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प्रशस्त मॉड्यूल की स्क्रीनिंग 60,000 से अधिक स्कूलों में

शिक्षा मंत्रालय ने प्रशस्त पोर्टल के जरिये समावेशी शिक्षा का 30 मिनट का मॉड्यूल 60,000 से अधिक स्कूलों में दिखाया, 72 लाख शिक्षक संवेदनशील बनाए गए।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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प्रशस्त मॉड्यूल की स्क्रीनिंग 60,000 से अधिक स्कूलों में

चर्चा में क्यों

8 अक्टूबर 2026 को स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने प्रशस्त पोर्टल के जरिये विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समावेशी शिक्षा पर तैयार संवेदीकरण मॉड्यूल की स्क्रीनिंग 60,000 से अधिक स्कूलों में कराई।

शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने 8 अक्टूबर 2026 को देशभर के स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समावेशी शिक्षा पर तैयार तीस मिनट के संवेदीकरण और अभिमुखीकरण मॉड्यूल की स्क्रीनिंग कराई, जो प्रशस्त पोर्टल के जरिये दिखाया गया। इसमें 60,000 से अधिक स्कूल शामिल हुए और विभाग को उम्मीद है कि इस महीने यह संख्या और बढ़ेगी।

मॉड्यूल का उद्देश्य

यह मॉड्यूल पूरे विद्यालय के साझा दृष्टिकोण पर आधारित है, क्योंकि समावेशन किसी एक शिक्षक की जिम्मेदारी नहीं है। यह प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, विशेष शिक्षकों तथा गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए बनाया गया है और इस सूची में आया, चालक, लिपिक, रिसेप्शनिस्ट, डीन और वार्डन तक शामिल हैं, क्योंकि बच्चे का अपनापन कक्षा, दफ्तर, स्कूल बस और हर साझा जगह पर बनता है। इसमें व्यावहारिक उदाहरण और संवादमूलक गतिविधियां रखी गई हैं, जिससे स्कूल का स्टाफ सहायता की जरूरत वाले बच्चों के प्रति उचित और सम्मानजनक व्यवहार सीख सके। यह मॉड्यूल 12 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है।

प्रशस्त क्या है

प्रशस्त विद्यालय स्तर का एक डिजिटल साधन है, जिससे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के दायरे में आने वाली संभावित दिव्यांगता की पहचान की जाती है। यह दो हिस्सों वाली जांच सूची पर चलता है, जिसमें शिक्षक दिखने वाले संकेतकों के आधार पर विद्यार्थी की प्रारंभिक जांच करता है और उसके बाद विशेष शिक्षक मामले की पुष्टि करके जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय आकलन के लिए संदर्भित करता है। इस तरह पोर्टल कक्षा की रोजमर्रा की निगरानी को औपचारिक आकलन और सहायता से जोड़ देता है।

अब तक की पहुंच

प्रशस्त के माध्यम से सामान्य शिक्षकों का संवेदीकरण पिछले तीन महीनों से लगातार चल रहा है और 72 लाख से अधिक शिक्षक इस समर्पित मॉड्यूल से गुजर चुके हैं। विभाग इस काम को समतामूलक, सुगम और समावेशी शिक्षा के अपने व्यापक प्रयास का हिस्सा बताता है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की दिशा के अनुरूप है। इस स्क्रीनिंग का संदेश यही है कि समावेशी शिक्षा स्कूल में बच्चे से मिलने वाले हर व्यक्ति की साझा जिम्मेदारी है और जरूरत की शुरुआती पहचान ही सही सहायता की पहली सीढ़ी है।

महत्वपूर्ण तथ्य

पहलसमावेशी शिक्षा पर संवेदीकरण मॉड्यूल की देशव्यापी स्क्रीनिंग
आयोजकस्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय
माध्यमप्रशस्त पोर्टल
मॉड्यूल की अवधि30 मिनट
भाषाएं12 भारतीय भाषाएं
शामिल स्कूल60,000 से अधिक
संवेदीकृत शिक्षक72 लाख से अधिक
कानूनी आधारदिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016
नीतिगत आधारराष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020

परीक्षा की दृष्टि से

याद रखें कि प्रशस्त स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का विद्यालय स्तरीय जांच साधन है, जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के दायरे की संभावित दिव्यांगता पहचानता है, इसकी जांच सूची दो हिस्सों वाली है, मॉड्यूल 30 मिनट का तथा 12 भारतीय भाषाओं में है, और पहुंच के दो आंकड़े हैं, 60,000 से अधिक स्कूल तथा 72 लाख से अधिक शिक्षक। नीतिगत आधार राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 और यही अधिनियम हैं।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंमध्यम

अक्टूबर 2026 में चर्चा में रहा प्रशस्त किस काम के लिए इस्तेमाल होने वाला साधन है?

  1. A.स्कूली बच्चों में संभावित दिव्यांगता की जांच
  2. B.स्कूलों में मध्याह्न भोजन की उपस्थिति दर्ज करना
  3. C.शिक्षकों के कक्षा प्रदर्शन का मूल्यांकन
  4. D.पहली पीढ़ी के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देना
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. स्कूली बच्चों में संभावित दिव्यांगता की जांच

व्याख्या

सही उत्तर स्कूली बच्चों में संभावित दिव्यांगता की जांच है। प्रशस्त स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का विद्यालय स्तरीय डिजिटल साधन है, जो दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के दायरे में आने वाली स्थितियों की पहचान में मदद करता है और यह दो हिस्सों वाली जांच सूची पर चलता है, जिसमें शिक्षक दिखने वाले संकेतकों पर जांच करता है और विशेष शिक्षक पुष्टि कर जरूरत होने पर चिकित्सकीय आकलन के लिए संदर्भित करता है। विकल्प B गलत है, क्योंकि मध्याह्न भोजन का रिकॉर्ड स्कूल पोषण कार्यक्रम की अलग व्यवस्था से रखा जाता है। विकल्प C गलत है, क्योंकि यह साधन बच्चों की जरूरत देखता है, शिक्षकों का प्रदर्शन नहीं, भले इसका उपयोग शिक्षक ही करते हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि छात्रवृत्ति का वितरण अन्य विभागों के अलग पोर्टलों से होता है। परीक्षा के लिए प्रशस्त और दिव्यांगता कानून का संबंध याद रखना सबसे उपयोगी है।

Q2.सरकारी योजनाएंआसान

समावेशी शिक्षा मॉड्यूल की देशव्यापी स्क्रीनिंग में कितने स्कूल शामिल हुए?

  1. A.20,000 से अधिक
  2. B.40,000 से अधिक
  3. C.60,000 से अधिक
  4. D.90,000 से अधिक
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. 60,000 से अधिक

व्याख्या

सही उत्तर 60,000 से अधिक स्कूल हैं और विभाग के अनुसार इस महीने भागीदारी और बढ़ने की संभावना है। बाकी विकल्प गलत हैं, क्योंकि उनमें संख्या बदल दी गई है, और विद्यार्थी को इस आंकड़े को इसी खबर के दूसरे आंकड़े से अलग रखना चाहिए, यानी पिछले तीन महीनों में इस समर्पित मॉड्यूल से बहत्तर लाख से अधिक शिक्षकों का संवेदीकरण। ये दोनों संख्याएं अलग-अलग चीजें मापती हैं, एक उन संस्थानों की गिनती है जिन्होंने एक दिन स्क्रीनिंग कराई और दूसरी उन शिक्षकों की, जो एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया से गुजरे। यह भी याद रखने योग्य है कि मॉड्यूल तीस मिनट का है, बारह भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है और यह केवल शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि प्रधानाचार्य से लेकर चालक और लिपिक तक, स्कूल में बच्चे से मिलने वाले हर व्यक्ति के लिए बना है।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

प्रशस्त किस कानून के दायरे में आने वाली स्थितियों की जांच करता है?

  1. A.शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009
  2. B.दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016
  3. C.किशोर न्याय अधिनियम, 2015
  4. D.मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016

व्याख्या

सही उत्तर दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 है। इस कानून में सूचीबद्ध स्थितियां ही प्रशस्त की जांच सूची का दायरा तय करती हैं और इसी रास्ते कक्षा की एक सामान्य निगरानी औपचारिक आकलन के लिए संदर्भ बन जाती है। विकल्प A यानी शिक्षा का अधिकार अधिनियम इस प्रश्न के लिए गलत है, भले वह नि:शुल्क और अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा को नियंत्रित करता है और स्कूल से जुड़े प्रश्न में पहला अनुमान बन जाता है। विकल्प C यानी किशोर न्याय अधिनियम गलत है, क्योंकि वह देखभाल और संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों तथा कानून से टकराव वाले बच्चों से जुड़ा है, स्कूल में दिव्यांगता की जांच से नहीं। विकल्प D यानी मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम भी गलत है, क्योंकि वह मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के अधिकारों और देखभाल पर है। विभाग इस काम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति और इसी दिव्यांगता कानून, दोनों से जोड़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रशस्त क्या है?

यह विद्यालय स्तर का डिजिटल साधन है, जिससे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के दायरे में आने वाली संभावित दिव्यांगता की पहचान होती है। शिक्षक दिखने वाले संकेतकों पर जांच करते हैं और विशेष शिक्षक पुष्टि कर संदर्भित करते हैं।

समावेशी शिक्षा मॉड्यूल की पहुंच कितनी रही?

देशव्यापी स्क्रीनिंग में 60,000 से अधिक स्कूल शामिल हुए और पिछले तीन महीनों में 72 लाख से अधिक शिक्षकों का संवेदीकरण इस मॉड्यूल से हो चुका है।

यह मॉड्यूल कितनी भाषाओं में उपलब्ध है?

12 भारतीय भाषाओं में। 30 मिनट का यह मॉड्यूल प्रधानाचार्यों, शिक्षकों, विशेष शिक्षकों तथा आया, चालक, लिपिक, रिसेप्शनिस्ट, डीन और वार्डन जैसे गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 8 अक्टूबर 2026

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