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भारतीय राजव्यवस्थाआसानपूछा गया: CDS · CDS-II 2017, GK

लोकसभा द्वारा पारित धन विधेयक को राज्यसभा कितने सप्ताह तक रोक सकती है?

  1. A.दो
  2. B.तीन
  3. C.चार
  4. D.पाँच

सही उत्तर

A. दो

व्याख्या

सही उत्तर है A, दो। अनुच्छेद 109 के अनुसार राज्यसभा को धन विधेयक 14 दिन के भीतर लौटाना होता है, इसलिए वह इसे लगभग दो सप्ताह तक ही रोक सकती है।

धन विधेयक केवल लोकसभा में और केवल राष्ट्रपति की सिफ़ारिश पर ही पेश किया जा सकता है। राज्यसभा इसे न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही संशोधित; वह केवल सिफ़ारिशें कर सकती है, जिन्हें मानना या न मानना लोकसभा पर निर्भर है। यदि राज्यसभा 14 दिन में विधेयक नहीं लौटाती, तो उसे दोनों सदनों द्वारा उसी रूप में पारित मान लिया जाता है जिसमें लोकसभा ने उसे पारित किया था। कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, यह अध्यक्ष तय करते हैं और अनुच्छेद 110 के तहत उनका प्रमाणपत्र अंतिम होता है।

विकल्प B, C और D गलत हैं क्योंकि तीन, चार और पाँच सप्ताह संविधान द्वारा दिए गए 14 दिन से अधिक हैं। छह महीने तक की लंबी देरी साधारण विधेयक पर लागू होती है, और ऐसा गतिरोध अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक से सुलझाया जा सकता है।

परीक्षा टिप: धन विधेयक: परिभाषा अनुच्छेद 110, प्रक्रिया अनुच्छेद 109, राज्यसभा को 14 दिन, संयुक्त बैठक नहीं।

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Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2017, GKमध्यम

अखिल भारतीय सेवाओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

  1. A.अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन संसद के अधिनियम द्वारा किया जा सकता है।
  2. B.अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन के लिए राज्यसभा का अनुमोदन आवश्यक नहीं है।
  3. C.अखिल भारतीय सेवाओं में भर्ती के नियम संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) निर्धारित करता है।
  4. D.अखिल भारतीय सेवाओं की सेवा शर्तों में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परिवर्तन कर सकता है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन संसद के अधिनियम द्वारा किया जा सकता है।

अनुच्छेद 312 के तहत संसद कानून बनाकर संघ और राज्यों के लिए साझा नई अखिल भारतीय सेवाओं का सृजन कर सकती है।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2017, GKआसान

भारत के संविधान के अनुच्छेद 44 में दी गई समान नागरिक संहिता के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.यह प्रत्येक भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार है।
  2. B.राज्य भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए इसे सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा।
  3. C.यह किसी भी न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है।
  4. D.यह न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है, फिर भी संविधान अपेक्षा करता है कि एक सिद्धांत के रूप में यह देश के शासन में मूलभूत हो।
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. यह प्रत्येक भारतीय नागरिक का मौलिक अधिकार है।

समान नागरिक संहिता मौलिक अधिकार नहीं है। अनुच्छेद 44 संविधान के भाग IV में, राज्य के नीति निदेशक तत्वों के बीच आता है।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-I 2018, GKआसान

भारत में चुनावों के संदर्भ में, VVPAT का सही पूर्ण रूप निम्नलिखित में से कौन-सा है?

  1. A.Voter Verifiable Poll Audit Trail
  2. B.Voter Verifying Paper Audit Trail
  3. C.Voter Verifiable Paper Audit Trail
  4. D.Voter Verifiable Paper Account Trail
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. Voter Verifiable Paper Audit Trail

VVPAT ईवीएम से जुड़ा एक प्रिंटर है, जिससे मतदाता कागज़ पर देख सकता है कि उसका वोट चुने हुए उम्मीदवार को ही गया।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2018, GKमध्यम

राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?

  1. A.यह विवेकाधीन शक्ति नहीं है।
  2. B.राज्यपाल किसी भी समय अध्यादेश वापस ले सकता है।
  3. C.अध्यादेश की शक्ति का प्रयोग तब किया जा सकता है जब विधानमंडल सत्र में न हो।
  4. D.अध्यादेश जारी करने के लिए मंत्रियों की सहायता और सलाह आवश्यक नहीं है।
उत्तर देखें
सही उत्तर: D. अध्यादेश जारी करने के लिए मंत्रियों की सहायता और सलाह आवश्यक नहीं है।

राज्यपाल मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर ही अध्यादेश जारी करता है। अनुच्छेद 213 राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने की शक्ति देता है और अनुच्छेद 163 कहता है कि जहाँ संविधान विवेक की अनुमति न दे, वहाँ वह मंत्रियों की सलाह पर काम करेगा।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CDS · CDS-II 2016, GKकठिन

घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?

  1. A.यह अधिनियम घरेलू हिंसा से पीड़ित महिला की रक्षा के लिए सिविल उपचार प्रदान करता है।
  2. B.इस कानून के तहत केवल महिलाएँ ही शिकायत कर सकती हैं।
  3. C.राहत केवल पति या उस पुरुष लिव-इन साथी के विरुद्ध माँगी जा सकती है जिसके साथ महिला घरेलू संबंध में रही हो।
  4. D.इस अधिनियम में केवल पत्नियाँ ही नहीं, बल्कि विवाह जैसे संबंधों में रहने वाली महिलाएँ भी शामिल हैं।
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. राहत केवल पति या उस पुरुष लिव-इन साथी के विरुद्ध माँगी जा सकती है जिसके साथ महिला घरेलू संबंध में रही हो।

अधिनियम के तहत राहत केवल पति या पुरुष साथी तक सीमित नहीं है; उसके रिश्तेदारों के विरुद्ध भी शिकायत की जा सकती है।