केंद्रीय बजट 2026-27 में सीसीयूएस योजना के लिए पांच वर्षों में कितनी राशि रखी गई?
- A.5,000 करोड़ रुपये
- B.10,000 करोड़ रुपये
- C.20,000 करोड़ रुपये
- D.50,000 करोड़ रुपये
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 20,000 करोड़ रुपये है। कार्बन कैप्चर, उपयोग और भंडारण की योजना की घोषणा फरवरी 2026 में हुई और वित्त मंत्रालय ने पांच वर्षों के लिए यही राशि रखी, जो बिजली, इस्पात, सीमेंट, रिफाइनरी और रसायन इन पांच औद्योगिक क्षेत्रों के लिए है। 5,000 करोड़ रुपये, 10,000 करोड़ रुपये और 50,000 करोड़ रुपये के विकल्प इस आवंटन से मेल नहीं खाते। अभ्यर्थियों को इस राशि के साथ पूरी नीति श्रृंखला जोड़कर याद रखनी चाहिए: नीति आयोग ने नवंबर 2022 में नीतिगत ढांचा जारी किया, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने दिसंबर 2025 में शोध रोडमैप प्रस्तुत किया और राष्ट्रीय सीसीयूएस केंद्र 2022 में आईआईटी बॉम्बे तथा बेंगलूरु के जेएनसीएएसआर में बने। इस खर्च का मकसद उन उद्योगों का उत्सर्जन घटाना है जिनकी कार्बन डाइऑक्साइड उत्पादन प्रक्रिया से ही निकलती है, और 2070 तक नेट जीरो के लक्ष्य में मदद करना है।
पूरा लेख पढ़ें: सीसीयूएस: नेट जीरो के लिए 20,000 करोड़ रुपये की योजना
अभ्यास प्रश्न
भारत की पहली एकीकृत सीसीयूएस फील्ड प्रयोगशाला किस संस्थान में है?
- A.आईआईटी दिल्ली
- B.आईआईटी बॉम्बे
- C.आईआईटी मद्रास
- D.आईआईएससी बेंगलूरु
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देश की पहली एकीकृत सीसीयूएस फील्ड प्रयोगशाला का उद्घाटन वहीं मई 2026 में हुआ और यह कैप्चर, उपयोग तथा स्थायी भूगर्भीय भंडारण को एक ही प्रायोगिक मंच पर लाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहे ईएसटीआईसी-2026 का आयोजक कौन है?
- A.इसरो
- B.डीआरडीओ
- C.सीएसआईआर
- D.आईसीएमआर
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वही उभरते विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार सम्मेलन के दूसरे संस्करण ईएसटीआईसी-2026 का आयोजन 27 से 29 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में क्रिएटिव माइंड्स, कैटलाइजिंग साइंस, एम्पावरिंग टेक्नोलॉजीज विषय पर कर रही है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →यह परियोजना प्रणोदन तकनीक को किस प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर तक पहुंचाना चाहती है?
- A.स्तर छह
- B.स्तर सात
- C.स्तर आठ
- D.स्तर नौ
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इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रणोदन तकनीक को प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर छह से, जहां कोई प्रणाली किसी प्रासंगिक परिवेश में सिद्ध हो चुकी होती है, स्तर नौ तक ले जाना है, जहां वह उड़ान में परखी जा चुकी होती है और व्यापक उपयोग के लिए तैयार मानी जाती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →मनस्तु स्पेस की ग्रीन प्रोपल्शन प्रणाली किस प्रणोदक पर आधारित है?
- A.हाइड्राजीन
- B.द्रव हाइड्रोजन
- C.योजकों के साथ हाइड्रोजन पेरोक्साइड
- D.केरोसिन और द्रव ऑक्सीजन
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इस प्रणाली को हरित प्रणोदन समाधान बताया गया है, जो हाइड्रोजन पेरोक्साइड पर आधारित प्रणोदक का उपयोग करता है और उसमें कुछ योजक मिलाए जाते हैं।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने आरडीआई कोष के तहत मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज को कितनी सहायता मंजूर की है?
- A.96 करोड़ रुपये
- B.116 करोड़ रुपये
- C.277.63 करोड़ रुपये
- D.350 करोड़ रुपये
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अधीन काम करने वाले प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड ने नवी मुंबई की मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष से 116 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता का समझौता किया है और यह राशि वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय ऋण के रूप में…
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