मंत्रिमंडल ने रेलवे की आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी
आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 9 सितंबर 2026 को रेलवे की आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिन पर 10,021 करोड़ और 10,783 करोड़ रुपये लगेंगे।

चर्चा में क्यों
9 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की आठ मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को दो निर्णयों में मंजूरी दी, जिनसे रेल नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर और 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
भारतीय रेल को एक ही दिन में आठ क्षमता वृद्धि परियोजनाएं मिली हैं। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने 9 सितंबर 2026 को दो अलग-अलग निर्णयों में इन्हें स्वीकृति दी। हर परियोजना मल्टीट्रैकिंग की है, यानी मौजूदा मार्ग के साथ तीसरी या चौथी लाइन बिछाई जाएगी या एकल लाइन का दोहरीकरण होगा। सभी आठ परियोजनाएं 2029-30 तक पूरी की जानी हैं।
दक्षिण भारत का पहला समूह
पहले निर्णय में पांच परियोजनाएं हैं, जिनकी लागत लगभग 10,021 करोड़ रुपये है। ये तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों से गुजरती हैं और रेल नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर जोड़ेंगी।
| परियोजना | लंबाई |
| अरक्कोनम - रेनिगुंटा तीसरी और चौथी लाइन | 77 किमी |
| व्हाइटफील्ड - बांगरपेट तीसरी और चौथी लाइन | 47 किमी |
| होसुर - ओमालूर दोहरीकरण | 147 किमी |
| सलेम - करूर - डिंडीगुल दोहरीकरण | 159 किमी |
| सिकंदराबाद (घाटकेसर) - काजीपेट मल्टीट्रैकिंग | 110 किमी |
पूर्वी और मध्य भारत का दूसरा समूह
दूसरे निर्णय में तीन परियोजनाएं हैं और लागत 10,783 करोड़ रुपये है। ये हैं खड़गपुर से झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी से पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर) से पेंड्रा रोड तीसरी लाइन। ये पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी और लगभग 656 किलोमीटर जोड़ेंगी।
आठ परियोजनाओं से क्या मिलेगा
| मानक | पांच परियोजनाएं | तीन परियोजनाएं |
| जुड़ने वाले गांव | लगभग 2,121 | लगभग 4,790 |
| लाभान्वित आबादी | लगभग 52 लाख | लगभग 56 लाख |
| अतिरिक्त माल ढुलाई | 47 एमटीपीए | 27 एमटीपीए |
| तेल आयात में कमी | लगभग 8 करोड़ लीटर | लगभग 12 करोड़ लीटर |
| कार्बन उत्सर्जन में कमी | लगभग 42 करोड़ किलोग्राम | लगभग 62 करोड़ किलोग्राम |
योजना का आधार
दोनों समूह प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत तैयार किए गए हैं, जिसका उद्देश्य एकीकृत योजना से बहु-मार्गीय संपर्क बढ़ाना और लॉजिस्टिक लागत घटाना है। दक्षिणी समूह से होने वाली उत्सर्जन कमी लगभग 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है और पूर्वी समूह से होने वाली कमी लगभग 2.48 करोड़ पेड़ों के बराबर है। पूर्वी मार्ग कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात ढोने वाले भारी माल मार्ग हैं, जबकि दक्षिणी मार्गों से तिरुपति, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल फॉल्स, मेट्टूर बांध और कोडाइकनाल तक पहुंच आसान होगी।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मंजूरी देने वाली समिति | आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति, अध्यक्ष प्रधानमंत्री |
|---|---|
| मंजूरी की तिथि | 9 सितंबर 2026 |
| पहला समूह | पांच परियोजनाएं, 10,021 करोड़ रुपये, 17 जिले, लगभग 540 किलोमीटर |
| पहले समूह के राज्य | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना |
| दूसरा समूह | तीन परियोजनाएं, 10,783 करोड़ रुपये, 14 जिले, लगभग 656 किलोमीटर |
| दूसरे समूह के राज्य | पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ |
| पूरा होने का लक्ष्य | 2029-30 |
| योजना ढांचा | प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान |
| सबसे लंबी परियोजना | सलेम - करूर - डिंडीगुल दोहरीकरण, 159 किलोमीटर |
परीक्षा की दृष्टि से
दोनों लागतों को परियोजनाओं की संख्या से जोड़कर याद रखें: दक्षिण की पांच परियोजनाएं 10,021 करोड़ रुपये और पूर्व की तीन परियोजनाएं 10,783 करोड़ रुपये। साथ ही 17 जिले बनाम 14 जिले, लगभग 540 किलोमीटर बनाम 656 किलोमीटर, 47 एमटीपीए बनाम 27 एमटीपीए और पूरा होने का लक्ष्य 2029-30 याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
9 सितंबर 2026 को तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के लिए मंजूर पांच रेल मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं की कुल लागत कितनी है?
- A.10,021 करोड़ रुपये
- B.10,783 करोड़ रुपये
- C.12,540 करोड़ रुपये
- D.9,656 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. 10,021 करोड़ रुपये
व्याख्या
सही उत्तर 10,021 करोड़ रुपये है। आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेल मंत्रालय की पांच परियोजनाओं को इसी लागत पर मंजूरी दी, जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में फैली हैं और नेटवर्क में लगभग 540 किलोमीटर जोड़ेंगी। विकल्प B यानी 10,783 करोड़ रुपये उसी दिन लिए गए दूसरे निर्णय की लागत है, जिसमें पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तीन परियोजनाएं शामिल थीं। जो छात्र दोनों समूहों को मिला देते हैं, वे यही विकल्प चुनते हैं। विकल्प C यानी 12,540 करोड़ रुपये किसी भी निर्णय की लागत नहीं है और इसमें केवल 540 का अंक जोड़ा गया है, जो दक्षिणी समूह की लंबाई है। विकल्प D यानी 9,656 करोड़ रुपये में 656 का अंक जोड़ा गया है, जो पूर्वी समूह की लंबाई है। याद रखने का आसान तरीका यह है कि परियोजनाएं जितनी ज्यादा, लागत उतनी कम: पांच परियोजनाएं 10,021 करोड़ रुपये और तीन परियोजनाएं 10,783 करोड़ रुपये।
पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं से प्रति वर्ष कितनी अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बनेगी?
- A.47 एमटीपीए
- B.27 एमटीपीए
- C.56 एमटीपीए
- D.14 एमटीपीए
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 27 एमटीपीए
व्याख्या
सही उत्तर 27 एमटीपीए यानी 27 मिलियन टन प्रति वर्ष है। पूर्वी और मध्य भारत की तीन परियोजनाएं खड़गपुर से झारसुगुड़ा चौथी लाइन, कटनी से पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर से पेंड्रा रोड तीसरी लाइन हैं। ये कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात के परिवहन के आवश्यक मार्ग हैं और इनसे बनने वाली अतिरिक्त क्षमता 27 एमटीपीए बताई गई है। विकल्प A यानी 47 एमटीपीए उसी दिन मंजूर दूसरे समूह, यानी दक्षिणी राज्यों की पांच परियोजनाओं की क्षमता है, इसलिए यही सबसे बड़ा भ्रम पैदा करता है। विकल्प C में 56 का अंक है, जो पूर्वी परियोजनाओं से जुड़ने वाले गांवों की 56 लाख आबादी से लिया गया है, माल ढुलाई से इसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प D में 14 का अंक है, जो पूर्वी समूह के जिलों की संख्या है। इसलिए पांच परियोजनाओं के साथ 47 एमटीपीए और तीन परियोजनाओं के साथ 27 एमटीपीए जोड़कर याद रखें।
9 सितंबर 2026 को मंजूर आठ रेल मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं किस ढांचे के अंतर्गत तैयार की गई हैं?
- A.भारतमाला परियोजना
- B.सागरमाला कार्यक्रम
- C.प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान
- D.अमृत भारत स्टेशन योजना
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान
व्याख्या
सही उत्तर प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान है। दोनों मंत्रिमंडलीय निर्णयों में कहा गया है कि परियोजनाएं इसी मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिसका उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श से बहु-मार्गीय संपर्क तथा लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाना है। विकल्प A यानी भारतमाला परियोजना सड़क परिवहन मंत्रालय का राजमार्ग कार्यक्रम है, इसलिए रेल लाइन की क्षमता वृद्धि इसके दायरे में नहीं आती, भले ही उसका लक्ष्य भी बेहतर संपर्क हो। विकल्प B यानी सागरमाला कार्यक्रम बंदरगाहों और तटीय जहाजरानी से जुड़ा है और पोत परिवहन मंत्रालय चलाता है, इसलिए रेल निर्णय के लिए यह गलत है। विकल्प D यानी अमृत भारत स्टेशन योजना रेलवे की ही योजना है, पर वह स्टेशनों के पुनर्विकास से संबंधित है, न कि दो स्टेशनों के बीच तीसरी और चौथी लाइन बिछाने से। परीक्षा के लिए नई रेल लाइनों के हर मंत्रिमंडलीय निर्णय को गति शक्ति से जोड़कर याद रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
9 सितंबर 2026 को मंत्रिमंडल ने रेलवे की कितनी मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी?
कुल आठ परियोजनाओं को दो निर्णयों में मंजूरी मिली: दक्षिणी राज्यों में 10,021 करोड़ रुपये की पांच और पूर्वी तथा मध्य भारत में 10,783 करोड़ रुपये की तीन परियोजनाएं।
इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क में कितनी वृद्धि होगी?
दक्षिण की पांच परियोजनाओं से लगभग 540 किलोमीटर और पूर्व की तीन परियोजनाओं से लगभग 656 किलोमीटर लाइन बढ़ेगी। सभी परियोजनाएं 2029-30 तक पूरी करने की योजना है।
ये रेल परियोजनाएं किस योजना के अंतर्गत बनाई गई हैं?
प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत, जिसका लक्ष्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श से बहु-मार्गीय संपर्क बढ़ाना और लॉजिस्टिक लागत कम करना है।
स्रोत
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों के 17 जिलों में फैली हैं, इससे भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 540 किल (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों के 17 जिलों में फैली हैं, इससे भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 540 किल (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के 14 जिलों को कवर करने वाली तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिससे भारतीय रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
- केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के 14 जिलों को कवर करने वाली तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिससे भारतीय रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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