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पीएमजीएसवाई चिंतन शिविर: चौथे चरण में 62 हजार किमी सड़कें

भारत मंडपम में पीएमजीएसवाई के राष्ट्रीय चिंतन शिविर में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि योजना के चौथे चरण में 62 हजार किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कें बनाई जाएंगी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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पीएमजीएसवाई चिंतन शिविर: चौथे चरण में 62 हजार किमी सड़कें

चर्चा में क्यों

5 अक्तूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के राष्ट्रीय चिंतन शिविर में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योजना के चौथे चरण के 62 हजार किलोमीटर लक्ष्य और गुणवत्ता नियंत्रण पर जोर दिया।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 5 अक्तूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर को संबोधित किया। उन्होंने अधिकारियों और अभियंताओं से कहा कि शिविर को औपचारिक आयोजन भर न रहने दें, बल्कि जमीन पर आने वाली कठिनाइयों के ठोस तथा नवाचारी हल खोजें। उनके अनुसार योजना का अगला चरण सामान्य निर्माण का नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण संपर्क का होना चाहिए। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान, ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल तथा सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सचिव, मुख्य अभियंता और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

योजना की प्रगति और लक्ष्य

मंत्री ने बताया कि देश में अब तक करीब 8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बन चुकी हैं। योजना के चौथे चरण में 62 हजार किलोमीटर नई सड़कों का लक्ष्य मिला है, जिसमें से 20 हजार किलोमीटर की स्वीकृति हो चुकी है और शेष काम समयबद्ध ढंग से पूरा करना है।

समय-सीमा और निविदा प्रक्रिया

उन्होंने कहा कि स्वीकृति मिलने से निर्माण शुरू होने तक 72 दिन की समय-सीमा तय है, लेकिन कुछ राज्य इसका पालन नहीं कर रहे और ऐसे राज्यों का पूरा हिसाब तैयार किया जाएगा। बार-बार निविदा निरस्त होना या बोली न आना जैसी बाधाओं का हल पहले से प्री-टेंडर योजना बनाकर निकाला जाए, क्योंकि देरी से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ती है। वन एवं पर्यावरण अनुमतियों पर उन्होंने कहा कि केवल पत्र लिखकर बैठना समाधान नहीं है; अधिकारी पर्यावरण विभाग और जिला कलेक्टरों के साथ बैठकर लंबित मामले निपटाएं।

गुणवत्ता और जलवायु-अनुकूल डिजाइन

  • घटिया निर्माण करने वाली एजेंसियां तुरंत ब्लैकलिस्ट होंगी, और यह निगरानी भी रहेगी कि वही ठेकेदार दूसरे नाम से नई कंपनी बनाकर काम न ले
  • हर राज्य व भौगोलिक क्षेत्र के लिए एक ही इंजीनियरिंग मॉडल लागू नहीं किया जा सकता
  • डीपीआर बनाते समय स्थानीय ढलान, जल निकासी, पुलिया और जलभराव का ध्यान रखा जाए
  • निर्माण के बाद 5 वर्ष तक रखरखाव संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी है, इसलिए सोच लाइफ साइकिल प्रबंधन पर केंद्रित हो
  • गारंटी अवधि के बाद रखरखाव के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था बने, जैसी मध्य प्रदेश में मंडी निधि से की गई थी

बेहतर काम करने वाले राज्य

मंत्री ने गुणवत्ता में गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान की सराहना की। रखरखाव में पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश तथा तमिलनाडु को बेहतर बताया गया। फुल डेप्थ रिक्लेमेशन तकनीक में उत्तर प्रदेश और संपत्तियों की क्यूआर कोडिंग में असम के काम को सराहनीय कहा गया। समय पर और गुणवत्ता के साथ काम पूरा करने वाले राज्यों को आगामी स्वीकृतियों में वरीयता मिलेगी तथा उनके लिए विशेष सम्मान समारोह होगा।

संवेदनशील क्षेत्रों पर जोर

उन्होंने निर्देश दिया कि पीएम जनमन के तहत छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, झारखंड और आंध्र प्रदेश के दूरदराज तथा नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़कें युद्ध स्तर पर बनाई जाएं। उन्होंने योजना की मूल सोच को कंस्ट्रक्शन से कनेक्टिविटी, कनेक्टिविटी से कंटिन्यूटी और कंटिन्यूटी से कम्युनिटी तक पहुंचाने की बात कही और प्रतिभागियों से मौलिक तथा व्यावहारिक सुझाव मांगे।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनप्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर
स्थानभारत मंडपम, नई दिल्ली
संबोधनकेंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान
अब तक बनी सड़केंकरीब 8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें
चौथे चरण का लक्ष्य62 हजार किलोमीटर नई सड़कें, 20 हजार किलोमीटर स्वीकृत
समय-सीमास्वीकृति से निर्माण शुरू होने तक 72 दिन
रखरखावनिर्माण के बाद 5 वर्ष तक संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी
अन्य उपस्थितराज्य मंत्री कमलेश पासवान और ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल

परीक्षा की दृष्टि से

आयोजन (पीएमजीएसवाई राष्ट्रीय चिंतन शिविर, भारत मंडपम, दो दिवसीय), मंत्री का नाम व विभाग, अब तक बनी सड़कें (करीब 8.50 लाख किलोमीटर), चौथे चरण का लक्ष्य (62 हजार किलोमीटर, 20 हजार स्वीकृत), 72 दिन की समय-सीमा, 5 वर्ष की रखरखाव जिम्मेदारी और सराहे गए राज्य याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.सरकारी योजनाएंमध्यम

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण में कितने किलोमीटर नई सड़कों का लक्ष्य रखा गया है?

  1. A.32 हजार किलोमीटर
  2. B.62 हजार किलोमीटर
  3. C.85 हजार किलोमीटर
  4. D.1 लाख किलोमीटर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 62 हजार किलोमीटर

व्याख्या

सही उत्तर 62 हजार किलोमीटर है। राष्ट्रीय चिंतन शिविर में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री ने बताया कि योजना के चौथे चरण में 62 हजार किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कों का लक्ष्य मिला है, जिसमें से 20 हजार किलोमीटर की स्वीकृति हो चुकी है। विकल्प A यानी 32 हजार किलोमीटर घोषित लक्ष्य से कम है और विज्ञप्ति में इस आंकड़े का उल्लेख नहीं है। विकल्प C भ्रमित करने वाला है क्योंकि यह अब तक बनी कुल सड़कों के आंकड़े से मिलता-जुलता लगता है, जबकि वह आंकड़ा करीब 8.50 लाख किलोमीटर है, न कि इस चरण का लक्ष्य। विकल्प D भी लक्ष्य को बहुत बढ़ाकर बताता है और किसी घोषणा पर आधारित नहीं है। अभ्यर्थी चरण का लक्ष्य, उसमें स्वीकृत हिस्सा और अब तक बनी कुल सड़कों की लंबाई, तीनों आंकड़े अलग-अलग याद रखें, क्योंकि परीक्षा में इन्हें आपस में बदलकर पूछा जाता है।

Q2.सरकारी योजनाएंआसान

पीएमजीएसवाई का राष्ट्रीय चिंतन शिविर किस स्थान पर आयोजित किया गया?

  1. A.विज्ञान भवन, नई दिल्ली
  2. B.भारत मंडपम, नई दिल्ली
  3. C.यशोभूमि, द्वारका
  4. D.प्रगति मैदान सभागार, नई दिल्ली
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. भारत मंडपम, नई दिल्ली

व्याख्या

सही उत्तर भारत मंडपम, नई दिल्ली है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर भारत मंडपम में आयोजित हुआ, जिसे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री ने संबोधित किया और जिसमें सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के सचिव तथा मुख्य अभियंता शामिल हुए। विकल्प A यानी विज्ञान भवन में सरकारी बैठकें होती हैं, पर यह शिविर वहां नहीं हुआ। विकल्प C यानी यशोभूमि द्वारका का सम्मेलन केंद्र है और प्रदर्शनियों तथा सम्मेलनों के लिए जाना जाता है, इसलिए यह आकर्षक भ्रम है, मगर आयोजन स्थल नहीं। विकल्प D भी गलत है, क्योंकि विज्ञप्ति में स्थान के रूप में स्पष्ट रूप से भारत मंडपम का नाम है। स्थान के साथ आयोजन की अवधि दो दिन और संबोधित करने वाले मंत्री का नाम जोड़कर याद रखना उपयोगी रहेगा।

Q3.सरकारी योजनाएंमध्यम

चिंतन शिविर में बताया गया कि स्वीकृति मिलने से निर्माण कार्य शुरू होने तक कितने दिन की समय-सीमा तय है?

  1. A.30 दिन
  2. B.60 दिन
  3. C.72 दिन
  4. D.90 दिन
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. 72 दिन

व्याख्या

सही उत्तर 72 दिन है। मंत्री ने कहा कि स्वीकृति मिलने से निर्माण कार्य आरंभ होने तक 72 दिन की समय-सीमा निर्धारित है, पर कुछ राज्य इसका उल्लंघन कर रहे हैं, इसलिए ऐसे राज्यों का पूरा हिसाब तैयार कराया जाएगा। उन्होंने निविदा प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने और बार-बार निविदा निरस्त होने जैसी बाधाओं का हल प्री-टेंडर योजना से निकालने को कहा, क्योंकि देरी से निर्माण सामग्री की लागत बढ़ जाती है। विकल्प A और विकल्प B निर्धारित अवधि से कम हैं और विज्ञप्ति में इनका कोई उल्लेख नहीं है। विकल्प D यानी 90 दिन सुनने में सहज लगता है क्योंकि सरकारी प्रक्रियाओं में तीन महीने की अवधि आम है, पर यहां तय सीमा उससे कम रखी गई है। इसके साथ यह भी याद रखें कि निर्माण के बाद 5 वर्ष तक सड़क का रखरखाव संबंधित एजेंसी की जिम्मेदारी होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएमजीएसवाई के चौथे चरण का लक्ष्य क्या है?

चौथे चरण में 62 हजार किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कें बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से 20 हजार किलोमीटर की स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है और शेष काम समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाना है।

योजना के तहत अब तक कितनी सड़कें बन चुकी हैं?

केंद्रीय मंत्री के अनुसार देश में अब तक करीब 8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कें बनाई गई हैं, जिनसे गांवों के जनजीवन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदली है।

निर्माण में समय-सीमा का क्या नियम बताया गया?

स्वीकृति मिलने से निर्माण कार्य शुरू होने तक 72 दिन की समय-सीमा तय है। मंत्री ने कहा कि कुछ राज्य इसका पालन नहीं कर रहे हैं और ऐसे राज्यों का पूरा हिसाब तैयार किया जाएगा।

किन राज्यों के काम की सराहना की गई?

गुणवत्ता में गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान; रखरखाव में पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश व तमिलनाडु; फुल डेप्थ रिक्लेमेशन में उत्तर प्रदेश और क्यूआर कोडिंग में असम।

स्रोत

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