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GK24

प्री-कॉप31 बैठक फिजी के नाडी में, भारत ने संतुलित नतीजे की मांग रखी

फिजी के नाडी में हुई प्री-कॉप31 बैठक में श्री भूपेंद्र यादव ने कॉप31 से महत्वाकांक्षी और संतुलित नतीजे, बढ़े हुए जलवायु वित्त तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की मांग रखी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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प्री-कॉप31 बैठक फिजी के नाडी में, भारत ने संतुलित नतीजे की मांग रखी

चर्चा में क्यों

8 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने फिजी के नाडी में हुई प्री-कॉप31 बैठक में पक्षकार देशों से लचीलापन, व्यावहारिकता और आपसी सम्मान दिखाने को कहा, जिससे अंताल्या में होने वाले कॉप31 से संतुलित नतीजा निकल सके।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के पक्षकार देशों से कहा है कि वे अधिक लचीलापन, व्यावहारिकता और आपसी सम्मान दिखाएं, ताकि यूएनएफसीसीसी कॉप31 से पहले बचे हुए मतभेद दूर किए जा सकें। यह बात केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने फिजी के नाडी में हुई प्री-कॉप31 बैठक में कही।

कहां रखी गई भारत की बात

मंत्री ने राजनीतिक लैंडिंग जोन और नतीजों पर हुई पूर्ण सत्र चर्चा को संबोधित किया। प्री-कॉप वह तैयारी बैठक होती है, जो हर साल होने वाले संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले बुलाई जाती है। इस बार सम्मेलन यानी कॉप31 नवंबर में तुर्किये के अंताल्या में होगा।

भारत की मांगें

  • ऊंचे लक्ष्यों के साथ उतनी ही बड़ी प्रतिबद्धताएं भी जुड़नी चाहिए, खासकर बढ़े हुए जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के रूप में।
  • अमल राष्ट्रीय स्तर पर तय रास्तों का सम्मान करते हुए हो, जिससे हर देश अपनी परिस्थितियों और विकास की जरूरतों के मुताबिक बदलाव कर सके।
  • बातचीत का ध्यान भाषणबाजी से हटकर अमल पर आना चाहिए और सम्मेलन तथा पेरिस समझौते के तहत पहले से मौजूद साधनों का पूरा उपयोग होना चाहिए।

श्री यादव ने कहा कि पक्षकार देशों के बीच सहमति का दायरा मतभेदों से कहीं बड़ा है। उन्होंने बताया कि वैश्विक तापवृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रोकने के आकांक्षात्मक लक्ष्य से जुड़े रहने पर व्यापक सहमति दिखी।

दो अनुच्छेद याद रखें

मंत्री ने अनुच्छेद 9.1 को अस्थायी एजेंडे में शामिल किए जाने का स्वागत किया और इसे वित्त को देशों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने का औपचारिक अवसर बताया। उन्होंने अनुच्छेद 6 के सहयोगात्मक तरीकों के रणनीतिक उपयोग पर भी जोर दिया, जिससे वित्त और अमल के अन्य साधनों की कमी पूरी की जा सकती है और टिकाऊ विकास के लिए बाजार आधारित संसाधन जुटाए जा सकते हैं।

अंताल्या तक का रास्ता

मंत्री ने कहा कि भारत कॉप31 से भागीदारी, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण के लिए लक्षित सहायता पर स्पष्ट रास्ता तय होने की अपेक्षा रखता है, और वह खुली तथा पारदर्शी बातचीत के लिए तैयार है, जिससे सबसे कमजोर देशों के लिए संतुलित और न्यायसंगत नतीजा निकले। उनके मुताबिक समावेशी, परामर्श आधारित और सहमति वाले तरीके से कॉप31 में जलवायु बहुपक्षवाद को मजबूत किया जा सकता है। भारत की बात खत्म करते हुए उन्होंने कहा कि फिजी की चर्चाओं के रचनात्मक पहलुओं को अंताल्या तक ले जाना चाहिए और लैंडिंग जोन ऐसा हो जो महत्वाकांक्षी भी हो और संतुलित भी, जिसमें शमन और अनुकूलन दोनों आगे बढ़ें। उन्होंने वार्ता अध्यक्ष श्री क्रिस बोवेन को खुली चर्चा के लिए धन्यवाद दिया।

महत्वपूर्ण तथ्य

आयोजनयूएनएफसीसीसी कॉप31 से पहले प्री-कॉप31 बैठक
प्री-कॉप का स्थाननाडी, फिजी
भारत का प्रतिनिधित्वश्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री
संबोधित सत्रराजनीतिक लैंडिंग जोन और नतीजों पर पूर्ण सत्र चर्चा
कॉप31 का स्थानअंताल्या, तुर्किये
कॉप31 का महीनानवंबर
तापमान लक्ष्यवैश्विक तापवृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखना
उल्लिखित प्रावधानअस्थायी एजेंडे में अनुच्छेद 9.1 तथा अनुच्छेद 6 के सहयोगात्मक तरीके
वार्ता अध्यक्षश्री क्रिस बोवेन
भारत की मांगबढ़ा हुआ जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण

परीक्षा की दृष्टि से

प्री-कॉप का स्थान (फिजी का नाडी), भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले मंत्री (पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव), संबोधित सत्र (राजनीतिक लैंडिंग जोन और नतीजे), कॉप31 का स्थान और महीना (तुर्किये का अंताल्या, नवंबर), तापमान लक्ष्य (1.5 डिग्री सेल्सियस), दो अनुच्छेद (वित्त पर 9.1 और सहयोगात्मक तरीकों पर 6) तथा वार्ता अध्यक्ष क्रिस बोवेन का नाम याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणआसान

प्री-कॉप31 बैठक किस देश में हुई, जहां भारत ने कॉप31 से महत्वाकांक्षी और संतुलित नतीजे की मांग रखी?

  1. A.फिजी
  2. B.तुर्किये
  3. C.ब्राजील
  4. D.अजरबैजान
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. फिजी

व्याख्या

सही उत्तर फिजी है। प्री-कॉप31 बैठक फिजी के नाडी में बुलाई गई थी और वहीं केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने राजनीतिक लैंडिंग जोन तथा नतीजों पर पूर्ण सत्र चर्चा को संबोधित करते हुए पक्षकार देशों से अधिक लचीलापन, व्यावहारिकता और आपसी सम्मान दिखाने को कहा। विकल्प B यानी तुर्किये भ्रम पैदा करता है, क्योंकि मुख्य सम्मेलन कॉप31 नवंबर में तुर्किये के अंताल्या में होना है, लेकिन तैयारी बैठक वहां नहीं हुई। विकल्प C और D यानी ब्राजील और अजरबैजान में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता के पहले के सत्र हुए हैं, इसलिए वे भ्रमित करने वाले विकल्प हैं, पर इस प्री-कॉप की मेजबानी उन्होंने नहीं की। परीक्षा के लिए दोनों स्थान अलग-अलग याद रखें, यानी प्री-कॉप फिजी के नाडी में और कॉप31 तुर्किये के अंताल्या में।

Q2.पर्यावरणमध्यम

यूएनएफसीसीसी कॉप31 का आयोजन कहां होना है?

  1. A.नाडी, फिजी
  2. B.अंताल्या, तुर्किये
  3. C.बेलेम, ब्राजील
  4. D.नई दिल्ली, भारत
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. अंताल्या, तुर्किये

व्याख्या

सही उत्तर अंताल्या, तुर्किये है। सालाना संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन यानी कॉप31 नवंबर में अंताल्या में होगा और उससे कुछ सप्ताह पहले हुई प्री-कॉप बैठक उसी की तैयारी थी। विकल्प A यानी फिजी का नाडी वह जगह है जहां प्री-कॉप हुई, इसलिए वह तैयारी बैठक का स्थान है, सम्मेलन का नहीं। विकल्प C यानी ब्राजील का बेलेम और विकल्प D यानी नई दिल्ली इस सत्र के स्थान नहीं हैं। भारतीय मंत्री ने दोनों जगहों का संबंध साफ किया, जब उन्होंने कहा कि फिजी की चर्चाओं के रचनात्मक पहलुओं को अंताल्या तक ले जाना चाहिए और लैंडिंग जोन ऐसा नतीजा हो जो महत्वाकांक्षी तथा संतुलित दोनों हो, जिसमें शमन और अनुकूलन आगे बढ़ें और विकासशील देशों को अमल के जरूरी साधन मिलें।

Q3.पर्यावरणकठिन

भारत ने प्री-कॉप31 के पूर्ण सत्र में जलवायु व्यवस्था के किन दो प्रावधानों का विशेष उल्लेख किया?

  1. A.अनुच्छेद 9.1 और अनुच्छेद 6
  2. B.अनुच्छेद 4 और अनुच्छेद 12
  3. C.अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 8
  4. D.अनुच्छेद 5 और अनुच्छेद 14
उत्तर देखें
सही उत्तर: A. अनुच्छेद 9.1 और अनुच्छेद 6

व्याख्या

सही उत्तर अनुच्छेद 9.1 और अनुच्छेद 6 है। भारत ने अनुच्छेद 9.1 को अस्थायी एजेंडे में शामिल किए जाने का स्वागत किया और इसे वित्त को देशों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने का महत्वपूर्ण औपचारिक अवसर बताया। इसके साथ ही भारत ने अनुच्छेद 6 के सहयोगात्मक तरीकों के रणनीतिक उपयोग पर जोर दिया, जिनसे वित्त तथा अमल के अन्य साधनों की गंभीर कमी पूरी की जा सकती है और टिकाऊ विकास के लिए बाजार आधारित संसाधन जुटाए जा सकते हैं। बाकी विकल्पों में बताए गए प्रावधान इस पूर्ण सत्र में भारत के वक्तव्य का विषय नहीं थे। मंत्री ने इन दोनों को अपनी बड़ी बात से जोड़ा, यानी ऊंचे लक्ष्यों के साथ बढ़ा हुआ जलवायु वित्त, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण जुड़ना चाहिए तथा अमल राष्ट्रीय स्तर पर तय रास्तों का सम्मान करे।

Q4.पर्यावरणआसान

प्री-कॉप31 की राजनीतिक लैंडिंग जोन और नतीजों पर हुई पूर्ण सत्र चर्चा में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?

  1. A.विदेश मंत्री
  2. B.पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री
  3. C.विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री
  4. D.नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री

व्याख्या

सही उत्तर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री है, यानी श्री भूपेंद्र यादव, जिनका मंत्रालय भारत की जलवायु वार्ताओं को संभालता है। राजनीतिक लैंडिंग जोन और नतीजों पर हुई पूर्ण सत्र चर्चा में उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर के चलते भाषणबाजी से आगे बढ़कर अमल और सहमति की दिशा में जाना जरूरी है, और पक्षकार देशों के बीच सहमति का दायरा मतभेदों से कहीं बड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक तापवृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के आकांक्षात्मक लक्ष्य से जुड़े रहने पर व्यापक सहमति है। बाकी विकल्पों में विदेश मामलों, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़े मंत्रालय आते हैं, जिनका काम अहम है, लेकिन जलवायु सम्मेलन की वार्ता पर्यावरण मंत्रालय संभालता है और इनमें से किसी मंत्री ने नाडी में भारत का वक्तव्य नहीं दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्री-कॉप31 बैठक कहां हुई और भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?

फिजी के नाडी में। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने भारत का प्रतिनिधित्व किया और राजनीतिक लैंडिंग जोन तथा नतीजों पर पूर्ण सत्र चर्चा को संबोधित किया।

यूएनएफसीसीसी कॉप31 कहां होगा?

तुर्किये के अंताल्या में, नवंबर महीने में। प्री-कॉप वह तैयारी बैठक है जो सालाना संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले होती है और इस बार यह फिजी के नाडी में हुई।

भारत ने प्री-कॉप में किन प्रावधानों पर जोर दिया?

अनुच्छेद 9.1, जिसे अस्थायी एजेंडे में शामिल करने को भारत ने वित्त को देशों की जरूरतों से जोड़ने का महत्वपूर्ण औपचारिक अवसर बताया, और अनुच्छेद 6 के सहयोगात्मक तरीके, जिनसे अमल के साधनों की कमी पूरी हो और बाजार आधारित संसाधन जुटें।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLIBPS