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GK क्विजभारतीय राजव्यवस्था

भारतीय राजव्यवस्था क्विज: लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय समितियां

  • 12 प्रश्न
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इस क्विज के बारे में

भारतीय राजव्यवस्था के अंतर्गत "लोकसभा अध्यक्ष और संसदीय समितियां" विषय पर यह क्विज़ 12 बहुविकल्पीय प्रश्न रखता है, जो GK24 के इसी विषय के नोट्स के साथ प्रकाशित सत्यापित प्रश्न हैं। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और शेष विकल्पों के गलत होने की पूरी व्याख्या दी गई है, ताकि आप केवल उत्तर याद न करें बल्कि उसके पीछे का तथ्य समझें। नोट्स पढ़ने के तुरंत बाद इसे हल करें, निर्धारित समय का पालन करें, और अंत में व्याख्याएं पढ़कर कमजोर बिंदु चिह्नित करें। परीक्षा से पहले दोहराव के लिए इसे दोबारा दें।

इस क्विज के प्रश्न

12 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत लोकसभा अपने सदस्यों में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनती है?

  1. A.अनुच्छेद 89
  2. B.अनुच्छेद 93
  3. C.अनुच्छेद 97
  4. D.अनुच्छेद 100
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अनुच्छेद 93

व्याख्या

सही उत्तर B, अनुच्छेद 93 है। संविधान का अनुच्छेद 93 उपबंधित करता है कि लोकसभा यथाशीघ्र अपने दो सदस्यों को क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनेगी, तथा जब भी इनमें से कोई पद रिक्त होगा, सदन किसी अन्य सदस्य को उस पद के लिए चुनेगा। यह निर्वाचन राष्ट्रपति द्वारा नियत तिथि पर होता है और उपस्थित तथा मत देने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत से तय होता है। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 89 राज्यसभा के लिए समान उपबंध है, जो राज्यसभा के सभापति और उपसभापति से संबंधित है, और वहां उपराष्ट्रपति पदेन सभापति होता है। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 97 केवल इन पीठासीन अधिकारियों के वेतन-भत्तों को भारत की संचित निधि पर भारित करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 100 सदनों में मतदान, पीठासीन अधिकारी के निर्णायक मत और कुल सदस्य संख्या के एक-दसवें भाग की गणपूर्ति से संबंधित है।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

लोकसभा अध्यक्ष को सदन के किस बहुमत से पारित संकल्प द्वारा पद से हटाया जा सकता है?

  1. A.उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों का साधारण बहुमत
  2. B.सदन के तत्कालीन समस्त सदस्यों का बहुमत
  3. C.उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत
  4. D.सदन की कुल सदस्य संख्या का दो-तिहाई बहुमत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सदन के तत्कालीन समस्त सदस्यों का बहुमत

व्याख्या

सही उत्तर B, सदन के तत्कालीन समस्त सदस्यों का बहुमत है। अनुच्छेद 94(ग) कहता है कि अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को लोकसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प द्वारा पद से हटाया जा सकता है, और परंतुक के अनुसार ऐसा संकल्प लाने के आशय की चौदह दिन की सूचना देना आवश्यक है। यह प्रभावी बहुमत है, जिसकी गणना रिक्तियों को छोड़कर सदन की वास्तविक संख्या पर होती है, केवल उपस्थित सदस्यों पर नहीं। विकल्प A गलत है क्योंकि साधारण बहुमत से अनुच्छेद 93 के अंतर्गत अध्यक्ष का निर्वाचन होता है, हटाया जाना नहीं। विकल्प C और D गलत हैं क्योंकि अध्यक्ष के लिए कहीं भी दो-तिहाई बहुमत अपेक्षित नहीं है; वह अन्य उपबंधों से जुड़ा है, जैसे किसी न्यायाधीश को हटाना या राष्ट्रपति पर महाभियोग, और परीक्षक उसे यहां जानबूझकर भ्रम के रूप में रखते हैं। यह भी ध्यान रखें कि अनुच्छेद 96 ऐसे संकल्प के विचाराधीन रहने पर अध्यक्ष को पीठासीन होने से रोकता है।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

लोकसभा के विघटन पर अध्यक्ष के पद का क्या होता है?

  1. A.अध्यक्ष विघटन के दिन पद छोड़ देता है
  2. B.अध्यक्ष अगली लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक पद पर बना रहता है
  3. C.राष्ट्रपति इस अंतराल के लिए कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त करता है
  4. D.राज्यसभा का सभापति अध्यक्ष के कर्तव्य संभाल लेता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अध्यक्ष अगली लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक पद पर बना रहता है

व्याख्या

सही उत्तर B है। अनुच्छेद 94 का परंतुक कहता है कि लोकसभा के विघटन पर अध्यक्ष अपना पद नहीं छोड़ेगा, बल्कि अगली लोकसभा की पहली बैठक से ठीक पहले तक पद धारण करता रहेगा। इसका कारण व्यावहारिक है: पद बना रहना चाहिए जिससे कोई अभिलेखों को अधिप्रमाणित कर सके, अंतराल में सदन की शक्तियों का प्रयोग कर सके और नए अध्यक्ष को व्यवस्थित सदन सौंप सके। विकल्प A इसी परंतुक के कारण गलत है, जो अध्यक्ष को उस नियम का अपवाद बनाता है कि विघटन पर सदन और उसके सदस्य समाप्त हो जाते हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि राष्ट्रपति केवल अस्थायी अध्यक्ष नियुक्त करता है, और वह भी नया सदन गठित होने पर सदस्यों को शपथ दिलाने के लिए, विघटन के बाद के अंतर को भरने के लिए नहीं। विकल्प D गलत है क्योंकि राज्यसभा स्थायी सदन है जिसका कभी विघटन नहीं होता, और उसके सभापति की लोकसभा के कार्य में कोई भूमिका नहीं होती, सिवाय अध्यक्ष की अनुपस्थिति में संयुक्त बैठक के।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

लोकसभा अध्यक्ष किस स्थिति में मत का प्रयोग करता है?

  1. A.सदन के समक्ष रखे गए प्रत्येक प्रश्न पर प्रथम बार
  2. B.केवल निर्णायक मत, जब मत बराबर बंट जाएं
  3. C.केवल धन विधेयकों पर
  4. D.अध्यक्ष किसी भी परिस्थिति में सदन में मत नहीं देता
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. केवल निर्णायक मत, जब मत बराबर बंट जाएं

व्याख्या

सही उत्तर B है। अनुच्छेद 100(1) उपबंधित करता है कि अध्यक्ष या अध्यक्ष के रूप में कार्य करने वाला व्यक्ति प्रथम बार मत नहीं देगा, किंतु मत बराबर होने की स्थिति में उसे निर्णायक मत का अधिकार होगा और वह उसका प्रयोग करेगा। इसका प्रयोजन यह है कि पीठ दलीय संघर्ष से ऊपर रहे और फिर भी सदन को गतिरोध से निकलने का मार्ग मिले। विकल्प A गलत है क्योंकि प्रत्येक प्रश्न पर प्रथम बार मत देना साधारण सदस्य का कार्य है, और पीठ को यह अधिकार जानबूझकर नहीं दिया गया। विकल्प C गलत है क्योंकि धन विधेयक में अध्यक्ष की भूमिका सर्वथा भिन्न है: अनुच्छेद 110(4) के अंतर्गत अध्यक्ष प्रमाणित करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, और वह प्रमाण अंतिम होता है तथा किसी न्यायालय में उस पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता। विकल्प D गलत है क्योंकि अध्यक्ष सदन का पूर्ण सदस्य होता है और दो स्थितियों में मत देता है, अर्थात अनुच्छेद 100 के अंतर्गत निर्णायक मत और अनुच्छेद 96 के अंतर्गत अपने ही हटाए जाने के संकल्प पर प्रथम बार मत।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

संसद की लोक लेखा समिति की कुल सदस्य संख्या कितनी है?

  1. A.15 सदस्य, सभी लोकसभा से
  2. B.22 सदस्य, 15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से
  3. C.30 सदस्य, सभी लोकसभा से
  4. D.31 सदस्य, 21 लोकसभा से और 10 राज्यसभा से
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 22 सदस्य, 15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से

व्याख्या

सही उत्तर B है। लोक लेखा समिति में बाईस सदस्य होते हैं, पंद्रह लोकसभा द्वारा और सात राज्यसभा द्वारा निर्वाचित, और यह निर्वाचन एकल संक्रमणीय मत द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व से एक वर्ष के कार्यकाल के लिए होता है। इसके सभापति की नियुक्ति अध्यक्ष समिति के लोकसभा सदस्यों में से करता है, और 1967 से यह परंपरा है कि विपक्ष के सदस्य को नियुक्त किया जाता है। समिति विनियोग लेखों तथा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों की जांच करती है। विकल्प A गलत है क्योंकि पंद्रह केवल समिति में लोकसभा का हिस्सा है, उसकी कुल संख्या नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि तीस सदस्य, सभी लोकसभा से, प्राक्कलन समिति की संख्या है, जिसमें राज्यसभा का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता। विकल्प D गलत है क्योंकि इकतीस सदस्य, इक्कीस और दस के विभाजन के साथ, प्रत्येक विभाग संबंधित स्थायी समिति का आकार है। लोक उपक्रम समिति में भी लोक लेखा समिति की तरह बाईस सदस्य होते हैं।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

संसद की प्राक्कलन समिति 1950 में किस व्यक्ति की सिफारिश पर गठित की गई थी?

  1. A.जॉन मथाई
  2. B.वी. के. कृष्ण मेनन
  3. C.जी. वी. मावलंकर
  4. D.सी. डी. देशमुख
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. जॉन मथाई

व्याख्या

सही उत्तर A, जॉन मथाई है। प्राक्कलन समिति 1950 में जॉन मथाई के सुझाव पर गठित की गई, जो तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री थे, और इसमें तीस सदस्य होते हैं जो सभी लोकसभा से निर्वाचित होते हैं; इसमें राज्यसभा का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता। इसके सभापति की नियुक्ति अध्यक्ष करता है, कोई मंत्री सदस्य नहीं हो सकता, और इसका कार्य बजट प्राक्कलनों की जांच करना, बचत के सुझाव देना तथा प्राक्कलन प्रस्तुत करने के वैकल्पिक रूप प्रस्तावित करना है, इसीलिए इसे सतत बचत समिति कहा जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि कृष्ण मेनन समिति ने लोक उपक्रम समिति की सिफारिश की थी, जो 1964 में गठित हुई। विकल्प C गलत है क्योंकि जी. वी. मावलंकर लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष थे और उन्हें लोकसभा का जनक कहा जाता है, किंतु प्राक्कलन समिति उनकी सिफारिश से नहीं जुड़ी है। विकल्प D गलत है क्योंकि सी. डी. देशमुख वित्त मंत्री और इससे पहले भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर रहे, किंतु इस समिति के गठन से उनका संबंध नहीं है।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

संसद की प्रत्येक विभाग संबंधित स्थायी समिति में कितने सदस्य होते हैं?

  1. A.22 सदस्य
  2. B.25 सदस्य
  3. C.31 सदस्य
  4. D.45 सदस्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 31 सदस्य

व्याख्या

सही उत्तर C, 31 सदस्य है। प्रत्येक विभाग संबंधित स्थायी समिति में इकतीस सदस्य होते हैं, जिनमें इक्कीस को अध्यक्ष लोकसभा से और दस को सभापति राज्यसभा से नामनिर्दिष्ट करता है। यह प्रणाली 1993 में सत्रह ऐसी समितियों से आरंभ हुई और 2004 में इसका पुनर्गठन हुआ, जिसके बाद चौबीस समितियां संपूर्ण केंद्र सरकार को कवर करती हैं। कोई मंत्री सदस्य नहीं हो सकता और कार्यकाल एक वर्ष का होता है। ये समितियां अपने मंत्रालयों की अनुदान मांगों, उन्हें निर्दिष्ट विधेयकों, वार्षिक प्रतिवेदनों तथा दीर्घकालिक नीति दस्तावेजों की जांच करती हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि बाईस लोक लेखा समिति और लोक उपक्रम समिति की संख्या है। विकल्प B गलत है क्योंकि पच्चीस किसी संसदीय समिति की संख्या नहीं है और यह केवल भ्रम के लिए रखा गया है। विकल्प D गलत है क्योंकि पैंतालीस किसी स्थायी समिति का आकार नहीं है; तीस की संख्या, बीस और दस के विभाजन के साथ, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति की है।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

लोक लेखा समिति के सभापति के विषय में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?

  1. A.सभापति का निर्वाचन समिति के सदस्य करते हैं
  2. B.सभापति की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष करता है
  3. C.सभापति को प्रधानमंत्री नामनिर्दिष्ट करता है
  4. D.उपाध्यक्ष इसका पदेन सभापति होता है
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सभापति की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष करता है

व्याख्या

सही उत्तर B है। लोक लेखा समिति के सभापति की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष समिति के लोकसभा सदस्यों में से करता है, और 1967 से यह स्थापित परंपरा है कि विपक्ष के किसी सदस्य को नियुक्त किया जाता है, जिससे समिति जवाबदेही के साधन के रूप में अधिक सशक्त होती है। समिति का कोई राज्यसभा सदस्य सभापति नहीं बनाया जा सकता। विकल्प A गलत है क्योंकि सदस्य किसी को सभापति नहीं चुनते; वे स्वयं आनुपातिक प्रतिनिधित्व से समिति में निर्वाचित होते हैं, किंतु सभापति का पद नियुक्ति से भरा जाता है। विकल्प C गलत है क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री की कोई भूमिका नहीं है, और सरकार के प्रमुख को उस समिति का सभापति चुनने देना, जो सरकार के लेखों की जांच करती है, समिति के प्रयोजन को ही नष्ट कर देगा। विकल्प D गलत है क्योंकि उपाध्यक्ष गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयक तथा संकल्प समिति का पदेन सभापति होता है, लोक लेखा समिति का नहीं; अध्यक्ष कार्य मंत्रणा, नियम तथा सामान्य प्रयोजन समितियों की अध्यक्षता करता है।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

संविधान की किस अनुसूची के अंतर्गत अध्यक्ष दल-बदल के आधार पर सदस्यों की निरर्हता के प्रश्न का निर्णय करता है?

  1. A.आठवीं अनुसूची
  2. B.नौवीं अनुसूची
  3. C.दसवीं अनुसूची
  4. D.बारहवीं अनुसूची
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. दसवीं अनुसूची

व्याख्या

सही उत्तर C, दसवीं अनुसूची है। दसवीं अनुसूची, जो 1985 के बावनवें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़ी गई, दल-बदल विरोधी उपबंध रखती है, और उसका पैरा 6 कहता है कि दल-बदल के आधार पर निरर्हता के प्रश्न का निर्णय संबंधित सदन का सभापति या अध्यक्ष करेगा और उसका निर्णय अंतिम होगा। किहोतो होलोहन बनाम जाचिल्हू, 1992 में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसे प्रश्न का निर्णय करते समय अध्यक्ष एक अधिकरण के रूप में कार्य करता है, इसलिए वह निर्णय सीमित आधारों पर न्यायिक पुनर्विलोकन के दायरे में आता है। विकल्प A गलत है क्योंकि आठवीं अनुसूची में संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाएं दी गई हैं। विकल्प B गलत है क्योंकि नौवीं अनुसूची, जो 1951 के प्रथम संशोधन द्वारा जोड़ी गई, कुछ विधियों को, जो अधिकतर भूमि सुधार विधियां हैं, चुनौती से संरक्षण देती है। विकल्प D गलत है क्योंकि बारहवीं अनुसूची, जो चौहत्तरवें संशोधन द्वारा जोड़ी गई, नगरपालिकाओं के अठारह विषय गिनाती है।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थाआसान

लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष कौन थे, जिन्हें प्रायः लोकसभा का जनक कहा जाता है?

  1. A.सच्चिदानंद सिन्हा
  2. B.जी. वी. मावलंकर
  3. C.एम. अनंतशयनम अय्यंगार
  4. D.हुकम सिंह
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. जी. वी. मावलंकर

व्याख्या

सही उत्तर B, जी. वी. मावलंकर है। गणेश वासुदेव मावलंकर संविधान सभा के अध्यक्ष थे जब वह विधानमंडल के रूप में बैठती थी, और इसके बाद 1952 में वे लोकसभा के प्रथम अध्यक्ष बने, इसीलिए उन्हें लोकसभा का जनक कहा जाता है; पीठ की अनेक परंपराएं उनके समय में ही स्थापित हुईं। विकल्प A गलत है क्योंकि सच्चिदानंद सिन्हा दिसंबर 1946 की पहली बैठक में संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष थे, जिसके बाद राजेंद्र प्रसाद उसके स्थायी अध्यक्ष चुने गए। विकल्प C गलत है क्योंकि एम. अनंतशयनम अय्यंगार लोकसभा के प्रथम उपाध्यक्ष थे और मावलंकर के निधन के बाद ही अध्यक्ष बने। विकल्प D गलत है क्योंकि हुकम सिंह 1960 के दशक में अध्यक्ष पद पर रहे, प्रथम कार्यकाल के बहुत बाद, और वे पीठ के प्रथम धारक नहीं हैं।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

लोकसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन तथा भत्ते

  1. A.प्रति वर्ष संसद के मतदान के अधीन होते हैं
  2. B.भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं
  3. C.भारत की आकस्मिकता निधि से दिए जाते हैं
  4. D.राष्ट्रपति द्वारा समय-समय पर नियत किए जाते हैं
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं

व्याख्या

सही उत्तर B है। अनुच्छेद 97 उपबंधित करता है कि लोकसभा के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष तथा राज्यसभा के सभापति एवं उपसभापति के वेतन-भत्ते वे होंगे जो संसद विधि द्वारा अवधारित करे, और ये भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं। भारित व्यय संसद के मतदान के लिए प्रस्तुत नहीं किया जाता, जिससे पद की स्वतंत्रता तत्कालीन सरकार से सुरक्षित रहती है। विकल्प A ठीक इसी कारण गलत है: भारित व्यय पर चर्चा हो सकती है, मतदान नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 267 के अंतर्गत भारत की आकस्मिकता निधि राष्ट्रपति के व्ययनाधीन एक अग्रदाय है, जो संसद के प्राधिकार मिलने तक अप्रत्याशित व्यय पूरा करने के लिए है; उसका उपयोग नियमित वेतन के लिए नहीं होता। विकल्प D गलत है क्योंकि ये वेतन संसद विधि द्वारा अवधारित करती है, राष्ट्रपति स्वविवेक से नहीं।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थाकठिन

संसदीय समितियों का कौन सा युग्म लोकप्रिय रूप से वित्तीय नियंत्रण की जुड़वां बहनें कहा जाता है?

  1. A.लोक लेखा समिति और प्राक्कलन समिति
  2. B.प्राक्कलन समिति और कार्य मंत्रणा समिति
  3. C.लोक उपक्रम समिति और नियम समिति
  4. D.विशेषाधिकार समिति और याचिका समिति
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. लोक लेखा समिति और प्राक्कलन समिति

व्याख्या

सही उत्तर A है। लोक लेखा समिति और प्राक्कलन समिति को वित्तीय नियंत्रण की जुड़वां बहनें कहा जाता है क्योंकि दोनों मिलकर व्यय चक्र के दोनों सिरों को ढकती हैं। प्राक्कलन समिति उस धन को देखती है जो व्यय होने वाला है, बजट प्राक्कलनों की जांच करती है और बचत के सुझाव देती है, जिससे उसे सतत बचत समिति का नाम मिला। लोक लेखा समिति उस धन को देखती है जो व्यय हो चुका है, विनियोग लेखों तथा नियंत्रक-महालेखापरीक्षक के प्रतिवेदनों की जांच करती है, इसीलिए उसके कार्य को व्यय का मरणोत्तर परीक्षण कहा जाता है। विकल्प B गलत है क्योंकि कार्य मंत्रणा समिति केवल सरकारी कार्य के लिए समय आवंटित करती है और उसकी अध्यक्षता अध्यक्ष करता है। विकल्प C गलत है क्योंकि नियम समिति प्रक्रिया के नियम बनाती और संशोधित करती है तथा वित्तीय समिति नहीं है, यद्यपि लोक उपक्रम समिति वास्तव में तीसरी वित्तीय समिति है। विकल्प D गलत है क्योंकि विशेषाधिकार समिति और याचिका समिति क्रमशः विशेषाधिकार भंग तथा नागरिकों की याचिकाओं से संबंधित हैं।

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