इस नियुक्ति से पहले भगवत प्रसाद मकवाना किस राज्य के सफाई कर्मचारी आयोग में उपाध्यक्ष और अध्यक्ष रह चुके हैं?
- A.उत्तराखंड
- B.उत्तर प्रदेश
- C.गुजरात
- D.मध्य प्रदेश
सही उत्तर
A. उत्तराखंड
व्याख्या
सही उत्तर उत्तराखंड है, जहां के सफाई कर्मचारी आयोग में उन्होंने उपाध्यक्ष और बाद में अध्यक्ष, दोनों पद संभाले। उनके अनुभव का यही हिस्सा उस राष्ट्रीय पद से सबसे सीधे जुड़ता है जिसे उन्होंने अब संभाला है, क्योंकि राज्य की संस्था एक राज्य में वही काम करती है जो राष्ट्रीय आयोग पूरे देश के लिए करता है। विकल्प B, C और D उन राज्यों के नाम हैं जहां सफाई कर्मचारियों के कल्याण की व्यवस्था भी मौजूद है, और हर विकल्प इसीलिए संभव लगता है क्योंकि ऐसे आयोग किसी एक राज्य तक सीमित नहीं हैं। उत्तर को व्यक्ति के साथ राज्य जोड़कर याद रखें, क्योंकि नियुक्ति के प्रश्नों में परीक्षक अक्सर बाकी विवरण सही रखकर केवल राज्य बदल देते हैं। साथ ही याद रखें कि उनके पास अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री है और उन्होंने अनुसूचित जाति समुदायों के कल्याण पर व्यापक काम किया है।
पूरा लेख पढ़ें: भगवत प्रसाद मकवाना बने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष
अभ्यास प्रश्न
9 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष का पदभार किसने ग्रहण किया?
- A.श्री भगवत प्रसाद मकवाना
- B.श्री अनिल मलिक
- C.श्री जितिन प्रसाद
- D.श्री प्रतापराव जाधव
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सही उत्तर: A. श्री भगवत प्रसाद मकवाना
व्याख्या
सही उत्तर श्री भगवत प्रसाद मकवाना हैं, जिन्होंने उसी तिथि को राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के अध्यक्ष का पदभार संभाला और जिन्हें भारत सरकार ने कुछ दिन पहले नियुक्त किया था। पदभार संभालते समय उन्होंने सफाई कर्मचारियों के अधिकारों तथा सम्मान की रक्षा और आयोग के कल्याण कार्यों को मजबूत करने की बात कही। विकल्प B एक अन्य मंत्रालय के सचिव का नाम है और जल्दबाजी करने वाले छात्र को यह पर्याप्त सरकारी लगता है। विकल्प C और विकल्प D केंद्रीय मंत्रियों के नाम हैं, और मंत्री ऐसे आयोगों के अध्यक्ष नहीं बनाए जाते, यही तर्क इन्हें तुरंत हटाने के लिए पर्याप्त है। नियुक्ति संबंधी प्रश्नों में नाम के साथ तीन बातें जोड़कर याद रखें, यानी सही पद, संबंधित संस्था और तिथि, क्योंकि एक ही नाम आगे किसी और भूमिका में भी समाचार में आ सकता है।
भगवत प्रसाद मकवाना पहले किस कानून के तहत गठित केंद्रीय निगरानी समिति के सदस्य रहे हैं?
- A.मैला ढोने वालों का नियोजन और शुष्क शौचालय निर्माण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1993
- B.हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013
- C.अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
- D.नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955
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सही उत्तर: B. हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013
व्याख्या
सही उत्तर हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 है। राष्ट्रीय आयोग का पदभार संभालने से पहले मकवाना इसी अधिनियम के तहत गठित केंद्रीय निगरानी समिति के सदस्य रहे, और यह अनुभव उत्तराखंड आयोग में उनके कार्यकाल तथा एनएचपीसी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में उनकी भूमिका के साथ जुड़ता है। विकल्प A इसी विषय पर बने 1993 के पुराने कानून का नाम है, इसलिए यही सबसे बड़ा भ्रम है, क्योंकि दोनों कानून मैला ढोने से जुड़े हैं और छात्रों को केवल विषय याद रहता है। विकल्प C यानी 1989 का अत्याचार निवारण कानून और विकल्प D यानी 1955 का नागरिक अधिकार कानून वास्तविक कानून हैं जो अनुसूचित जाति समुदायों की रक्षा करते हैं, इसलिए वे भी संभव लगते हैं, पर यहां उल्लिखित समिति उनसे नहीं बनी। 2013 के वर्ष को पुनर्वास शब्द के साथ जोड़कर याद रखें।
विज्ञप्ति में एनसीएसके के नए अध्यक्ष के पिछले काम के संदर्भ में किस अधिनियम का नाम आया है?
- A.नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955
- B.हाथ से मैला ढोने के रूप में रोजगार पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013
- C.मैला ढोने वालों का नियोजन और शुष्क शौचालय निर्माण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1993
- D.अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989
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सही उत्तर: B. हाथ से मैला ढोने के रूप में रोजगार पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013
व्याख्या
सही उत्तर हाथ से मैला ढोने के रूप में रोजगार पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013 है। विज्ञप्ति दर्ज करती है कि राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष बनने से पहले भगवत प्रसाद मकवाना इसी अधिनियम के तहत गठित केंद्रीय निगरानी समिति के सदस्य रहे थे। विकल्प C में उसी विषय का पुराना कानून है, जिसकी जगह 2013 के अधिनियम ने ली, और इसीलिए उसे खारिज करना सबसे कठिन है। विकल्प A और विकल्प D अनुसूचित जातियों की रक्षा करने वाले असली कानून हैं, पर वे अस्पृश्यता के अपराधों और अत्याचारों से जुड़े हैं, हाथ से मैला ढोने से नहीं, इसलिए यहां उनका नाम नहीं आता। अध्यक्ष की बाकी योग्यताएं भी साथ याद रखें: अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर, उत्तराखंड सफाई कर्मचारी आयोग में उपाध्यक्ष तथा अध्यक्ष के कार्यकाल, और एनएचपीसी बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक का अनुभव।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग का अध्यक्ष किसे नियुक्त किया गया है?
- A.कैशब बिहारी
- B.भगवत प्रसाद मकवाना
- C.मनोज कुमार बाल्मीकि
- D.रवि रामू कालोसे
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सही उत्तर: B. भगवत प्रसाद मकवाना
व्याख्या
सही उत्तर भगवत प्रसाद मकवाना हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने उन्हें आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया, और विज्ञप्ति उनकी पृष्ठभूमि भी देती है: अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर, अनुसूचित जाति समुदायों के लिए सामाजिक कार्य का लंबा अनुभव, उत्तराखंड सरकार के सफाई कर्मचारी आयोग में पहले उपाध्यक्ष और फिर अध्यक्ष के रूप में सेवा, एनएचपीसी के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक का कार्यकाल, तथा हाथ से मैला ढोने के रूप में रोजगार पर रोक और पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत बनी केंद्रीय निगरानी समिति की सदस्यता। यहां हर गलत विकल्प उसी आदेश में नियुक्त किसी व्यक्ति का नाम है, पर अलग पद पर। विकल्प A के कैशब बिहारी उपाध्यक्ष हैं, जबकि विकल्प C और विकल्प D तीन सदस्यों में से दो के नाम हैं। प्रश्न ठीक इसी तरह बनते हैं, इसलिए नामों की सूची नहीं, नाम के साथ पद याद रखें।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में हुई ये नियुक्तियां किस तारीख तक प्रभावी रहेंगी?
- A.31 मार्च 2028
- B.31 दिसंबर 2027
- C.30 सितंबर 2029
- D.31 मार्च 2030
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सही उत्तर: A. 31 मार्च 2028
व्याख्या
सही उत्तर 31 मार्च 2028 है। विज्ञप्ति कहती है कि ये नियुक्तियां उसी तारीख तक प्रभावी रहेंगी, जो मौजूदा आयोग के बचे हुए कार्यकाल के बराबर है। यह केवल याद रखने की तारीख नहीं, बल्कि एक सिद्धांत की बात है: नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्य अपना अलग पूरा कार्यकाल शुरू नहीं करते, बल्कि आयोग के मौजूदा कार्यकाल का बचा हुआ हिस्सा पूरा करते हैं। विकल्प B, C और D देखने में ठीक लगने वाली तारीखें हैं जो विज्ञप्ति में नहीं आतीं। इससे जुड़ा एक और ब्योरा साथ रखें, यानी आयोग की संरचना: एक ही आदेश में एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन सदस्य नियुक्त हुए, जो हैं भगवत प्रसाद मकवाना, कैशब बिहारी, मनोज कुमार बाल्मीकि, सुषमा गौड़ियाल और रवि रामू कालोसे। नियुक्तियां सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने कीं।