नई रणनीति में पर्यावरण लेखांकन का महत्व बढ़ाने वाला कौन सा घटनाक्रम बताया गया है?
- A.राष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 में प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को मान्यता
- B.राष्ट्रीय कार्बन क्रेडिट एक्सचेंज की शुरुआत
- C.आर्थिक सर्वेक्षण में हरित विकास पर नया अध्याय
- D.राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय में विलय
सही उत्तर
A. राष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 में प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को मान्यता
व्याख्या
सही उत्तर राष्ट्रीय लेखा प्रणाली 2025 में प्राकृतिक संसाधन लेखांकन को मान्यता है। विज्ञप्ति कहती है कि इस प्रणाली के तहत हुए घटनाक्रम, विशेष रूप से राष्ट्रीय लेखा ढांचे के भीतर प्राकृतिक संसाधन लेखांकन की मान्यता, पर्यावरण लेखांकन का महत्व बढ़ाते हैं, और रूपरेखा में शामिल विषय प्राकृतिक संसाधन, अर्थव्यवस्था तथा पर्यावरण के बीच संबंध समझने और आंकड़ों की कमी पहचानने में मदद करेंगे। विकल्प B गलत है क्योंकि दस्तावेज में किसी कार्बन क्रेडिट एक्सचेंज का उल्लेख नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि इस विज्ञप्ति में आर्थिक सर्वेक्षण की चर्चा नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि किसी विलय की बात नहीं कही गई; राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय का नाम केवल पुरानी रणनीति जारी करने वाली संस्था के रूप में आया है।
पूरा लेख पढ़ें: पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030 जारी, एमओएसपीआई का कदम
अभ्यास प्रश्न
'भारत में पर्यावरण आर्थिक लेखा रणनीति 2026-2030' दस्तावेज किस मंत्रालय ने जारी किया?
- A.पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय
- B.सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
- C.पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
- D.नीति आयोग
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय है, जिसे संक्षेप में एमओएसपीआई कहा जाता है। यह दस्तावेज उसी का संकलन है और उस पुरानी रणनीति के बाद आया है जिसकी अवधि 2026 में समाप्त हो रही थी। विकल्प A यानी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय स्वाभाविक अनुमान लगता है क्योंकि विषय पर्यावरण से जुड़ा है, पर पर्यावरण लेखांकन सांख्यिकीय कार्य है और यह विज्ञप्ति सांख्यिकी मंत्रालय से आई है, जिसके राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने पुरानी रूपरेखा जारी की थी। विकल्प C यानी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय गलत है क्योंकि विज्ञप्ति में उसका नाम नहीं है, भले महासागर लेखा कार्य के क्षेत्रों में शामिल है। विकल्प D यानी नीति आयोग भी गलत है, क्योंकि इस विज्ञप्ति में उसकी कोई भूमिका नहीं है।
भारत जिस पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (एसईईए) का पालन करता है, उसे किस संस्था ने मान्यता दी है?
- A.संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग
- B.विश्व बैंक
- C.संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम
- D.अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग
व्याख्या
सही उत्तर संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग है। विज्ञप्ति स्पष्ट कहती है कि एमओएसपीआई पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली का पालन करता है, जिसे इस आयोग ने मान्यता दी है, और मंत्रालय ने 2018 से पर्यावरण लेखा के विभिन्न पहलुओं पर काम शुरू किया। विकल्प B यानी विश्व बैंक गलत है क्योंकि विज्ञप्ति इस प्रणाली को मान्यता देने का श्रेय उसे नहीं देती, भले बैंक प्राकृतिक पूंजी से जुड़े अपने आकलन प्रकाशित करता है। विकल्प C यानी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम आकर्षक विकल्प है क्योंकि उसका कार्यक्षेत्र पर्यावरण है, पर यहां नामित संस्था सांख्यिकी आयोग है, जो सरकारी सांख्यिकी के मानक तय करता है। विकल्प D यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष गलत है क्योंकि उसका काम व्यापक आर्थिक और वित्तीय सांख्यिकी से जुड़ा है।
भारत में पर्यावरण-आर्थिक लेखा रणनीति 2022-2026 के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन कार्य क्षेत्र चुना गया था?
- A.सामग्री प्रवाह लेखा
- B.उपभोक्ता मूल्य सूचकांक लेखा
- C.भुगतान संतुलन लेखा
- D.मौद्रिक समुच्चय
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सही उत्तर: A. सामग्री प्रवाह लेखा
व्याख्या
सही उत्तर सामग्री प्रवाह लेखा है। मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय की पुरानी रूपरेखा में सामग्री प्रवाह लेखा, महासागर लेखा, ऊर्जा लेखा तथा जैव विविधता और शहरी क्षेत्रों के विषयगत लेखा को उस अवधि के कार्य क्षेत्र के रूप में चुना गया था। उसी के अनुसार मंत्रालय ने वन, जैव विविधता, आर्द्रभूमि, महासागर लेखा, मृदा, जल गुणवत्ता, फसल भूमि, ऊर्जा, अवशेष, शहरी पारिस्थितिकी तंत्र और परागण सेवाओं पर अध्ययन तथा प्रकाशन जारी किए। विकल्प B गलत है क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक खुदरा महंगाई नापता है और पर्यावरण लेखांकन का हिस्सा नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि भुगतान संतुलन लेखा शेष विश्व के साथ लेनदेन दर्ज करता है। विकल्प D गलत है क्योंकि मौद्रिक समुच्चय केंद्रीय बैंक की मुद्रा एवं बैंकिंग सांख्यिकी का विषय है।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण किस केंद्रीय मंत्रालय के अधीन कार्य करता है?
- A.संचार मंत्रालय
- B.इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
- C.सूचना और प्रसारण मंत्रालय
- D.वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. संचार मंत्रालय
व्याख्या
सही उत्तर संचार मंत्रालय है, जिसके अधीन भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण काम करता है और जिसने बालासोर ड्राइव टेस्ट से जुड़ी विज्ञप्ति जारी की। ट्राई का काम दूरसंचार सेवाओं और शुल्कों का नियमन करना तथा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है, और ड्राइव टेस्ट उन तरीकों में से एक है जिससे वह जांचता है कि कंपनियां वास्तव में कैसी सेवा गुणवत्ता दे रही हैं। विकल्प ख, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सूचना प्रौद्योगिकी नीति देखता है, दूरसंचार नियमन नहीं। विकल्प ग, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, प्रसारण, फिल्म और समाचार माध्यमों से जुड़ा है। विकल्प घ, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, व्यापार और औद्योगिक नीति संभालता है। नियामक के साथ कॉल ड्रॉप दर और मीन ओपिनियन स्कोर जैसे मानक भी जोड़कर याद रखें।
अगस्त 2026 के लिए ट्राई का स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट बालासोर शहर में हुआ, जो किस लाइसेंस सेवा क्षेत्र में आता है?
- A.ओडिशा
- B.बिहार
- C.पश्चिम बंगाल
- D.झारखंड
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ओडिशा
व्याख्या
सही उत्तर ओडिशा है। बालासोर ओडिशा का शहर है और ड्राइव टेस्ट ओडिशा लाइसेंस सेवा क्षेत्र में किया गया, जिसकी निगरानी ट्राई के हैदराबाद क्षेत्रीय कार्यालय ने की। परीक्षण मार्ग में जनुगंज, मल्लिकाशपुर, रेमुना, सोरो, नीलगिरि, जलेश्वर और बालियापाल जैसे क्षेत्र शामिल रहे, जो सभी राज्य के बालासोर इलाके में हैं। विकल्प ख बिहार और विकल्प घ झारखंड पूर्वी भारत के पड़ोसी राज्य हैं, पर बालासोर उनमें नहीं आता। विकल्प ग पश्चिम बंगाल बालासोर जिले की उत्तरी सीमा से लगा है, इसलिए यह भ्रमित कर सकता है, लेकिन परीक्षण वाला शहर और सेवा क्षेत्र ओडिशा का है। लाइसेंस सेवा क्षेत्र वह इकाई है जिसमें दूरसंचार कंपनियां लाइसेंस रखती हैं और नियामक सेवा गुणवत्ता की माप और तुलना करता है, इसलिए परीक्षा में शहर के साथ उसका सेवा क्षेत्र भी पूछा जा सकता है।