चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग मध्यस्थता मामले में एनएचएआई जीता
एसएआरओडी के मध्यस्थता अधिकरण ने राजस्थान के चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग विवाद में 366.53 करोड़ रुपये के दावे खारिज किए और एनएचएआई को 33.54 करोड़ रुपये दिलाए।

चर्चा में क्यों
16 अक्टूबर 2026 को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बताया कि एसएआरओडी के मध्यस्थता अधिकरण ने चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग विवाद में एनएचएआई के पक्ष को बरकरार रखते हुए 366.53 करोड़ रुपये के दावे खारिज किए और प्राधिकरण को 33.54 करोड़ रुपये दिलाए।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-76 के 93.5 किलोमीटर लंबे चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड को छह लेन का बनाने से जुड़े मध्यस्थता मामले में जीत हासिल की है। यह विवाद रियायतग्राही कंपनी उचित एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड के साथ था, जिसे टीआरआईएल रोड्स प्राइवेट लिमिटेड ने प्रवर्तित किया था। अधिकरण ने रियायत समझौते पर प्राधिकरण के पक्ष को लगभग पूरी तरह सही माना, जिससे सार्वजनिक धन बचा और राजमार्ग परियोजनाओं का संविदात्मक ढांचा मजबूत हुआ।
अधिकरण का फैसला
सोसाइटी फॉर अफोर्डेबल रिड्रेसल ऑफ डिस्प्यूट्स (एसएआरओडी) के तहत बने तीन सदस्यीय अधिकरण ने दावों और प्रतिदावों की जांच की। उसने रियायतग्राही के कुल 366.53 करोड़ रुपये के दावे खारिज कर दिए। इनमें 238.18 करोड़ रुपये का वह दावा भी था जो कोविड-19 की अवधि से जोड़कर कार्यावधि बढ़ने की लागत के नाम पर किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद अधिकरण ने यह दावा नामंजूर कर दिया और सिर्फ 14.51 करोड़ रुपये के दावे स्वीकार किए, साथ ही 2.82 करोड़ रुपये की सशर्त वापसी की इजाजत दी।
एनएचएआई को मिले प्रतिदावे
दूसरी ओर अधिकरण ने प्राधिकरण के प्रतिदावों पर मूल राशि के रूप में 33.54 करोड़ रुपये दिलाए।
| मद | राशि |
| परियोजना के दायरे से हटाए गए कार्य की वसूली | 27 करोड़ रुपये |
| राजमार्ग का रखरखाव न करने पर | 4.03 करोड़ रुपये |
| मार्च 2021 की पूर्णता तिथि के बाद वसूला गया अनधिकृत टोल | 2.51 करोड़ रुपये |
| कुल मूल राशि | 33.54 करोड़ रुपये |
हाल की अन्य जीतें
प्राधिकरण हाल के महीनों में कई मध्यस्थता मामलों में अपना पक्ष मजबूती से रख चुका है। जुलाई 2026 में बरेली हाईवेज प्रोजेक्ट लिमिटेड से जुड़ी कार्यवाही में लगभग 3,177 करोड़ रुपये के दावों का बचाव किया गया। जून 2026 में कर्नाटक की तुमकुर-चित्रदुर्ग छह लेन परियोजना का मामला 1,202 करोड़ रुपये के साथ उसके पक्ष में गया। अप्रैल 2026 में पानीपत-जालंधर राजमार्ग के दो मामलों का निपटारा 819.96 करोड़ रुपये में उसके हक में हुआ, जिनमें रियायतग्राही के करीब 8,375 करोड़ रुपये के दावे और प्राधिकरण के 2,888.64 करोड़ रुपये के प्रतिदावे शामिल थे। मई 2026 में गुजरात के कामरेज-चलथान खंड (राष्ट्रीय राजमार्ग-48) पर ठेकेदार के लगभग 174.49 करोड़ रुपये के दावे केवल 54 लाख रुपये में निपटा दिए गए।
महत्व
प्राधिकरण के अनुसार ये नतीजे मजबूत संविदात्मक प्रबंधन और सोची-समझी कानूनी रणनीति का संकेत हैं। इनसे राजमार्ग अवसंरचना के निर्माण और संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा अनुशासन को बल मिलता है और सार्वजनिक धन का सही उपयोग सुनिश्चित होता है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| प्राधिकरण | भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) |
|---|---|
| परियोजना | राष्ट्रीय राजमार्ग-76 के चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड का छह लेन निर्माण, राजस्थान |
| लंबाई | 93.5 किलोमीटर |
| रियायतग्राही | उचित एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड, प्रवर्तक टीआरआईएल रोड्स प्राइवेट लिमिटेड |
| मध्यस्थता संस्था | सोसाइटी फॉर अफोर्डेबल रिड्रेसल ऑफ डिस्प्यूट्स (एसएआरओडी), तीन सदस्यीय अधिकरण |
| खारिज दावे | 366.53 करोड़ रुपये |
| नामंजूर कोविड-19 दावा | 238.18 करोड़ रुपये |
| स्वीकृत दावे | 14.51 करोड़ रुपये तथा 2.82 करोड़ रुपये की सशर्त वापसी |
| एनएचएआई को प्रतिदावे | 33.54 करोड़ रुपये मूल राशि |
| प्रतिदावों का ब्योरा | 27 करोड़ रुपये हटाया गया कार्य, 4.03 करोड़ रुपये रखरखाव, 2.51 करोड़ रुपये अनधिकृत टोल |
| परियोजना पूर्णता तिथि | मार्च 2021 |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें — राजमार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग-76), खंड और उसकी लंबाई (चित्तौड़गढ़-उदयपुर, 93.5 किलोमीटर), राज्य (राजस्थान), रियायतग्राही (उचित एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड, प्रवर्तक टीआरआईएल रोड्स), मध्यस्थता संस्था (एसएआरओडी का तीन सदस्यीय अधिकरण), खारिज दावे (366.53 करोड़ रुपये, जिनमें 238.18 करोड़ रुपये कोविड-19 से जुड़ा दावा), स्वीकृत राशि (14.51 करोड़ रुपये) और एनएचएआई को मिले प्रतिदावे (33.54 करोड़ रुपये)।
अभ्यास प्रश्न
चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड से जुड़ा एनएचएआई का मध्यस्थता मामला किस राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित था?
- A.राष्ट्रीय राजमार्ग-44
- B.राष्ट्रीय राजमार्ग-48
- C.राष्ट्रीय राजमार्ग-76
- D.राष्ट्रीय राजमार्ग-27
उत्तर देखें
यह विवाद राजस्थान में इसी राजमार्ग के चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड को छह लेन का बनाने से पैदा हुआ था, जिसकी लंबाई 93.5 किलोमीटर है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चित्तौड़गढ़-उदयपुर मामले में तीन सदस्यीय मध्यस्थता अधिकरण किस संस्था के तहत गठित हुआ था?
- A.सोसाइटी फॉर अफोर्डेबल रिड्रेसल ऑफ डिस्प्यूट्स (एसएआरओडी)
- B.भारतीय मध्यस्थता परिषद
- C.अंतरराष्ट्रीय वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र
- D.राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण
उत्तर देखें
चित्तौड़गढ़-उदयपुर छह लेन परियोजना के रियायत समझौते से उपजे दावों और प्रतिदावों की जांच करने वाला अधिकरण इसी के तहत बना था और उसमें तीन सदस्य थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →छह लेन के लिए चुने गए चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड की लंबाई कितनी है?
- A.73.5 किलोमीटर
- B.83.5 किलोमीटर
- C.93.5 किलोमीटर
- D.103.5 किलोमीटर
उत्तर देखें
राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-76 के चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड की यही लंबाई है, जिसे उचित एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुए रियायत समझौते के तहत छह लेन का बनाया जाना था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अधिकरण ने एनएचएआई को प्रतिदावों में मूल राशि के रूप में कितनी रकम दिलाई?
- A.14.51 करोड़ रुपये
- B.33.54 करोड़ रुपये
- C.238.18 करोड़ रुपये
- D.366.53 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
अधिकरण ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रतिदावों को इसी हद तक मूल राशि के रूप में स्वीकार किया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एनएचएआई का यह मध्यस्थता मामला किस राजमार्ग खंड से जुड़ा था?
राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-76 के 93.5 किलोमीटर लंबे चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड से, जिसे छह लेन का बनाया जाना था। रियायतग्राही कंपनी उचित एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड थी, जिसे टीआरआईएल रोड्स प्राइवेट लिमिटेड ने प्रवर्तित किया था।
एसएआरओडी क्या है?
सोसाइटी फॉर अफोर्डेबल रिड्रेसल ऑफ डिस्प्यूट्स। चित्तौड़गढ़-उदयपुर मामले में दावों और प्रतिदावों की सुनवाई करने वाला तीन सदस्यीय मध्यस्थता अधिकरण इसी के तहत गठित हुआ था।
अधिकरण ने एनएचएआई को कितनी राशि दिलाई?
प्रतिदावों पर मूल राशि के रूप में 33.54 करोड़ रुपये। इसमें परियोजना के दायरे से हटाए गए कार्य की वसूली के 27 करोड़ रुपये, रखरखाव में विफलता के 4.03 करोड़ रुपये और मार्च 2021 की पूर्णता तिथि के बाद वसूले गए अनधिकृत टोल के 2.51 करोड़ रुपये शामिल हैं।
स्रोत
- https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2324416 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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