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राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: लक्ष्य, परिव्यय और प्रगति

पीआईबी की पृष्ठभूमि रिपोर्ट में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का 19,744 करोड़ रुपये का परिव्यय, 2030 तक 5 एमएमटी लक्ष्य और अब तक की प्रगति बताई गई है।

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राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन: लक्ष्य, परिव्यय और प्रगति

चर्चा में क्यों

28 अक्टूबर 2026 को पत्र सूचना कार्यालय ने हरित हाइड्रोजन पर पृष्ठभूमि रिपोर्ट जारी की, जिसमें राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का 19,744 करोड़ रुपये का परिव्यय, 2030 तक 5 एमएमटी का लक्ष्य और विनिर्माण, पायलट, केंद्र तथा कौशल में हुई प्रगति बताई गई है।

28 अक्टूबर 2026 को पत्र सूचना कार्यालय ने हरित हाइड्रोजन पर एक पृष्ठभूमि रिपोर्ट जारी की, जिसमें इसे भारत के स्वच्छ ऊर्जा बदलाव का उभरता हुआ आधार बताया गया है। हरित हाइड्रोजन नवीकरणीय बिजली से पानी को तोड़कर बनाया जाता है और यह उन क्षेत्रों में सबसे अधिक काम का है जहां उत्सर्जन घटाना कठिन है, जैसे उर्वरक, पेट्रोलियम रिफाइनिंग, लोहा और इस्पात, भारी वाहन तथा जहाजरानी।

हाइड्रोजन हरित कब कहलाता है

इस्तेमाल के समय हाइड्रोजन से कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, इसलिए सब कुछ इस पर निर्भर करता है कि उसे बनाया कैसे गया। अगस्त 2023 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने भारत का हरित हाइड्रोजन मानक अधिसूचित किया। हाइड्रोजन तभी हरित माना जाएगा जब प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर उत्सर्जन 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य से अधिक न हो, जिसे वेल-टू-गेट आधार पर बारह महीने के औसत के रूप में मापा जाता है। इस तरह भारत हरित हाइड्रोजन को औपचारिक रूप से परिभाषित करने वाले पहले कुछ देशों में शामिल हो गया।

मिशन और उसका धन

मंजूरीकेंद्रीय मंत्रिमंडल, जनवरी 2023
कुल परिव्यय19,744 करोड़ रुपये
उत्पादन लक्ष्य2030 तक कम से कम 5 एमएमटी प्रतिवर्ष, निर्यात मांग के साथ 10 एमएमटी तक
साइट कार्यक्रम2029-30 तक 17,490 करोड़ रुपये

साइट यानी हरित हाइड्रोजन बदलाव के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप कार्यक्रम बाजार के दोनों सिरों पर प्रोत्साहन देता है, देश में इलेक्ट्रोलाइजर बनाने के लिए और गैस के उत्पादन के लिए। पंद्रह कंपनियों को प्रतिवर्ष 3,000 मेगावाट इलेक्ट्रोलाइजर विनिर्माण क्षमता के लिए सहायता दी गई है, 8,62,000 टन प्रतिवर्ष उत्पादन क्षमता पर प्रोत्साहन तय हुआ है और फरवरी 2026 तक लगभग 8,000 टन प्रतिवर्ष क्षमता चालू हो चुकी थी।

पायलट, केंद्र और क्लस्टर

पायलट परियोजनाओं के लिए कम कार्बन वाले इस्पात हेतु 455 करोड़ रुपये, गतिशीलता हेतु 496 करोड़ रुपये और जहाजरानी हेतु 115 करोड़ रुपये रखे गए हैं। बारह गतिशीलता परियोजनाओं के तहत 70 हाइड्रोजन वाहन चलेंगे, जिनमें 27 बसें और 43 ट्रक हैं, तथा 21 मार्गों पर 16 ईंधन भरने वाले स्टेशन बनेंगे। तीन बंदरगाहों को केंद्र के रूप में मान्यता मिली है: कांडला का दीनदयाल बंदरगाह, तूतीकोरिन का वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह और पारादीप बंदरगाह। चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर जोधपुर, ओडिशा, पुणे और केरल में दिए गए हैं।

कौशल, राज्य और आगे की राह

प्रशिक्षण में 8,149 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें से 7,248 को 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रमाणपत्र मिला। गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल, यानी छह राज्यों ने अलग हरित हाइड्रोजन नीतियां अधिसूचित की हैं। अनुमान है कि 2030 तक यह मिशन जीवाश्म ईंधन के आयात में करीब 1 लाख करोड़ रुपये की कमी लाएगा, 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश जुटाएगा, 6 लाख से अधिक रोजगार देगा और हर साल लगभग 50 एमएमटी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन रोकेगा, जो 2047 तक विकसित भारत और 2070 तक नेट जीरो के लक्ष्यों से जुड़ता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

मिशनराष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय
मंत्रिमंडल की मंजूरीजनवरी 2023
परिव्यय19,744 करोड़ रुपये
उत्पादन लक्ष्य2030 तक कम से कम 5 एमएमटी प्रतिवर्ष; निर्यात मांग के साथ 10 एमएमटी तक
साइट कार्यक्रम का परिव्यय2029-30 तक 17,490 करोड़ रुपये
हरित हाइड्रोजन मानकप्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर अधिकतम 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य, वेल-टू-गेट, बारह महीने का औसत (अगस्त 2023)
बंदरगाह केंद्रदीनदयाल बंदरगाह (कांडला), वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह (तूतीकोरिन), पारादीप बंदरगाह
हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टरजोधपुर, ओडिशा, पुणे और केरल
इलेक्ट्रोलाइजर प्रोत्साहन15 कंपनियों को प्रतिवर्ष 3,000 मेगावाट के लिए
2030 तक अपेक्षित असर8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश, 6 लाख से अधिक रोजगार, हर साल लगभग 50 एमएमटी कार्बन डाइऑक्साइड की बचत

परीक्षा की दृष्टि से

मिशन की मंजूरी (जनवरी 2023), परिव्यय (19,744 करोड़ रुपये), लक्ष्य (2030 तक 5 एमएमटी, निर्यात के साथ 10 एमएमटी), साइट कार्यक्रम का 17,490 करोड़ रुपये परिव्यय, 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य का मानक, तीन बंदरगाह केंद्र और चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कितना परिव्यय मंजूर किया था?

  1. A.8,240 करोड़ रुपये
  2. B.17,490 करोड़ रुपये
  3. C.19,744 करोड़ रुपये
  4. D.24,500 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 19,744 करोड़ रुपये

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी 2023 में इसी परिव्यय के साथ मिशन को मंजूरी दी थी और लक्ष्य रखा कि भारत हरित हाइड्रोजन तथा उसके उत्पादों का वैश्विक केंद्र बने, जिसके लिए 2030 तक कम से कम 5 एमएमटी वार्षिक उत्पादन क्षमता तय की गई।

Q2.पर्यावरणमध्यम

भारत के हरित हाइड्रोजन मानक के अनुसार हाइड्रोजन को हरित मानने के लिए अधिकतम उत्सर्जन कितना होना चाहिए?

  1. A.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
  2. B.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 5 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
  3. C.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 9 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
  4. D.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 12 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अगस्त 2023 में यह मानक अधिसूचित किया और यह सीमा वेल-टू-गेट आधार पर बारह महीने के औसत के रूप में लागू होती है; इसी के साथ भारत हरित हाइड्रोजन को औपचारिक रूप से परिभाषित करने वाले पहले कुछ देशों में आ गया।

Q3.पर्यावरणमध्यम

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने निम्न में से किस बंदरगाह को हरित हाइड्रोजन केंद्र के रूप में मान्यता दी है?

  1. A.मोरमुगाओ बंदरगाह
  2. B.पारादीप बंदरगाह
  3. C.विशाखापत्तनम बंदरगाह
  4. D.मुंबई बंदरगाह
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पारादीप बंदरगाह

मंत्रालय ने तीन बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन केंद्र के रूप में मान्यता दी है, यानी गुजरात में कांडला का दीनदयाल बंदरगाह, तमिलनाडु में तूतीकोरिन का वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह और ओडिशा का पारादीप बंदरगाह, ताकि उत्पादन, खपत और अवसंरचना पास-पास रहें और परियोजनाएं व्यवहार्य बनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरित हाइड्रोजन क्या है?

नवीकरणीय बिजली से पानी को तोड़कर बनाया गया हाइड्रोजन, जिसमें बहुत कम कार्बन निकलता है। भारत में यह तभी हरित माना जाता है जब वेल-टू-गेट आधार पर प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर उत्सर्जन 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य के भीतर रहे।

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का परिव्यय और लक्ष्य क्या है?

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी 2023 में इसे 19,744 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी। इसका लक्ष्य 2030 तक कम से कम 5 एमएमटी वार्षिक क्षमता है, जो निर्यात मांग के साथ 10 एमएमटी तक पहुंच सकती है।

किन बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन केंद्र के रूप में मान्यता मिली है?

गुजरात में कांडला का दीनदयाल बंदरगाह, तमिलनाडु में तूतीकोरिन का वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह और ओडिशा का पारादीप बंदरगाह।

साइट कार्यक्रम क्या है?

हरित हाइड्रोजन बदलाव के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप कार्यक्रम, जो मिशन का प्रमुख हिस्सा है। इसका परिव्यय 2029-30 तक 17,490 करोड़ रुपये है और यह इलेक्ट्रोलाइजर विनिर्माण तथा हाइड्रोजन उत्पादन दोनों पर प्रोत्साहन देता है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 28 अक्टूबर 2026

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