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GK24

प्री-कॉप31 में भारत ने समानता और सीबीडीआर-आरसी पर जोर दिया

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने फिजी में यूएनएफसीसीसी प्री-कॉप31 में अनुकूलन, शमन और कार्यान्वयन के साधनों पर समान ध्यान देने की मांग रखी।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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प्री-कॉप31 में भारत ने समानता और सीबीडीआर-आरसी पर जोर दिया

चर्चा में क्यों

6 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने फिजी में यूएनएफसीसीसी प्री-कॉप31 की नेताओं की पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए समानता, सीबीडीआर-आरसी और अनुकूलन, शमन तथा कार्यान्वयन साधनों पर समान ध्यान देने की मांग रखी।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव यूएनएफसीसीसी की प्री-कॉप31 बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। ये बैठकें ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालू की सह-मेजबानी में हो रही हैं। फिजी में नेताओं की पूर्ण बैठक को 6 अक्टूबर 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कॉप31 की ओर बढ़ते समय अनुकूलन, शमन और कार्यान्वयन के साधनों पर समान ध्यान दिया जाना चाहिए।

भारत का पक्ष

मंत्री ने कहा कि समानता तथा साझा किंतु विभेदित जिम्मेदारी और संबंधित क्षमता (सीबीडीआर-आरसी) के सिद्धांतों का पालन अक्षरशः होना चाहिए, तभी विभिन्न देशों में जलवायु कार्रवाई सार्थक और टिकाऊ बन सकेगी। उन्होंने कहा कि जलवायु कार्रवाई का कोई एक ही रास्ता सब पर लागू नहीं हो सकता। किसी क्षेत्र की समस्याएं स्थानीय अध्ययन और आकलन से ही सामने आती हैं, और वही बताते हैं कि कौन से शमन तथा अनुकूलन उपाय आवश्यक हैं और उनके लिए कितने संसाधन चाहिए।

प्रशांत देशों को प्रस्ताव

मंत्री ने कहा कि लंबी तटरेखा और द्वीपों वाला भारत प्रशांत द्वीपीय देशों की कठिनाइयों को भली भांति समझता है। उन्होंने समुद्र विज्ञान में भारतीय संस्थानों द्वारा बनाए गए ज्ञान आधार का उल्लेख किया, जिनमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो), राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र और राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र शामिल हैं। भारत की क्षमताओं में ये बातें गिनाई गईं:

  • तटों की संवेदनशीलता का आकलन और तटरेखा में बदलाव का मानचित्रण।
  • समुद्री स्थानिक योजनाएं और तटीय क्षेत्रों के लिए एकीकृत प्रबंधन योजनाएं।
  • नील अर्थव्यवस्था की संभावनाओं का उपयोग।
  • तटरेखा की निगरानी, जलमग्नता के आकलन, चक्रवात तथा विषम मौसम की पूर्व चेतावनी और जलवायु जोखिम आकलन के लिए अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोग।

उन्होंने यह विशेषज्ञता प्रशांत साझेदारों के साथ बांटने का प्रस्ताव रखा। भारत इन देशों के साथ स्वास्थ्य, नवीकरणीय ऊर्जा, सुदृढ़ अवसंरचना, पूर्व चेतावनी, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि और क्षमता निर्माण में पहले से काम कर रहा है।

तुवालू का उदाहरण

अपनी तुवालू यात्रा का स्मरण करते हुए मंत्री ने कहा कि तुवालू कोस्टल अडैप्टेशन परियोजना इसका उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, विशेषकर कार्यान्वयन के साधनों की उपलब्धता, जमीन पर वास्तविक मजबूती में कैसे बदलती है।

प्री-कॉप क्या है

प्री-कॉप वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले होने वाली तैयारी बैठक है। इस वर्ष वह सम्मेलन, कॉप31, नवंबर में अंताल्या, तुर्किये में होगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

बैठकयूएनएफसीसीसी प्री-कॉप31 तैयारी बैठकें
सह-मेजबानऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालू
भारत का प्रतिनिधित्वकेंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, प्रतिनिधिमंडल के नेता
संबोधन का स्थानफिजी में नेताओं की पूर्ण बैठक
भारत की मांगअनुकूलन, शमन और कार्यान्वयन के साधनों पर समान ध्यान
रेखांकित सिद्धांतसमानता तथा साझा किंतु विभेदित जिम्मेदारी और संबंधित क्षमता
उल्लिखित संस्थानइसरो, राष्ट्रीय सतत तटीय प्रबंधन केंद्र, राष्ट्रीय तटीय अनुसंधान केंद्र
उद्धृत परियोजनातुवालू कोस्टल अडैप्टेशन परियोजना
कॉप31 का स्थानअंताल्या, तुर्किये, नवंबर में

परीक्षा की दृष्टि से

मंत्री (भूपेंद्र यादव), बैठक (यूएनएफसीसीसी प्री-कॉप31) और सह-मेजबान (ऑस्ट्रेलिया, फिजी, तुवालू), समान ध्यान वाले तीन तत्व (अनुकूलन, शमन, कार्यान्वयन के साधन), सीबीडीआर-आरसी का पूरा रूप, उल्लिखित संस्थान (इसरो, एनसीएससीएम, एनसीसीआर), परियोजना (तुवालू कोस्टल अडैप्टेशन) और कॉप31 का स्थान (अंताल्या, तुर्किये) याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.पर्यावरणमध्यम

भारत ने जिस यूएनएफसीसीसी प्री-कॉप31 बैठक को संबोधित किया, उसकी सह-मेजबानी किन देशों ने की?

  1. A.ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालू
  2. B.न्यूजीलैंड, समोआ और टोंगा
  3. C.इंडोनेशिया, पापुआ न्यू गिनी और नाउरू
  4. D.ब्राजील, चिली और पेरू
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालू

व्याख्या

सही उत्तर ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालू है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन की प्री-कॉप31 बैठकों में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जिनकी सह-मेजबानी इन तीन देशों ने की, और उन्होंने फिजी में नेताओं की पूर्ण बैठक को संबोधित किया। विकल्प B गलत है, क्योंकि इन प्रशांत देशों में से किसी को इस बैठक का सह-मेजबान नहीं बताया गया। विकल्प C इसी कारण गलत है, यद्यपि चर्चा में प्रशांत द्वीपीय देशों की चिंताएं केंद्र में रहीं। विकल्प D गलत है, क्योंकि सूची में दिए लातिन अमेरिकी देशों की यहां कोई मेजबानी भूमिका नहीं थी। यह भी याद रखें कि प्री-कॉप वार्षिक सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले होने वाली तैयारी बैठक है और इस वर्ष वह सम्मेलन नवंबर में अंताल्या, तुर्किये में होगा।

Q2.पर्यावरणमध्यम

भारत द्वारा प्री-कॉप31 में रेखांकित सिद्धांत सीबीडीआर-आरसी का अर्थ क्या है?

  1. A.जलवायु भार वितरण और संसाधन मुआवजा
  2. B.साझा किंतु विभेदित जिम्मेदारी और संबंधित क्षमता
  3. C.तटीय आधाररेखा विकास और जोखिम नियंत्रण
  4. D.कार्बन बजट विभाजन और क्षेत्रीय सहयोग
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. साझा किंतु विभेदित जिम्मेदारी और संबंधित क्षमता

व्याख्या

सही उत्तर साझा किंतु विभेदित जिम्मेदारी और संबंधित क्षमता है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समानता के साथ इस सिद्धांत का पालन अक्षरशः होना चाहिए, तभी विभिन्न देशों में जलवायु कार्रवाई सार्थक और टिकाऊ बन सकेगी, और उन्होंने यह भी कहा कि जलवायु कार्रवाई का कोई एक रास्ता सब पर लागू नहीं हो सकता। विकल्प A, C और D गलत हैं, क्योंकि ये इस संक्षिप्त नाम के बनाए हुए विस्तार हैं और जलवायु वार्ताओं में प्रयुक्त शब्दावली नहीं हैं। इस सिद्धांत का भाव यह है कि जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी सभी देशों की है, किंतु उनके दायित्व उनके ऐतिहासिक योगदान और वर्तमान क्षमता के अनुसार भिन्न होते हैं। भारत ने अनुकूलन, शमन और कार्यान्वयन के साधनों पर समान ध्यान देने की मांग भी रखी।

Q3.पर्यावरणमध्यम

इस वर्ष का वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कॉप31 कहां आयोजित होगा?

  1. A.सुवा, फिजी
  2. B.अंताल्या, तुर्किये
  3. C.बेलेम, ब्राजील
  4. D.बाकू, अजरबैजान
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. अंताल्या, तुर्किये

व्याख्या

सही उत्तर अंताल्या, तुर्किये है, जहां यह सम्मेलन नवंबर में होगा। प्री-कॉप, जिसमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने अपना पक्ष रखा, उसी वार्षिक सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले होने वाली तैयारी बैठक है और इस बार उसकी सह-मेजबानी ऑस्ट्रेलिया, फिजी तथा तुवालू ने की। विकल्प A भ्रामक है, पर गलत है: भारतीय मंत्री ने नेताओं की जिस पूर्ण बैठक को संबोधित किया वह फिजी में हुई, किंतु फिजी तैयारी बैठक का स्थान है, सम्मेलन का नहीं। विकल्प C गलत है, क्योंकि ब्राजील का यह शहर इस सम्मेलन का स्थान नहीं बताया गया। विकल्प D भी इसी कारण गलत है। दोनों स्थानों को अलग-अलग याद रखें, क्योंकि प्रश्न अक्सर यही परखते हैं कि तैयारी बैठक का मेजबान और सम्मेलन का मेजबान पहचाना जा सकता है या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्री-कॉप31 बैठकों की सह-मेजबानी किन देशों ने की?

यूएनएफसीसीसी प्री-कॉप31 बैठकों की सह-मेजबानी ऑस्ट्रेलिया, फिजी और तुवालू ने की। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया और फिजी में नेताओं की पूर्ण बैठक को संबोधित किया।

सीबीडीआर-आरसी का पूरा अर्थ क्या है?

साझा किंतु विभेदित जिम्मेदारी और संबंधित क्षमता। भारत ने कहा कि समानता के साथ इस सिद्धांत का पालन अक्षरशः होना चाहिए, तभी विभिन्न देशों में जलवायु कार्रवाई सार्थक और टिकाऊ बन सकेगी।

कॉप31 कहां होगा?

वार्षिक संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन कॉप31 नवंबर में अंताल्या, तुर्किये में होगा। प्री-कॉप उसी सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले होने वाली तैयारी बैठक है।

स्रोत

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