हरित हाइड्रोजन मिशन: 19,744 करोड़, 2030 तक 5 एमएमटी लक्ष्य
सरकारी दस्तावेज में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के 19,744 करोड़ रुपये के परिव्यय, 2030 के 5 एमएमटी लक्ष्य और अब तक की प्रगति का ब्योरा है।

चर्चा में क्यों
2 नवंबर 2026 को सरकार ने हरित हाइड्रोजन पर दस्तावेज जारी किया, जिसमें राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का 19,744 करोड़ रुपये का परिव्यय, 2030 तक सालाना 5 मिलियन मीट्रिक टन का लक्ष्य और प्रोत्साहन, पायलट तथा हब की प्रगति बताई गई।
सरकार ने हरित हाइड्रोजन पर भारत की स्थिति का ब्योरा जारी किया है। यह वह ईंधन है जो नवीकरणीय बिजली से पानी को तोड़कर बनाया जाता है। जलने पर इससे केवल पानी और गर्मी बचती है, इसलिए इसे उन उद्योगों में लाया जा रहा है जहाँ उत्सर्जन घटाना सबसे कठिन है, यानी उर्वरक, पेट्रोलियम शोधन, लोहा एवं इस्पात, भारी सड़क परिवहन तथा जहाजरानी। यह 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन के भारत के लक्ष्य से भी जुड़ता है।
हरित कहलाने की शर्त
उपयोग के समय हाइड्रोजन से कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलती, इसलिए सब कुछ इस पर टिका है कि वह कैसे बनी। अगस्त 2023 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने भारत का हरित हाइड्रोजन मानक अधिसूचित किया, जिसके अनुसार प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर उत्सर्जन 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य से अधिक नहीं होना चाहिए, जिसे वेल-टू-गेट आधार पर बारह महीने के औसत के रूप में मापा जाता है। ऐसी परिभाषा लिखित रूप में तय करने वाले पहले देशों में भारत रहा।
मिशन और उसका धन
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को 19,744 करोड़ रुपये के परिव्यय से मंजूरी दी। इसका लक्ष्य 2030 तक सालाना कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन क्षमता है, जो निर्यात मांग बनी रहने पर 10 मिलियन मीट्रिक टन तक जा सकती है। इसका सबसे बड़ा घटक हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए रणनीतिक पहल यानी साइट कार्यक्रम है, जिसका परिव्यय 2029-30 तक 17,490 करोड़ रुपये है और जो बाजार के दोनों सिरों पर प्रोत्साहन देता है, यानी देश में इलेक्ट्रोलाइजर बनाने और हाइड्रोजन का उत्पादन करने पर।
अब तक की प्रगति
| इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण | 15 कंपनियों को सालाना 3,000 मेगावाट के लिए प्रोत्साहन |
| उत्पादन क्षमता | सालाना 8,62,000 टन के लिए प्रोत्साहन; फरवरी 2026 तक लगभग 8,000 टन सालाना क्षमता शुरू |
| खरीद प्रतिबद्धता | भारतीय कंपनियों ने 5.5 लाख एमटीपीए से अधिक की प्रतिबद्धता की, जो दुनिया में सबसे बड़ी है |
| कौशल विकास | 14 राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में 8,149 अभ्यर्थी प्रशिक्षित और 7,248 प्रमाणित |
पायलट, हब और क्लस्टर
पायलट परियोजनाओं के लिए कम कार्बन वाले इस्पात को 455 करोड़ रुपये, गतिशीलता को 496 करोड़ रुपये और जहाजरानी को 115 करोड़ रुपये रखे गए हैं। इस्पात में पाँच पायलट मंजूर हुए हैं, और गतिशीलता की बारह परियोजनाएँ सत्तर हाइड्रोजन वाहन सड़क पर उतारेंगी, साथ में इक्कीस मार्गों पर सोलह ईंधन भरने के स्टेशन बनेंगे। कांडला का दीनदयाल बंदरगाह, तूतीकोरिन का वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह और पारादीप बंदरगाह हाइड्रोजन हब माने गए हैं, तथा चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर जोधपुर, ओडिशा, पुणे और केरल को मिले हैं। कांडला में स्वदेशी रूप से बना 1 मेगावाट का संयंत्र जुलाई 2025 में शुरू हुआ।
लागत घटाने वाले नियम
31 दिसंबर 2030 तक शुरू होने वाले संयंत्रों को पच्चीस वर्ष तक अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क से छूट है। ओपन एक्सेस पंद्रह दिन में देना है और अतिरिक्त नवीकरणीय बिजली तीस दिन तक बैंक की जा सकती है। अकेले चलने वाले इलेक्ट्रोलिसिस संयंत्रों को पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी से छूट मिली है, और विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम, 2005 के शुल्क लाभ कैप्टिव नवीकरणीय उपकरणों तक बढ़ाए गए हैं। गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान तथा पश्चिम बंगाल, इन छह राज्यों ने अलग हरित हाइड्रोजन नीतियाँ अधिसूचित की हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
| मिशन | राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित |
|---|---|
| मंजूरी | जनवरी 2023, केंद्रीय मंत्रिमंडल |
| परिव्यय | 19,744 करोड़ रुपये |
| लक्ष्य | 2030 तक सालाना कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन, निर्यात मांग के साथ 10 एमएमटी तक |
| हरित हाइड्रोजन मानक | अगस्त 2023 में अधिसूचित; प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर अधिकतम 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य, वेल-टू-गेट, बारह महीने का औसत |
| साइट परिव्यय | 2029-30 तक 17,490 करोड़ रुपये |
| इलेक्ट्रोलाइजर प्रोत्साहन | 15 कंपनियाँ, सालाना 3,000 मेगावाट |
| उत्पादन प्रोत्साहन | सालाना 8,62,000 टन; फरवरी 2026 तक लगभग 8,000 टन सालाना क्षमता शुरू |
| पायलट आवंटन | इस्पात 455 करोड़ रुपये, गतिशीलता 496 करोड़ रुपये, जहाजरानी 115 करोड़ रुपये |
| मान्यता प्राप्त हब | दीनदयाल बंदरगाह (कांडला), वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह (तूतीकोरिन), पारादीप बंदरगाह |
| हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर | जोधपुर, ओडिशा, पुणे और केरल |
| अलग नीति वाले राज्य | गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल |
परीक्षा की दृष्टि से
याद रखें मिशन की मंजूरी (जनवरी 2023), परिव्यय (19,744 करोड़ रुपये) और लक्ष्य (2030 तक सालाना 5 एमएमटी, निर्यात के साथ 10 एमएमटी); अगस्त 2023 का हरित हाइड्रोजन मानक जिसमें प्रति किलोग्राम 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य की सीमा है; साइट का 17,490 करोड़ रुपये परिव्यय; तीन मान्यता प्राप्त हब; चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर; 31 दिसंबर 2030 तक शुरू संयंत्रों को पच्चीस वर्ष की पारेषण शुल्क छूट; और अलग नीति वाले छह राज्य।
अभ्यास प्रश्न
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए कितने परिव्यय को मंजूरी दी?
- A.9,744 करोड़ रुपये
- B.17,490 करोड़ रुपये
- C.19,744 करोड़ रुपये
- D.24,000 करोड़ रुपये
उत्तर देखें
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी 2023 में इस परिव्यय के साथ मिशन को मंजूरी दी, और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय इसे इस उद्देश्य से लागू कर रहा है कि भारत हरित हाइड्रोजन तथा उसके उत्पादों का वैश्विक केंद्र बने।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के हरित हाइड्रोजन मानक के अनुसार हाइड्रोजन को हरित कहलाने के लिए अधिकतम उत्सर्जन कितना हो सकता है?
- A.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 1 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- B.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- C.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 5 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- D.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 9 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
उत्तर देखें
यह मानक नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अगस्त 2023 में अधिसूचित किया, इसे वेल-टू-गेट आधार पर मापा जाता है और बारह महीने के औसत के रूप में आँका जाता है, जिससे भारत हरित हाइड्रोजन की औपचारिक परिभाषा तय करने वाले पहले कुछ देशों में आ गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →31 दिसंबर 2030 तक शुरू होने वाले हरित हाइड्रोजन संयंत्रों को अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क से कितने वर्ष की छूट है?
- A.10 वर्ष
- B.15 वर्ष
- C.20 वर्ष
- D.25 वर्ष
उत्तर देखें
दिसंबर 2030 के अंत तक शुरू होने वाले हरित हाइड्रोजन तथा हरित अमोनिया संयंत्रों को पच्चीस वर्ष तक अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के शुल्क से छूट है, जिससे ऐसे संयंत्रों तक नवीकरणीय बिजली पहुँचाने की लागत घटती है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर दिए गए हैं। इनमें से कौन एक है?
- A.जोधपुर
- B.कांडला
- C.तूतीकोरिन
- D.पारादीप
उत्तर देखें
मिशन के तहत दिए गए चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर जोधपुर, ओडिशा, पुणे और केरल हैं। ये क्लस्टर उत्पादन, खपत तथा अधोसंरचना को एक ही क्षेत्र में लाते हैं, जिससे परियोजना की व्यवहार्यता बढ़ती है और पैमाने का लाभ मिलता है, क्योंकि हाइड्रोजन का परिवहन कठिन होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का परिव्यय और लक्ष्य क्या है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे जनवरी 2023 में 19,744 करोड़ रुपये के परिव्यय से मंजूरी दी। इसका लक्ष्य 2030 तक सालाना कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन क्षमता है, जो निर्यात मांग बढ़ने पर 10 मिलियन मीट्रिक टन तक जा सकती है।
भारत में हाइड्रोजन कब हरित मानी जाती है?
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अगस्त 2023 में हरित हाइड्रोजन मानक अधिसूचित किया, जिसके अनुसार प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर उत्सर्जन 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य से अधिक न हो, जिसे वेल-टू-गेट आधार पर बारह महीने के औसत से मापा जाता है।
किन बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन हब माना गया है?
गुजरात में कांडला का दीनदयाल बंदरगाह, तमिलनाडु में तूतीकोरिन का वी.ओ. चिदंबरनार बंदरगाह और ओडिशा का पारादीप बंदरगाह। कांडला बंदरगाह पर स्वदेशी रूप से बना 1 मेगावाट का हरित हाइड्रोजन संयंत्र जुलाई 2025 में शुरू हुआ।
साइट कार्यक्रम क्या है?
हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए रणनीतिक पहल, जो मिशन का प्रमुख घटक है और जिसका परिव्यय 2029-30 तक 17,490 करोड़ रुपये है। यह देश में इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण तथा हरित हाइड्रोजन उत्पादन, दोनों पर प्रोत्साहन देता है।
स्रोत
- https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2331561 (नए टैब में खुलेगा) — Press Information Bureau
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