स्वच्छ भारत में कचरे से ऊर्जा: प्रयागराज से ग्वालियर तक
27 सितंबर 2026 के पीआईबी बैकग्राउंडर में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत प्रयागराज, ग्वालियर, हैदराबाद और गांधीनगर के चार कचरे से ऊर्जा संयंत्रों का ब्यौरा है।

चर्चा में क्यों
प्रेस सूचना ब्यूरो ने 27 सितंबर 2026 को जारी बैकग्राउंडर में स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत प्रयागराज, ग्वालियर, हैदराबाद और गांधीनगर के चार कचरे से ऊर्जा संयंत्रों की क्षमता और बचत का ब्यौरा दिया।
जैविक कचरा अब बोझ नहीं, संसाधन माना जा रहा है। 27 सितंबर 2026 को जारी एक बैकग्राउंडर में उन चार जगहों का ब्यौरा है जहां यह बदलाव पहले से फल दे रहा है। ये सभी स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के कचरे से ऊर्जा वाले काम के अंतर्गत आते हैं; मूल मिशन अक्टूबर 2014 में शुरू हुआ था और नगरीय ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन उसका मूल उद्देश्य रहा है। जैव गैस जैविक पदार्थ के अवायवीय अपघटन से बनती है और बची हुई स्लरी में नाइट्रोजन भरपूर होता है, इसलिए एक ही संयंत्र से रसोई का ईंधन और जैविक खाद दोनों मिलते हैं।
प्रयागराज: एक संयंत्र, चार कच्चे माल
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का बायो-सीएनजी संयंत्र रोज 343 टन जैविक कचरा लेता है और लगभग 21 टन बायो-सीएनजी देता है। इसका बहु-फीडस्टॉक ढांचा गीला कचरा, पुआल, गोबर और मुर्गी के अपशिष्ट को स्वीकार करता है, जिससे फसल अवशेष का उपयोग होता है और पराली जलाने का दबाव घटता है। सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर चलने वाला यह संयंत्र होटल, रेस्तरां और अपार्टमेंट से थोक कचरा लेता है; रोजाना गीले कचरे की आपूर्ति शुरुआती सात-आठ टन से बढ़कर करीब 125 टन हो गई है। गैस संपीडित जैव गैस और सिटी गैस वितरण समन्वय योजना के तहत बिकती है और अभी शहर के परिवहन में काम आती है। संयंत्र रोज 28 टन खाद भी बनाता है, और आगे लगभग 45,000 घरों तक पाइप से गैस पहुंचाने तथा हर साल करीब 57,000 टन कार्बन उत्सर्जन घटाने की उम्मीद है।
ग्वालियर: गौशाला बनी बिजलीघर
लालटीपारा की आदर्श गौशाला ग्वालियर की सबसे बड़ी गौशाला है, जहां 10,000 से अधिक मवेशी रहते हैं। अक्टूबर 2024 में यहां 100 टन प्रतिदिन क्षमता का संपीडित जैव गैस संयंत्र शुरू हुआ, जिससे यह ऐसी सुविधा पर आधारित देश की पहली आधुनिक और आत्मनिर्भर गौशाला बन गई। 5 एकड़ में फैली और 31 करोड़ रुपये की यह परियोजना इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के सहयोग से बनी और मध्य प्रदेश का पहला ऐसा संयंत्र है जो बाजारों तथा घरों से आने वाले सब्जी और फल के कचरे को भी ले सकता है। यह रोज 100 टन गोबर से दो टन संपीडित जैव गैस तथा 10 से 15 टन सूखी जैव खाद बनाता है।
हैदराबाद और गांधीनगर
हैदराबाद की बोवेनपल्ली सब्जी मंडी में रोज करीब 10 टन सब्जी और फल का कचरा जुटता है, जो पहले लैंडफिल जाता था और अब वहीं संयंत्र में खप जाता है। इससे रोज लगभग 400 से 500 यूनिट बिजली और 30 किलो जैव ईंधन बनता है, जिससे मंडी की स्ट्रीट लाइट, दुकानें, प्रशासनिक भवन और जल आपूर्ति चलती है, और जैव ईंधन मंडी की रसोई में जाता है। बिजली का बिल महीने के करीब तीन लाख रुपये से आधा रह गया है, और गुडीमलकापुर, गद्दीअन्नाराम, एर्रागड्डा, अलवाल तथा सरूरनगर में पांच और संयंत्रों के लिए धन दिया गया है। मंडी की महिलाएं कचरा छंटाई, मशीन संचालन और प्रशासनिक काम संभालती हैं।
गुजरात के गांधीनगर में अडालज के पास श्रीमती मानेकबा विनय विहार शिक्षण परिसर की रसोई रोज 500 से अधिक लोगों का भोजन बनाती है, जिनमें करीब 250 छात्रावासी विद्यार्थी और 15 कर्मचारी परिवार शामिल हैं। वसुमती चैरिटेबल ट्रस्ट के दो जैव गैस संयंत्र, कुल 90 घन मीटर प्रतिदिन, 222 गायों के गोबर के साथ रसोई कचरे और खेत के अवशेष पर चलते हैं और पूरी खाना पकाने की जरूरत पूरी करते हैं, जिसके बिना महीने में 30 एलपीजी सिलेंडर लगते। गुजरात की संस्थागत जैव गैस संयंत्र योजना और गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी ने इसमें सहयोग दिया।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्यक्रम | स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत कचरे से ऊर्जा |
|---|---|
| मिशन की शुरुआत | अक्टूबर 2014 |
| प्रयागराज संयंत्र की खपत | रोज 343 टन जैविक कचरा |
| प्रयागराज का उत्पादन | लगभग 21 टन बायो-सीएनजी और 28 टन खाद प्रतिदिन |
| प्रयागराज की पहुंच | करीब 45,000 घर; सालाना 57,000 टन उत्सर्जन में कमी |
| ग्वालियर संयंत्र | लालटीपारा की आदर्श गौशाला में 100 टन प्रतिदिन का सीबीजी संयंत्र |
| ग्वालियर की लागत और साझेदार | 31 करोड़ रुपये, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के साथ, 5 एकड़ में |
| हैदराबाद स्थल | बोवेनपल्ली सब्जी मंडी, रोज करीब 10 टन कचरा |
| हैदराबाद का उत्पादन | रोज 400 से 500 यूनिट बिजली और 30 किलो जैव ईंधन |
| गांधीनगर परिसर | 90 घन मीटर के दो जैव गैस संयंत्र, 222 गायों का गोबर |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें कि स्वच्छ भारत मिशन अक्टूबर 2014 में शुरू हुआ; प्रयागराज का संयंत्र 343 टन कचरे से 21 टन गैस और 28 टन खाद देता है; ग्वालियर की आदर्श गौशाला में देश का पहला गौशाला आधारित 100 टन प्रतिदिन का सीबीजी संयंत्र है, जो इंडियन ऑयल के सहयोग से 31 करोड़ रुपये में बना; और हैदराबाद की बोवेनपल्ली मंडी अपनी स्ट्रीट लाइट सब्जी के कचरे से जलाती है।
अभ्यास प्रश्न
प्रयागराज का बहु-फीडस्टॉक बायो-सीएनजी संयंत्र प्रतिदिन कितना जैविक कचरा संसाधित कर सकता है?
- A.143 टन
- B.243 टन
- C.343 टन
- D.443 टन
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 343 टन
व्याख्या
सही उत्तर 343 टन है। उत्तर प्रदेश का यह संयंत्र रोज इतना जैविक कचरा लेता है और लगभग इक्कीस टन बायो-सीएनजी देता है, साथ ही अट्ठाईस टन अच्छी गुणवत्ता की खाद बनाता है जो आसपास के किसानों को मिलती है। इसका बहु-फीडस्टॉक ढांचा गीला कचरा, पुआल, गोबर और मुर्गी के अपशिष्ट को स्वीकार करता है, इसी कारण फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसका लाभकारी उपयोग हो पाता है। विकल्प A यानी 143 टन, विकल्प B यानी 243 टन और विकल्प D यानी 443 टन केवल पहला अंक बदलकर बनाए गए भ्रमजाल हैं, जो उस परीक्षार्थी को फंसाते हैं जिसे आंकड़े के अंतिम दो अंक ही याद रहते हैं। इसी संयंत्र से जुड़े अन्य आंकड़े भी याद रखें: गीले कचरे की आपूर्ति सात-आठ टन से बढ़कर करीब 125 टन हो गई है, पाइप से गैस लगभग 45,000 घरों तक पहुंचेगी और सालाना उत्सर्जन में करीब 57,000 टन की कमी अपेक्षित है।
संपीडित जैव गैस संयंत्र पर आधारित देश की पहली आधुनिक और आत्मनिर्भर गौशाला कही जाने वाली आदर्श गौशाला किस शहर में है?
- A.भोपाल
- B.ग्वालियर
- C.इंदौर
- D.जबलपुर
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ग्वालियर
व्याख्या
सही उत्तर ग्वालियर है, जो मध्य प्रदेश में है। आदर्श गौशाला लालटीपारा में स्थित है और शहर की सबसे बड़ी गौशाला है, जहां दस हजार से अधिक मवेशी रहते हैं। इसका 100 टन प्रतिदिन क्षमता का संपीडित जैव गैस संयंत्र अक्टूबर 2024 में शुरू हुआ, पांच एकड़ में फैला है, 31 करोड़ रुपये की लागत से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के सहयोग से बना और राज्य का पहला ऐसा संयंत्र है जो गोबर के साथ बाजारों तथा घरों से आने वाले सब्जी-फल के कचरे को भी ले सकता है। यह रोज 100 टन गोबर से दो टन गैस और दस से पंद्रह टन सूखी जैव खाद बनाता है। विकल्प A भोपाल राज्य की राजधानी है पर यह स्थल नहीं है। विकल्प C इंदौर स्वच्छता रैंकिंग के कारण ध्यान खींचता है, इसीलिए वह भ्रमित करता है। विकल्प D जबलपुर का इस सुविधा से कोई संबंध नहीं है।
सब्जी के कचरे से बनी बिजली से स्ट्रीट लाइट जलाने वाली बोवेनपल्ली सब्जी मंडी किस शहर में है?
- A.बेंगलुरु
- B.चेन्नई
- C.हैदराबाद
- D.पुणे
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. हैदराबाद
व्याख्या
सही उत्तर हैदराबाद है। बोवेनपल्ली सब्जी मंडी में रोज करीब दस टन सब्जी और फल का कचरा जुटता है, और वहीं जैव गैस संयंत्र लगने के बाद उसका लगभग पूरा हिस्सा काम में आ जाता है, पहले वह लैंडफिल जाता था। संयंत्र रोज करीब 400 से 500 यूनिट बिजली और 30 किलो जैव ईंधन बनाता है, जिससे मंडी की स्ट्रीट लाइट, दुकानें, प्रशासनिक भवन और जल आपूर्ति नेटवर्क चलते हैं, जबकि जैव ईंधन मंडी की रसोई और पूरी तरह जैव गैस पर चलने वाले जनरेटर को मिलता है। बिजली का बिल महीने के करीब तीन लाख रुपये से घटकर लगभग आधा रह गया है और गुडीमलकापुर, गद्दीअन्नाराम, एर्रागड्डा, अलवाल तथा सरूरनगर में पांच और संयंत्रों के लिए धन स्वीकृत हुआ है। विकल्प A, B और D दूसरे राज्यों के बड़े शहर हैं और इस मॉडल से जुड़े नहीं हैं।
स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत किस महीने और वर्ष में हुई थी?
- A.अक्टूबर 2014
- B.अगस्त 2014
- C.अक्टूबर 2015
- D.अप्रैल 2016
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अक्टूबर 2014
व्याख्या
सही उत्तर अक्टूबर 2014 है। उसी शुरुआत से नगरीय ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन इस मिशन का मूल उद्देश्य रहा है, और जैसे-जैसे मिशन आगे बढ़ा, जैविक कचरे को कूड़ा मानने के बजाय स्वच्छ ऊर्जा के संसाधन के रूप में देखा जाने लगा। प्रयागराज, ग्वालियर, हैदराबाद और गांधीनगर में बताए गए कचरे से ऊर्जा वाले सभी काम इसी मिशन के शहरी हिस्से के दूसरे चरण के अंतर्गत आते हैं। विकल्प B यानी अगस्त 2014 वर्ष के हिसाब से इतना निकट है कि जल्दबाजी में पढ़ने वाला फंस सकता है, परंतु महीना गलत है। विकल्प C यानी अक्टूबर 2015 में महीना ठीक है और वर्ष एक साल आगे खिसका दिया गया है, जो तिथि वाले प्रश्नों का सबसे आम जाल है। विकल्प D यानी अप्रैल 2016 किसी से मेल नहीं खाता। याद रखने का सहारा यह है कि स्वच्छता महात्मा गांधी की जयंती से जुड़ी है, जो दो अक्टूबर को पड़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रयागराज का बायो-सीएनजी संयंत्र रोज कितना जैविक कचरा संसाधित करता है?
यह रोज 343 टन कचरा लेता है और लगभग 21 टन बायो-सीएनजी बनाता है, साथ ही किसानों के लिए 28 टन खाद भी देता है।
देश की पहली ऐसी आधुनिक गौशाला कौन सी है जिसमें सीबीजी संयंत्र है?
मध्य प्रदेश में ग्वालियर के लालटीपारा की आदर्श गौशाला। इसका 100 टन प्रतिदिन का संपीडित जैव गैस संयंत्र अक्टूबर 2024 में शुरू हुआ और इसकी लागत 31 करोड़ रुपये रही।
हैदराबाद की बोवेनपल्ली मंडी का जैव गैस संयंत्र क्या बनाता है?
करीब 10 टन सब्जी और फल के कचरे से रोज लगभग 400 से 500 यूनिट बिजली और 30 किलो जैव ईंधन, जिससे मंडी का बिजली बिल आधा हो गया है।
स्रोत
- Power from Waste (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
करेंट अफेयर्स 27 सितंबर 2026
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