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GK24

ट्राई ने उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण की सिफारिश की

ट्राई ने दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत 20 वर्ष तक चलने वाले नए उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण तथा डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा की सिफारिश की।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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चर्चा में क्यों

ट्राई ने 5 नवंबर 2026 को उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण बनाने और उपग्रह स्पेक्ट्रम आवंटन की रूपरेखा तय करने वाली सिफारिशें जारी कीं, जिससे भारत में डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा का रास्ता खुला।

भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने 5 नवंबर 2026 को उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता को प्राधिकृत करने और उन्हें स्पेक्ट्रम देने की रूपरेखा पर अपनी सिफारिशें जारी कीं। यह प्रक्रिया तब शुरू हुई जब दूरसंचार विभाग ने जुलाई 2025 में ट्राई को बताया कि वह दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 3(1)(ख) के अंतर्गत नया उपग्रह संचार नेटवर्क प्राधिकरण लाना चाहता है और फीडर तथा यूजर, दोनों लिंक के लिए स्पेक्ट्रम की शर्तें मांगीं। ट्राई ने अप्रैल 2026 में परामर्श पत्र जारी किया, 31 हितधारकों की टिप्पणियां और 12 की प्रति-टिप्पणियां मिलीं, और जुलाई 2026 में खुली परिचर्चा के बाद सिफारिशें अंतिम रूप से तय कीं।

नया प्राधिकरण

ट्राई चाहता है कि अधिनियम की धारा 3(1)(ख) के तहत अलग प्राधिकरण बने। इसका धारक पात्र सेवा प्रदाताओं को सेवा के रूप में उपग्रह संचार नेटवर्क बेच सकेगा, लेकिन उपयोगकर्ताओं को सीधे सेवा नहीं दे सकेगा। यह प्राधिकरण पूरे राष्ट्रीय भूभाग के लिए होगा, अधिकतम 20 वर्ष चलेगा और 20 वर्ष तक नवीकरण हो सकेगा। इन नेटवर्कों से स्थिर उपग्रह सेवा, मोबाइल उपग्रह सेवा तथा एमएसएस और आईएमटी स्पेक्ट्रम से डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा दी जा सकेगी।

स्पेक्ट्रम और बैंड

प्राधिकृत संस्था केंद्र सरकार से फीडर लिंक के लिए एफएसएस स्पेक्ट्रम और यूजर लिंक के लिए एफएसएस या एमएसएस स्पेक्ट्रम मांग सकेगी, या भागीदार सेवा प्रदाता का स्पेक्ट्रम उपयोग कर सकेगी, जिसमें उपयोग का अधिकार भागीदार के पास ही रहेगा। आवंटन प्रशासनिक आधार पर होगा, राष्ट्रीय आवृत्ति आवंटन योजना 2025 के अनुरूप रहेगा और पांच वर्ष तक वैध होगा, जिसे दो वर्ष और बढ़ाया जा सकता है।

सेवायूजर लिंक बैंड
एफएसएस (जीएसओ)सी, केयू, केए और क्यू/वी
एफएसएस (एनजीएसओ)केयू, केए और क्यू/वी
एमएसएसएल और एस

डायरेक्ट-टू-डिवाइस

एल-बैंड और एस-बैंड से एमएसएस आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा की अनुमति देने की सिफारिश है, और सरकार से कहा गया है कि वह हैंडसेट कंपनियों को भारत में बिकने वाले स्मार्टफोन में जरूरी मॉड्यूल देने के लिए प्रोत्साहित करे। आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा आईटीयू रेडियो विनियम के अनुच्छेद 4.4 के तहत हस्तक्षेप-रहित और संरक्षण-रहित आधार पर, डब्ल्यूआरसी-2027 के नतीजे का इंतजार किए बिना शुरू हो सकेगी। इसके लिए 600, 700, 800, 900, 1800 और 2100 मेगाहर्ट्ज के एफडीडी बैंड तय हुए हैं, और यह तभी चलेगी जब उस चैनल को देश के सभी 22 सेवा क्षेत्रों में रखने वाले पहुंच सेवा प्रदाता सहमति दें।

वित्तीय शर्तें

प्राधिकरण शुल्क समायोजित सकल राजस्व का 8 प्रतिशत रखा गया है और कोई न्यूनतम शुल्क नहीं होगा। केंद्र से मिले स्पेक्ट्रम पर प्रति मेगाहर्ट्ज सालाना न्यूनतम 3,500 रुपये का शुल्क लगेगा, और एनजीएसओ आधारित एफएसएस में शहरी तथा ग्रामीण दरें अलग होंगी। ट्राई का कहना है कि उसने एकीकृत मॉडल और साझा नेटवर्क मॉडल के बीच नियामकीय समानता बनाए रखी है।

महत्वपूर्ण तथ्य

नियामकभारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई)
नया प्राधिकरणउपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण
कानूनी आधारदूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 3(1)(ख)
क्षेत्र और अवधिराष्ट्रीय भूभाग; अधिकतम 20 वर्ष, 20 वर्ष तक नवीकरण
सेवासेवा के रूप में उपग्रह संचार नेटवर्क; उपयोगकर्ताओं को सीधे सेवा नहीं
स्पेक्ट्रम अवधिपांच वर्ष तक, दो वर्ष और बढ़ाने का प्रावधान
प्राधिकरण शुल्कसमायोजित सकल राजस्व का 8 प्रतिशत, न्यूनतम शुल्क नहीं
न्यूनतम स्पेक्ट्रम शुल्क3,500 रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज सालाना
आईएमटी डी2डी बैंड600, 700, 800, 900, 1800 और 2100 मेगाहर्ट्ज (एफडीडी)

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि यह प्राधिकरण दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 3(1)(ख) के तहत आता है, राष्ट्रीय भूभाग के लिए है, 20 वर्ष तक चलता है और 20 वर्ष नवीकरण योग्य है। स्पेक्ट्रम पांच वर्ष के लिए और दो वर्ष बढ़ाने योग्य, प्राधिकरण शुल्क समायोजित सकल राजस्व का 8 प्रतिशत, न्यूनतम स्पेक्ट्रम शुल्क 3,500 रुपये प्रति मेगाहर्ट्ज, एमएसएस डी2डी के लिए एल और एस बैंड तथा छह आईएमटी एफडीडी बैंड भी देखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

ट्राई ने उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण बनाने की सिफारिश दूरसंचार अधिनियम, 2023 की किस धारा के तहत की है?

  1. A.धारा 2(1)(क)
  2. B.धारा 3(1)(ख)
  3. C.धारा 4(4)
  4. D.धारा 10(2)
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. धारा 3(1)(ख)

दूरसंचार विभाग ने नियामक को बताया था कि वह दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 3(1)(ख) के अंतर्गत उपग्रह संचार नेटवर्क प्राधिकरण लाने का प्रस्ताव कर रहा है, और उसने ट्राई से नियम एवं शर्तें मांगी थीं जिनमें फीडर तथा यूजर लिंक के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन शामिल हो।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण की अधिकतम अवधि कितनी रखने की सिफारिश की गई है?

  1. A.5 वर्ष
  2. B.10 वर्ष
  3. C.20 वर्ष
  4. D.30 वर्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 20 वर्ष

ट्राई ने सिफारिश की है कि उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण राष्ट्रीय भूभाग के लिए दिया जाए, इसकी अधिकतम अवधि बीस वर्ष हो और इसमें बीस वर्ष तक नवीकरण का प्रावधान रखा जाए।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

ट्राई ने उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्थाओं के लिए कितना प्राधिकरण शुल्क सुझाया है?

  1. A.समायोजित सकल राजस्व का 3 प्रतिशत
  2. B.समायोजित सकल राजस्व का 5 प्रतिशत
  3. C.समायोजित सकल राजस्व का 8 प्रतिशत
  4. D.समायोजित सकल राजस्व का 12 प्रतिशत
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. समायोजित सकल राजस्व का 8 प्रतिशत

ट्राई की सिफारिश है कि उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकृत संस्था का प्राधिकरण शुल्क उसके समायोजित सकल राजस्व का आठ प्रतिशत हो और उस पर कोई न्यूनतम प्राधिकरण शुल्क न लगाया जाए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्राई ने किस नए प्राधिकरण की सिफारिश की है?

दूरसंचार अधिनियम, 2023 की धारा 3(1)(ख) के तहत उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण की। यह राष्ट्रीय भूभाग के लिए होगा, अधिकतम 20 वर्ष चलेगा और 20 वर्ष तक नवीकरण योग्य रहेगा।

क्या उपग्रह संचार नेटवर्क प्रदाता ग्राहकों को सीधे सेवा दे सकेगा?

नहीं। वह केवल पात्र सेवा प्रदाताओं को सेवा के रूप में उपग्रह संचार नेटवर्क बेच सकेगा, और वही प्रदाता उपयोगकर्ताओं तक सेवा पहुंचाएंगे। भागीदार के स्पेक्ट्रम का उपयोग अधिकार भागीदार के पास रहेगा।

आईएमटी आधारित डायरेक्ट-टू-डिवाइस सेवा के लिए कौन-से बैंड तय हुए हैं?

600, 700, 800, 900, 1800 और 2100 मेगाहर्ट्ज के एफडीडी बैंड, जो आईटीयू रेडियो विनियम के अनुच्छेद 4.4 के तहत हस्तक्षेप-रहित और संरक्षण-रहित आधार पर चलेंगे।

स्रोत

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