मानवाधिकारों पर पांचवें आईटीईसी क्षमता-निर्माण कार्यक्रम में समापन भाषण किसने दिया?
- A.केंद्रीय गृह मंत्री
- B.न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, अध्यक्ष, एनएचआरसी भारत
- C.भारत के मुख्य न्यायाधीश
- D.केंद्रीय विदेश मंत्री
सही उत्तर
B. न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, अध्यक्ष, एनएचआरसी भारत
व्याख्या
उत्तर हैं न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन, जो भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष हैं और जिन्होंने कार्यक्रम का समापन किया। उनका विषय वैश्विक दक्षिण की मानवाधिकार संस्थाओं के बीच सहयोग था, और तर्क यह कि ये संस्थाएं तभी बेहतर होती हैं जब अपना अनुभव खुलकर साझा करें, अपनी कठिनाइयों को नाम दें और अपनी भूलों से सीखें।
शेष विकल्प ऐसे पदों के हैं जो मानवाधिकार से जुड़े आयोजन के लिए विश्वसनीय लगते हैं, पर यहाँ उनकी कोई भूमिका नहीं थी। विदेश मंत्रालय इस कार्यक्रम में सहयोगी अवश्य था, जिससे विकल्प D सबसे प्रबल भ्रम बनता है, किंतु समापन भाषण आयोग के अपने अध्यक्ष ने दिया। सत्र में संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार और श्रीमती सैदिंगपुई छकछुआक भी उपस्थित रहे। परीक्षा की दृष्टि से अध्यक्ष का नाम यहाँ सबसे उपयोगी तथ्य है, क्योंकि वह इस समाचार से आगे भी काम आता है - एनएचआरसी से जुड़ा कोई भी प्रश्न प्रायः अध्यक्ष के नाम पर ही टिकता है।
पूरा लेख पढ़ें: एनएचआरसी का पांचवां आईटीईसी मानवाधिकार कार्यक्रम संपन्न
अभ्यास प्रश्न
कार्यक्रम में कितनी राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने प्रतिभागी भेजे?
- A.आठ
- B.ग्यारह
- C.चौदह
- D.बीस
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सही उत्तर: C. चौदह
व्याख्या
उत्तर है चौदह। इस समाचार में दो संख्याएं साथ चलती हैं और आपस में बदल जाना आसान है - अड़तीस वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, और वे चौदह राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं से आए थे। संस्थाएं छोटी संख्या हैं, लोग बड़ी। जो अभ्यर्थी केवल एक अंक याद रखेगा, वह दूसरे पर अटक जाएगा, इसलिए दोनों को जोड़ी की तरह याद रखना चाहिए।
भाग लेने वाले देशों को महाद्वीप के हिसाब से देखें तो याद रखना आसान हो जाता है। अफ्रीका से अल्जीरिया, इथियोपिया, केन्या, दक्षिण अफ्रीका तथा जिम्बाब्वे; लैटिन अमेरिका से चिली और इक्वाडोर; एशिया से इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, मलेशिया, ओमान और ताजिकिस्तान; और प्रशांत क्षेत्र से समोआ। यानी फैलाव अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, एशिया और प्रशांत तक है। यही विविधता कार्यक्रम की मूल सोच बताती है - अलग-अलग कानूनी व्यवस्थाओं में लगभग एक जैसा काम करने वाली संस्थाएं किसी एक आदर्श से अधिक एक-दूसरे से सीख सकती हैं। इसी आधार पर आयोग के अध्यक्ष ने वैश्विक दक्षिण की संस्थाओं के बीच और गहरे सहयोग की बात रखी।
एनएचआरसी ने मानवाधिकारों पर यह आईटीईसी कार्यक्रम किस मंत्रालय के सहयोग से आयोजित किया?
- A.गृह मंत्रालय
- B.विदेश मंत्रालय
- C.विधि एवं न्याय मंत्रालय
- D.सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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सही उत्तर: B. विदेश मंत्रालय
व्याख्या
उत्तर है विदेश मंत्रालय। यह जोड़ी संयोग नहीं है - भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग कार्यक्रम विदेश नीति का एक साधन है, जिसके जरिए अन्य विकासशील देशों के अधिकारियों को प्रशिक्षण और विशेषज्ञता दी जाती है। इसलिए विदेशी मानवाधिकार संस्थाओं के लिए बना कोई भी पाठ्यक्रम स्वाभाविक रूप से विदेश मंत्रालय से होकर चलता है।
सूची में दिए गए बाकी मंत्रालयों का भारत के भीतर मानवाधिकार कार्य से किसी न किसी रूप में संबंध है, इसीलिए वे भ्रम पैदा करते हैं, पर यहाँ सहयोगी के रूप में उनका नाम नहीं है। परीक्षा के लिए आईटीईसी और विदेश मंत्रालय को एक स्थिर जोड़ी मानकर चलें, और यह भी याद रखें कि यह कार्यक्रम का पांचवां संस्करण था, जो नई दिल्ली में 14 सितंबर 2026 से छह दिन चला।
18वीं आईपी ब्रिक्स बैठक में जिन नई परियोजनाओं पर विचार हुआ, उनमें इनमें से कौन शामिल नहीं थी?
- A.ब्रिक्स बौद्धिक संपदा जागरूकता श्रृंखला
- B.आईपी ब्रिक्स फिनटेक इनोवेशन मॉनिटर
- C.ब्रिक्स औद्योगिक संपदा व्यावसायीकरण फोरम
- D.ब्रिक्स साझा मुद्रा पेटेंट कोष
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सही उत्तर: D. ब्रिक्स साझा मुद्रा पेटेंट कोष
व्याख्या
सही उत्तर ब्रिक्स साझा मुद्रा पेटेंट कोष है, जिसका जिक्र विज्ञप्ति में कहीं नहीं है। जिन नई परियोजनाओं पर विचार-विमर्श पूरा हुआ वे हैं ब्रिक्स बौद्धिक संपदा जागरूकता श्रृंखला, आईपी ब्रिक्स फिनटेक इनोवेशन मॉनिटर, ब्रिक्स औद्योगिक संपदा व्यावसायीकरण फोरम और सर्वोत्तम प्रथाओं का रिपॉजिटरी, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा विकास के लिए बौद्धिक संपदा नीतियों से जुड़ी पहल, ब्रिक्स देशों की डिजाइन प्रणालियों पर अनुसंधान और ब्रिक्स देशों के पेटेंट दस्तावेजीकरण एवं सूचना संसाधनों का मैनुअल। विकल्प ए, बी और सी इसी सूची के असली नाम हैं। प्रमुखों ने समन्वय तंत्र और प्रगति की आवधिक समीक्षा पर भी बल दिया, ताकि ये परियोजनाएं बैठकों के बीच अधूरी न रह जाएं और आईपी ब्रिक्स समूह में सहयोग की निरंतरता बनी रहे। साथ ही उन्होंने पारंपरिक ज्ञान तथा चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों को साझा विरासत मानकर उनके संरक्षण की जरूरत भी रेखांकित की।
ब्रिक्स देशों के बौद्धिक संपदा कार्यालयों के प्रमुखों की 18वीं बैठक किस शहर में हुई?
- A.मॉस्को
- B.नई दिल्ली
- C.जोहानिसबर्ग
- D.रियो डी जनेरियो
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सही उत्तर: B. नई दिल्ली
व्याख्या
सही उत्तर नई दिल्ली है। तीन दिन की यह बैठक वहीं 1 से 3 सितंबर 2026 तक हुई और मेजबानी पेटेंट, डिजाइन और व्यापार चिह्न महानियंत्रक के कार्यालय ने की, जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के अंतर्गत काम करता है। वर्ष 2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है, इसीलिए यह वार्षिक बैठक भारत की राजधानी आई, और विज्ञप्ति इस मेजबानी को कार्यालय के लिए गर्व का विषय बताती है। विकल्प ए, सी और डी ब्रिक्स के अन्य सदस्य देशों के शहर हैं, इसलिए वे भ्रम पैदा करते हैं, पर इस संस्करण की मेजबानी उनमें से किसी ने नहीं की। ध्यान रहे कि रूस, ईरान और इथियोपिया के प्रतिनिधि ऑनलाइन जुड़े थे, इसलिए सदस्य होने का अर्थ प्रत्यक्ष उपस्थिति नहीं है।
18वीं आईपी ब्रिक्स बैठक के प्रमुख परिणाम के रूप में क्या अपनाया गया?
- A.पेटेंट पर नई दिल्ली घोषणा-पत्र
- B.अद्यतन परिचालन दिशानिर्देश
- C.कॉपीराइट पर ब्रिक्स चार्टर
- D.एकल ब्रिक्स पेटेंट कार्यालय
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सही उत्तर: B. अद्यतन परिचालन दिशानिर्देश
व्याख्या
सही उत्तर अद्यतन परिचालन दिशानिर्देश हैं। विज्ञप्ति इनके अपनाए जाने को विचार-विमर्श का प्रमुख परिणाम बताती है और इनका उद्देश्य भी साफ करती है: सदस्य कार्यालयों के बीच परिणामोन्मुख सहयोग की राह दिखाना, सीमा पार नवाचार को बढ़ावा देना और वैश्विक बौद्धिक संपदा मानक गढ़ने के साझा प्रयासों को मजबूत करना। विकल्प ए और सी गढ़े हुए दस्तावेज हैं, जो इसलिए भरोसेमंद लगते हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बैठकों से अक्सर घोषणा-पत्र और चार्टर निकलते हैं, पर विज्ञप्ति में इनका नाम नहीं है। विकल्प डी सिर्फ गलत ही नहीं, समझने लायक भी है: बैठक मौजूदा कार्यालयों के बीच सहयोग पर काम कर रही थी, जिसमें पेटेंट परीक्षा सहयोग का वह अध्ययन शामिल है जिसका मकसद प्रक्रियाएं सरल करना, लंबित मामले घटाना और खोज परिणामों का आदान-प्रदान सुधारना है, पर कोई एकल ब्रिक्स पेटेंट कार्यालय नहीं बनाया गया।