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GK24
विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

भारत में अनाज भंडारण में कटाई उपरांत कीट नियंत्रण के लिए मुख्य रूप से किन दो रसायनों का उपयोग होता रहा है?

  1. A.एल्युमिनियम फॉस्फाइड और मैलाथियान
  2. B.नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड
  3. C.एंडोसल्फान और डीडीटी
  4. D.फॉस्फीन और क्लोरपाइरीफॉस

सही उत्तर

A. एल्युमिनियम फॉस्फाइड और मैलाथियान

व्याख्या

सही उत्तर एल्युमिनियम फॉस्फाइड और मैलाथियान है। दशकों से देश के अनाज भंडारों में कटाई उपरांत कीट नियंत्रण का मुख्य आधार ये दोनों ही रहे हैं और इनके व्यापक तथा बार-बार प्रयोग से प्रमुख राज्यों में कीट प्रतिरोधकता 72 से 100 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिससे धूम्रीकरण के चक्र और लागत दोनों बढ़े। विकल्प B गलत है, क्योंकि नाइट्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड इस परियोजना में परखे जा रहे विकल्प हैं, बदले जाने वाले रसायन नहीं। परीक्षा में यही अदला-बदली सबसे अधिक पूछी जाती है। विकल्प C गलत है, क्योंकि इन दोनों कीटनाशकों का इस अनाज भंडारण कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं बताया गया। विकल्प D आधा सही होने के कारण पूरा गलत है, क्योंकि फॉस्फीन परीक्षणों में कार्बन डाइऑक्साइड के साथ आता है, जबकि क्लोरपाइरीफॉस का इस समाचार में कोई उल्लेख नहीं है।

पूरा लेख पढ़ें: आईसीएआर और एफसीआई के बीच अनाज भंडारण पर समझौता

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Q1.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

आईसीएआर-एफसीआई की वैकल्पिक धूम्रीकरण परियोजना का पहला चरण कौन सा संस्थान लागू करेगा?

  1. A.आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली
  2. B.आईसीएआर-सिफेट, लुधियाना
  3. C.आईसीएआर-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल
  4. D.केंद्रीय भंडारण निगम, नई दिल्ली
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. आईसीएआर-सिफेट, लुधियाना

व्याख्या

सही उत्तर आईसीएआर-सिफेट, लुधियाना है, यानी केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, जो गेहूं और चावल में रासायनिक धूम्रीकरण के विकल्पों पर दो वर्ष का पहला चरण चलाएगा। विकल्प A गलत है, क्योंकि भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान फसल सुधार और उससे जुड़े शोध पर काम करता है और इसे लागू करने वाली संस्था नहीं बताया गया। विकल्प C गलत है, क्योंकि परीक्षणों में गेहूं केंद्र में होने के बावजूद करनाल का संस्थान इस समझौते में शामिल नहीं है। समझौता कटाई उपरांत अभियांत्रिकी संस्थान के साथ हुआ, क्योंकि भंडारण और धूम्रीकरण कटाई के बाद की ही समस्याएं हैं। विकल्प D गलत है, क्योंकि केंद्रीय भंडारण निगम केवल उन गोदाम प्रणालियों में से एक है जहां बोरियों में रखे अनाज पर परीक्षण होगा, वह लागू करने वाला संस्थान नहीं है।

Q2.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

आईसीएआर-एफसीआई धूम्रीकरण परियोजना के दूसरे चरण में क्या किया जाएगा?

  1. A.एक ही संस्थान में दो वर्ष का प्रयोगशाला अध्ययन
  2. B.कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक वर्ष का बहु-स्थानीय परीक्षण
  3. C.नाइट्रोजन धूम्रीकरण को तुरंत देशभर में लागू करना
  4. D.केवल मौजूदा रासायनिक धूम्रीकरण नियमों की समीक्षा
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक वर्ष का बहु-स्थानीय परीक्षण

व्याख्या

सही उत्तर कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक वर्ष का बहु-स्थानीय परीक्षण है। दूसरा चरण दो वर्ष के प्रायोगिक पहले चरण के बाद आता है और इसका उद्देश्य भिन्न परिस्थितियों में पद्धतियों को परखना है, जिससे क्षेत्र के अनुरूप मानक संचालन प्रक्रिया तय की जा सके। विकल्प A गलत है, क्योंकि एक संस्थान में दो वर्ष का काम पहले चरण का विवरण है, जिसे आईसीएआर-सिफेट, लुधियाना चलाएगा, न कि उसके बाद आने वाले चरण का। विकल्प C गलत है, क्योंकि तुरंत देशव्यापी अमल की कोई घोषणा नहीं हुई। चरणबद्ध ढांचे का उद्देश्य ही पहले गैसों को प्रमाणित करना है, जिसमें धातु के साइलो में 99 प्रतिशत से अधिक शुद्ध नाइट्रोजन भी शामिल है। विकल्प D गलत है, क्योंकि यह वैकल्पिक तकनीकों पर क्षेत्रीय शोध कार्यक्रम है, जो विस्तार योग्य और टिकाऊ विकल्प खोजता है, मौजूदा नियमों की कागजी समीक्षा नहीं करता।

Q3.विज्ञान और प्रौद्योगिकीकठिन

चाइम की यह खोज किस वर्ष जुटाए गए प्रेक्षण आंकड़ों पर आधारित है?

  1. A.2015
  2. B.2019
  3. C.2022
  4. D.2024
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 2019

व्याख्या

सही उत्तर है 2019। यह माप उसी वर्ष जुटाए गए 94 रातों के प्रेक्षण आंकड़ों पर टिका है, जो दूरबीन के काम शुरू करने के बाद से दर्ज सभी आंकड़ों का छोटा सा हिस्सा भर है। विकल्प A, C और D आसपास के वर्ष हैं, जो भ्रम पैदा करने के लिए रखे गए हैं और घोषणा से मेल नहीं खाते। वर्ष के साथ दो और बातें याद रखने योग्य हैं। पहली, यह निष्कर्ष तुरंत नहीं मिला, क्योंकि शोर के बीच से धुंधला संकेत निकालने के लिए नई विश्लेषण विधियां लगानी पड़ीं और दल ने एक वर्ष से अधिक समय उसकी जांच में लगाया। दूसरी, अब शोधकर्ताओं के पास लगभग सात वर्ष के प्रेक्षण हैं और वे और पुराने दौर तक विश्लेषण बढ़ा रहे हैं।

Q4.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

हाइड्रोजन की चमक का पहली बार अकेले पता लगाने वाली चाइम दूरबीन का पूरा रूप क्या है?

  1. A.कॉस्मिक हाइड्रोजन इमेजिंग एंड मैपिंग एक्सपेरिमेंट
  2. B.कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट
  3. C.कंबाइंड हाइड्रोजन इंटरफेरोमेट्रिक मेजरमेंट एंडेवर
  4. D.कॉस्मोलॉजिकल हाई-एनर्जी इन्फ्रारेड मैपिंग एक्सपेरिमेंट
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट

व्याख्या

सही उत्तर है कैनेडियन हाइड्रोजन इंटेंसिटी मैपिंग एक्सपेरिमेंट। चाइम कनाडा में लगी एक इंटरफेरोमेट्रिक रेडियो दूरबीन है, जिसे आरंभिक ब्रह्मांड में हाइड्रोजन गैस के फैलाव का नक्शा बनाने के लिए बनाया गया था, ताकि खगोलविद ब्रह्मांड के प्रसार की गणना कर डार्क एनर्जी का अध्ययन कर सकें। विकल्प A, C और D मिलती-जुलती खगोलीय शब्दावली से गढ़े गए रूप हैं, और ऐसे प्रश्नों में भ्रामक विकल्प इसी तरह बनाए जाते हैं। ध्यान दें कि पहला अक्षर उस देश को दर्शाता है जिसने इस उपकरण की कल्पना की, उसे बनाया और उसका खर्च उठाया। यह भी याद रखें कि चाइम रेडियो तरंगों पर काम करती है और इसमें कोई गतिशील पुर्जा नहीं होता। यह भी जान लें कि यह दूरबीन आकाश के अपने ऊपर से गुजरने के साथ ब्रह्मांड का बड़ा हिस्सा स्कैन करती है और हर दिन रेडियो तरंगों में आकाश की तस्वीर देती है।

Q5.विज्ञान और प्रौद्योगिकीमध्यम

इस खोज से जुड़े चाइम सहयोग में भारत का कौन सा संस्थान शामिल था?

  1. A.भारतीय तारा भौतिकी संस्थान
  2. B.भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला
  3. C.रमन अनुसंधान संस्थान
  4. D.टाटा मूलभूत अनुसंधान संस्थान
उत्तर देखें

सही उत्तर: C. रमन अनुसंधान संस्थान

व्याख्या

सही उत्तर है रमन अनुसंधान संस्थान। जिस अध्ययन में पहली बार अकेले आंकड़ों से हाइड्रोजन की चमक पकड़ने की बात कही गई, उसमें इसी संस्थान के चाइम सहयोगी शामिल थे। यह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का स्वायत्त संस्थान है और वहां के सहायक प्राध्यापक सौरभ सिंह इस परिणाम पर टिप्पणी करने वाले सह-लेखकों में हैं। विकल्प A, B और D भारत के ऐसे अन्य जाने-माने अनुसंधान संस्थान हैं जो खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष और मूलभूत भौतिकी में काम करते हैं, और उन्हें इसलिए रखा गया है कि जिस अभ्यर्थी को केवल इतना याद हो कि कोई भारतीय संस्थान शामिल था, वह कोई भी नाम चुन ले। संस्थान के साथ उसका मूल विभाग भी जोड़कर याद रखें। प्रश्न प्रायः यह भी पूछते हैं कि संबंधित संस्थान किस मंत्रालय या विभाग के अधीन आता है, और यहां उत्तर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग है, इसलिए यह जोड़ अवश्य याद रखें।