किसी पारिस्थितिकी तंत्र की शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता किसके बराबर होती है?
- A.सकल प्राथमिक उत्पादकता जोड़ श्वसन
- B.सकल प्राथमिक उत्पादकता घटा पौधों द्वारा श्वसन में प्रयुक्त ऊर्जा
- C.तंत्र पर पड़ने वाला कुल सूर्य प्रकाश
- D.सभी उपभोक्ताओं का कुल जैवभार
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर B है। सकल प्राथमिक उत्पादकता वह कुल ऊर्जा है जिसे उत्पादक प्रकाश संश्लेषण से स्थिर करते हैं। इसका एक भाग पौधे अपने श्वसन में खर्च कर देते हैं, और जो शेष पौधों के शरीर में संचित रह जाता है वही शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता है। यही शेष भाग शाकाहारियों को वास्तव में उपलब्ध भोजन है, इसलिए यही तय करता है कि तंत्र कितने जीवन का पोषण कर सकता है।
विकल्प A श्वसन को घटाने के बजाय जोड़ देता है और ऐसा आंकड़ा देगा जो वास्तव में ग्रहण की गई ऊर्जा से भी अधिक होगा। विकल्प C गलत है, क्योंकि हरे पौधे उन तक पहुंचने वाले सूर्य प्रकाश का बहुत छोटा भाग ही ग्रहण करते हैं, शेष परावर्तित हो जाता है या निकल जाता है। विकल्प D उपभोक्ताओं का संचित जैवभार बताता है, जो किसी क्षण का भंडार है, उत्पादन की दर नहीं। उत्पादकता सदैव प्रति इकाई क्षेत्रफल प्रति इकाई समय में व्यक्त की जाती है।
पूरा लेख पढ़ें: पारिस्थितिकी तंत्र और खाद्य श्रृंखला: घटक एवं पिरामिड
अभ्यास प्रश्न
सभी देखेंपारिस्थितिकी तंत्र शब्द किस वैज्ञानिक ने दिया था?
- A.ए. जी. टैंसले
- B.चार्ल्स डार्विन
- C.रेमंड लिंडेमान
- D.चार्ल्स एल्टन
उत्तर देखें
ब्रिटिश वनस्पति वैज्ञानिक आर्थर जॉर्ज टैंसले ने 1935 में पारिस्थितिकी तंत्र शब्द का प्रयोग उस इकाई के लिए किया जिसमें जीव और उनका निर्जीव परिवेश एक ही तंत्र के रूप में ऊर्जा तथा पदार्थ का आदान-प्रदान करते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खाद्य श्रृंखला में हरे पौधों को क्या कहा जाता है?
- A.उत्पादक
- B.प्राथमिक उपभोक्ता
- C.अपघटक
- D.द्वितीयक उपभोक्ता
उत्तर देखें
हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा से कार्बन डाइऑक्साइड और जल द्वारा प्रकाश संश्लेषण करके अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, इसीलिए उन्हें स्वपोषी भी कहा जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →खाद्य श्रृंखला में ऊर्जा स्थानांतरण का दस प्रतिशत नियम किसने दिया था?
- A.ए. जी. टैंसले
- B.रेमंड लिंडेमान
- C.ओडम
- D.अर्नस्ट हेकल
उत्तर देखें
इसके अनुसार किसी पोषी स्तर पर उपलब्ध ऊर्जा का लगभग दस प्रतिशत ही अगले स्तर तक पहुंचता है, क्योंकि शेष श्वसन तथा अन्य जैविक क्रियाओं में प्रयुक्त होकर परिवेश में ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →निम्नलिखित में से कौन सा पारिस्थितिक पिरामिड सदैव सीधा रहता है?
- A.संख्या का पिरामिड
- B.जैवभार का पिरामिड
- C.ऊर्जा का पिरामिड
- D.तीनों सदैव सीधे रहते हैं
उत्तर देखें
एक पोषी स्तर से अगले स्तर तक हर स्थानांतरण पर ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है, इसलिए ऊपर का कोई स्तर अपने नीचे वाले स्तर से अधिक ऊर्जा कभी नहीं रख सकता।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मृत पौधों और जंतुओं का अपघटन करने वाले जीवाणु तथा कवक क्या कहलाते हैं?
- A.उत्पादक
- B.अपघटक
- C.शाकाहारी
- D.सर्वाहारी
उत्तर देखें
ये मृत शरीरों, गिरी पत्तियों और अपशिष्ट पदार्थों पर पलते हैं, जटिल कार्बनिक पदार्थों को सरल पदार्थों में तोड़ते हैं तथा पोषक तत्व पुनः मृदा, जल और वायु में मुक्त कर देते हैं, जहां से पौधे उन्हें फिर ग्रहण कर सकें।
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