भारत का लक्ष्य पांच वर्ष में 30 मिलियन टन मत्स्य उत्पादन
भोपाल में अंतर्देशीय लघु स्तरीय मत्स्य पालन की राष्ट्रीय कार्य योजना का विकास चरण शुरू हुआ और भारत ने पांच वर्ष में 30 मिलियन टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य रखा।

चर्चा में क्यों
23 अक्टूबर 2026 को मत्स्य पालन विभाग ने अंतर्देशीय लघु स्तरीय मत्स्य पालन की राष्ट्रीय कार्य योजना का विकास चरण शुरू किया और पांच वर्ष में 30 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य घोषित किया।
भारत ने अंतर्देशीय लघु स्तरीय मत्स्य पालन के लिए अलग राष्ट्रीय कार्य योजना के विकास चरण में प्रवेश कर लिया है। इस योजना का उद्देश्य मछुआरों की आजीविका सुधारना, विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाना और मीठे पानी के संसाधनों का अधिक सुव्यवस्थित प्रबंधन करना है। मत्स्य पालन विभाग के सचिव अभिलक्ष लिखी ने भोपाल में हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में इस चरण की औपचारिक शुरुआत की।
योजना के पीछे कौन
यह योजना संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के ढांचे के भीतर तैयार की जा रही है। केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग इसका नेतृत्व कर रहा है और उसके साथ बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) साझेदार है। कार्यशाला में विकास चरण की प्राथमिकताएं तय की गईं, जिनमें मछुआरा समुदायों तथा अन्य हितधारकों से परामर्श का प्रस्तावित कार्यक्रम शामिल है, और मत्स्य संस्थानों के विशेषज्ञों ने गतिविधियों का ढांचा तैयार किया।
उत्पादन और निर्यात के लक्ष्य
सचिव ने बताया कि भारत ने अगले पांच वर्षों में 30 मिलियन टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य रखा है, जबकि समुद्री खाद्य निर्यात बढ़कर 1.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। वर्तमान में देश का वार्षिक मत्स्य उत्पादन 19.7 मिलियन टन है, जिसमें लगभग तीन-चौथाई हिस्सा अंतर्देशीय मत्स्य पालन का है, और समुद्री खाद्य निर्यात 70,000 करोड़ रुपये पार कर चुका है। उन्होंने जोर दिया कि उत्पादन और निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ छोटे मछुआरों की आजीविका की सुरक्षा भी जरूरी है।
योजना किन मुद्दों पर काम करेगी
- मछली पकड़ने के अधिकार और संसाधनों का प्रबंधन।
- रोजगार और सम्मानजनक काम।
- लैंगिक समानता।
- मूल्य श्रृंखला तथा कटाई के बाद का व्यापार।
- आपदा जोखिम और जलवायु परिवर्तन।
इन क्षेत्रों का उल्लेख BOBP-IGO के निदेशक पी. कृष्णन ने किया, जिन्होंने कहा कि विकास चरण में इन्हीं पर काम होना है।
जलवायु और जल की गुणवत्ता
सचिव ने जलवायु परिवर्तन और जल की बिगड़ती गुणवत्ता को अंतर्देशीय मत्स्य पालन के लिए सबसे बड़ी चिंता बताया और जलाशयों में घटते ऑक्सीजन स्तर जैसी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। उनके अनुसार योजना में जलवायु सहनशीलता बढ़ाने के उपाय होने चाहिए और उन मछुआरा समुदायों के अनुभव का लाभ लिया जाना चाहिए, जो इन चुनौतियों से सीधे जूझते हैं। उन्होंने मिशन मोड में प्रचार कार्यक्रम चलाने की बात भी कही, ताकि यह दस्तावेज सरकारी दफ्तरों में बंद न रहे और देश भर के मछुआरा समुदायों तक पहुंचकर आजीविका में वास्तविक सुधार लाए।
दायरा और अगला कदम
प्रस्तावित योजना नदियों, नहरों, जलाशयों, झीलों, बाढ़ क्षेत्र की आर्द्रभूमियों, तालाबों और ठंडे पानी की प्रणालियों में होने वाले मत्स्य पालन को शामिल करती है। सचिव ने सुझाव दिया कि भारत का विविध अंतर्देशीय मत्स्य क्षेत्र खाद्य एवं कृषि संगठन के लिए एक नमूना बन सकता है, जहां क्षेत्र विशेष तरीकों का परीक्षण करके सीख अन्य भूभागों तक पहुंचाई जा सके। योजना को हितधारकों के परामर्श के बाद अंतिम रूप दिया जाएगा और अगले महीने सार्वजनिक रूप से शुरू करने के बाद उसका क्रियान्वयन होगा। मध्य प्रदेश के मत्स्य सचिव स्वतंत्र कुमार सिंह, संयुक्त सचिव गुंजन कृष्णा और एफएओ की परियोजना अधिकारी जूलिया गोरेली ने भी विचार रखे।
महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना | अंतर्देशीय लघु स्तरीय मत्स्य पालन की राष्ट्रीय कार्य योजना, विकास चरण |
|---|---|
| शुरुआत | अभिलक्ष लिखी, सचिव, मत्स्य पालन विभाग |
| स्थान | भोपाल में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला |
| अंतरराष्ट्रीय ढांचा | संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) |
| साझेदार संगठन | बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन (BOBP-IGO) |
| उत्पादन लक्ष्य | अगले पांच वर्षों में 30 मिलियन टन |
| निर्यात लक्ष्य | समुद्री खाद्य निर्यात 1.25 लाख करोड़ रुपये |
| वर्तमान उत्पादन | 19.7 मिलियन टन प्रति वर्ष, अंतर्देशीय हिस्सा लगभग तीन-चौथाई |
| वर्तमान निर्यात | 70,000 करोड़ रुपये से अधिक |
| शामिल जल स्रोत | नदियां, नहरें, जलाशय, झीलें, बाढ़ क्षेत्र की आर्द्रभूमियां, तालाब और ठंडे पानी की प्रणालियां |
| BOBP-IGO के निदेशक | पी. कृष्णन |
परीक्षा की दृष्टि से
लक्ष्य याद रखें: पांच वर्ष में 30 मिलियन टन मत्स्य उत्पादन और समुद्री खाद्य निर्यात 1.25 लाख करोड़ रुपये, जबकि वर्तमान उत्पादन 19.7 मिलियन टन और निर्यात 70,000 करोड़ रुपये से अधिक है। यह भी याद रखें कि उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई अंतर्देशीय मत्स्य पालन से आता है, योजना एफएओ के ढांचे में BOBP-IGO के साथ बन रही है और मत्स्य सचिव अभिलक्ष लिखी हैं।
अभ्यास प्रश्न
मत्स्य सचिव के अनुसार भारत ने अगले पांच वर्षों में मत्स्य उत्पादन का क्या लक्ष्य रखा है?
- A.20 मिलियन टन
- B.25 मिलियन टन
- C.30 मिलियन टन
- D.40 मिलियन टन
उत्तर देखें
मत्स्य पालन विभाग के सचिव अभिलक्ष लिखी ने बताया कि भारत ने अगले पांच वर्षों में 30 मिलियन टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य रखा है और इसी अवधि में समुद्री खाद्य निर्यात बढ़कर 1.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अंतर्देशीय लघु स्तरीय मत्स्य पालन की राष्ट्रीय कार्य योजना किस अंतर-सरकारी संगठन के साथ तैयार की जा रही है?
- A.बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन
- B.हिंद महासागर रिम संगठन
- C.एशियाई मत्स्य समिति
- D.विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन
उत्तर देखें
इस पहल का नेतृत्व केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग कर रहा है और वह इसी संगठन के सहयोग से काम कर रहा है, जबकि पूरी योजना संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के ढांचे के भीतर तैयार हो रही है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अंतर्देशीय लघु स्तरीय मत्स्य पालन की राष्ट्रीय कार्य योजना का विकास चरण कहां शुरू किया गया?
- A.चेन्नई
- B.कोच्चि
- C.भोपाल
- D.नई दिल्ली
उत्तर देखें
कार्यशाला में मत्स्य संस्थानों के विशेषज्ञों तथा अन्य हितधारकों ने इस चरण की गतिविधियों का ढांचा तैयार किया और मछुआरा समुदायों से परामर्श का कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
भारत ने अगले पांच वर्षों के लिए मत्स्य उत्पादन का क्या लक्ष्य रखा है?
30 मिलियन टन, और इसी अवधि में समुद्री खाद्य निर्यात 1.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। वर्तमान वार्षिक उत्पादन 19.7 मिलियन टन है और निर्यात 70,000 करोड़ रुपये पार कर चुका है।
यह योजना किस अंतरराष्ट्रीय ढांचे के तहत बन रही है?
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के ढांचे के तहत। केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग इसका नेतृत्व कर रहा है और उसके साथ बंगाल की खाड़ी कार्यक्रम अंतर-सरकारी संगठन, यानी BOBP-IGO, साझेदार है।
योजना में कौन से जल स्रोत शामिल हैं?
नदियों, नहरों, जलाशयों, झीलों, बाढ़ क्षेत्र की आर्द्रभूमियों, तालाबों और ठंडे पानी की प्रणालियों का मत्स्य पालन। विकास चरण में मछली पकड़ने के अधिकार, संसाधन प्रबंधन, रोजगार, लैंगिक समानता, मूल्य श्रृंखला, आपदा जोखिम और जलवायु परिवर्तन पर काम होगा।
भारत के मत्स्य उत्पादन में अंतर्देशीय मत्स्य पालन का हिस्सा कितना है?
वार्षिक 19.7 मिलियन टन उत्पादन का लगभग तीन-चौथाई, और इसी कारण अंतर्देशीय लघु स्तरीय मत्स्य पालन के लिए अलग कार्य योजना आजीविका तथा निर्यात, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2327362 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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