मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24

कवच 4.0 पहली बार दक्षिण मध्य रेलवे पर शुरू, 108 किलोमीटर मार्ग

भारतीय रेल ने दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद डिवीजन में मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड के 108 किलोमीटर मार्ग पर पहली बार कवच संस्करण 4.0 सफलतापूर्वक चालू किया है।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
Read in English
कवच 4.0 पहली बार दक्षिण मध्य रेलवे पर शुरू, 108 किलोमीटर मार्ग

चर्चा में क्यों

रेल मंत्रालय ने 23 सितंबर 2026 को बताया कि भारतीय रेल पर पहली बार कवच संस्करण 4.0 चालू किया गया है, और यह दक्षिण मध्य रेलवे के मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड के 108 किलोमीटर मार्ग पर हुआ है।

भारतीय रेल ने कवच संस्करण 4.0 को दक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर) पर शुरू कर दिया है। देश में कहीं भी इस संस्करण के चालू होने का यह पहला मौका है। हैदराबाद मंडल के मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड पर 108 किलोमीटर मार्ग को संस्करण 3.2 से बढ़ाकर 4.0 कर दिया गया है।

यही खंड क्यों चुना गया

कवच के मामले में दक्षिण मध्य रेलवे का अनुभव सबसे लंबा रहा है। इस मंडल पर संस्करण 3.2 पहले से ही 1,465 किलोमीटर मार्ग पर काम कर रहा है और उसी के संचालन से मिली सीख नए संस्करण की बनावट में काम आई। रेलवे की योजना संस्करण 4.0 को पूरे देश के नेटवर्क पर बड़े पैमाने पर लगाने की है, इसलिए हैदराबाद मंडल का यह खंड परख का मैदान बना।

संस्करण 4.0 में नया क्या है

  • ट्रेन की स्थिति पहले से अधिक सटीकता के साथ पता चलती है।
  • बड़े यार्डों में सिग्नल की जानकारी बेहतर मिलती है, जिससे चालक दल को आगे की स्थिति का बेहतर अंदाजा रहता है।
  • एक स्टेशन का कवच अब ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिये अगले स्टेशन के कवच से जुड़ा रहता है।
  • यह पहले से लगी इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली से सीधे जुड़ जाता है, इसके लिए अलग व्यवस्था नहीं करनी पड़ती।

यह प्रणाली ट्रेन की रक्षा कैसे करती है

कवच भारत में ही बनी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। यह लोको पायलट पर नजर रखती है। यदि तय गति सीमा पार हो जाए या खतरे का सिग्नल पार होने वाला हो और चालक ब्रेक न लगाए, तो यह प्रणाली खुद ब्रेक लगा देती है। इसी तरह यह खतरे में सिग्नल पार करने यानी एसपीएडी और टक्कर के जोखिम को घटाती है, और कोहरे या बारिश में भी ट्रेन का संचालन सुरक्षित रखती है।

इतनी बड़ी जिम्मेदारी के कारण इस उपकरण को सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 (एसआईएल-4) का प्रमाणन लेना पड़ता है, जो सुरक्षा का सबसे कड़ा दर्जा है।

एक खंड पर कवच लगाने में क्या-क्या लगता है

किसी खंड पर कवच लगाना एक ही काम नहीं है। स्टेशनों और ब्लॉक खंडों पर स्टेशन कवच लगता है, पूरी पटरी के साथ आरएफआईडी टैग लगाए जाते हैं, पूरे खंड में दूरसंचार टावर खड़े किए जाते हैं, पटरी के किनारे ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जाती है और उस मार्ग पर चलने वाले हर इंजन में लोको कवच लगाया जाता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

प्रणालीकवच संस्करण 4.0, स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली
मंडलदक्षिण मध्य रेलवे (एससीआर)
डिवीजन और खंडहैदराबाद डिवीजन, मलकाजगिरि-कामारेड्डी
उन्नत मार्ग108 किलोमीटर, संस्करण 3.2 से 4.0
संस्करण 3.2 का विस्तार1,465 किलोमीटर मार्ग
सुरक्षा प्रमाणनसेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 (एसआईएल-4)
मंत्रालयरेल मंत्रालय
विकासस्वदेशी रूप से भारत में विकसित

परीक्षा की दृष्टि से

संस्करण (4.0), मंडल (दक्षिण मध्य रेलवे), डिवीजन (हैदराबाद), खंड (मलकाजगिरि-कामारेड्डी), उन्नत मार्ग की लंबाई (108 किलोमीटर), संस्करण 3.2 का विस्तार (1,465 किलोमीटर), कवच का काम (स्वचालित ट्रेन सुरक्षा), रोका जाने वाला खतरा (एसपीएडी) और प्रमाणन (एसआईएल-4) याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीआसान

भारतीय रेल के किस मंडल पर पहली बार कवच संस्करण 4.0 चालू किया गया?

  1. A.उत्तर रेलवे
  2. B.दक्षिण मध्य रेलवे
  3. C.पश्चिम रेलवे
  4. D.पूर्व तट रेलवे
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. दक्षिण मध्य रेलवे

व्याख्या

सही उत्तर दक्षिण मध्य रेलवे है। रेल मंत्रालय के अनुसार ट्रेन सुरक्षा प्रणाली का संस्करण 4.0 पहली बार इसी मंडल पर चालू किया गया, और वह भी हैदराबाद डिवीजन के मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड पर। यही मंडल इसलिए चुना गया क्योंकि इसका पिछला संस्करण 3.2 यहां पहले से लंबे मार्ग पर काम कर रहा था और उसी संचालन के अनुभव से नए संस्करण के सुधार तय हुए। उत्तर रेलवे गलत है, क्योंकि विज्ञप्ति में उस मंडल पर ऐसी किसी शुरुआत का जिक्र नहीं है। पश्चिम रेलवे भी इसी कारण गलत है, घोषणा केवल दक्षिणी मंडल तक सीमित है। पूर्व तट रेलवे भी गलत है, क्योंकि जिस खंड को उन्नत किया गया वह हैदराबाद डिवीजन में है और यह डिवीजन दक्षिण मध्य रेलवे का हिस्सा है। परीक्षा में संस्करण, मंडल, डिवीजन और खंड, चारों को जोड़कर याद रखना चाहिए क्योंकि प्रश्न इनमें से किसी पर भी बन सकता है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड पर कितने किलोमीटर मार्ग को कवच संस्करण 3.2 से 4.0 में उन्नत किया गया?

  1. A.108 किलोमीटर
  2. B.208 किलोमीटर
  3. C.1,465 किलोमीटर
  4. D.512 किलोमीटर
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. 108 किलोमीटर

व्याख्या

सही उत्तर 108 किलोमीटर है। हैदराबाद डिवीजन के मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड की इतनी ही लंबाई को पुराने संस्करण से नए संस्करण में बदला गया है। विकल्प 208 गलत है, क्योंकि यह आंकड़ा विज्ञप्ति में कहीं नहीं आता और केवल भ्रम पैदा करने के लिए रखा गया है। विकल्प 1,465 इस प्रश्न का असली जाल है। यह आंकड़ा पूरे दक्षिण मध्य रेलवे पर पहले से चल रहे संस्करण 3.2 के विस्तार का है, नए उन्नत खंड का नहीं, और जल्दबाजी में पढ़ने वाले अभ्यर्थी अक्सर दोनों को आपस में बदल देते हैं। विकल्प 512 भी गलत है, क्योंकि ऐसा कोई आंकड़ा विज्ञप्ति में नहीं है। याद रखने का आसान तरीका यह है कि नया उन्नत हिस्सा छोटा है और पुराने संस्करण का फैलाव उससे दस गुना से भी बड़ा है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

कवच प्रणाली के लिए कौन सा सुरक्षा प्रमाणन स्तर आवश्यक है?

  1. A.सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-2
  2. B.सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-3
  3. C.सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4
  4. D.सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-5
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4

व्याख्या

सही उत्तर सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4 है, जिसे एसआईएल-4 लिखा जाता है। विज्ञप्ति में इस ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को अत्यधिक प्रौद्योगिकी केंद्रित बताया गया है और कहा गया है कि इसे सुरक्षा का सबसे ऊंचा प्रमाणन लेना पड़ता है, जिसकी पहचान एसआईएल-4 के रूप में की गई है। लेवल-2 गलत है क्योंकि यह नीचे का दर्जा है और चलती ट्रेन पर बिना मानवीय हस्तक्षेप के ब्रेक लगाने वाली प्रणाली के लिए पर्याप्त नहीं होगा। लेवल-3 भी इसी कारण गलत है, यह बताए गए दर्जे से एक पायदान नीचे है। लेवल-5 गलत है क्योंकि विज्ञप्ति में लेवल-4 को ही सबसे ऊंचा दर्जा कहा गया है। परीक्षा में यह तथ्य अक्सर प्रणाली के काम के साथ पूछा जाता है, इसलिए साथ में याद रखें कि कवच स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, यह एसपीएडी से बचाव करती है और इसका प्रमाणन एसआईएल-4 है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कवच 4.0 क्या है और यह सबसे पहले कहां चालू हुआ?

कवच भारत की अपनी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसका संस्करण 4.0 सबसे पहले दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद मंडल में मलकाजगिरि-कामारेड्डी खंड के 108 किलोमीटर मार्ग पर चालू किया गया।

चलती ट्रेन में कवच क्या करता है?

यह लोको पायलट की मदद करता है कि ट्रेन तय गति सीमा में रहे, और चालक के चूकने पर खुद ब्रेक लगा देता है। इससे खतरे का सिग्नल पार करने और टक्कर का जोखिम घटता है, खराब मौसम में भी संचालन सुरक्षित रहता है।

कवच को कौन सा सुरक्षा दर्जा लेना पड़ता है?

सेफ्टी इंटीग्रिटी लेवल-4, जिसे एसआईएल-4 लिखा जाता है। इस तरह की सुरक्षा प्रणाली के लिए यही सबसे ऊंचा प्रमाणन माना जाता है।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLUPSC सिविल सेवा