जेएनसीएएसआर की सिलिकॉन चिप पर 100 जीबीपीएस टेराहर्ट्ज़ डेटा
जेएनसीएएसआर के शोधकर्ताओं ने सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल चिप बनाई, जिस पर टेराहर्ट्ज़ तरंगें अवरोध पार करके 100 जीबीपीएस डेटा ले गईं, जो 6जी की राह है।

चर्चा में क्यों
जेएनसीएएसआर के शोधकर्ताओं ने ऐसी सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल चिप दिखाई है, जिस पर टेराहर्ट्ज़ तरंगें बनाए गए अवरोध को बहुत कम क्षय के साथ पार करती हैं और 100 जीबीपीएस की दर से डेटा ले जाती हैं, जो भविष्य के 6जी नेटवर्क की दिशा में कदम है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) के शोधकर्ताओं ने एक सिलिकॉन चिप पर दिखाया है कि टेराहर्ट्ज़ तरंगें जानबूझकर बनाए गए अवरोध को लगभग बिना क्षय पार कर सकती हैं और उसी समय 100 जीबीपीएस की दर से डेटा ले जा सकती हैं। यह परिणाम छठी पीढ़ी यानी 6जी संचार के लिए छोटी टेराहर्ट्ज़ परिपथ प्रणालियों की दिशा में संकेत देता है।
समस्या क्या थी
भविष्य के 6जी नेटवर्क टेराहर्ट्ज़ आवृत्तियों पर काम करेंगे, जो माइक्रोवेव और अवरक्त प्रकाश के बीच आती हैं तथा बहुत अधिक बैंडविड्थ देती हैं। कठिनाई इन तरंगों को छोटे परिपथों से गुजारने में है, क्योंकि वेवगाइड में मोड़, संधि और अचानक बदलाव संकेत के एक हिस्से को बिखेर या परावर्तित कर देते हैं और वह रास्ते में कमजोर पड़ जाता है।
टीम ने क्या बनाया
समूह ने टोपोलॉजिकल फोटोनिक्स का उपयोग किया। सिलिकॉन पट्टी में त्रिकोणीय छिद्रों को ऐसे क्रम में रखा गया जो ग्रैफीन की मधुमक्खी-छत्ते जैसी जालक संरचना की नकल करता है। इससे बना फोटोनिक क्रिस्टल टेराहर्ट्ज़ तरंगों को दो क्षेत्रों की सीमा के साथ आगे बढ़ाता है। इसके बाद वेवगाइड के एक छोटे हिस्से में त्रिकोणीय छिद्रों का आकार बदलकर अवरोध बनाया गया, जिसे फोटोनिक क्लाइन टनलिंग कहा जाता है। एक अवरोध से केवल लगभग एक से दो प्रतिशत और क्रम में दो अवरोधों से लगभग दो से तीन प्रतिशत क्षय हुआ, जबकि सामान्य वेवगाइड में संप्रेषण बहुत घट जाता है। जब तक अवरोध की शक्ति क्रिस्टल की विशिष्ट कपलिंग शक्ति से नीचे रही, संप्रेषण अवरोध-मुक्त स्तर के करीब बना रहा, जो डिजाइन का व्यावहारिक नियम देता है।
उपकरण और गति
तीन उपकरण उच्च प्रतिरोधकता वाले सिलिकॉन पर बनाए गए, जो प्रचलित अर्धचालक निर्माण के अनुकूल है: एक में क्रम से दो अवरोध, दूसरे में चार तीखे मोड़ और मध्य में अवरोध वाला ओमेगा आकार का मार्ग, तथा तीसरा एक शाखा में अवरोध वाला पावर स्प्लिटर। 310 से 360 गीगाहर्ट्ज़ की सीमा में माप अनुकरण से मेल खाए। दो अवरोध वाले उपकरण ने 48 जीबीपीएस और ओमेगा आकार वाले ने 60 जीबीपीएस डेटा ले जाया, जबकि स्प्लिटर ने क्यूएएम-32 मॉडुलन से 100 जीबीपीएस तक पहुंचा। इस गति पर पांच गीगाबाइट की फिल्म सिद्धांत रूप में आधे सेकंड से कम में भेजी जा सकती है।
किसने किया अध्ययन
अध्ययन का नेतृत्व जेएनसीएएसआर के डॉ. अभिषेक कुमार ने किया, जो मेटा ऑप्टिक्स प्रयोगशाला के प्रमुख हैं; समीना मुल्ला और संग्राम कुमार साधु संयुक्त प्रथम लेखक रहे। सहयोगी आईआईएसईआर कोलकाता, आईआईटी बॉम्बे, सिंगापुर के ए-स्टार स्थित माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स संस्थान तथा फ्रांस के लिल विश्वविद्यालय और सीएनआरएस से थे। यह कार्य एडवांस्ड मैटेरियल्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| संस्थान | जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) |
|---|---|
| मूल विभाग | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) |
| उपलब्धि | बनाए गए अवरोध के पार 100 जीबीपीएस पर टेराहर्ट्ज़ डेटा संप्रेषण |
| तकनीक | टोपोलॉजिकल फोटोनिक्स; सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल में फोटोनिक क्लाइन टनलिंग |
| मापी आवृत्ति सीमा | 310 से 360 गीगाहर्ट्ज़ |
| उपकरणों की गति | दो अवरोध 48, ओमेगा 60 और स्प्लिटर 100 जीबीपीएस |
| प्रमुख शोधकर्ता | डॉ. अभिषेक कुमार, मेटा ऑप्टिक्स प्रयोगशाला, जेएनसीएएसआर |
| पत्रिका | एडवांस्ड मैटेरियल्स |
| उपयोग | भविष्य के 6जी संचार के लिए छोटी टेराहर्ट्ज़ परिपथ प्रणालियां |
परीक्षा की दृष्टि से
संस्थान (जेएनसीएएसआर, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत), तकनीक (सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल में टोपोलॉजिकल फोटोनिक्स और फोटोनिक क्लाइन टनलिंग), 100 जीबीपीएस डेटा दर, 310 से 360 गीगाहर्ट्ज़ की मापी सीमा, 6जी में टेराहर्ट्ज़ आवृत्तियों का उपयोग, ग्रैफीन जैसी छत्ता संरचना, प्रमुख शोधकर्ता डॉ. अभिषेक कुमार और पत्रिका एडवांस्ड मैटेरियल्स याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
अवरोध के पार 100 जीबीपीएस टेराहर्ट्ज़ डेटा ले जाने वाली सिलिकॉन चिप किस संस्थान ने विकसित की?
- A.भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु
- B.जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र
- C.साहा नाभिकीय भौतिकी संस्थान, कोलकाता
- D.सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स
उत्तर देखें
इसकी टीम ने, मेटा ऑप्टिक्स प्रयोगशाला के डॉ. अभिषेक कुमार के नेतृत्व में, टोपोलॉजिकल फोटोनिक्स का उपयोग करते हुए दिखाया कि टेराहर्ट्ज़ तरंगें जानबूझकर बनाए गए अवरोध को पार करते हुए 100 जीबीपीएस की दर से डेटा ले जा सकती हैं, और यह कार्य एडवांस्ड मैटेरियल्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जेएनसीएएसआर के कार्य में उपयोग किया गया सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल किस पदार्थ की जालक संरचना की नकल करता है?
- A.हीरा
- B.ग्रैफीन
- C.गैलियम नाइट्राइड
- D.नीलम
उत्तर देखें
टीम ने ऐसा सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल डिजाइन किया, जिसकी संरचना ग्रैफीन की मधुमक्खी-छत्ते जैसी जालक संरचना की नकल करती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →जेएनसीएएसआर के टेराहर्ट्ज़ उपकरणों का माप किस आवृत्ति सीमा में किया गया?
- A.24 से 40 गीगाहर्ट्ज़
- B.110 से 170 गीगाहर्ट्ज़
- C.310 से 360 गीगाहर्ट्ज़
- D.600 से 750 गीगाहर्ट्ज़
उत्तर देखें
इस बैंड में किए गए माप टीम के अनुकरण से निकट रूप से मेल खाए, और पावर स्प्लिटर में दोनों निर्गत संकेत लगभग समान रहे, जिससे पता चला कि बनाए गए अवरोध का संप्रेषण पर बहुत कम असर पड़ा।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जेएनसीएएसआर के शोधकर्ताओं ने सिलिकॉन चिप पर क्या दिखाया?
यह कि टेराहर्ट्ज़ तरंगें बनाए गए अवरोध को बहुत कम क्षय के साथ पार कर सकती हैं और साथ ही 100 जीबीपीएस की दर से डेटा ले जा सकती हैं, जो 6जी के लिए छोटी परिपथ प्रणालियों में सहायक है।
6जी के लिए टेराहर्ट्ज़ आवृत्तियां क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ये माइक्रोवेव और अवरक्त प्रकाश के बीच आती हैं और बहुत अधिक बैंडविड्थ देती हैं। कठिनाई इन्हें छोटे परिपथों से गुजारने में है, क्योंकि मोड़ और संधियां संकेत को बिखेर देती हैं।
चिप पर अवरोध कैसे बनाया गया?
ग्रैफीन की छत्ता जैसी संरचना की नकल करने वाले सिलिकॉन फोटोनिक क्रिस्टल में वेवगाइड के एक छोटे हिस्से में त्रिकोणीय छिद्रों का आकार बदलकर अवरोध बनाया गया।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2332613 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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