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GK24

जनजातीय कार्य मंत्रालय और आईजीएनसीए के बीच समझौता ज्ञापन

जनजातीय कार्य मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण और डिजिटलीकरण के लिए समझौता ज्ञापन किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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जनजातीय कार्य मंत्रालय और आईजीएनसीए के बीच समझौता ज्ञापन

चर्चा में क्यों

जनजातीय कार्य मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत की मूर्त और अमूर्त जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण तथा प्रचार के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

जनजातीय कार्य मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत की जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण, शोध और प्रचार के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। कला केंद्र संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त न्यास है, इसलिए यह समझौता एक ही विषय पर दो मंत्रालयों के संसाधनों को जोड़ता है।

हस्ताक्षर और उपस्थिति

समझौते पर हस्ताक्षर जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा तथा कला केंद्र के विभागाध्यक्ष डॉ. के. अनिल कुमार और दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हुए। मंत्रालय के उप सचिव गणेश नागराजन ने कहा कि यह समझौता दोनों संस्थाओं की ताकत को एक साथ लाने का संस्थागत ढांचा देता है। सचिव ने कहा कि इस साझेदारी से जनजातीय सशक्तीकरण और देश की जनजातीय परंपराओं की व्यापक पहचान को बल मिलेगा।

दोनों पक्ष क्या लाते हैं

मंत्रालय अपना जनजातीय शोध तंत्र और राज्यों में फैला जनजातीय शोध संस्थानों का नेटवर्क देता है। कला केंद्र शैक्षणिक, अभिलेखीय, शोध तथा संग्रह प्रबंधन की क्षमता देता है। दोनों मिलकर जनजातीय कलाओं, संगीत, वाद्ययंत्रों, हस्तशिल्प, व्यंजनों, भाषाओं, मौखिक परंपराओं, लोककथाओं, प्रथागत रीतियों और पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान की व्यवस्थित पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण, प्रकाशन और प्रसार का ढांचा बनाएंगे, जिसमें मूर्त और अमूर्त दोनों विरासत शामिल हैं।

प्रस्तावित काम

क्षेत्रप्रस्तावित काम
भाषाएंलुप्तप्राय जनजातीय भाषाओं और मौखिक परंपराओं की पहचान, संरक्षण तथा प्रचार
अभिलेखजनजातीय कलाओं, कलाकृतियों और पारंपरिक ज्ञान के डिजिटल अभिलेखागार
संग्रहालयसमर्पित दीर्घाएं और डिजिटल संग्रहालय, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान भी
युवाशिक्षण संस्थानों में जनजातीय सांस्कृतिक मूल्यों और संरक्षण पर शिविर
प्रसारप्रदर्शनियां, प्रकाशन, डिजिटल मंच और सांस्कृतिक उत्सव

महत्व क्यों

भारत की जनजातीय विरासत का बड़ा हिस्सा जीवित और समुदाय आधारित है, जो लिखित अभिलेख की जगह अभ्यास के सहारे चलता है। इसीलिए दस्तावेजीकरण को तात्कालिक जरूरत माना गया है, क्योंकि लुप्त होती कलाएं, वाद्ययंत्र और व्यंजन अंतिम जानकार के हटते ही निशान छोड़े बिना खत्म हो जाते हैं। इस सहयोग का उद्देश्य जनजातीय विद्वानों, कलाकारों, शिल्पियों, प्रस्तुतिकर्ताओं और पारंपरिक ज्ञान रखने वालों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पहचान दिलाना भी है, साथ ही ऐसी संवादमूलक संग्रहालय दीर्घाएं बनाना, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों की भूमिका पर अलग प्रदर्शन हो।

महत्वपूर्ण तथ्य

समझौताजनजातीय सांस्कृतिक विरासत पर समझौता ज्ञापन
पक्षजनजातीय कार्य मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र
तिथि और स्थान28 सितंबर 2026, नई दिल्ली
कला केंद्र की स्थितिसंस्कृति मंत्रालय के अधीन स्वायत्त न्यास
सचिव, जनजातीय कार्यरंजना चोपड़ा
कला केंद्र अधिकारीडॉ. के. अनिल कुमार, विभागाध्यक्ष
मंत्रालय का नेटवर्कजनजातीय शोध संस्थान
दायरामूर्त और अमूर्त जनजातीय विरासत का संरक्षण, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण, शोध तथा प्रचार
संग्रहालय योजनादीर्घाएं और डिजिटल संग्रहालय, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान शामिल

परीक्षा की दृष्टि से

दोनों पक्ष (जनजातीय कार्य मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र), कला केंद्र का संस्कृति मंत्रालय के अधीन स्वायत्त न्यास होना, हस्ताक्षर की तिथि (28 सितंबर 2026), जनजातीय कार्य सचिव (रंजना चोपड़ा), जनजातीय शोध संस्थानों की भूमिका तथा डिजिटल अभिलेखागार, स्वतंत्रता संग्राम पर संग्रहालय दीर्घाएं और लुप्तप्राय भाषाओं का संरक्षण याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

जनजातीय कार्य मंत्रालय ने जनजातीय सांस्कृतिक विरासत पर समझौता ज्ञापन किस संस्थान के साथ किया?

  1. A.इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र
  2. B.भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण
  3. C.राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय
  4. D.भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र

व्याख्या

सही उत्तर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र है, जो संस्कृति मंत्रालय के अधीन काम करने वाला स्वायत्त न्यास है। यह समझौता ज्ञापन 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में भारत की मूर्त तथा अमूर्त जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण, शोध और प्रचार के लिए हुआ, और यह मंत्रालय के जनजातीय शोध संस्थानों के नेटवर्क को कला केंद्र की शैक्षणिक, अभिलेखीय तथा संग्रह प्रबंधन क्षमता से जोड़ता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण समुदायों का अध्ययन करता है, पर इस समझौते का पक्ष नहीं था। विकल्प C गलत है, क्योंकि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंच का प्रशिक्षण देता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद का नाम इसमें नहीं आया। हस्ताक्षर मंत्रालय की सचिव रंजना चोपड़ा की उपस्थिति में हुए।

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

समझौता ज्ञापन करने वाला इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र किस मंत्रालय के अधीन स्वायत्त न्यास है?

  1. A.शिक्षा मंत्रालय
  2. B.जनजातीय कार्य मंत्रालय
  3. C.संस्कृति मंत्रालय
  4. D.पर्यटन मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. संस्कृति मंत्रालय

व्याख्या

सही उत्तर संस्कृति मंत्रालय है। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र उसी मंत्रालय के अधीन स्वायत्त न्यास है, और इसी वजह से यह समझौता एक ही विषय पर दो मंत्रालयों के संसाधनों को जोड़ने वाला बनता है। विकल्प A गलत है, क्योंकि शिक्षा मंत्रालय विद्यालयी तथा उच्च शिक्षा देखता है और कला केंद्र का प्रशासन उसके पास नहीं है। विकल्प B गलत है, क्योंकि जनजातीय कार्य मंत्रालय इस समझौते का दूसरा पक्ष है, जो अपना जनजातीय शोध तंत्र और जनजातीय शोध संस्थानों का नेटवर्क देता है, न कि कला केंद्र का संचालन करता है। विकल्प D गलत है, क्योंकि पर्यटन का काम अलग है और उसका कला केंद्र से प्रशासनिक संबंध नहीं है। समझौते में कला केंद्र जनजातीय कलाओं, भाषाओं, मौखिक परंपराओं और हस्तशिल्प के दस्तावेजीकरण के लिए अपनी क्षमता देगा।

Q3.राष्ट्रीयकठिन

इस समझौता ज्ञापन के तहत निम्नलिखित में से कौन सा काम प्रस्तावित है?

  1. A.वन उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करना
  2. B.स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान वाले डिजिटल संग्रहालय
  3. C.एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती
  4. D.वन अधिकार कानून के तहत पट्टे देना
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान वाले डिजिटल संग्रहालय

व्याख्या

सही उत्तर स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान वाले डिजिटल संग्रहालय है। समझौते में सहयोग के प्रमुख क्षेत्र के रूप में ऐसी समर्पित दीर्घाओं और डिजिटल संग्रहालयों का विकास बताया गया है, जिनमें जनजातीय कलाएं, कलाकृतियां और स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समुदायों का ऐतिहासिक योगदान दिखाया जाएगा, साथ ही डिजिटल अभिलेखागार और संवादमूलक दीर्घाएं भी। विकल्प A गलत है, क्योंकि वन उत्पादों का मूल्य निर्धारण अलग खरीद व्यवस्था का विषय है और इस सांस्कृतिक समझौते में नहीं आता। विकल्प C गलत है, क्योंकि विद्यालयों में भर्ती प्रशासनिक काम है और समझौते में उसका जिक्र नहीं है। विकल्प D गलत है, क्योंकि वन अधिकार कानून के तहत पट्टे देना राज्य अधिकारियों की वैधानिक प्रक्रिया है। अन्य प्रस्तावित क्षेत्र लुप्त होती कलाओं तथा व्यंजनों का दस्तावेजीकरण, लुप्तप्राय भाषाओं का संरक्षण और युवा शिविर हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनजातीय सांस्कृतिक विरासत पर समझौता ज्ञापन किन दो पक्षों के बीच हुआ?

जनजातीय कार्य मंत्रालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के बीच, जो संस्कृति मंत्रालय के अधीन स्वायत्त न्यास है। यह समझौता 28 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में जनजातीय विरासत के संरक्षण, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण, शोध और प्रचार के लिए हुआ।

इस साझेदारी में क्या काम होगा?

जनजातीय कलाओं, संगीत, वाद्ययंत्रों, हस्तशिल्प, व्यंजनों, भाषाओं, मौखिक परंपराओं और लोककथाओं का दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण तथा प्रकाशन, लुप्तप्राय जनजातीय भाषाओं का संरक्षण, डिजिटल अभिलेखागार और संग्रहालय दीर्घाएं, जिनमें स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान का प्रदर्शन हो, तथा शिक्षण संस्थानों में युवा शिविर।

जनजातीय शोध संस्थान क्या हैं?

ये राज्यों में फैले मंत्रालय के शोध संस्थान हैं, जो उसका जनजातीय शोध तंत्र बनाते हैं। समझौते के तहत उनके काम को कला केंद्र की शैक्षणिक, अभिलेखीय, शोध तथा संग्रह प्रबंधन क्षमता से जोड़ा जाएगा।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLSSC CHSL