निम्नलिखित में से कौन-सी भारत के सर्वोच्च न्यायालय की शक्तियाँ हैं? 1. भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद में मूल क्षेत्राधिकार 2. उच्च न्यायालयों से अपीलें सुनने की शक्ति 3. अपने समक्ष किसी भी मामले में न्याय करने के लिए डिक्री और आदेश पारित करना 4. विधि के मामलों में भारत के राष्ट्रपति को परामर्श देना नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.1, 2, 3 और 4
- B.केवल 1, 2 और 3
- C.केवल 1 और 2
- D.केवल 3 और 4
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर है A, 1, 2, 3 और 4। चारों शक्तियाँ संविधान ने सर्वोच्च न्यायालय को दी हैं।
अनुच्छेद 131 भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या राज्यों के आपसी विवादों में सर्वोच्च न्यायालय को मूल और अनन्य क्षेत्राधिकार देता है। अनुच्छेद 132 से 134 इसे संवैधानिक, दीवानी और आपराधिक मामलों में उच्च न्यायालयों से अपील का सर्वोच्च न्यायालय बनाते हैं, और अनुच्छेद 136 विशेष अनुमति याचिका जोड़ता है। अनुच्छेद 142 के तहत यह अपने समक्ष लंबित किसी भी मामले में पूर्ण न्याय के लिए आवश्यक डिक्री या आदेश दे सकता है। अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति सार्वजनिक महत्व के विधि या तथ्य के प्रश्न पर न्यायालय की सलाह माँग सकते हैं।
विकल्प B गलत है क्योंकि इसमें अनुच्छेद 143 का परामर्शी क्षेत्राधिकार छूट गया है। विकल्प C गलत है क्योंकि इसमें अनुच्छेद 142 और 143 की शक्तियाँ छूट गई हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि इसमें मूल और अपीलीय क्षेत्राधिकार ही नहीं हैं।
परीक्षा टिप: अनु. 131 मूल, 132-136 अपीलीय, 142 पूर्ण न्याय, 143 परामर्शी।
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंसंघ और यूनियन बनाने का अधिकार एक
- A.सभी को प्रत्याभूत अधिकार है
- B.केवल नागरिकों को प्रत्याभूत स्वतंत्रता का अधिकार है
- C.विधि के समक्ष समता का अधिकार है
- D.प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार है
उत्तर देखें
संघ या यूनियन बनाने का अधिकार अनुच्छेद 19 का हिस्सा है, और अनुच्छेद 19 के अधिकार केवल भारत के नागरिकों को मिलते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.संघ और प्रत्येक राज्य सरकार अनुसूचित जनजातियों को प्रभावित करने वाले सभी प्रमुख नीतिगत मामलों पर आयोग से परामर्श करेगी।
- B.आयोग की सभी रिपोर्टें और उसकी सिफ़ारिशें केवल लोकसभा के समक्ष रखी जाएँगी।
- C.किसी मामले की जाँच करते समय आयोग को सिविल न्यायालय की सभी शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
- D.आयोग को अपनी प्रक्रिया स्वयं विनियमित करने की शक्ति है।
उत्तर देखें
यह कथन सही नहीं है, क्योंकि आयोग की रिपोर्टें राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाते हैं, केवल लोकसभा के समक्ष नहीं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में चुनावों के संचालन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही नहीं है/हैं? 1. निर्वाचक नामावलियाँ तैयार करने का उत्तरदायित्व भारत के निर्वाचन आयोग में निहित है। 2. चुनाव की तिथि घोषित होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। 3. निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से संबंधित कानून भारत का निर्वाचन आयोग बनाता है। 4. किसी भी चुनाव को चुनाव याचिका के अलावा किसी अन्य प्रकार से प्रश्नगत नहीं किया जाएगा। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- A.केवल 3
- B.1, 2 और 4
- C.1, 2 और 3
- D.केवल 4
उत्तर देखें
केवल कथन 3 गलत है, क्योंकि निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से जुड़े कानून संसद बनाती है, निर्वाचन आयोग नहीं। अनुच्छेद 327 संसद को चुनाव से संबंधित सभी विषयों पर कानून बनाने की शक्ति देता है, जिनमें निर्वाचक नामावली और परिसीमन भी शामिल हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के संविधान की नौवीं अनुसूची के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
- A.इसे संविधान (पहला संशोधन) अधिनियम, 1951 द्वारा जोड़ा गया था।
- B.नौवीं अनुसूची में शामिल अधिनियम और विनियम इस आधार पर शून्य हो जाएँगे कि वे संविधान के भाग III के किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं।
- C.मूल ढाँचे के सिद्धांत के आधार पर नौवीं अनुसूची में शामिल किसी अधिनियम का न्यायिक पुनर्विलोकन करने की शक्ति सर्वोच्च न्यायालय के पास है।
- D.उपयुक्त विधानमंडल नौवीं अनुसूची में शामिल किसी अधिनियम को निरस्त या संशोधित कर सकता है।
उत्तर देखें
यह कथन सही नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद 31B ठीक उलटी बात कहता है: नौवीं अनुसूची में रखा गया कोई अधिनियम केवल इस आधार पर शून्य नहीं होगा कि वह भाग III के किसी मौलिक अधिकार से असंगत है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के संविधान की छठी अनुसूची निम्नलिखित में से किन राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है?
- A.असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम
- B.मेघालय, त्रिपुरा, मणिपुर और मिज़ोरम
- C.असम, मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा
- D.मणिपुर, मेघालय, त्रिपुरा और अरुणाचल प्रदेश
उत्तर देखें
छठी अनुसूची ठीक इन्हीं चार पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है। अनुच्छेद 244(2) और 275(1) के अंतर्गत छठी अनुसूची इन राज्यों में स्वायत्त ज़िले और स्वायत्त क्षेत्र बनाती है।
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