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GK क्विजभारतीय राजव्यवस्था

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज: सेट 23

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इस क्विज के बारे में

भारतीय राजव्यवस्था मिश्रित क्विज़ (सेट 23) में 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो इस विषय के 13 अलग-अलग टॉपिक से लिए गए हैं: मौलिक अधिकार, महत्वपूर्ण संविधान संशोधन, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति और अन्य। ये सभी प्रश्न पिछले वर्षों की वास्तविक परीक्षाओं में पूछे जा चुके हैं। टॉपिक-वार क्विज़ एक अध्याय की जाँच करता है, जबकि यह सेट पूरे विषय को एक साथ दोहराता है, जैसा परीक्षा में होता है जहाँ अगला प्रश्न किसी भी अध्याय से आ सकता है। हर प्रश्न के साथ सही विकल्प की और बाकी विकल्पों के गलत होने की व्याख्या दी गई है। समय का पालन करते हुए हल करें, अंत में व्याख्याएँ पढ़ें और जिस टॉपिक में गलती हुई उसके नोट्स दोबारा पढ़ें।

इस क्विज के प्रश्न

20 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित

Q1.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 02 Aug, 2023, Shift 3आसान

भारतीय संविधान के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन प्रवर्तनीय (enforceable) है?

  1. A.प्रस्तावना
  2. B.मौलिक अधिकार
  3. C.राज्य के नीति निदेशक तत्व
  4. D.मौलिक कर्तव्य
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. मौलिक अधिकार

व्याख्या

सही उत्तर है B, मौलिक अधिकार। दिए गए विकल्पों में केवल मौलिक अधिकार ही ऐसे हैं जिन्हें अदालत सीधे लागू करा सकती है। ये संविधान के भाग III में अनुच्छेद 12 से 35 तक रखे गए हैं। अनुच्छेद 32 किसी भी व्यक्ति को मौलिक अधिकार के हनन पर सीधे उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार देता है, और अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालय जाने का। इसके लिए अदालतें पाँच रिट जारी करती हैं: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार-पृच्छा। डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 को संविधान की आत्मा कहा था, क्योंकि उपाय पाने का अधिकार स्वयं एक मौलिक अधिकार है। A गलत है क्योंकि प्रस्तावना केवल संविधान के उद्देश्य बताती है, इसे अदालत में लागू नहीं कराया जा सकता। C गलत है क्योंकि भाग IV के नीति निदेशक तत्व अनुच्छेद 37 के अनुसार वाद योग्य नहीं हैं, वे सरकार के लक्ष्य हैं। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 51A के मौलिक कर्तव्यों के लिए कोई सीधा न्यायिक उपाय नहीं है। परीक्षा टिप: भाग III वाद योग्य, भाग IV वाद योग्य नहीं, उपाय अनुच्छेद 32।

Q2.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 17 March, 2023, Shift 4मध्यम

भारतीय संविधान के 89वें संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा निम्नलिखित में से किस आयोग की स्थापना की गई?

  1. A.भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग
  2. B.राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
  3. C.राष्ट्रीय महिला आयोग
  4. D.राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग

व्याख्या

सही उत्तर है D, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग। 89वें संशोधन अधिनियम, 2003 ने अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के पुराने संयुक्त आयोग को दो अलग आयोगों में बाँट दिया। अनुच्छेद 338 के अंतर्गत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग रहा और नया अनुच्छेद 338A जोड़कर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग बनाया गया, जिसने 19 फरवरी 2004 से काम शुरू किया। दोनों आयोगों में राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं और दोनों अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 से बना वैधानिक निकाय है, संवैधानिक नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग 102वें संशोधन, 2018 से अनुच्छेद 338B जुड़ने पर संवैधानिक बना। विकल्प C गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय महिला आयोग 1990 के अधिनियम पर आधारित वैधानिक निकाय है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 338 अनुसूचित जाति, 338A अनुसूचित जनजाति, 338B पिछड़ा वर्ग।

Q3.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CPO · 23 November 2020, Shift 1मध्यम

जब राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब भारत के राष्ट्रपति कौन थे?

  1. A.आर वेंकटरमण
  2. B.शंकर दयाल शर्मा
  3. C.ज्ञानी जैल सिंह
  4. D.एन संजीव रेड्डी
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. ज्ञानी जैल सिंह

व्याख्या

सही उत्तर है C, ज्ञानी जैल सिंह। राजीव गांधी ने 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उसी दिन जिस दिन उनकी माँ इंदिरा गांधी की हत्या हुई थी, और उन्हें शपथ ज्ञानी जैल सिंह ने दिलाई, जो 1982 से 1987 तक राष्ट्रपति रहे। जैल सिंह इस पद पर पहुँचने वाले पहले सिख थे और इससे पहले वे पंजाब के मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय गृह मंत्री रह चुके थे। यह शपथ अनुच्छेद 75 की उस व्यवस्था को दिखाती है जिसके तहत प्रधानमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और शेष मंत्री प्रधानमंत्री की सलाह पर नियुक्त होते हैं। A गलत है क्योंकि आर वेंकटरमण 1987 में राष्ट्रपति बने। B गलत है क्योंकि शंकर दयाल शर्मा 1992 में राष्ट्रपति बने। D गलत है क्योंकि एन संजीव रेड्डी का कार्यकाल 1982 में समाप्त हो गया था। परीक्षा टिप: जैल सिंह 1982-87।

Q4.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 15 Oct 2020, Shift 2मध्यम

निम्नलिखित में से किसने उस नौ न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता की थी, जिसने निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया?

  1. A.जे.एस. खेहर
  2. B.दीपक मिश्रा
  3. C.एच.जे. कनिया
  4. D.टी.एस. ठाकुर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. जे.एस. खेहर

व्याख्या

सही उत्तर है A, जे.एस. खेहर। न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर उस समय भारत के मुख्य न्यायाधीश थे, जब 24 अगस्त 2017 को नौ न्यायाधीशों की पीठ ने न्यायमूर्ति के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ में फैसला सुनाया, और उन्होंने ही पीठ की अध्यक्षता की। पीठ ने एकमत से माना कि निजता मौलिक अधिकार है, जो मुख्यतः अनुच्छेद 21 के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार तथा भाग III की स्वतंत्रताओं से सुरक्षित है। इसने एम.पी. शर्मा (1954) और खड़क सिंह (1962) के पुराने फैसले पलट दिए, जिनमें कहा गया था कि संविधान ऐसा कोई अधिकार नहीं देता। यह मामला आधार योजना की चुनौती से निकला था। खेहर भारत के पहले सिख मुख्य न्यायाधीश भी थे। विकल्प B गलत है, क्योंकि दीपक मिश्रा एक सप्ताह बाद मुख्य न्यायाधीश बने और धारा 377 तथा व्यभिचार के फैसलों की पीठों में थे। विकल्प C गलत है, क्योंकि एच.जे. कनिया 1950 में भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश थे। विकल्प D गलत है, क्योंकि टी.एस. ठाकुर जनवरी 2017 में सेवानिवृत्त हो गए थे। परीक्षा टिप: पुट्टस्वामी 2017, नौ न्यायाधीश, अनुच्छेद 21, सीजेआई खेहर।

Q5.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 18 मई 2023, शिफ्ट 3आसान

राज्यों की परिषद (राज्यसभा) में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत ______ सदस्य होंगे।

  1. A.छह
  2. B.दस
  3. C.बारह
  4. D.पांच
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बारह

व्याख्या

सही उत्तर बारह है। अनुच्छेद 80 के तहत राज्यसभा में राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत 12 सदस्य और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकतम 238 प्रतिनिधि होते हैं, यानी अधिकतम 250। मनोनीत सदस्यों को साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा में विशेष ज्ञान या व्यावहारिक अनुभव के आधार पर चुना जाता है; सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर और संगीतकार इलैयाराजा वर्षों में मनोनीत होने वालों में शामिल हैं।

गलत संख्याओं का संविधान में कोई आधार नहीं है। लोकसभा से अंतर भी याद रखें: राष्ट्रपति पहले अनुच्छेद 331 के तहत उसमें दो आंग्ल-भारतीय सदस्य मनोनीत कर सकते थे, लेकिन 104वें संशोधन द्वारा इसे आगे न बढ़ाए जाने से यह प्रावधान जनवरी 2020 में समाप्त हो गया। इसलिए आज राष्ट्रपति केवल राज्यसभा में सदस्य मनोनीत करते हैं। राज्यसभा के मनोनीत सदस्य उपराष्ट्रपति के चुनाव में मतदान कर सकते हैं, लेकिन राष्ट्रपति के चुनाव में नहीं; परीक्षक अक्सर इस बिंदु को इसके साथ जोड़ते हैं।

Q6.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 10 May 2022, Shift 1मध्यम

भारत में, किसी राज्य की न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की नियुक्ति _________ द्वारा की जाती है।

  1. A.उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
  2. B.प्रधानमंत्री
  3. C.भारत के राष्ट्रपति
  4. D.राज्य के राज्यपाल
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. राज्य के राज्यपाल

व्याख्या

सही उत्तर है D, राज्य के राज्यपाल। संविधान का अनुच्छेद 234 कहता है कि राज्य की न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीशों से भिन्न व्यक्तियों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं, और यह उन नियमों के अनुसार होती है जो राज्य लोक सेवा आयोग तथा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद बनाए जाते हैं। जिला न्यायाधीशों के लिए अलग से अनुच्छेद 233 है; उनकी नियुक्ति भी राज्यपाल करते हैं, पर उच्च न्यायालय से परामर्श करके। सेवा में आने के बाद अनुच्छेद 235 के तहत इन अधिकारियों की तैनाती, पदोन्नति और छुट्टी पर नियंत्रण उच्च न्यायालय का होता है, इसी से अधीनस्थ न्यायपालिका स्वतंत्र रहती है। विकल्प A गलत है, क्योंकि परामर्श उच्च न्यायालय से लिया जाता है, नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश नहीं करते। विकल्प B गलत है, क्योंकि राज्य की न्यायिक सेवा में प्रधानमंत्री की कोई भूमिका नहीं है। विकल्प C गलत है, क्योंकि राष्ट्रपति अनुच्छेद 124 और 217 के तहत उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश नियुक्त करते हैं। परीक्षा टिप: 233 जिला न्यायाधीश, 234 अन्य न्यायिक अधिकारी, 235 उच्च न्यायालय का नियंत्रण।

Q7.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 11th April 2022मध्यम

राज्यपाल की अध्यादेश जारी करने की शक्ति किस अनुच्छेद में दी गई है?

  1. A.अनुच्छेद 200
  2. B.अनुच्छेद 213
  3. C.अनुच्छेद 161
  4. D.अनुच्छेद 167
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 213

व्याख्या

सही उत्तर है B, अनुच्छेद 213। अनुच्छेद 213 राज्यपाल को यह शक्ति देता है कि जब राज्य विधानमंडल का सत्र न चल रहा हो और उसे लगे कि तुरंत कार्रवाई आवश्यक है, तब वह अध्यादेश जारी कर सकता है। अध्यादेश का बल विधानमंडल द्वारा बनाए गए अधिनियम के बराबर होता है, परंतु सत्र शुरू होने पर इसे सदन के समक्ष रखना पड़ता है और उस तिथि से छह सप्ताह में यह समाप्त हो जाता है, यदि पहले ही स्वीकृत न हो जाए; राज्यपाल इसे कभी भी वापस भी ले सकता है। जिस विधेयक के लिए राष्ट्रपति की पूर्व स्वीकृति आवश्यक होती, उस विषय पर अध्यादेश निकालने से पहले राज्यपाल को राष्ट्रपति के निर्देश लेने होते हैं। A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 200 विधेयकों पर राज्यपाल की अनुमति से संबंधित है। C गलत है क्योंकि अनुच्छेद 161 राज्यपाल की क्षमादान शक्ति देता है। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के कर्तव्यों से जुड़ा है। परीक्षा टिप: अध्यादेश - राष्ट्रपति के लिए अनुच्छेद 123 और राज्यपाल के लिए अनुच्छेद 213।

Q8.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: CTET · Paper II SST, 21 Jan 2024मध्यम

अभिकथन (A) और कारण (R) को ध्यान से पढ़िए: अभिकथन (A): 1960 में द्विभाषी बंबई राज्य को मराठी और गुजराती बोलने वालों के लिए अलग-अलग राज्यों में बाँटा गया। कारण (R): 1966 में पंजाब राज्य को भी दो राज्यों में बाँटा गया, पंजाबी बोलने वालों के लिए पंजाब और हरियाणवी या हिंदी बोलने वालों के लिए हरियाणा। सही विकल्प चुनिए:

  1. A.(A) गलत है, पर (R) सही है
  2. B.(A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की व्याख्या करता है
  3. C.(A) और (R) दोनों सही हैं, पर (R), (A) की व्याख्या नहीं करता
  4. D.(A) सही है, पर (R) गलत है
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. (A) और (R) दोनों सही हैं, पर (R), (A) की व्याख्या नहीं करता

व्याख्या

सही उत्तर है C, (A) और (R) दोनों सही हैं, पर (R), (A) की व्याख्या नहीं करता। दोनों घटनाएँ भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के सच्चे कदम हैं, पर 1966 में पंजाब का बँटवारा छह साल पहले बंबई के साथ हुई घटना का कारण नहीं हो सकता। 1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम ने भाषा के आधार पर राज्यों की सीमाएँ फिर से खींचीं, फिर भी द्विभाषी बंबई राज्य बना रहा। 1 मई 1960 को इसे मराठी भाषियों के लिए महाराष्ट्र और गुजराती भाषियों के लिए गुजरात में बाँट दिया गया। 1966 में इसी सोच से पंजाब का बँटवारा हुआ: पंजाबी भाषियों के लिए पंजाब और हरियाणवी या हिंदी भाषियों के लिए हरियाणा बना। विकल्प A गलत है क्योंकि बंबई वाला अभिकथन सही है। विकल्प B गलत है क्योंकि 1966 की घटना 1960 की घटना की व्याख्या नहीं कर सकती। विकल्प D गलत है क्योंकि पंजाब वाला कारण भी सही कथन है। परीक्षा टिप: आंध्र राज्य 1953; राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956; महाराष्ट्र और गुजरात 1960; हरियाणा 1966।

Q9.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC MTS · 11 Oct 2021, Shift 3मध्यम

भारतीय संविधान के अनुसार, संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य छह वर्ष की अवधि तक या __________ वर्ष की आयु पूरी होने तक पद पर रहता है।

  1. A.60
  2. B.68
  3. C.65
  4. D.62
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 65

व्याख्या

सही उत्तर है C, 65। संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य पद ग्रहण करने की तारीख से छह वर्ष तक, या 65 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, पद पर रहता है। यही नियम आयोग के अध्यक्ष पर भी लागू होता है। राज्य लोक सेवा आयोग में कार्यकाल भी छह वर्ष का होता है, पर सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष है, और परीक्षाओं में यही जोड़ी पूछी जाती है। सदस्य राष्ट्रपति को लिखकर अपना पद छोड़ सकता है, और उसे हटाया केवल अनुच्छेद 317 में बताई प्रक्रिया से जा सकता है, जिसमें मामला उच्चतम न्यायालय को भेजा जाता है। यही व्यवस्था आयोग की स्वतंत्रता की रक्षा करती है। A गलत है क्योंकि 60 वर्ष केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सामान्य सेवानिवृत्ति आयु है। B गलत है क्योंकि 68 वर्ष इस पद के लिए कहीं तय नहीं है। D गलत है क्योंकि 62 वर्ष राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्य के लिए है। परीक्षा टिप: UPSC – छह वर्ष या 65, राज्य लोक सेवा आयोग – छह वर्ष या 62।

Q10.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: मध्य प्रदेश · MPPSC Pre GS, 18 Feb 2018मध्यम

निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद – सम्बन्धित राज्य

  1. A.371 क – नागालैंड
  2. B.371 ख – असम
  3. C.371 ग – मेघालय
  4. D.371 घ – आन्ध्र प्रदेश
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 371 ग – मेघालय

व्याख्या

सही उत्तर है C, 371 ग – मेघालय। अनुच्छेद 371ग मेघालय नहीं, मणिपुर के लिए विशेष प्रावधान करता है: राष्ट्रपति पहाड़ी क्षेत्रों से चुने गए सदस्यों वाली विधान सभा की एक समिति बनाने का प्रावधान कर सकते हैं, और राज्यपाल इन क्षेत्रों के प्रशासन पर राष्ट्रपति को रिपोर्ट देते हैं। अनुच्छेद 371 से 371ञ तक बारह राज्यों को ऐसे विशेष प्रावधान मिले हैं, और हर एक किसी क्षेत्रीय ज़रूरत के लिए जोड़ा गया। इस शृंखला में मेघालय का कोई अलग अनुच्छेद नहीं है; उसके जनजातीय क्षेत्र छठी अनुसूची के तहत चलते हैं। विकल्प A सही सुमेलित है, क्योंकि अनुच्छेद 371क नागालैंड के नागाओं की धार्मिक-सामाजिक प्रथाओं, प्रथागत क़ानून और भूमि स्वामित्व की रक्षा करता है। विकल्प B सही सुमेलित है, क्योंकि अनुच्छेद 371ख असम विधान सभा में जनजातीय क्षेत्रों के सदस्यों की समिति का प्रावधान करता है। विकल्प D सही सुमेलित है, क्योंकि अनुच्छेद 371घ आंध्र प्रदेश में सरकारी नौकरियों और शिक्षा में समान अवसर देता है, और अब तेलंगाना पर भी लागू है। परीक्षा टिप: 371क नागालैंड, 371ख असम, 371ग मणिपुर, 371घ आंध्र प्रदेश।

Q11.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 17 Jan 2023, Shift 4मध्यम

राज्य के राज्यपाल को क्षमादान की शक्ति भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के अंतर्गत प्राप्त है?

  1. A.अनुच्छेद 163
  2. B.अनुच्छेद 161
  3. C.अनुच्छेद 55
  4. D.अनुच्छेद 145
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अनुच्छेद 161

व्याख्या

सही उत्तर है B, अनुच्छेद 161। अनुच्छेद 161 राज्यपाल को यह शक्ति देता है कि वे उस अपराध के लिए दंडित किसी व्यक्ति को क्षमा, प्रविलंबन, विराम और परिहार दे सकें तथा दंड को निलंबित, कम या परिवर्तित कर सकें, जिस विषय पर राज्य की कार्यपालिका शक्ति फैली हुई है। उनकी यह शक्ति अनुच्छेद 72 के अंतर्गत राष्ट्रपति की शक्ति से दो बातों में कम है — राज्यपाल मृत्युदंड को क्षमा नहीं कर सकते और सेना न्यायालय द्वारा दिए गए दंड में उनका कोई अधिकार नहीं होता, जबकि राष्ट्रपति दोनों कर सकते हैं। राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल भी इस शक्ति का प्रयोग राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर करते हैं। विकल्प A गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 163 राज्यपाल को सहायता और सलाह देने वाली मंत्रिपरिषद से संबंधित है। विकल्प C गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 55 राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीति बताता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 145 उच्चतम न्यायालय को प्रक्रिया के नियम बनाने की शक्ति देता है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 72 राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति, अनुच्छेद 161 राज्यपाल की; मृत्युदंड और सेना न्यायालय के दंड में केवल राष्ट्रपति क्षमा दे सकते हैं।

Q12.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: हरियाणा · HSSC CET Group C, 5 Nov 2022, Shift 2मध्यम

भारत के संविधान का अनुच्छेद 395, जो संविधान का अंतिम अनुच्छेद भी है, निम्नलिखित में से किसके प्रावधान के बारे में बताता है?

  1. A.नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019
  2. B.नए राज्यों का गठन
  3. C.भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का निरसन
  4. D.आपात की उद्घोषणा
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का निरसन

व्याख्या

सही उत्तर है C, भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 का निरसन। संविधान का अंतिम अनुच्छेद 395 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 और भारत शासन अधिनियम, 1935 को, 1935 के अधिनियम में संशोधन या जोड़ करने वाले कानूनों सहित, निरस्त करता है। इन ब्रिटिश कानूनों को हटाकर संविधान निर्माताओं ने संविधान को भारत में कानूनी सत्ता का एकमात्र स्रोत बना दिया और ब्रिटिश संसद से कानूनी संबंध समाप्त कर दिया। यह अनुच्छेद एक अपवाद भी रखता है: प्रिवी काउंसिल क्षेत्राधिकार उन्मूलन अधिनियम, 1949 को निरस्त नहीं किया गया। अनुच्छेद 395 भाग XXII में अनुच्छेद 393 (संक्षिप्त नाम) और अनुच्छेद 394 (प्रारंभ) के साथ है, और यह 26 जनवरी 1950 से लागू हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 संसद का बनाया साधारण कानून है, संविधान का अनुच्छेद नहीं। विकल्प B गलत है, क्योंकि नए राज्यों का गठन अनुच्छेद 2 और 3 के तहत होता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा अनुच्छेद 352 के तहत होती है। परीक्षा टिप: अनुच्छेद 395 भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और भारत शासन अधिनियम 1935 को निरस्त करता है।

Q13.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC GD कांस्टेबल · 13 Feb 2019, Shift 1आसान

निम्नलिखित में से किस संविधान संशोधन द्वारा शिक्षा का अधिकार दिया गया?

  1. A.88वाँ संशोधन
  2. B.89वाँ संशोधन
  3. C.87वाँ संशोधन
  4. D.86वाँ संशोधन
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. 86वाँ संशोधन

व्याख्या

सही उत्तर है D, 86वाँ संशोधन। 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 ने निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाया। इसने अनुच्छेद 21A जोड़ा, जिसके अनुसार राज्य छह से चौदह वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराएगा। इसी संशोधन ने नीति निर्देशक तत्वों में अनुच्छेद 45 को बदलकर छह वर्ष से छोटे बच्चों की देखभाल का दायित्व राज्य पर रखा और अनुच्छेद 51A(k) जोड़ा, जो माता-पिता या संरक्षक का यह मूल कर्तव्य बनाता है कि वे बच्चे को विद्यालय भेजें। संसद ने इस अधिकार को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के रूप में लागू किया, जो 1 अप्रैल 2010 से प्रभावी हुआ। विकल्प A गलत है, क्योंकि 88वाँ संशोधन सेवा कर से संबंधित था। विकल्प B गलत है, क्योंकि 89वें संशोधन ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोग को दो अलग आयोगों में बाँटा। विकल्प C गलत है, क्योंकि 87वें संशोधन ने परिसीमन का आधार 2001 की जनगणना कर दिया। परीक्षा टिप: 86वाँ संशोधन, अनुच्छेद 21A और आरटीई अधिनियम 2009 — तीनों को एक साथ याद रखें।

Q14.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CHSL · 15 April 2021, Shift 1आसान

भारतीय संविधान में मूल अधिकारों की विशेषताएँ आंशिक रूप से _______ के संविधान में निहित अधिकार पत्र (बिल ऑफ राइट्स) से प्रेरित हैं।

  1. A.कनाडा
  2. B.संयुक्त राज्य अमेरिका
  3. C.आयरलैंड
  4. D.ऑस्ट्रेलिया
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. संयुक्त राज्य अमेरिका

व्याख्या

सही उत्तर है B, संयुक्त राज्य अमेरिका। भारतीय संविधान के भाग III में दिए मूल अधिकार अमेरिका के संविधान के पहले दस संशोधनों से लिए गए हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से अधिकार पत्र यानी बिल ऑफ राइट्स कहा जाता है। इनके साथ भारत ने अमेरिकी प्रतिरूप से न्यायिक पुनरावलोकन, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, राष्ट्रपति पर महाभियोग, उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया तथा उपराष्ट्रपति का पद भी लिया। विकल्प A गलत है, क्योंकि कनाडा से मजबूत केंद्र वाला संघ, अवशिष्ट शक्तियाँ संघ में रखना, राज्यपालों की नियुक्ति और उच्चतम न्यायालय का परामर्शी क्षेत्राधिकार लिया गया। विकल्प C गलत है, क्योंकि आयरलैंड से राज्य के नीति निदेशक तत्व, राज्यसभा में सदस्यों का नामांकन और राष्ट्रपति के निर्वाचन की पद्धति ली गई। विकल्प D गलत है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया से समवर्ती सूची, व्यापार और वाणिज्य की स्वतंत्रता तथा दोनों सदनों की संयुक्त बैठक ली गई। परीक्षा टिप: बिल ऑफ राइट्स अमेरिका से, नीति निदेशक तत्व आयरलैंड से और आपातकालीन उपबंध जर्मनी से।

Q15.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 20 जनवरी 2021, शिफ्ट 1आसान

लोकसभा के पहले अध्यक्ष कौन थे?

  1. A.राजेंद्र प्रसाद
  2. B.पुरुषोत्तम दास टंडन
  3. C.हुकम सिंह
  4. D.जी.वी. मावलंकर
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. जी.वी. मावलंकर

व्याख्या

सही उत्तर जी.वी. मावलंकर है। गणेश वासुदेव मावलंकर 1952 में लोकसभा के पहले अध्यक्ष चुने गए और 1956 में अपने निधन तक इस पद पर रहे। इससे पहले वे 1946 से केंद्रीय विधान सभा की अध्यक्षता कर चुके थे, और लोकसभा की कई परंपराएं और प्रक्रियाएं तय करने के लिए उन्हें "लोकसभा का जनक" कहा जाता है। उनके बाद एम. अनंतशयनम अय्यंगार दूसरे अध्यक्ष बने।

बाकी नाम भी विधायिकाओं से जुड़े हैं, इसीलिए विश्वसनीय लगते हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद संविधान सभा के अध्यक्ष और फिर भारत के पहले राष्ट्रपति थे, लोकसभा अध्यक्ष नहीं। पुरुषोत्तम दास टंडन स्वतंत्रता सेनानी थे, जो 1937 से 1950 तक संयुक्त प्रांत (अब उत्तर प्रदेश) विधानसभा के अध्यक्ष रहे। सरदार हुकम सिंह बाद में, 1962 से 1967 तक, लोकसभा के तीसरे अध्यक्ष रहे। पहली बार के तथ्यों की पूरी सूची में मीरा कुमार को भी जोड़ें, जो पहली महिला अध्यक्ष (2009) थीं।

Q16.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: राजस्थान · RPSC 2nd Grade GK and Educational Psychoमध्यम

दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुसार किसे बधिर कहा जाता है?

  1. A.दोनों कानों में 70 dB श्रवण हानि
  2. B.दोनों कानों में 80 dB श्रवण हानि
  3. C.दोनों कानों में 90 dB श्रवण हानि
  4. D.दोनों कानों में 60 dB श्रवण हानि
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. दोनों कानों में 70 dB श्रवण हानि

व्याख्या

सही उत्तर है A, दोनों कानों में 70 dB श्रवण हानि। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की अनुसूची में बधिर उसे कहा गया है जिसे भाषण आवृत्तियों पर दोनों कानों में 70 dB श्रवण हानि हो। जिसे दोनों कानों में 60 से 70 dB तक हानि हो, उसे अलग श्रेणी श्रवण बाधित में रखा गया है, इसलिए दोनों परिभाषाएं साथ पढ़नी चाहिए। इस अधिनियम ने 1995 के निःशक्त व्यक्ति अधिनियम को बदला, मान्यता प्राप्त दिव्यांगताओं की संख्या सात से बढ़ाकर इक्कीस की, और बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए सरकारी पदों में चार प्रतिशत आरक्षण दिया। विकल्प B और C अनुसूची से ऊंची सीमा बताते हैं; 80 या 90 dB मान लेने पर बहुत से बधिर व्यक्ति परिभाषा से बाहर रह जाएंगे और अधिनियम के लाभ से वंचित हो जाएंगे। विकल्प D, 60 dB, श्रवण बाधित श्रेणी की निचली सीमा है, बधिरता की नहीं। परीक्षा टिप: 60 से 70 dB श्रवण बाधित, 70 dB और अधिक बधिर।

Q17.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CPO · 28 Jun, 2024, Shift 2कठिन

भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद कहता है कि 'मंत्रिपरिषद राज्य की विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी'?

  1. A.अनुच्छेद 164(3)
  2. B.अनुच्छेद 164(4)
  3. C.अनुच्छेद 164(2)
  4. D.अनुच्छेद 164(1)
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. अनुच्छेद 164(2)

व्याख्या

सही उत्तर है C, अनुच्छेद 164(2)। अनुच्छेद 164(2) कहता है कि राज्य की मंत्रिपरिषद उस राज्य की विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होगी। यही वह नियम है जिसके कारण कोई राज्य सरकार तभी तक पद पर रहती है जब तक उसे विधान सभा का विश्वास प्राप्त है, और इसी आधार पर अविश्वास प्रस्ताव काम करता है। अनुच्छेद 164 के शेष खंड राज्य कार्यपालिका के दूसरे पहलुओं से जुड़े हैं। A गलत है क्योंकि अनुच्छेद 164(3) में राज्यपाल द्वारा मंत्री को दिलाई जाने वाली पद और गोपनीयता की शपथ का उल्लेख है। B गलत है क्योंकि अनुच्छेद 164(4) कहता है कि जो मंत्री लगातार छह माह तक विधानमंडल का सदस्य नहीं रहता, वह मंत्री नहीं रह जाता। D गलत है क्योंकि अनुच्छेद 164(1) में मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति मुख्यमंत्री की सलाह पर करने की बात है। परीक्षा टिप: संघ के लिए अनुच्छेद 75।

Q18.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: SSC CGL · 23 अगस्त 2021, शिफ्ट 3मध्यम

लोकसभा के प्रोटेम अध्यक्ष की नियुक्ति निम्नलिखित में से कौन करता है?

  1. A.राष्ट्रपति
  2. B.प्रधानमंत्री
  3. C.सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश
  4. D.मुख्य चुनाव आयुक्त
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. राष्ट्रपति

व्याख्या

सही उत्तर राष्ट्रपति है। आम चुनाव के बाद पुरानी लोकसभा के अध्यक्ष नए सदन की पहली बैठक से ठीक पहले पद छोड़ देते हैं। इस अंतर को भरने के लिए राष्ट्रपति नई लोकसभा के किसी सदस्य को, आमतौर पर सबसे वरिष्ठ को, प्रोटेम अध्यक्ष नियुक्त करते हैं। राष्ट्रपति प्रोटेम अध्यक्ष को शपथ दिलाते हैं, और फिर प्रोटेम अध्यक्ष पहली बैठक की अध्यक्षता करते हैं, नए चुने सदस्यों को शपथ दिलाते हैं और नए अध्यक्ष का चुनाव कराते हैं। अध्यक्ष चुने जाते ही यह पद समाप्त हो जाता है।

प्रधानमंत्री प्रोटेम अध्यक्ष नियुक्त नहीं करते; व्यवहार में सरकार एक नाम सुझाती है, लेकिन नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश राष्ट्रपति को शपथ दिलाते हैं, लोकसभा सदस्यों को नहीं, और यहां उनकी कोई भूमिका नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त आम चुनाव कराते हैं, लेकिन सदन गठित होने के बाद उसका उनसे कोई संबंध नहीं रहता। "प्रोटेम" लैटिन शब्द है, जिसका अर्थ है "फिलहाल के लिए", और यह इस पद का बिल्कुल सही वर्णन है।

Q19.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB JE · 30 अगस्त 2019, शिफ्ट 1आसान

संसद के दो सत्रों के बीच का अंतर ______ से अधिक नहीं होना चाहिए।

  1. A.3 महीने
  2. B.1 वर्ष
  3. C.6 महीने
  4. D.9 महीने
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 6 महीने

व्याख्या

सही उत्तर 6 महीने है। अनुच्छेद 85(1) कहता है कि राष्ट्रपति हर सदन को ऐसे समय और स्थान पर बैठक के लिए बुलाएंगे जो वे ठीक समझें, लेकिन एक सत्र की अंतिम बैठक और अगले सत्र की पहली बैठक की तिथि के बीच छह महीने का अंतर नहीं होगा। इसलिए संसद को साल में कम से कम दो बार बैठना होता है। व्यवहार में तीन सत्र होते हैं: बजट सत्र (फरवरी से मई), मानसून सत्र (जुलाई से सितंबर) और शीतकालीन सत्र (नवंबर से दिसंबर)।

बाकी विकल्प इस नियम को दूसरी समय-सीमाओं से मिला देते हैं। तीन महीने का कोई आधार नहीं है, एक वर्ष से संसद पूरे साल बिना बैठे रह सकती, और नौ महीने गढ़ा हुआ है। छह महीने का यह नियम अध्यादेश की अधिकतम अवधि भी समझाता है: चूंकि संसद को छह महीने में फिर बैठना होता है, और अध्यादेश दोबारा बैठने के छह सप्ताह बाद समाप्त हो जाता है, इसलिए कोई अध्यादेश छह महीने और छह सप्ताह से अधिक नहीं चल सकता। ध्यान दें कि यह नियम सत्रों के बीच के अंतर का है, सत्र की लंबाई का नहीं।

Q20.भारतीय राजव्यवस्थापूछा गया: RRB NTPC · 19 जनवरी 2017, शिफ्ट 2आसान

लोकसभा की बैठक के लिए गणपूर्ति सदन के कुल सदस्यों का _____ है।

  1. A.आधा
  2. B.दो-तिहाई
  3. C.छठा हिस्सा
  4. D.दसवां हिस्सा
उत्तर देखें

सही उत्तर: D. दसवां हिस्सा

व्याख्या

सही उत्तर दसवां हिस्सा है। अनुच्छेद 100(3) के तहत संसद के किसी भी सदन की बैठक के लिए गणपूर्ति, अध्यक्ष या पीठासीन अधिकारी के रूप में कार्य करने वाले व्यक्ति समेत, सदन के कुल सदस्यों का दसवां हिस्सा है। 543 सदस्यों वाली लोकसभा में इसका अर्थ है कि लगभग 55 सदस्य उपस्थित होने चाहिए। गणपूर्ति न होने पर पीठासीन अधिकारी को सदन स्थगित करना होता है या गणपूर्ति होने तक बैठक निलंबित करनी होती है।

बाकी भिन्न दूसरे नियमों के हैं। आधा, यानी साधारण बहुमत, सामान्य निर्णयों के लिए है। दो-तिहाई उस विशेष बहुमत का हिस्सा है जो संविधान संशोधन, राष्ट्रीय आपातकाल की मंज़ूरी और न्यायाधीशों को हटाने के लिए चाहिए। छठे हिस्से की कोई भूमिका नहीं है। यही दसवें हिस्से का आंकड़ा दूसरी जगहों पर भी आता है, जिससे इसे याद रखना आसान है: किसी दल के नेता को विपक्ष के नेता की मान्यता के लिए दल के पास दसवां हिस्सा सीटें चाहिए, और लोकसभा के दसवें हिस्से के सदस्य आपातकाल को अस्वीकार करने के लिए विशेष बैठक की मांग कर सकते हैं।

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