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आईसीएआर और एफसीआई के बीच अनाज भंडारण पर समझौता

आईसीएआर और एफसीआई ने 30 सितंबर 2026 को गेहूं-चावल के भंडारण कीटों पर वैकल्पिक धूम्रीकरण अनुसंधान का समझौता किया, पहला चरण आईसीएआर-सिफेट लुधियाना चलाएगा।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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आईसीएआर और एफसीआई के बीच अनाज भंडारण पर समझौता

चर्चा में क्यों

1 अक्टूबर 2026 को घोषित और 30 सितंबर 2026 को हस्ताक्षरित आईसीएआर-एफसीआई समझौते से गेहूं-चावल भंडारण में रासायनिक धूम्रीकरण के सुरक्षित तथा टिकाऊ विकल्पों पर शोध शुरू होगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने 30 सितंबर 2026 को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य गेहूं और चावल में भंडारण के दौरान लगने वाले कीटों के सुरक्षित तथा टिकाऊ प्रबंधन के लिए वैकल्पिक धूम्रीकरण तकनीकों पर शोध करना है। इस अध्ययन को उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग का सहयोग मिला है।

परियोजना कौन चलाएगा

दो वर्ष के पहले चरण को आईसीएआर-केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिफेट), लुधियाना लागू करेगा। समझौते पर आईसीएआर-सिफेट के निदेशक डॉ. नचिकेत कोटवालीवाले और एफसीआई के कार्यकारी निदेशक (गुणवत्ता नियंत्रण) डॉ. ए. के. सिन्हा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डीएआरई के सचिव और आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट उपस्थित रहे।

समस्या क्या है

देश के अनाज भंडार कटाई के बाद कीट नियंत्रण के लिए लंबे समय से एल्युमिनियम फॉस्फाइड और मैलाथियान पर निर्भर रहे हैं। बार-बार इस्तेमाल से प्रमुख राज्यों में कीटों की प्रतिरोधक क्षमता 72 से 100 प्रतिशत तक पहुंच गई, धूम्रीकरण के चक्र बढ़ गए और परिचालन लागत भी चढ़ी। साथ ही ये रसायन श्रमिकों के लिए सांस संबंधी खतरे और दीर्घकालिक पर्यावरणीय जोखिम पैदा करते हैं।

पहले चरण के तीन परीक्षण

  • धातु के साइलो में रखे गेहूं के लिए 99 प्रतिशत से अधिक शुद्धता वाली नाइट्रोजन गैस से धूम्रीकरण
  • एफसीआई और सीडब्ल्यूसी के गोदामों में बोरियों में रखे गेहूं-चावल के लिए कार्बन डाइऑक्साइड और फॉस्फीन का साझा प्रयोग
  • वायुरुद्ध आवरण में रखी बोरियों के गेहूं-चावल के लिए कार्बन डाइऑक्साइड से धूम्रीकरण

आगे क्या

दो वर्ष के प्रायोगिक चरण के बाद दूसरा चरण एक वर्ष का बहु-स्थानीय परीक्षण होगा, जो विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में चलेगा, ताकि क्षेत्र के अनुरूप मानक संचालन प्रक्रिया बनाई जा सके। लक्ष्य है परंपरागत रासायनिक धूम्रीकरण के वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, विस्तार योग्य और टिकाऊ विकल्प तैयार करना, जिससे बढ़ती कीट प्रतिरोधकता, कार्यस्थल पर रसायनों के संपर्क, पर्यावरणीय असर और अवशेष से जुड़ी चिंताएं दूर हों।

महत्वपूर्ण तथ्य

समझौताआईसीएआर और भारतीय खाद्य निगम के बीच समझौता ज्ञापन
हस्ताक्षर तिथि30 सितंबर 2026
सहयोगखाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
पहले चरण की अवधिदो वर्ष
लागू करने वाला संस्थानआईसीएआर-केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिफेट), लुधियाना
बदले जाने वाले रसायनएल्युमिनियम फॉस्फाइड और मैलाथियान
प्रमुख राज्यों में कीट प्रतिरोधकता72 से 100 प्रतिशत
परीक्षण में गैसेंनाइट्रोजन (99 प्रतिशत से अधिक), कार्बन डाइऑक्साइड, तथा कार्बन डाइऑक्साइड के साथ फॉस्फीन
दूसरा चरणएक वर्ष का बहु-स्थानीय परीक्षण, क्षेत्र आधारित मानक संचालन प्रक्रिया के लिए
हस्ताक्षरकर्ताडॉ. नचिकेत कोटवालीवाले (आईसीएआर-सिफेट) और डॉ. ए. के. सिन्हा (एफसीआई)

परीक्षा की दृष्टि से

दोनों पक्ष आईसीएआर और एफसीआई, हस्ताक्षर की तिथि 30 सितंबर 2026, लागू करने वाला संस्थान आईसीएआर-सिफेट लुधियाना, सहयोगी विभाग, बदले जाने वाले दोनों रसायन, 72 से 100 प्रतिशत प्रतिरोधकता का आंकड़ा और परीक्षण में शामिल तीनों गैसें याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

आईसीएआर-एफसीआई की वैकल्पिक धूम्रीकरण परियोजना का पहला चरण कौन सा संस्थान लागू करेगा?

  1. A.आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली
  2. B.आईसीएआर-सिफेट, लुधियाना
  3. C.आईसीएआर-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल
  4. D.केंद्रीय भंडारण निगम, नई दिल्ली
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आईसीएआर-सिफेट, लुधियाना

व्याख्या

सही उत्तर आईसीएआर-सिफेट, लुधियाना है, यानी केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, जो गेहूं और चावल में रासायनिक धूम्रीकरण के विकल्पों पर दो वर्ष का पहला चरण चलाएगा। विकल्प A गलत है, क्योंकि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान फसल सुधार और उससे जुड़े शोध पर काम करता है और इसे लागू करने वाली संस्था नहीं बताया गया। विकल्प C गलत है, क्योंकि परीक्षणों में गेहूं केंद्र में होने के बावजूद करनाल का संस्थान इस समझौते में शामिल नहीं है। समझौता कटाई उपरांत अभियांत्रिकी संस्थान के साथ हुआ, क्योंकि भंडारण और धूम्रीकरण कटाई के बाद की ही समस्याएं हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि केंद्रीय भंडारण निगम केवल उन गोदाम प्रणालियों में से एक है जहां बोरियों में रखे अनाज पर परीक्षण होगा, वह लागू करने वाला संस्थान नहीं है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारत में अनाज भंडारण में कटाई उपरांत कीट नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से किन दो रसायनों का उपयोग होता रहा है?

  1. A.एल्युमिनियम फॉस्फाइड और मैलाथियान
  2. B.नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड
  3. C.एंडोसल्फान और डीडीटी
  4. D.फॉस्फीन और क्लोरपाइरीफॉस
उत्तर देखें

सही उत्तर: A. एल्युमिनियम फॉस्फाइड और मैलाथियान

व्याख्या

सही उत्तर एल्युमिनियम फॉस्फाइड और मैलाथियान है। दशकों से देश के अनाज भंडारों में कटाई उपरांत कीट नियंत्रण का मुख्य आधार ये दोनों ही रहे हैं और इनके व्यापक तथा बार-बार प्रयोग से प्रमुख राज्यों में कीट प्रतिरोधकता 72 से 100 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे धूम्रीकरण के चक्र और लागत दोनों बढ़े। विकल्प B गलत है, क्योंकि नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड इस परियोजना में परखे जा रहे विकल्प हैं, बदले जाने वाले रसायन नहीं। परीक्षा में यही अदला-बदली सबसे अधिक पूछी जाती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इन दोनों कीटनाशकों का इस अनाज भंडारण कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं बताया गया। विकल्प D आधा सही होने के कारण पूरा गलत है, क्योंकि फॉस्फीन परीक्षणों में कार्बन डाइऑक्साइड के साथ आता है, जबकि क्लोरपाइरीफॉस का इस समाचार में कोई उल्लेख नहीं है।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

आईसीएआर-एफसीआई धूम्रीकरण परियोजना के दूसरे चरण में क्या किया जाएगा?

  1. A.एक ही संस्थान में दो वर्ष का प्रयोगशाला अध्ययन
  2. B.कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक वर्ष का बहु-स्थानीय परीक्षण
  3. C.नाइट्रोजन धूम्रीकरण को तुरंत देशभर में लागू करना
  4. D.केवल मौजूदा रासायनिक धूम्रीकरण नियमों की समीक्षा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक वर्ष का बहु-स्थानीय परीक्षण

व्याख्या

सही उत्तर कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक वर्ष का बहु-स्थानीय परीक्षण है। दूसरा चरण दो वर्ष के प्रायोगिक पहले चरण के बाद आता है और इसका उद्देश्य भिन्न परिस्थितियों में पद्धतियों को परखना है, जिससे क्षेत्र के अनुरूप मानक संचालन प्रक्रिया तय की जा सके। विकल्प A गलत है, क्योंकि एक संस्थान में दो वर्ष का काम पहले चरण का विवरण है, जिसे आईसीएआर-सिफेट, लुधियाना चलाएगा, न कि उसके बाद आने वाले चरण का। विकल्प C गलत है, क्योंकि तुरंत देशव्यापी अमल की कोई घोषणा नहीं हुई। चरणबद्ध ढांचे का उद्देश्य ही पहले गैसों को प्रमाणित करना है, जिसमें धातु के साइलो में 99 प्रतिशत से अधिक शुद्ध नाइट्रोजन भी शामिल है। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह वैकल्पिक तकनीकों पर क्षेत्रीय शोध कार्यक्रम है, जो विस्तार योग्य और टिकाऊ विकल्प खोजता है, मौजूदा नियमों की कागजी समीक्षा नहीं करता।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईसीएआर-एफसीआई परियोजना का पहला चरण कौन सा संस्थान लागू करेगा?

आईसीएआर-केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिफेट), लुधियाना। पहला चरण दो वर्ष चलेगा और गेहूं-चावल में रासायनिक धूम्रीकरण के विकल्प परखेगा।

भारत में अनाज भंडारण अब तक किन रसायनों पर निर्भर रहा है?

एल्युमिनियम फॉस्फाइड और मैलाथियान पर। बार-बार प्रयोग से प्रमुख राज्यों में कीट प्रतिरोधकता 72 से 100 प्रतिशत तक पहुंची और धूम्रीकरण चक्र तथा लागत दोनों बढ़े।

परियोजना के दूसरे चरण में क्या होगा?

यह एक वर्ष का बहु-स्थानीय परीक्षण होगा, जो अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों में चलेगा और नई धूम्रीकरण पद्धतियों के लिए क्षेत्र आधारित मानक संचालन प्रक्रिया तय करेगा।

स्रोत

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