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महासागरीय अनुसंधान पोत ओआरवी सागर मंथन कोलकाता में लॉन्च

भारत का पहला उन्नत महासागरीय अनुसंधान पोत ओआरवी सागर मंथन 9 सितंबर 2026 को कोलकाता में लॉन्च हुआ, जिसे जीआरएसई ने 840 करोड़ रुपये में बनाया है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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महासागरीय अनुसंधान पोत ओआरवी सागर मंथन कोलकाता में लॉन्च

चर्चा में क्यों

9 सितंबर 2026 को पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के एनसीपीओआर के लिए जीआरएसई द्वारा बनाया गया महासागरीय अनुसंधान पोत ओआरवी सागर मंथन कोलकाता में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लॉन्च किया, जिसकी लागत लगभग 840 करोड़ रुपये है।

भारत ने अपना पहला उन्नत महासागरीय अनुसंधान पोत जल में उतार दिया है। ओआरवी सागर मंथन, जिसे अब तक केवल यार्ड 3041 कहा जाता था, 9 सितंबर 2026 को कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में लॉन्च किया गया। पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने वर्चुअल माध्यम से इसका शुभारंभ किया और परंपरा के अनुसार उनकी पत्नी श्रीमती मंजू सिंह ने पोत का नामकरण किया।

किसने बनाया और किसके लिए

इस पोत को रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई) ने डिजाइन और निर्मित किया है। इसका स्वामित्व राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र (एनसीपीओआर) के पास है, जो पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन काम करता है। कोलकाता में मंत्रालय के सचिव डॉ. टी. श्रीनिवास कुमार उपस्थित रहे।

पोत के प्रमुख आंकड़े

विवरणब्यौरा
लागतलगभग 840 करोड़ रुपये
कार्यक्रमदीप महासागर मिशन का वर्टिकल-4, गहन महासागर सर्वेक्षण एवं अन्वेषण
सेवा अवधि30 वर्ष
प्रमाणनदोहरी श्रेणी, इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग और अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग
कमीशनिंग2028 के लिए निर्धारित

किसकी जगह लेगा

यह नया पोत धीरे-धीरे 43 वर्ष पुराने ओआरवी सागर कन्या की जगह लेगा, जिसे भारत ने 1983 में जर्मनी से खरीदा था। मंत्री ने इस दिन को ऐतिहासिक बताया और कहा कि अनुबंध के दो वर्ष के भीतर तथा कील बिछाने के महज पांच महीने बाद यह उपलब्धि मिली।

यह क्या करेगा

ओआरवी सागर मंथन हर मौसम में काम करने वाला मंच है, जिसे दक्षिणी महासागर जैसी कठिन परिस्थितियों के लिए भी तैयार किया गया है। इसमें डायनामिक पोजिशनिंग, मल्टीबीम बाथिमेट्री, मल्टीचैनल भूकंपीय प्रणाली, सब-बॉटम प्रोफाइलिंग और मौसम रडार लगे हैं तथा यह रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल और ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल तैनात कर सकता है। इसका अनुसंधान हिंद महासागर के मध्य-महासागरीय कटक पर होगा, जहां बहु-धातु हाइड्रोथर्मल सल्फाइड खनिजकरण की पहचान, पर्यावरणीय आधार रेखा तय करने और ऊपरी वायु के आंकड़े जुटाने का काम होगा।

अब तक के पड़ाव

अनुबंध पर जुलाई 2024 में हस्ताक्षर हुए, पहली स्टील कटिंग 29 नवंबर 2024 को हुई और कील 8 अप्रैल 2026 को बिछाई गई। अब सुपरस्ट्रक्चर निर्माण, सिस्टम एकीकरण और समुद्री परीक्षण होंगे, उसके बाद एनसीपीओआर को सौंपा जाएगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

पोतओआरवी सागर मंथन (यार्ड 3041)
लॉन्च तिथि9 सितंबर 2026, ऋषि बंकिम शिपयार्ड, कोलकाता
लॉन्च करने वालेडॉ. जितेंद्र सिंह, पृथ्वी विज्ञान मंत्री (वर्चुअल)
निर्मातागार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (जीआरएसई)
स्वामी संस्थाराष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
लागतलगभग 840 करोड़ रुपये
कार्यक्रमदीप महासागर मिशन का वर्टिकल-4
सेवा अवधि30 वर्ष
किसकी जगह लेगाओआरवी सागर कन्या, 43 वर्ष पुराना, 1983 में जर्मनी से खरीदा गया
कमीशनिंग2028 के लिए निर्धारित

परीक्षा की दृष्टि से

पोत का नाम और यार्ड संख्या 3041, निर्माता जीआरएसई, स्वामी एनसीपीओआर, लागत लगभग 840 करोड़ रुपये, दीप महासागर मिशन का वर्टिकल-4, 30 वर्ष की सेवा अवधि, 2028 की कमीशनिंग और 1983 में जर्मनी से खरीदे गए ओआरवी सागर कन्या का स्थान लेना, ये सभी बिंदु याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

9 सितंबर 2026 को लॉन्च हुए महासागरीय अनुसंधान पोत ओआरवी सागर मंथन को किस शिपयार्ड ने डिजाइन और निर्मित किया है?

  1. A.कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड
  2. B.मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स
  3. C.गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड
  4. D.हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड

मंत्री ने अनुबंध के दो वर्ष के भीतर लॉन्च पूरा करने के लिए यार्ड की सराहना की।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

ओआरवी सागर मंथन धीरे-धीरे किस पुराने अनुसंधान पोत की जगह लेगा?

  1. A.ओआरवी सागर निधि
  2. B.ओआरवी सागर कन्या
  3. C.आईएनएस संध्यायक
  4. D.एमवी सागर संपदा
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. ओआरवी सागर कन्या

यह पोत 43 वर्ष पुराना है और इसे 1983 में जर्मनी से खरीदा गया था, तथा नया पोत धीरे-धीरे इसका काम संभालेगा।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

ओआरवी सागर मंथन किस कार्यक्रम के अंतर्गत और लगभग कितनी लागत से बनाया गया है?

  1. A.दीप महासागर मिशन, लगभग 840 करोड़ रुपये
  2. B.मिशन समुद्रयान, लगभग 640 करोड़ रुपये
  3. C.नीली क्रांति, लगभग 940 करोड़ रुपये
  4. D.ओ-स्मार्ट योजना, लगभग 740 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. दीप महासागर मिशन, लगभग 840 करोड़ रुपये

ठीक-ठीक कहें तो यह पोत उस मिशन के वर्टिकल-4 के अंतर्गत बना है, जो गहन महासागर सर्वेक्षण और अन्वेषण से जुड़ा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओआरवी सागर मंथन को किस शिपयार्ड ने बनाया है?

रक्षा क्षेत्र के सार्वजनिक उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने कोलकाता के ऋषि बंकिम शिपयार्ड में इसे बनाया है। यह पोत राष्ट्रीय ध्रुवीय और महासागरीय अनुसंधान केंद्र के लिए बनाया गया है।

यह पोत किस पुराने जहाज की जगह लेगा?

ओआरवी सागर कन्या की, जो 43 वर्ष पुराना है और 1983 में जर्मनी से खरीदा गया था। मंत्रालय निकट भविष्य में और समुद्र विज्ञान पोत तथा एक ध्रुवीय अनुसंधान पोत लेने की योजना बना रहा है।

ओआरवी सागर मंथन किस मिशन के अंतर्गत बना है?

दीप महासागर मिशन के वर्टिकल-4, यानी गहन महासागर सर्वेक्षण एवं अन्वेषण के अंतर्गत, जिसकी लागत लगभग 840 करोड़ रुपये है। इसकी कमीशनिंग 2028 के लिए निर्धारित है।

स्रोत

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