भारत के नौ व्यापार समझौतों से 60 लाख करोड़ डॉलर का बाजार
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के नौ व्यापार समझौतों से 60 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच खुली है, जबकि 2014 से पहले यह 10 लाख करोड़ डॉलर थी।

चर्चा में क्यों
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 29 अक्टूबर 2026 को भारत के औद्योगिक बदलाव पर चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा कि देश के नौ व्यापार समझौतों से 60 लाख करोड़ डॉलर के बाजार खुले हैं और औद्योगिक वृद्धि गुणवत्ता, पैमाने, बाजार पहुंच तथा समावेशिता से तय होगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 29 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत के औद्योगिक बदलाव की रफ्तार गुणवत्ता, उत्पादन के पैमाने, वैश्विक बाजार तक पहुंच और समावेशिता से तय होगी। वे भारत के औद्योगिक बदलाव पर आयोजित चौथे राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे, जिसका आयोजन आईएसआईडी और आईडीआरए ने किया। उन्होंने कहा कि देश को यह लक्ष्य रखना चाहिए कि उसे दुनिया एक विनिर्माण राष्ट्र के रूप में पहचाने।
चार बातें जो फर्क पैदा करेंगी
मंत्री ने गुणवत्ता, वैश्विक बाजार तक पहुंच, उत्पादन का पैमाना और समावेशिता को चार निर्णायक बातें बताया। उनकी सूची में गुणवत्ता सबसे पहले रही और उन्होंने प्रधानमंत्री के जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट मंत्र को दोहराया। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों का घरेलू बाजार और विदेशी बाजारों में प्रवेश, दोनों मिलकर उत्पादकों को लागत इतनी घटाने देते हैं कि वे मुकाबला कर सकें। उन्होंने जोड़ा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य इन्हीं 1.4 अरब भारतीयों का साझा संकल्प है।
व्यापार समझौतों का दायरा
गोयल ने बताया कि सरकार द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार तथा द्विपक्षीय समझौतों से उन अर्थव्यवस्थाओं में तरजीही पहुंच मिली है, जिनका कुल उत्पादन 60 लाख करोड़ डॉलर है। वर्ष 2014 से पहले हुए समझौते केवल 10 लाख करोड़ डॉलर के बाजार तक पहुंचते थे और वे ज्यादातर ऐसे देशों के साथ थे जो भारत से मुकाबला करते हैं, उसके पूरक नहीं हैं। भारत के समझौते अब 38 विकसित और संपन्न देशों तक फैले हैं। उन्होंने कहा कि ये समझौते केवल शुल्क घटाने और मूल नियम तय करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सेवाएं, निवेश, शिक्षा, कौशल, तकनीकी साझेदारी और जलवायु सहयोग भी शामिल हैं तथा इनसे ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट, मेमोरी और चिकित्सा तकनीक जैसे उच्च प्रौद्योगिकी वाले सामान का आयात आसान होता है। अमेरिका के साथ बातचीत पर उन्होंने कहा कि ब्योरा सामने आने पर देश देखेगा कि किसानों और अन्य संवेदनशील वर्गों के हित से समझौता नहीं किया गया।
प्रतिभा, ऊर्जा और नए क्षेत्र
मंत्री ने कहा कि भारतीय कौशल की मांग विदेश में बढ़ रही है। उन्होंने जर्मनी के साथ हुए प्रवास समझौते का हवाला दिया, जिसमें हर वर्ष 90,000 भारतीयों की जरूरत बताई गई है, जबकि जर्मन पक्ष ने उनसे कहा कि उसे इससे काफी अधिक भारतीय प्रतिभा चाहिए। उन्हें भरोसा है कि भारत अगले 20 से 25 वर्ष तक दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था रहेगा। उन्होंने बताया कि देश की स्थापित बिजली क्षमता में 60 प्रतिशत हिस्सा हरित और नवीकरणीय स्रोतों का है, फिर भी ऊर्जा सुरक्षा तथा सस्ती बिजली के लिए कोयला जरूरी बना हुआ है। नवाचार पर उन्होंने कहा कि पहला स्टार्टअप फंड ऑफ फंड्स पूरी तरह उपयोग हो गया और दूसरा कोष अब तैयार है, इसके साथ अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष भी है, और देश का स्टार्टअप तंत्र दुनिया में तीसरे स्थान पर है। निजी कंपनियों के लिए खुले अंतरिक्ष क्षेत्र की अर्थव्यवस्था 8.4 अरब डॉलर की है, जो 2033 तक 44 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
महत्वपूर्ण तथ्य
| वक्ता | पीयूष गोयल, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री |
|---|---|
| अवसर | भारत के औद्योगिक बदलाव पर चौथा राष्ट्रीय सम्मेलन, आयोजक आईएसआईडी और आईडीआरए |
| चार निर्णायक बातें | गुणवत्ता, वैश्विक बाजार पहुंच, उत्पादन का पैमाना, समावेशिता |
| व्यापार समझौते | नौ मुक्त व्यापार तथा द्विपक्षीय समझौते |
| खुला बाजार | 60 लाख करोड़ डॉलर की कुल अर्थव्यवस्था |
| 2014 से पहले | समझौतों का दायरा 10 लाख करोड़ डॉलर |
| देशों की संख्या | 38 विकसित और संपन्न देश |
| जर्मनी प्रवास समझौता | हर वर्ष 90,000 भारतीयों की जरूरत |
| अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था | अब 8.4 अरब डॉलर, 2033 तक 44 अरब डॉलर की संभावना |
| हरित बिजली हिस्सा | स्थापित क्षमता का 60 प्रतिशत |
| स्टार्टअप तंत्र | दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा |
| दीर्घकालिक लक्ष्य | विकसित भारत 2047 |
परीक्षा की दृष्टि से
चार निर्णायक बातें (गुणवत्ता, वैश्विक बाजार पहुंच, उत्पादन का पैमाना, समावेशिता), नौ व्यापार समझौते और 60 लाख करोड़ डॉलर का बाजार जबकि 2014 से पहले 10 लाख करोड़ डॉलर, 38 देश, भारत-जर्मनी प्रवास समझौते में 90,000 की सालाना जरूरत, अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (8.4 अरब डॉलर अब, 2033 तक 44 अरब डॉलर), स्थापित बिजली क्षमता में 60 प्रतिशत हरित हिस्सा, तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप तंत्र और विकसित भारत 2047 का लक्ष्य याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
पीयूष गोयल के अनुसार भारत के नौ व्यापार समझौतों से खुली अर्थव्यवस्थाओं का कुल आकार कितना है?
- A.25 लाख करोड़ डॉलर
- B.40 लाख करोड़ डॉलर
- C.60 लाख करोड़ डॉलर
- D.85 लाख करोड़ डॉलर
उत्तर देखें
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा किए गए नौ मुक्त व्यापार तथा द्विपक्षीय समझौतों से उन अर्थव्यवस्थाओं में तरजीही बाजार अवसर खुले हैं, जिनका कुल उत्पादन इतना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री के अनुसार भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए क्या संभावना बताई गई है?
- A.2030 तक 20 अरब डॉलर
- B.2033 तक 44 अरब डॉलर
- C.2035 तक 60 अरब डॉलर
- D.2040 तक 100 अरब डॉलर
उत्तर देखें
पीयूष गोयल ने कहा कि उनके संबोधन के समय भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 8.4 अरब डॉलर की थी और इसमें उस वर्ष तक 44 अरब डॉलर तक पहुंचने की क्षमता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →पीयूष गोयल के अनुसार भारत की स्थापित बिजली क्षमता में हरित और नवीकरणीय स्रोतों का हिस्सा कितना है?
- A.40 प्रतिशत
- B.50 प्रतिशत
- C.60 प्रतिशत
- D.75 प्रतिशत
उत्तर देखें
मंत्री ने कहा कि भारत की स्थापित बिजली क्षमता में अब इतना हिस्सा हरित तथा नवीकरणीय स्रोतों का है, साथ ही यह भी जोड़ा कि ऊर्जा सुरक्षा और सस्ती बिजली के लिए कोयला अब भी जरूरी है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →गोयल द्वारा बताए गए प्रवास समझौते के तहत जर्मनी को हर वर्ष कितने भारतीयों की जरूरत है?
- A.30,000
- B.50,000
- C.90,000
- D.1,20,000
उत्तर देखें
जर्मनी के विदेश मंत्री से हुई बातचीत को याद करते हुए पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और जर्मनी के बीच हुए प्रवास समझौते में हर वर्ष 90,000 भारतीयों की जरूरत बताई गई है, और उनसे कहा गया कि असल में जर्मनी को इससे काफी अधिक भारतीय प्रतिभा चाहिए।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत के व्यापार समझौतों से कितना बड़ा बाजार खुला है?
पीयूष गोयल ने बताया कि सरकार के नौ मुक्त व्यापार तथा द्विपक्षीय समझौतों से 60 लाख करोड़ डॉलर की कुल अर्थव्यवस्था वाले देशों में तरजीही पहुंच मिली है, जबकि 2014 से पहले हुए समझौतों का दायरा 10 लाख करोड़ डॉलर था।
गोयल ने औद्योगिक बदलाव की चार निर्णायक बातें कौन सी बताईं?
गुणवत्ता, वैश्विक बाजार तक पहुंच, उत्पादन का पैमाना और समावेशिता। उन्होंने गुणवत्ता को पहले स्थान पर रखा और प्रधानमंत्री के जीरो डिफेक्ट, जीरो इफेक्ट मंत्र को दोहराया।
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी है?
यह 8.4 अरब डॉलर की है और इसमें 2033 तक 44 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। यह क्षेत्र निजी भागीदारी के लिए खोला गया है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2330034 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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