस्थापित संसदीय प्रथा यह है कि प्रस्ताव अध्यक्ष द्वारा रखा जाता है और प्रधानमंत्री द्वारा उसका विधिवत समर्थन किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A.केवल 1 और 3
- B.1, 2 और 3
- C.केवल 3 और 4
- D.केवल 2 और 4
उत्तर देखें
उपाध्यक्ष के निर्वाचन की तिथि अध्यक्ष तय करता है, और पीठासीन उपाध्यक्ष को अध्यक्ष की पूरी शक्तियाँ होती हैं; कथन 2 और 4 ऐसे नियम बताते हैं जो हैं ही नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में न्यायालयों द्वारा जारी की जाने वाली रिटों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. परमादेश (मैंडमस) किसी निजी संगठन के विरुद्ध तब तक जारी नहीं होगा, जब तक उसे कोई लोक कर्तव्य न सौंपा गया हो।
2. परमादेश किसी कंपनी के विरुद्ध जारी नहीं होगा, भले ही वह सरकारी कंपनी हो।
3. कोई भी लोकहित-चिंतक व्यक्ति अधिकार-पृच्छा (क्वो वारंटो) रिट पाने के लिए न्यायालय में याचिका दायर कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
- A.केवल 1 और 2
- B.केवल 2 और 3
- C.केवल 1 और 3
- D.1, 2 और 3
उत्तर देखें
परमादेश हर उस संस्था पर लागू होता है जिस पर कोई लोक कर्तव्य है, सरकारी कंपनियों पर भी, और अधिकार-पृच्छा की माँग कोई भी इच्छुक व्यक्ति कर सकता है, केवल पीड़ित नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन-सा एक भारत के संविधान का कार्य नहीं है?
- A.राजनीति में अच्छे लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना
- B.नागरिकों को अधिकारों का एक समूह प्रत्याभूत करना
- C.सरकार के विभिन्न अंगों की शक्तियों को परिभाषित करना
- D.एक न्यायपूर्ण समाज के लिए परिस्थितियां बनाना
उत्तर देखें
संविधान नियम और सीमाएं तय कर सकता है, पर यह गारंटी नहीं दे सकता कि अच्छे लोग ही राजनीति में आएंगे।
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