एनएचआरसी का पांचवां आईटीईसी मानवाधिकार कार्यक्रम संपन्न
वैश्विक दक्षिण की मानवाधिकार संस्थाओं के लिए एनएचआरसी का छह दिवसीय कार्यक्रम नई दिल्ली में संपन्न हुआ, जिसमें चौदह देशों के अड़तीस अधिकारी आए।

चर्चा में क्यों
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वैश्विक दक्षिण की संस्थाओं के लिए अपने आईटीईसी क्षमता-निर्माण कार्यक्रम का पांचवां संस्करण संपन्न किया।
क्या संपन्न हुआ
अन्य विकासशील देशों की मानवाधिकार संस्थाओं के लिए चलाया गया एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नई दिल्ली में समाप्त हो गया। यह इसका पांचवां संस्करण था, जो भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग के अंतर्गत हुआ और 14 सितंबर 2026 से छह दिन चला।
इसमें सरकार के दो अंगों ने मिलकर काम किया। कार्यक्रम की रूपरेखा भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने बनाई, और विदेश मंत्रालय इसमें सहयोगी रहा - विदेशी अधिकारियों के लिए बने किसी भी आईटीईसी कार्यक्रम का यही सामान्य ढांचा होता है।
कौन आया
अड़तीस वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जो चौदह राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से आए थे। यह सूची चार महाद्वीपों तक फैली है। अफ्रीका से अल्जीरिया, इथियोपिया, केन्या, दक्षिण अफ्रीका तथा जिम्बाब्वे; लैटिन अमेरिका से चिली और इक्वाडोर; एशिया से इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मलेशिया, ओमान और ताजिकिस्तान; और प्रशांत क्षेत्र से समोआ।
यही विविधता इस अभ्यास का मर्म है। ये सभी संस्थाएं मोटे तौर पर एक जैसा काम बहुत अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं में करती हैं, और कार्यक्रम इसी मान्यता पर खड़ा है कि वे किसी एक आदर्श से अधिक एक-दूसरे से सीख सकती हैं।
समापन भाषण
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने समापन भाषण दिया। उनका तर्क था कि वैश्विक दक्षिण की ऐसी संस्थाओं के बीच सहयोग और गहरा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थाएं तभी बेहतर होती हैं जब वे अपना अनुभव सामने रखें, अपनी कठिनाइयों को नाम दें और अपनी गलतियों को छिपाने के बजाय उनसे सीखने को तैयार रहें।
सत्र में संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार तथा श्रीमती सैदिंगपुई छकछुआक के साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
किन विषयों पर चर्चा
सत्र व्याख्यान-आधारित न होकर संवादात्मक रखे गए और इनमें प्रतिष्ठित व्यक्ति तथा विषय विशेषज्ञ शामिल हुए। चर्चा में अधिकारों के दोनों पक्ष आए - एक ओर नागरिक और राजनीतिक अधिकार, दूसरी ओर सामाजिक-आर्थिक तथा सांस्कृतिक अधिकार। शासन से जुड़े पहलुओं पर भी बात हुई।
परीक्षा में क्यों आता है
इसमें दो सूत्र परखने योग्य हैं। पहला स्वयं संस्था - एनएचआरसी और उसके अध्यक्ष कौन हैं। दूसरा आईटीईसी, भारत का लंबे समय से चला आ रहा तकनीकी सहयोग कार्यक्रम, जो विदेश नीति और सॉफ्ट पावर के प्रश्नों में नियमित रूप से आता है। जो समाचार दोनों को जोड़ दे, वह नोट करने लायक है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| कार्यक्रम | मानवाधिकारों पर पांचवां आईटीईसी कार्यकारी क्षमता-निर्माण कार्यक्रम |
|---|---|
| आयोजक | राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), भारत |
| सहयोगी | विदेश मंत्रालय |
| स्थान | नई दिल्ली |
| अवधि | छह दिन, 14 सितंबर 2026 से |
| प्रतिभागी | 14 संस्थाओं से 38 वरिष्ठ अधिकारी |
| समापन भाषण | न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, अध्यक्ष, एनएचआरसी भारत |
परीक्षा की दृष्टि से
तीन बातें प्रश्न बनाती हैं। एनएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन हैं। सहयोगी मंत्रालय विदेश मंत्रालय है। और संख्याएं - चौदह संस्थाओं से अड़तीस अधिकारी, 14 सितंबर 2026 से छह दिन।
अभ्यास प्रश्न
मानवाधिकारों पर पांचवें आईटीईसी क्षमता-निर्माण कार्यक्रम में समापन भाषण किसने दिया?
- A.केंद्रीय गृह मंत्री
- B.न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, अध्यक्ष, एनएचआरसी भारत
- C.भारत के मुख्य न्यायाधीश
- D.केंद्रीय विदेश मंत्री
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, अध्यक्ष, एनएचआरसी भारत
व्याख्या
उत्तर हैं न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, जो भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं और जिन्होंने कार्यक्रम का समापन किया। उनका विषय वैश्विक दक्षिण की मानवाधिकार संस्थाओं के बीच सहयोग था, और तर्क यह कि ये संस्थाएं तभी बेहतर होती हैं जब अपना अनुभव खुलकर साझा करें, अपनी कठिनाइयों को नाम दें और अपनी भूलों से सीखें।
शेष विकल्प ऐसे पदों के हैं जो मानवाधिकार से जुड़े आयोजन के लिए विश्वसनीय लगते हैं, पर यहाँ उनकी कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्रालय इस कार्यक्रम में सहयोगी अवश्य था, जिससे विकल्प D सबसे प्रबल भ्रम बनता है, किंतु समापन भाषण आयोग के अपने अध्यक्ष ने दिया। सत्र में संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार और श्रीमती सैदिंगपुई छकछुआक भी उपस्थित रहे। परीक्षा की दृष्टि से अध्यक्ष का नाम यहाँ सबसे उपयोगी तथ्य है, क्योंकि वह इस समाचार से आगे भी काम आता है - एनएचआरसी से जुड़ा कोई भी प्रश्न प्रायः अध्यक्ष के नाम पर ही टिकता है।
कार्यक्रम में कितनी राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने प्रतिभागी भेजे?
- A.आठ
- B.ग्यारह
- C.चौदह
- D.बीस
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. चौदह
व्याख्या
उत्तर है चौदह। इस समाचार में दो संख्याएं साथ चलती हैं और आपस में बदल जाना आसान है - अड़तीस वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, और वे चौदह राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से आए थे। संस्थाएं छोटी संख्या हैं, लोग बड़ी। जो अभ्यर्थी केवल एक अंक याद रखेगा, वह दूसरे पर अटक जाएगा, इसलिए दोनों को जोड़ी की तरह याद रखना चाहिए।
भाग लेने वाले देशों को महाद्वीप के हिसाब से देखें तो याद रखना आसान हो जाता है। अफ्रीका से अल्जीरिया, इथियोपिया, केन्या, दक्षिण अफ्रीका तथा जिम्बाब्वे; लैटिन अमेरिका से चिली और इक्वाडोर; एशिया से इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मलेशिया, ओमान और ताजिकिस्तान; और प्रशांत क्षेत्र से समोआ। यानी फैलाव अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, एशिया और प्रशांत तक है। यही विविधता कार्यक्रम की मूल सोच बताती है - अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं में लगभग एक जैसा काम करने वाली संस्थाएं किसी एक आदर्श से अधिक एक-दूसरे से सीख सकती हैं। इसी आधार पर आयोग के अध्यक्ष ने वैश्विक दक्षिण की संस्थाओं के बीच और गहरे सहयोग की बात रखी।
एनएचआरसी ने मानवाधिकारों पर यह आईटीईसी कार्यक्रम किस मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया?
- A.गृह मंत्रालय
- B.विदेश मंत्रालय
- C.विधि एवं न्याय मंत्रालय
- D.सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. विदेश मंत्रालय
व्याख्या
उत्तर है विदेश मंत्रालय। यह जोड़ी संयोग नहीं है - भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम विदेश नीति का एक साधन है, जिसके जरिए अन्य विकासशील देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षण और विशेषज्ञता दी जाती है। इसलिए विदेशी मानवाधिकार संस्थाओं के लिए बना कोई भी पाठ्यक्रम स्वाभाविक रूप से विदेश मंत्रालय से होकर चलता है।
सूची में दिए गए बाकी मंत्रालयों का भारत के भीतर मानवाधिकार कार्य से किसी न किसी रूप में संबंध है, इसीलिए वे भ्रम पैदा करते हैं, पर यहाँ सहयोगी के रूप में उनका नाम नहीं है। परीक्षा के लिए आईटीईसी और विदेश मंत्रालय को एक स्थिर जोड़ी मानकर चलें, और यह भी याद रखें कि यह कार्यक्रम का पांचवां संस्करण था, जो नई दिल्ली में 14 सितंबर 2026 से छह दिन चला।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के एनएचआरसी के अध्यक्ष कौन हैं?
न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, जिन्होंने इस कार्यक्रम में समापन भाषण दिया।
कार्यक्रम में कौन सा मंत्रालय सहयोगी था?
भारत सरकार का विदेश मंत्रालय।
कितने देशों ने भाग लिया?
चौदह राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने कुल अड़तीस वरिष्ठ अधिकारी भेजे।
स्रोत
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