अधिकरण ने एनएचएआई को प्रतिदावों में मूल राशि के रूप में कितनी रकम दिलाई?
- A.14.51 करोड़ रुपये
- B.33.54 करोड़ रुपये
- C.238.18 करोड़ रुपये
- D.366.53 करोड़ रुपये
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 33.54 करोड़ रुपये है। अधिकरण ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रतिदावों को इसी हद तक मूल राशि के रूप में स्वीकार किया। इस रकम में तीन मदें शामिल हैं — परियोजना के दायरे से हटाए गए कार्य की वसूली के लिए 27 करोड़ रुपये, राजमार्ग का रखरखाव करने में विफलता के लिए 4.03 करोड़ रुपये, और मार्च 2021 में परियोजना की पूर्णता तिथि के बाद बिना अधिकार वसूले गए टोल के लिए 2.51 करोड़ रुपये। विकल्प A यानी 14.51 करोड़ रुपये वह छोटी रकम है जो अधिकरण ने रियायतग्राही के अपने दावों में से मंजूर की थी, इसलिए वह विवाद के दूसरे पक्ष से जुड़ी है। विकल्प C यानी 238.18 करोड़ रुपये कोविड-19 की अवधि से जोड़ा गया कार्यावधि विस्तार लागत का दावा था, जिसे अधिकरण ने खारिज कर दिया। विकल्प D यानी 366.53 करोड़ रुपये रियायतग्राही के कुल खारिज दावों का मूल्य है।
पूरा लेख पढ़ें: चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग मध्यस्थता मामले में एनएचएआई जीता
अभ्यास प्रश्न
चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड से जुड़ा एनएचएआई का मध्यस्थता मामला किस राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित था?
- A.राष्ट्रीय राजमार्ग-44
- B.राष्ट्रीय राजमार्ग-48
- C.राष्ट्रीय राजमार्ग-76
- D.राष्ट्रीय राजमार्ग-27
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यह विवाद राजस्थान में इसी राजमार्ग के चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड को छह लेन का बनाने से पैदा हुआ था, जिसकी लंबाई 93.5 किलोमीटर है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चित्तौड़गढ़-उदयपुर मामले में तीन सदस्यीय मध्यस्थता अधिकरण किस संस्था के तहत गठित हुआ था?
- A.सोसाइटी फॉर अफोर्डेबल रिड्रेसल ऑफ डिस्प्यूट्स (एसएआरओडी)
- B.भारतीय मध्यस्थता परिषद
- C.अंतरराष्ट्रीय वैकल्पिक विवाद समाधान केंद्र
- D.राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण
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चित्तौड़गढ़-उदयपुर छह लेन परियोजना के रियायत समझौते से उपजे दावों और प्रतिदावों की जांच करने वाला अधिकरण इसी के तहत बना था और उसमें तीन सदस्य थे।
पूरी व्याख्या पढ़ें →छह लेन के लिए चुने गए चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड की लंबाई कितनी है?
- A.73.5 किलोमीटर
- B.83.5 किलोमीटर
- C.93.5 किलोमीटर
- D.103.5 किलोमीटर
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राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग-76 के चित्तौड़गढ़-उदयपुर खंड की यही लंबाई है, जिसे उचित एक्सप्रेसवे प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुए रियायत समझौते के तहत छह लेन का बनाया जाना था।
पूरी व्याख्या पढ़ें →2022 से अब तक हुए शिल्प समागम मेलों से कितने कारीगर लाभान्वित हुए हैं?
- A.575
- B.775
- C.875
- D.975
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शेष विकल्प आसपास के आंकड़े हैं, जो अधूरी याद को पकड़ने के लिए रखे गए हैं। यहां दो तथ्य जोड़कर याद रखने चाहिए, यानी अब तक लगे मेलों की संख्या और उनसे लाभ पाने वाले कारीगरों की संख्या, क्योंकि प्रश्न दोनों में से किसी पर बन सकता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →शिल्प समागम मेला 2026 किस स्थान पर आयोजित हो रहा है?
- A.भारत मंडपम, नई दिल्ली
- B.मैसूरु दशहरा प्रदर्शनी मैदान, कर्नाटक
- C.दिल्ली हाट, नई दिल्ली
- D.सूरजकुंड, हरियाणा
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शेष तीनों विकल्प मंत्रालय की योजनाओं से जुड़े वास्तविक स्थान हैं, इसीलिए वे अच्छे भ्रमकारी विकल्प बनते हैं। नई दिल्ली का भारत मंडपम वह स्थान है जहां नवंबर में भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला लगेगा और मंत्रालय उसमें भाग लेने वाला है।
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