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एनएचआरसी की पहल: हैदराबाद जेल में जेंडर-न्यूट्रल सेल

एनएचआरसी के विशेष मॉनिटर के दौरे के बाद हैदराबाद केंद्रीय कारागार में अलग जेंडर-न्यूट्रल सेल बनी और वहां रहने वालों को पहचान के अनुरूप पोशाक की अनुमति मिली।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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एनएचआरसी की पहल: हैदराबाद जेल में जेंडर-न्यूट्रल सेल — GK24 title card

चर्चा में क्यों

5 नवंबर 2026 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बताया कि हैदराबाद केंद्रीय कारागार ने उसकी सिफारिश पर अमल करते हुए विविध लैंगिक पहचान और अभिव्यक्ति वाले व्यक्तियों के लिए अलग जेंडर-न्यूट्रल सेल बना दी है और उन्हें पहचान के अनुरूप पोशाक की अनुमति भी दी है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को हैदराबाद केंद्रीय कारागार के अधिकारियों ने बताया है कि जेल के भीतर विविध लैंगिक पहचान और अभिव्यक्ति वाले व्यक्तियों के लिए एक अलग जेंडर-न्यूट्रल सेल बना दी गई है। जेल प्रशासन के अनुसार इसका उद्देश्य उनकी गरिमा की रक्षा करना और उन्हें उपयुक्त रहने की व्यवस्था देना है।

यह कैसे हुआ

यह बदलाव 8 अक्टूबर 2026 को आयोग के विशेष मॉनिटर के जेल दौरे के बाद आया। विशेष मॉनिटर वह अधिकारी होता है जिसे आयोग ट्रांसजेंडर व्यक्तियों तथा एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के अधिकारों से जुड़े विषय सौंपता है। दौरे के समय उन्होंने हिरासत में रहने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए आयोग और गृह मंत्रालय द्वारा जारी सलाह-पत्रों पर अमल करने की बात पर जोर दिया।

जेल ने क्या बताया

आयोग को भेजी अनुपालन रिपोर्ट में हैदराबाद केंद्रीय कारागार के अधीक्षक ने पुष्टि की कि जेंडर-न्यूट्रल सेल बनाने की सिफारिश पर अमल कर दिया गया है। इसके साथ जेल अधिकारियों ने उस सेल में रखे गए व्यक्तियों के लिए पहचान के अनुरूप पोशाक की अनुमति भी दे दी है, जिससे बंदी वही पहन सकें जो उनकी स्वयं की लैंगिक पहचान से मेल खाता है।

यह क्यों अहम है

भारत की जेलें पुरुष और महिला बैरकों के विभाजन पर बनी हैं, इसलिए ट्रांसजेंडर तथा विविध लैंगिक पहचान वाले बंदियों के लिए अपनी कोई जगह नहीं बचती और वे उत्पीड़न के सामने खुले रह जाते हैं। अलग सेल और पोशाक की अनुमति, दोनों मिलकर इस एक जेल में यह समस्या हल करते हैं और दूसरे राज्यों के कारागार विभागों के सामने एक काम करता हुआ उदाहरण रखते हैं। आयोग ने कहा कि यह कदम सुधार संस्थानों के भीतर विविध लैंगिक पहचान और अभिव्यक्ति वाले व्यक्तियों के मानवाधिकार तथा गरिमा की रक्षा की उसकी कोशिश को दर्शाता है।

आयोग की निगरानी व्यवस्था

एनएचआरसी विशेष मॉनिटर और विशेष प्रतिवेदक नियुक्त करता है, जो हिरासत संस्थानों का दौरा करते हैं, वहां की स्थिति देखते हैं और सुधार की सिफारिश करते हैं; इसके बाद आयोग संबंधित अधिकारी से अनुपालन रिपोर्ट मांगता है। हैदराबाद का मामला इस पूरी शृंखला का उदाहरण है, दौरा, सिफारिश, अनुपालन रिपोर्ट और जेल के भीतर वास्तविक बदलाव। परीक्षार्थियों के लिए यह समझने का अच्छा उदाहरण है कि अपनी पुलिस शक्ति के बिना भी एक मानवाधिकार संस्था सलाह-पत्र, निरीक्षण और अनुगमन के जरिये बदलाव ला सकती है।

महत्वपूर्ण तथ्य

संस्थाराष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत
कारागारकेंद्रीय कारागार, हैदराबाद
बनी सुविधाविविध लैंगिक पहचान और अभिव्यक्ति वाले व्यक्तियों के लिए जेंडर-न्यूट्रल सेल
अतिरिक्त अनुमतिसेल में रखे गए व्यक्तियों के लिए पहचान के अनुरूप पोशाक
कारण8 अक्टूबर 2026 को आयोग के विशेष मॉनिटर का जेल दौरा
विशेष मॉनिटर का दायित्वट्रांसजेंडर व्यक्तियों तथा एलजीबीटीक्यू+ समुदाय के अधिकारों से जुड़े विषय
उल्लिखित सलाह-पत्रएनएचआरसी तथा गृह मंत्रालय के सलाह-पत्र
अनुपालन रिपोर्ट भेजीअधीक्षक, केंद्रीय कारागार, हैदराबाद

परीक्षा की दृष्टि से

संस्था (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग), जेल (हैदराबाद केंद्रीय कारागार), बनी सुविधा (जेंडर-न्यूट्रल सेल), दूसरी अनुमति (पहचान के अनुरूप पोशाक), कारण (8 अक्टूबर 2026 को विशेष मॉनिटर का दौरा) और उल्लिखित सलाह-पत्रों के दो स्रोत (एनएचआरसी तथा गृह मंत्रालय) याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.राष्ट्रीयआसान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की पहल के बाद किस कारागार में अलग जेंडर-न्यूट्रल सेल बनाई गई है?

  1. A.केंद्रीय कारागार, हैदराबाद
  2. B.तिहाड़ जेल, दिल्ली
  3. C.यरवदा केंद्रीय कारागार, पुणे
  4. D.प्रेसीडेंसी सुधार गृह, कोलकाता
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. केंद्रीय कारागार, हैदराबाद

वहां के अधिकारियों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सूचित किया कि विविध लैंगिक पहचान और अभिव्यक्ति वाले व्यक्तियों के लिए अलग जेंडर-न्यूट्रल सेल बना दी गई है, जिससे उनकी गरिमा सुरक्षित रहे और उन्हें उपयुक्त रहने की व्यवस्था मिले, और यह भी बताया कि वहां रखे गए व्यक्तियों के लिए…

Q2.राष्ट्रीयमध्यम

हैदराबाद जेल में जेंडर-न्यूट्रल सेल 8 अक्टूबर 2026 को हुए किस अधिकारी के दौरे के बाद बनी?

  1. A.ट्रांसजेंडर तथा एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों के लिए एनएचआरसी के विशेष मॉनिटर
  2. B.एनएचआरसी के अध्यक्ष
  3. C.उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त न्यायमित्र
  4. D.राज्य मानवाधिकार आयोग के सदस्य
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. ट्रांसजेंडर तथा एलजीबीटीक्यू+ अधिकारों के लिए एनएचआरसी के विशेष मॉनिटर

उन्होंने 8 अक्टूबर 2026 को कारागार का दौरा किया और उसी दौरान हिरासत में रहने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए आयोग तथा गृह मंत्रालय के सलाह-पत्रों पर अमल करने की बात पर जोर दिया।

Q3.राष्ट्रीयमध्यम

जेंडर-न्यूट्रल सेल बनाने के अलावा हैदराबाद जेल प्रशासन ने वहां रखे गए व्यक्तियों को कौन सी अनुमति दी है?

  1. A.पहचान के अनुरूप पोशाक
  2. B.वैवाहिक मुलाकात
  3. C.खुली जेल में स्थानांतरण
  4. D.अलग रसोई
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. पहचान के अनुरूप पोशाक

जेल अधिकारियों ने जेंडर-न्यूट्रल सेल में रखे गए व्यक्तियों के लिए इसकी अनुमति दी, और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सेल के साथ इसे भी विशेष मॉनिटर के 8 अक्टूबर 2026 के दौरे के बाद की गई सिफारिश का अनुपालन माना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएचआरसी की पहल पर किस जेल में जेंडर-न्यूट्रल सेल बनी है?

हैदराबाद की केंद्रीय कारागार में। वहां के अधिकारियों ने आयोग को बताया कि विविध लैंगिक पहचान और अभिव्यक्ति वाले व्यक्तियों के लिए अलग सेल बना दी गई है और उनके लिए पहचान के अनुरूप पोशाक की अनुमति भी दी गई है।

यह सेल बनाने की नौबत कैसे आई?

8 अक्टूबर 2026 को आयोग के विशेष मॉनिटर ने जेल का दौरा किया और एनएचआरसी तथा गृह मंत्रालय के सलाह-पत्रों पर अमल करने पर जोर दिया। बाद में जेल अधीक्षक ने आयोग को अनुपालन रिपोर्ट भेजी।

पहचान के अनुरूप पोशाक का क्या अर्थ है?

वह पोशाक जो व्यक्ति की स्वयं की लैंगिक पहचान से मेल खाती है। हैदराबाद जेल प्रशासन ने जेंडर-न्यूट्रल सेल में रखे गए व्यक्तियों के लिए अलग रहने की व्यवस्था के साथ-साथ इसकी भी अनुमति दी है।

स्रोत

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