समाज में समानता का एक निहितार्थ किसका अभाव है?
- A.विशेषाधिकार
- B.प्रतिबंध
- C.प्रतिस्पर्धा
- D.विचारधारा
उत्तर देखें
व्याख्या
सही उत्तर है A, विशेषाधिकार। समानता का अर्थ है कि किसी व्यक्ति या समूह को ऐसे विशेष अधिकार न मिलें जो दूसरों को नहीं मिलते, इसलिए इसमें विशेषाधिकारों का अभाव निहित है।
राजनीतिक सिद्धांत में समानता इस विचार पर टिकी है कि सभी लोग समान सम्मान और ध्यान के पात्र हैं। हेरोल्ड लास्की ने समानता को सबसे पहले विशेषाधिकारों के अभाव और सभी के लिए पर्याप्त अवसरों के रूप में समझाया। भारतीय संविधान में भी यही दिखता है: अनुच्छेद 14 विधि के समक्ष समानता देता है, अनुच्छेद 15 भेदभाव रोकता है, अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता समाप्त करता है और अनुच्छेद 18 उपाधियों का अंत करता है; ये सभी जन्म, जाति या हैसियत पर आधारित विशेषाधिकार हटाते हैं।
B गलत है, क्योंकि समान लोगों के समाज में भी कानून और प्रतिबंध होते हैं, जो सब पर समान रूप से लागू होते हैं।
C गलत है, क्योंकि अवसर की समानता प्रतिस्पर्धा को हटाती नहीं, बल्कि उसे निष्पक्ष बनाती है।
D गलत है, क्योंकि समानता स्वयं एक आदर्श है और विचारधारा के अभाव की माँग नहीं करती।
परीक्षा टिप: लास्की: समानता = विशेषाधिकारों का अभाव और सबके लिए पर्याप्त अवसर; अनुच्छेद 14 से 18 = समानता का अधिकार।