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GK क्विजभारतीय राजव्यवस्था

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 8

  • 20 प्रश्न
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इस क्विज के बारे में

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 8) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 17 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: संविधान का निर्माण, राजभाषा और विशेष प्रावधान, प्रस्तावना और अन्य। इनमें से 19 प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 15 फरवरी 2019, शिफ्ट 3आसान

भारत की संविधान सभा ने संविधान को कब अपनाया?

  1. A.26 नवंबर 1949
  2. B.26 जनवरी 1950
  3. C.26 नवंबर 1950
  4. D.26 जनवरी 1949
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 26 नवंबर 1949

व्याख्या

सही उत्तर 26 नवंबर 1949 है। इसी दिन संविधान सभा ने संविधान को अपनाया, और अब हर साल यह दिन संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। नागरिकता, चुनाव, अंतरिम संसद और अस्थायी तथा संक्रमणकालीन प्रावधानों जैसे कुछ उपबंध 26 नवंबर 1949 को ही लागू हो गए थे।

इस प्रश्न में जाल 26 जनवरी 1950 है: यह वह तिथि है जब संविधान लागू हुआ, जिसे अब गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है, न कि वह तिथि जब उसे अपनाया गया। यह दिन इसलिए चुना गया क्योंकि कांग्रेस ने 1930 में 26 जनवरी को पूर्ण स्वराज दिवस के रूप में मनाया था। बाकी दो विकल्प, 26 नवंबर 1950 और 26 जनवरी 1949, केवल वर्षों को आपस में बदल देते हैं और संविधान निर्माण की किसी घटना से मेल नहीं खाते। दोहराते समय इस जोड़ी को सही क्रम में याद रखें: 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 15 Mar 2023, Shift 1आसान

भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित करता है?

  1. A.अनुच्छेद 370
  2. B.अनुच्छेद 51A
  3. C.अनुच्छेद 80
  4. D.अनुच्छेद 343
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. अनुच्छेद 343

व्याख्या

सही उत्तर है D, अनुच्छेद 343। अनुच्छेद 343(1) कहता है कि संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी और सरकारी कामकाज में भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप प्रयोग होगा। इसमें 1950 से पंद्रह साल तक अंग्रेज़ी जारी रखने की छूट थी; फिर राजभाषा अधिनियम 1963 ने 1965 के बाद भी हिंदी के साथ अंग्रेज़ी को बनाए रखा। अनुच्छेद 343 से 351 तक भाग XVII 'राजभाषा' है, और हिंदी दिवस 14 सितंबर को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 1949 में इसी दिन संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में अपनाया था। ध्यान रखें, भारत की कोई 'राष्ट्रभाषा' नहीं है; हिंदी संघ की राजभाषा है और आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएँ हैं। विकल्प A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देता था। विकल्प B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 51A में मौलिक कर्तव्य हैं। विकल्प C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 80 राज्य सभा की संरचना के बारे में है। परीक्षा टिप: 343 = देवनागरी में हिंदी, 344 = राजभाषा आयोग, 348 = न्यायालयों की भाषा।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थामध्यम

किस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपना पुराना मत पलटते हुए कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा है?

  1. A.बेरुबारी यूनियन मामला (1960)
  2. B.गोलकनाथ मामला (1967)
  3. C.एलआईसी ऑफ इंडिया मामला (1995)
  4. D.केशवानंद भारती मामला (1973)
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. केशवानंद भारती मामला (1973)

व्याख्या

सही उत्तर केशवानंद भारती मामला (1973) है। 1960 के बेरुबारी यूनियन मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा नहीं है, हालांकि यह संविधान निर्माताओं के मन को समझने की कुंजी है। केशवानंद भारती मामले में न्यायालय ने यह मत अस्वीकार किया और कहा कि प्रस्तावना संविधान का हिस्सा है और इसमें संशोधन हो सकता है, बशर्ते इसकी मूल विशेषताएं न बदलें।

बेरुबारी यूनियन मामला वही पुराना निर्णय है जिसे पलटा गया, इसलिए यह उत्तर नहीं हो सकता। एलआईसी ऑफ इंडिया मामला 1995 में बाद में आया और उसने केवल दोहराया कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न हिस्सा है; उसने कुछ पलटा नहीं। 1967 का गोलकनाथ मामला मौलिक अधिकारों में संशोधन की संसद की शक्ति से जुड़ा था, प्रस्तावना की स्थिति से नहीं। प्रश्न में "पलटते हुए" शब्द ही संकेत है: यह उस मामले की ओर इशारा करता है जिसने बेरुबारी का निर्णय पलटा, यानी केशवानंद भारती।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: हरियाणा · HSSC CET Group C, 5 Nov 2022, Shift 2मध्यम

भारत के संविधान का अनुच्छेद 395, जो संविधान का अंतिम अनुच्छेद भी है, निम्नलिखित में से किसके प्रावधान के बारे में बताता है?

  1. A.नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019
  2. B.नए राज्यों का गठन
  3. C.भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का निरसन
  4. D.आपात की उद्घोषणा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का निरसन

व्याख्या

सही उत्तर है C, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का निरसन। संविधान का अंतिम अनुच्छेद 395 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 और भारत शासन अधिनियम, 1935 को, 1935 के अधिनियम में संशोधन या जोड़ करने वाले कानूनों सहित, निरस्त करता है। इन ब्रिटिश कानूनों को हटाकर संविधान निर्माताओं ने संविधान को भारत में कानूनी सत्ता का एकमात्र स्रोत बना दिया और ब्रिटिश संसद से कानूनी संबंध समाप्त कर दिया। यह अनुच्छेद एक अपवाद भी रखता है: प्रिवी काउंसिल क्षेत्राधिकार उन्मूलन अधिनियम, 1949 को निरस्त नहीं किया गया। अनुच्छेद 395 भाग XXII में अनुच्छेद 393 (संक्षिप्त नाम) और अनुच्छेद 394 (प्रारंभ) के साथ है, और यह 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 संसद का बनाया साधारण कानून है, संविधान का अनुच्छेद नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि नए राज्यों का गठन अनुच्छेद 2 और 3 के तहत होता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा अनुच्छेद 352 के तहत होती है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 395 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और भारत शासन अधिनियम 1935 को निरस्त करता है।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 5 दिसंबर 2022, शिफ्ट 2आसान

धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार भारत के संविधान के किन अनुच्छेदों में है?

  1. A.अनुच्छेद 19 से अनुच्छेद 22
  2. B.अनुच्छेद 29 से अनुच्छेद 30
  3. C.अनुच्छेद 25 से अनुच्छेद 28
  4. D.अनुच्छेद 14 से अनुच्छेद 18
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अनुच्छेद 25 से अनुच्छेद 28

व्याख्या

सही उत्तर अनुच्छेद 25 से अनुच्छेद 28 है। धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार में चार अनुच्छेद हैं: अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता और धर्म को अबाध रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार देता है; अनुच्छेद 26 हर धार्मिक संप्रदाय को अपने धार्मिक कार्यों का प्रबंध करने देता है; अनुच्छेद 27 कहता है कि किसी विशेष धर्म के प्रचार के लिए कर देने को किसी को बाध्य नहीं किया जा सकता; और अनुच्छेद 28 पूरी तरह राज्य निधि से चलने वाली शिक्षा संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा पर रोक लगाता है।

हर गलत विकल्प मौलिक अधिकारों का कोई दूसरा समूह है: अनुच्छेद 14 से 18 समता का अधिकार, अनुच्छेद 19 से 22 स्वतंत्रता का अधिकार, और अनुच्छेद 29 और 30 संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार। इसलिए यह प्रश्न असल में यह परखता है कि आप जानते हैं कि हर समूह कहां से शुरू होकर कहां खत्म होता है। अगर आपको छह शुरुआती संख्याएं, 14, 19, 23, 25, 29 और 32, याद हैं, तो आप ऐसे हर प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं। यह भी ध्यान दें कि ये अनुच्छेद 1950 से संविधान में हैं, प्रस्तावना में 1976 में "पंथनिरपेक्ष" शब्द जुड़ने से बहुत पहले से।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: बिहार · BPSC 64th CCE Pre, 16 Dec 2018आसान

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति किसके द्वारा की जाती है?

  1. A.संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष
  2. B.भारत के राष्ट्रपति
  3. C.राज्य के राज्यपाल
  4. D.मुख्यमंत्री
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. राज्य के राज्यपाल

व्याख्या

सही उत्तर है C, राज्य के राज्यपाल। अनुच्छेद 316 के तहत राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और बाकी सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। लोक सेवा आयोगों से जुड़े प्रावधान संविधान के भाग XIV में, अनुच्छेद 315 से 323 तक हैं। राज्य आयोग का सदस्य छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, पद पर रहता है। परीक्षक यहाँ अक्सर हटाने वाला पेच पूछते हैं: नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, लेकिन हटा केवल राष्ट्रपति सकते हैं (अनुच्छेद 317); राज्यपाल सिर्फ सुप्रीम कोर्ट को मामला भेजे जाने तक सदस्य को निलंबित कर सकते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि राज्य आयोग के अध्यक्ष के चयन में यूपीएससी अध्यक्ष की कोई भूमिका नहीं होती। विकल्प B गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति यूपीएससी के अध्यक्ष को नियुक्त करते हैं, बीपीएससी या किसी राज्य आयोग के अध्यक्ष को नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि मुख्यमंत्री केवल सलाह देते हैं, औपचारिक नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। परीक्षा टिप: नियुक्ति राज्यपाल, हटाना राष्ट्रपति, कार्यकाल छह वर्ष या 62 वर्ष की आयु।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 7 मार्च 2023आसान

निम्नलिखित में से कौन-सा अनुच्छेद पूरे भारत में समान नागरिक संहिता का उल्लेख करता है?

  1. A.अनुच्छेद 44
  2. B.अनुच्छेद 39
  3. C.अनुच्छेद 40
  4. D.अनुच्छेद 50
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. अनुच्छेद 44

व्याख्या

सही उत्तर अनुच्छेद 44 है। यह कहता है: "राज्य, भारत के समस्त राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा।" समान नागरिक संहिता विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने पर अलग-अलग धार्मिक समुदायों के अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लाएगी। नीति निदेशक तत्व होने के कारण इसे न्यायालय में लागू नहीं कराया जा सकता, और सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार सरकार से इस पर कदम उठाने को कहा है। गोवा में लंबे समय से एक समान नागरिक संहिता है, और उत्तराखंड ने 2024 में अपनी समान नागरिक संहिता पारित की।

बाकी विकल्प दूसरे विषयों वाले नीति निदेशक तत्व हैं: अनुच्छेद 39 आजीविका, संसाधनों के बंटवारे और समान वेतन से; अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों से; और अनुच्छेद 50 न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने से जुड़ा है। यह भी याद रखें कि समान नागरिक संहिता को आमतौर पर उदार-बौद्धिक सिद्धांत माना जाता है, गांधीवादी नहीं; परीक्षक यह बिंदु भी परखते हैं।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 3 Aug 2025कठिन

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की शक्तियों और कर्तव्यों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :

1. वह भारत की संचित निधि से होने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करता है और उन पर प्रतिवेदन देता है।

2. वह भारत की संचित निधि से धन के निर्गमन और प्राप्ति पर नियंत्रण रखता है।

3. वह संघ या राज्य के राजस्व से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित सभी निकायों के व्यय की लेखापरीक्षा करता है और उन पर प्रतिवेदन देता है।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

  1. A.केवल 1 और 2
  2. B.केवल 2 और 3
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.1, 2 और 3
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। भारत का CAG लेखापरीक्षक है, जो खर्च हो जाने के बाद उसकी जाँच करता है; खज़ाने से पैसा निकलने पर उसका कोई नियंत्रण नहीं होता। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति अनुच्छेद 148 के तहत करते हैं और उसके कर्तव्य CAG (कर्तव्य, शक्तियाँ और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1971 में तय हैं। वह भारत और हर राज्य की संचित निधि से होने वाले सभी खर्चों की जाँच करता है, साथ ही संघ या राज्य के राजस्व से पर्याप्त रूप से वित्तपोषित निकायों के खातों की भी। संघ के खातों पर उसकी रिपोर्ट अनुच्छेद 151 के तहत राष्ट्रपति को जाती है, जो उसे संसद के सामने रखवाते हैं और लोक लेखा समिति उसकी जाँच करती है। कथन 2 गलत है, क्योंकि संचित निधि से पैसा विनियोग अधिनियम के तहत कार्यपालिका निकालती है और ब्रिटेन के CAG के विपरीत भारत का CAG इसके निर्गमन को नियंत्रित नहीं करता। इसलिए विकल्प A, B और D गलत हैं, क्योंकि तीनों में कथन 2 शामिल है। परीक्षा टिप: भारत का CAG नियंत्रक कम और महालेखापरीक्षक ज़्यादा है; वह जाँच करता है, पैसा जारी नहीं करता।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC सिविल सेवा · Prelims GS Paper I, 4 Oct 2020कठिन

निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. भारत का राष्ट्रपति संसद का सत्र ऐसे स्थान पर आहूत कर सकता है, जिसे वह उचित समझे।

2. भारत का संविधान एक वर्ष में संसद के तीन सत्रों का प्रावधान करता है, किंतु तीनों सत्रों का आयोजन अनिवार्य नहीं है।

3. एक वर्ष में संसद की बैठकों के लिए दिनों की कोई न्यूनतम संख्या निर्धारित नहीं है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. A.केवल 1
  2. B.केवल 2
  3. C.केवल 1 और 3
  4. D.केवल 2 और 3
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. केवल 1 और 3

व्याख्या

सही उत्तर है C, केवल 1 और 3। अनुच्छेद 85 राष्ट्रपति को हर सदन को 'ऐसे समय और स्थान पर, जो वह ठीक समझे' आहूत करने की शक्ति देता है, और बैठकों के न्यूनतम दिन कहीं तय नहीं हैं। अनुच्छेद 85(1) का एकमात्र नियम यह है कि एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक के बीच छह महीने से अधिक का अंतर नहीं होगा, इसलिए संसद को साल में कम से कम दो बार मिलना ही पड़ता है। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह पर सत्र बुलाते, सत्रावसान करते और लोकसभा भंग करते हैं। कथन 2 गलत है, क्योंकि संविधान में तीन सत्रों का कोई उल्लेख नहीं है; बजट, मानसून और शीतकालीन सत्र केवल परंपरा हैं। कथन 1 सही है, क्योंकि अनुच्छेद 85 समय के साथ स्थान चुनने की छूट भी देता है। कथन 3 सही है, क्योंकि कोई न्यूनतम सीमा नहीं है, इसीलिए NCRWC (2002) ने लोकसभा के लिए साल में कम से कम 120 बैठक-दिन सुझाए थे। इसलिए A, B और D गलत हैं। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 85, अधिकतम छह महीने का अंतर, तीन सत्र केवल परंपरा।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB ALP · CBT-1, 17 Feb 2026, Shift 2मध्यम

विभिन्न संवैधानिक पदों के लिए शपथ और प्रतिज्ञान के प्रारूप भारतीय संविधान की किस अनुसूची में दिए गए हैं?

  1. A.ग्यारहवीं अनुसूची
  2. B.तीसरी अनुसूची
  3. C.नौवीं अनुसूची
  4. D.पहली अनुसूची
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. तीसरी अनुसूची

व्याख्या

सही उत्तर है B, तीसरी अनुसूची। संविधान की तीसरी अनुसूची में महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों के लिए शपथ या प्रतिज्ञान के प्रारूप दिए गए हैं। इसमें केंद्रीय मंत्री, संसद के चुनाव के उम्मीदवार, संसद सदस्य, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक आते हैं; राज्य स्तर पर मंत्री, विधानमंडल के उम्मीदवार, विधायक और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी शामिल हैं। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति की शपथ इस अनुसूची में नहीं है; वह अनुच्छेद 60 और 69 में दी गई है। A गलत है क्योंकि ग्यारहवीं अनुसूची, जो 1992 के 73वें संशोधन से जुड़ी, पंचायतों को दिए गए विषय बताती है। C गलत है क्योंकि नौवीं अनुसूची, जो 1951 के पहले संशोधन से जुड़ी, कुछ भूमि सुधार और अन्य कानूनों को अदालती चुनौती से बचाती है। D गलत है क्योंकि पहली अनुसूची में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नाम और उनके क्षेत्र दिए गए हैं। परीक्षा टिप: पहली = राज्य और केंद्रशासित प्रदेश, तीसरी = शपथ, सातवीं = संघ, राज्य और समवर्ती सूची, दसवीं = दल-बदल विरोधी, ग्यारहवीं = पंचायत, बारहवीं = नगरपालिका।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 3 Aug 2025कठिन

सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :

सूची-I (समिति का नाम)

A. बलवंतराय मेहता समिति

B. अशोक मेहता समिति

C. जी. वी. के. राव समिति

D. एल. एम. सिंघवी समिति

सूची-II (प्रमुख सिफारिश)

1. पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा

2. जिला विकास आयुक्त के पद का सृजन

3. जिला परिषद और मंडल पंचायत का गठन

4. जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत का गठन

कूट :

  1. A.A-4, B-3, C-2, D-1
  2. B.A-4, B-2, C-3, D-1
  3. C.A-1, B-3, C-2, D-4
  4. D.A-1, B-2, C-3, D-4
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. A-4, B-3, C-2, D-1

व्याख्या

सही उत्तर है A, A-4, B-3, C-2, D-1। हर समिति एक खास सुझाव के लिए याद की जाती है और कूट उन्हें 1957, 1977, 1985 और 1986 के क्रम में जोड़ता है। बलवंतराय मेहता समिति (1957) ने जिला परिषद, पंचायत समिति और ग्राम पंचायत वाली त्रिस्तरीय व्यवस्था सुझाई, जिसे सबसे पहले राजस्थान ने 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में लागू किया। अशोक मेहता समिति (1977) ने केवल दो स्तर, जिला परिषद और मंडल पंचायत, की बात कही। जी.वी.के. राव समिति (1985) ने जिला विकास आयुक्त का पद सुझाया और एल.एम. सिंघवी समिति (1986) ने संवैधानिक दर्जे की माँग की, जो 1992 के 73वें संशोधन से मिला। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें अशोक मेहता और जी.वी.के. राव के सुझाव आपस में बदल दिए गए हैं। विकल्प C गलत है, क्योंकि संवैधानिक दर्जा सिंघवी की माँग थी, बलवंतराय मेहता की नहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि इसमें बलवंतराय मेहता को सिंघवी का सुझाव दिया गया है और B, C भी उलटे हैं। परीक्षा टिप: मेहता 1957 तीन स्तर, अशोक मेहता 1977 दो स्तर, सिंघवी 1986 संवैधानिक दर्जा।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: NDA · NDA (I) 2023, 16 Apr 2023आसान

मूल कर्तव्यों से संबंधित अनुच्छेद 51A को भारत के संविधान में निम्नलिखित में से किस संशोधन द्वारा जोड़ा गया?

  1. A.संविधान (42वाँ संशोधन) अधिनियम
  2. B.संविधान (44वाँ संशोधन) अधिनियम
  3. C.संविधान (85वाँ संशोधन) अधिनियम
  4. D.संविधान (92वाँ संशोधन) अधिनियम
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. संविधान (42वाँ संशोधन) अधिनियम

व्याख्या

सही उत्तर है A, संविधान (42वाँ संशोधन) अधिनियम। 1976 के 42वें संशोधन ने, जो आपातकाल के दौरान स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर पारित हुआ, एक नया भाग IV-A जोड़ा जिसमें एकमात्र अनुच्छेद 51A नागरिकों के दस मूल कर्तव्य गिनाता है, जैसे संविधान, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान, पर्यावरण की रक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास। यह विचार पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया था। ग्यारहवाँ कर्तव्य, कि माता-पिता या अभिभावक छह से चौदह वर्ष के बच्चे को शिक्षा दिलाएँ, 2002 के 86वें संशोधन से जोड़ा गया। ये कर्तव्य न्यायालय से लागू नहीं कराए जा सकते, पर संसद इन्हें लागू करने के लिए कानून बना सकती है। B, 1978 के 44वें संशोधन ने आपातकाल के कई बदलाव पलटे और संपत्ति के अधिकार को कानूनी अधिकार बनाया। C, 2001 के 85वें संशोधन ने अनुसूचित जाति और जनजाति कर्मचारियों की पदोन्नति में परिणामी वरिष्ठता का प्रावधान किया। D, 2003 के 92वें संशोधन ने बोडो, डोगरी, मैथिली और संथाली को आठवीं अनुसूची में जोड़ा। परीक्षा टिप: 42वाँ संशोधन 1976 ने भाग IV-A, अनुच्छेद 51A, दस कर्तव्य जोड़े; 86वाँ संशोधन 2002 ने इन्हें ग्यारह किया।

Q13.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: राजस्थान · RPSC RAS Pre, 2 Feb 2025कठिन

सूची-A का सूची-B से मिलान कीजिये और नीचे दिये गये कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिये:

सूची-A (वाद)

A. इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण

B. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ

C. किहोतो होलोहन बनाम ज़चिल्हू

D. पी. संबामूर्ति बनाम आंध्र प्रदेश राज्य

सूची-B (संशोधन को चुनौती)

i. 42वाँ संशोधन

ii. 52वाँ संशोधन

iii. 39वाँ संशोधन

iv. 32वाँ संशोधन

  1. A.A-i, B-iii, C-iv, D-ii
  2. B.A-ii, B-iii, C-i, D-iv
  3. C.A-iv, B-ii, C-iii, D-i
  4. D.A-iii, B-i, C-ii, D-iv
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. A-iii, B-i, C-ii, D-iv

व्याख्या

सही उत्तर है D, A-iii, B-i, C-ii, D-iv। हर मामले में एक संशोधन को मूल ढांचे की कसौटी पर परखा गया। इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण (1975) में उच्चतम न्यायालय ने 39वें संशोधन का वह भाग रद्द किया जिसने प्रधानमंत्री के चुनाव को अदालतों की पहुँच से बाहर कर दिया था, और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव को मूल ढांचे का हिस्सा माना। मिनर्वा मिल्स (1980) में 42वें संशोधन के वे प्रावधान रद्द हुए जो संसद को असीमित संशोधन शक्ति देते थे और सभी नीति निदेशक तत्वों को अनुच्छेद 14 और 19 के अधिकारों से ऊपर रखते थे। किहोतो होलोहन (1992) में 52वें संशोधन से आया दल-बदल विरोधी कानून वैध माना गया, पर अध्यक्ष के निर्णय को न्यायिक समीक्षा के दायरे में रखा गया। पी. संबामूर्ति (1987) में 32वें संशोधन से जुड़े अनुच्छेद 371D का वह खंड रद्द हुआ जो राज्य सरकार को न्यायाधिकरण का आदेश पलटने देता था। विकल्प A गलत है, क्योंकि इसमें राज नारायण को 42वें संशोधन से जोड़ा गया है। विकल्प B गलत है, क्योंकि इसमें मिनर्वा मिल्स को 52वें से जोड़ा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इसमें राज नारायण को 32वें से जोड़ा गया है। परीक्षा टिप: 39वाँ–राज नारायण, 42वाँ–मिनर्वा, 52वाँ–किहोतो, 32वाँ–संबामूर्ति।

Q14.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 11 Jun 2019, Shift 1मध्यम

भारत के संविधान का कौन-सा अनुच्छेद भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग के प्रावधानों की बात करता है?

  1. A.अनुच्छेद 51
  2. B.अनुच्छेद 61
  3. C.अनुच्छेद 63
  4. D.अनुच्छेद 54
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 61

व्याख्या

सही उत्तर है B, अनुच्छेद 61। इसमें राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया दी गई है और इसका एकमात्र आधार है "संविधान का उल्लंघन"। आरोप किसी भी सदन में शुरू हो सकता है, जिसके लिए कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव और चौदह दिन का नोटिस चाहिए, और उस सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से पास होना चाहिए। फिर दूसरा सदन आरोप की जाँच करता है, राष्ट्रपति उपस्थित हो सकते हैं या अपना प्रतिनिधि भेज सकते हैं, और अगर वह सदन भी दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पास कर दे तो राष्ट्रपति पद से हट जाते हैं। अब तक किसी भारतीय राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं चला। A, अनुच्छेद 51, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बढ़ाने का नीति निदेशक तत्व है। C, अनुच्छेद 63, केवल यह कहता है कि भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा। D, अनुच्छेद 54, निर्वाचक मंडल द्वारा राष्ट्रपति के चुनाव के बारे में है। परीक्षा टिप: 54 चुनाव, 56 कार्यकाल, 61 महाभियोग, 63 उपराष्ट्रपति।

Q15.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: दिल्ली · DSSSB Asst. Supdt., 14 Jul 2024, S3मध्यम

भारतीय संविधान में निम्नलिखित में से किस रिट के तहत न्यायालय किसी निचली अदालत या अन्य प्राधिकरण को उसके सामने लंबित मामला किसी उच्च प्राधिकरण या न्यायालय को सौंपने का आदेश देता है?

  1. A.प्रतिषेध
  2. B.परमादेश
  3. C.अधिकार पृच्छा
  4. D.उत्प्रेषण
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. उत्प्रेषण

व्याख्या

सही उत्तर है D, उत्प्रेषण। उत्प्रेषण (सर्टिओरारी) का अर्थ है 'प्रमाणित होना' या 'सूचित किया जाना'। इस रिट से ऊपरी न्यायालय किसी निचली अदालत या न्यायाधिकरण को आदेश देता है कि वह अपने सामने लंबित मामला ऊपर भेजे, या उसका पहले से दिया गया आदेश रद्द कर देता है, जब अधिकार क्षेत्र न हो, अधिकार क्षेत्र से बाहर जाया गया हो या कानून की गलती हुई हो। सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 और उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत रिट जारी करते हैं। प्रतिषेध और उत्प्रेषण मिलते-जुलते लगते हैं, इसलिए समय पर ध्यान दें: प्रतिषेध चलते मामले को रोकता है, जबकि उत्प्रेषण दिए जा चुके फैसले को भी रद्द कर सकता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि प्रतिषेध निचली अदालत को केवल अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने से रोकता है; मामला स्थानांतरित नहीं करता। विकल्प B गलत है, क्योंकि परमादेश, यानी 'हम आदेश देते हैं', किसी लोक अधिकारी या संस्था को उसका छोड़ा हुआ कर्तव्य करने का आदेश देता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अधिकार पृच्छा, यानी 'किस अधिकार से', किसी व्यक्ति से सार्वजनिक पद पर उसका अधिकार साबित करने को कहती है। परीक्षा टिप: उत्प्रेषण = ऊपर भेजो या रद्द करो; प्रतिषेध = रोको; परमादेश = कर्तव्य निभाओ।

Q16.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB ALP · CBT-1, 16 Feb 2026, Shift 3मध्यम

भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद कहता है कि राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान प्रधानमंत्री होगा, और राष्ट्रपति अपने कार्यों के निर्वहन में ऐसी सलाह के अनुसार कार्य करेगा?

  1. A.अनुच्छेद 70
  2. B.अनुच्छेद 50
  3. C.अनुच्छेद 74
  4. D.अनुच्छेद 84
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अनुच्छेद 74

व्याख्या

सही उत्तर है C, अनुच्छेद 74। अनुच्छेद 74 के अनुसार राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक मंत्रिपरिषद होगी और राष्ट्रपति उसी सलाह के अनुसार काम करेगा। सलाह को बाध्यकारी बनाने वाले शब्द 1976 के 42वें संशोधन से जोड़े गए। 1978 के 44वें संशोधन ने राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया कि वह सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सके, पर दोबारा दी गई सलाह उसे माननी ही होगी। मंत्रियों ने राष्ट्रपति को क्या सलाह दी, इसकी जाँच कोई अदालत नहीं कर सकती। अनुच्छेद 75 प्रधानमंत्री और मंत्रियों की नियुक्ति से और अनुच्छेद 78 राष्ट्रपति को जानकारी देने के प्रधानमंत्री के कर्तव्य से जुड़ा है। A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 70 अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में राष्ट्रपति के कार्यों के निर्वहन से जुड़ा है। B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 50 न्यायपालिका को कार्यपालिका से अलग करने वाला नीति निदेशक तत्व है। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 84 संसद की सदस्यता की योग्यताएँ बताता है। परीक्षा टिप: अनु. 52 = राष्ट्रपति, अनु. 63 = उपराष्ट्रपति, अनु. 74 = राष्ट्रपति को सलाह देने वाली मंत्रिपरिषद, अनु. 75 = प्रधानमंत्री व मंत्रियों की नियुक्ति, अनु. 78 = प्रधानमंत्री के कर्तव्य।

Q17.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: UPSC CAPF · Paper I, 18 Aug 2019मध्यम

भारत के महान्यायवादी के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही नहीं है?

  1. A.महान्यायवादी को संसद के सदनों में बोलने का अधिकार होगा
  2. B.महान्यायवादी को अपने कार्यालयीन कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र में सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार होगा
  3. C.उस में वही अर्हताएं होनी चाहिएं जो उच्चतम न्यायालय का एक न्यायाधीश बनने के लिए आवश्यक होती हैं
  4. D.वह सरकार के लिए एक पूर्णकालिक परामर्शदाता (काउंसेल) है
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. वह सरकार के लिए एक पूर्णकालिक परामर्शदाता (काउंसेल) है

व्याख्या

सही उत्तर है D, वह सरकार के लिए एक पूर्णकालिक परामर्शदाता (काउंसेल) है। महान्यायवादी पूर्णकालिक सरकारी वकील नहीं होता और निजी वकालत भी कर सकता है। उसकी नियुक्ति राष्ट्रपति अनुच्छेद 76 के तहत करते हैं और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद पर रहता है; संविधान में उसका कार्यकाल तय नहीं है। वह देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी है, पर केंद्रीय मंत्रिमंडल का सदस्य नहीं होता। पूर्णकालिक न होने के कारण उस पर केवल इतनी रोक है कि वह भारत सरकार के विरुद्ध सलाह या पैरवी न करे। कथन A सही है, क्योंकि अनुच्छेद 88 उसे संसद के दोनों सदनों में बोलने और कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार देता है, पर मत देने का नहीं। कथन B सही है, क्योंकि अनुच्छेद 76(3) उसे भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार देता है। कथन C सही है, क्योंकि अनुच्छेद 76(1) के अनुसार उसमें सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जैसी योग्यता होनी चाहिए। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 76 से पद, अनुच्छेद 88 से संसद में बोलने का अधिकार, पर वहाँ मताधिकार कभी नहीं।

Q18.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB ग्रुप D · 30 Sep 2022, Shift 3मध्यम

भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत देवनागरी लिपि में हिंदी को भारत की राजभाषा माना गया है?

  1. A.अनुच्छेद 351
  2. B.अनुच्छेद 336
  3. C.अनुच्छेद 343
  4. D.अनुच्छेद 347
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अनुच्छेद 343

व्याख्या

सही उत्तर है C, अनुच्छेद 343। अनुच्छेद 343(1) घोषित करता है कि संघ की राजभाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी और शासकीय प्रयोजनों के लिए भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप इस्तेमाल होगा। संविधान का भाग XVII, अनुच्छेद 343 से 351, राजभाषा से संबंधित है। अनुच्छेद 343 ने 1950 से पंद्रह वर्ष तक अंग्रेज़ी जारी रखने की अनुमति दी और राजभाषा अधिनियम 1963 ने उसके बाद भी हिंदी के साथ अंग्रेज़ी को बनाए रखा। अनुच्छेद 344 राजभाषा पर एक आयोग और संसद की समिति का प्रावधान करता है, और आठवीं अनुसूची में संविधान द्वारा मान्य भाषाओं की सूची है। A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 351 केवल हिंदी के विकास और प्रसार का निदेश है। B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 336 कुछ सेवाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय के लिए विशेष प्रावधान देता है। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 347 राष्ट्रपति को किसी राज्य की आबादी के एक हिस्से द्वारा बोली जाने वाली भाषा को मान्यता देने का अधिकार देता है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 343 = देवनागरी में हिंदी राजभाषा; अनुच्छेद 351 = हिंदी के विकास का निदेश; अनुच्छेद 343 से 351 मिलकर भाग XVII बनाते हैं।

Q19.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: हरियाणा · HPSC HCS Prelims GS, 11 Feb 2024मध्यम

भारतीय संविधान के सन्दर्भ में सूची I का सूची II से मिलान कीजिए:

सूची I: a. अनुच्छेद 263, b. अनुच्छेद 226, c. अनुच्छेद 239, d. अनुच्छेद 280

सूची II: i. वित्त आयोग, ii. उच्च न्यायालय, iii. अंतरराज्यीय परिषद्, iv. केंद्र शासित प्रदेश

नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:

  1. A.a-iii, b-ii, c-iv, d-i
  2. B.a-i, b-ii, c-iii, d-iv
  3. C.a-ii, b-i, c-iii, d-iv
  4. D.a-iv, b-ii, c-iii, d-i
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. a-iii, b-ii, c-iv, d-i

व्याख्या

सही उत्तर है A, a-iii, b-ii, c-iv, d-i। अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को राज्यों के बीच विवादों और साझा विषयों पर चर्चा के लिए अंतरराज्यीय परिषद् बनाने का अधिकार देता है; सरकारिया आयोग की सलाह पर यह परिषद् पहली बार 1990 में बनी। अनुच्छेद 226 हर उच्च न्यायालय को बंदी प्रत्यक्षीकरण और परमादेश जैसी रिट जारी करने की शक्ति देता है, मूल अधिकारों के साथ ‘किसी अन्य प्रयोजन’ के लिए भी, इसलिए यह अनुच्छेद 32 से व्यापक है। अनुच्छेद 239 के अनुसार हर केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन राष्ट्रपति अपने नियुक्त प्रशासक के माध्यम से चलाते हैं। अनुच्छेद 280 के तहत हर पाँच साल में वित्त आयोग बनता है, जो केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बँटवारे की सिफ़ारिश करता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि उसमें अनुच्छेद 263 को वित्त आयोग और 280 को केंद्र शासित प्रदेशों से जोड़ा गया है। विकल्प C गलत है, क्योंकि उसमें 263 को उच्च न्यायालय और 226 को वित्त आयोग से जोड़ा गया है। विकल्प D गलत है, क्योंकि उसमें 263 को केंद्र शासित प्रदेशों और 239 को अंतरराज्यीय परिषद् से जोड़ा गया है। परीक्षा टिप: 263 अंतरराज्यीय परिषद्, 226 उच्च न्यायालय की रिट, 239 केंद्र शासित प्रदेश, 280 वित्त आयोग।

Q20.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CTET · Paper II SST, 7 Jul 2024आसान

भारतीय संविधान के स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचार _______ से लिए गए हैं।

  1. A.रूसी क्रांति
  2. B.मैग्ना कार्टा
  3. C.अमेरिकी क्रांति
  4. D.फ्रांसीसी क्रांति
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. फ्रांसीसी क्रांति

व्याख्या

सही उत्तर है D, फ्रांसीसी क्रांति। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में दिए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्श 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से आए हैं, जिसका प्रसिद्ध नारा इन्हीं तीन शब्दों से बना था। संविधान निर्माताओं ने कई देशों से विचार लिए और उन्हें भारत की ज़रूरतों के अनुसार ढाला। फ्रांस से ये तीन आदर्श और गणराज्य का विचार आया। पूर्व सोवियत संघ से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय का आदर्श और बाद में मौलिक कर्तव्य आए। ब्रिटेन से संसदीय व्यवस्था और आयरलैंड से नीति निदेशक तत्व लिए गए। A गलत है क्योंकि 1917 की रूसी क्रांति न्याय के आदर्श से जुड़ी है, इन तीन आदर्शों से नहीं। B गलत है क्योंकि 1215 का मैग्ना कार्टा इंग्लैंड का वह अधिकार-पत्र था जिसने राजा की शक्ति सीमित की, और यह सामान्य रूप से अधिकारों के विचार से जुड़ा है। C गलत है क्योंकि अमेरिका से भारत ने मौलिक अधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन और स्वतंत्र न्यायपालिका ली। परीक्षा टिप: स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व – फ्रांस; न्याय – सोवियत संघ; नीति निदेशक तत्व – आयरलैंड; संसदीय व्यवस्था – ब्रिटेन।

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