मुख्य सामग्री पर जाएं
GK24

661.50 करोड़ रुपये का ब्रह्मोस फायर कंट्रोल अनुबंध

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने का 661.50 करोड़ रुपये का अनुबंध 6 अक्टूबर को किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
Read in English
661.50 करोड़ रुपये का ब्रह्मोस फायर कंट्रोल अनुबंध

चर्चा में क्यों

6 अक्टूबर 2026 को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने का 661.50 करोड़ रुपये का अनुबंध ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी में किया।

रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर खरीदने का आदेश ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को दिया है। अनुबंध पर 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर हुए और इसका मूल्य 661.50 करोड़ रुपये है।

खरीद का रास्ता

यह खरीद बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी के अंतर्गत की गई है। यह श्रेणी उन्हीं उपकरणों के लिए रखी गई है जिनका डिज़ाइन, विकास और निर्माण भारत में ही होता है। हस्ताक्षर के समय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित रहे।

स्वदेशी सामग्री और रोजगार

अनुबंध में कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है। इतनी बड़ी हिस्सेदारी से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित अनेक भारतीय कंपनियाँ इस परियोजना से जुड़ती हैं, क्योंकि लॉन्चर के पुर्जे और उसका इलेक्ट्रॉनिक सामान कई छोटी इकाइयों से आता है। काम तीन वर्ष की अवधि में फैला है, इसलिए रोजगार भी उसी अवधि में बनेगा। मंत्रालय इसे उन्नत सैन्य प्रौद्योगिकी के स्वदेशीकरण तथा देश की समुद्री सुरक्षा संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम मानता है।

फायर कंट्रोल सिस्टम का काम

मिसाइल उतनी ही कारगर होती है जितनी उसे चलाने वाली प्रणाली। फायर कंट्रोल सिस्टम युद्धपोत से मिले लक्ष्य के आँकड़े लेता है, फायरिंग का हल निकालता है और लॉन्चर को निर्देश देता है; इसके बाद लॉन्चर मिसाइल छोड़ता है। इसी कारण ये उपकरण किसी पोत को मिसाइल मंच में बदल देते हैं।

समुद्र में ब्रह्मोस

ब्रह्मोस प्रणाली नौसेना के कई अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर लगी है और समुद्री हमले के लिए उसकी प्रमुख सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। यह सुपरसोनिक गति से उड़ती है, विस्तारित रेंज तक पहुँचती है और सटीक निशाना लगाती है। यह ज़मीन के लक्ष्यों पर भी और समुद्र के लक्ष्यों पर भी मार कर सकती है।

एक नज़र में

खरीदाररक्षा मंत्रालय
आपूर्तिकर्ताब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड
मूल्य661.50 करोड़ रुपये
श्रेणीबाय (इंडियन-आईडीडीएम)

महत्वपूर्ण तथ्य

अनुबंध मूल्य661.50 करोड़ रुपये
अनुबंध किसके साथब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड
खरीदी गई वस्तुभारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर
खरीद श्रेणीबाय (इंडियन-आईडीडीएम)
स्वदेशी सामग्रीन्यूनतम 68 प्रतिशत
तिथि और स्थान6 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली
उपस्थित अधिकारीरक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह
रोजगार अवधितीन वर्ष

परीक्षा की दृष्टि से

मूल्य (661.50 करोड़ रुपये), आपूर्तिकर्ता (ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड), श्रेणी (बाय इंडियन-आईडीडीएम), स्वदेशी सामग्री की न्यूनतम सीमा (68 प्रतिशत), उपस्थित अधिकारी (रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह) और यह तथ्य याद रखें कि ब्रह्मोस नौसेना की प्रमुख सतह से सतह मिसाइल प्रणाली है।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षाआसान

भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर का अनुबंध कितने मूल्य का है?

  1. A.451.20 करोड़ रुपये
  2. B.661.50 करोड़ रुपये
  3. C.1,061.50 करोड़ रुपये
  4. D.266.15 करोड़ रुपये
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 661.50 करोड़ रुपये

व्याख्या

सही उत्तर 661.50 करोड़ रुपये है। रक्षा मंत्रालय ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ यह अनुबंध किया और भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम तथा लॉन्चर की खरीद का मूल्य इतना ही तय हुआ। हस्ताक्षर के समय रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित रहे और खरीद बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी में हुई, जिसमें कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है। विकल्प A गलत है क्योंकि इस आदेश से इतनी राशि जुड़ी हुई नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि यह राशि को एक हजार करोड़ से ऊपर बढ़ा देता है, जो इस अनुबंध का मूल्य नहीं है। विकल्प D गलत है क्योंकि यह असली अंकों को उलट-पलट कर रख देता है और अनुबंध को बहुत कम दिखाता है। परीक्षा में अक्सर पूरे करोड़ का गोल आँकड़ा भी विकल्प में रखा जाता है, इसलिए पचास लाख सहित सही मूल्य याद रखना चाहिए।

Q2.रक्षामध्यम

रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम की खरीद किस श्रेणी के अंतर्गत की?

  1. A.बाय (ग्लोबल)
  2. B.बाय एंड मेक (इंडियन)
  3. C.बाय (इंडियन-आईडीडीएम)
  4. D.मेक-दो
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. बाय (इंडियन-आईडीडीएम)

व्याख्या

सही उत्तर बाय (इंडियन-आईडीडीएम) है। ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम और लॉन्चर का आदेश ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड को इसी श्रेणी में दिया गया, जो स्वदेश में डिज़ाइन, विकसित और निर्मित उपकरणों के लिए रखी गई है। अनुबंध में कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है और इससे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित भारतीय उद्योग इस परियोजना से जुड़ते हैं, जिससे तीन वर्ष की अवधि में रोजगार बनता है। विकल्प A गलत है क्योंकि वैश्विक खरीद में विदेशी विक्रेता भी शामिल होते हैं, जो इस आदेश के उद्देश्य के विपरीत है। विकल्प B गलत है क्योंकि उस रास्ते में पहले कुछ उपकरण खरीदे जाते हैं और बाकी लाइसेंस पर बनाए जाते हैं, जो यहाँ नहीं हुआ। विकल्प D गलत है क्योंकि वह उद्योग द्वारा वित्त पोषित प्रारूप विकास का मार्ग है, कोई खरीद आदेश नहीं। श्रेणी और स्वदेशी प्रतिशत को साथ याद रखें।

Q3.रक्षामध्यम

भारतीय नौसेना में ब्रह्मोस मुख्य रूप से किस प्रकार की हथियार प्रणाली है?

  1. A.सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली
  2. B.सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली
  3. C.पनडुब्बी रोधी रॉकेट प्रणाली
  4. D.हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली

व्याख्या

सही उत्तर सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। नौसेना के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर लगी ब्रह्मोस प्रणाली समुद्री हमले के लिए उसकी प्रमुख सतह से सतह मिसाइल प्रणाली है। यह सुपरसोनिक गति से उड़ती है, विस्तारित रेंज में सटीक निशाना लगाती है और ज़मीन तथा समुद्र दोनों के लक्ष्यों को भेद सकती है। विकल्प A गलत है क्योंकि सतह से हवा में मार करने वाली प्रणाली विमानों और आती हुई मिसाइलों को गिराने के लिए होती है, जो युद्धपोत के अन्य हथियारों का काम है। विकल्प C गलत है क्योंकि पनडुब्बी रोधी रॉकेट और टॉरपीडो पानी के भीतर के लक्ष्यों के लिए अलग वर्ग के हथियार हैं और ब्रह्मोस की यह भूमिका नहीं बताई गई। विकल्प D गलत है क्योंकि हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल एक विमान से दूसरे विमान पर छोड़ी जाती है, जिसका पोत पर लगे लॉन्चर से कोई संबंध नहीं। 661.50 करोड़ रुपये में खरीदे गए उपकरण ठीक वही हैं जो युद्धपोत को यह मिसाइल चलाने योग्य बनाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ब्रह्मोस फायर कंट्रोल सिस्टम का अनुबंध कितने का है?

661.50 करोड़ रुपये का। रक्षा मंत्रालय ने 6 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ यह अनुबंध भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए किया।

यह खरीद किस श्रेणी में की गई है?

बाय (इंडियन-आईडीडीएम) श्रेणी में, जो स्वदेश में डिज़ाइन, विकसित और निर्मित उपकरणों के लिए है। अनुबंध में कम से कम 68 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है।

भारतीय नौसेना में ब्रह्मोस की भूमिका क्या है?

यह समुद्री हमले के लिए नौसेना की प्रमुख सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है। अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर लगी यह प्रणाली सुपरसोनिक गति से विस्तारित रेंज तक सटीक निशाना लगाती है।

स्रोत

करेंट अफेयर्स 6 अक्टूबर 2026

  1. ई-संजीवनी ने 50 करोड़ टेली-परामर्श का आंकड़ा पार कियासरकारी योजनाएं
  2. वीबी-जी राम जी के तहत 375 कार्य अधिसूचित हुएसरकारी योजनाएं
  3. इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद बनेगी, छमाही समीक्षा जारीअर्थव्यवस्था
  4. पहला बेड़ा सहायक पोत सूर्य विशाखापत्तनम में लॉन्च हुआरक्षा
  5. ब्लेज़ार OJ 287 के युगल ब्लैक होल पर एरीज का दशक लंबा अध्ययनविज्ञान और प्रौद्योगिकी
  6. भारत 153वीं आईपीयू सभा में, तंजानिया के अरुशा में बैठकअंतरराष्ट्रीय
  7. कोच्चि में ईएसटीआईसी 2026 महासागर विज्ञान कर्टेन रेज़रशिखर सम्मेलन
  8. वस्त्र उद्योग विकास परिषद की पहली बैठक नई दिल्ली मेंअर्थव्यवस्था
आज का क्विज25 प्रश्नपूरा संस्करण पढ़ें →
इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLUPSC सिविल सेवा