31 दिसंबर 2030 तक शुरू होने वाले हरित हाइड्रोजन संयंत्रों को अंतर-राज्यीय पारेषण शुल्क से कितने वर्ष की छूट है?
- A.10 वर्ष
- B.15 वर्ष
- C.20 वर्ष
- D.25 वर्ष
सही उत्तर
व्याख्या
सही उत्तर 25 वर्ष है। दिसंबर 2030 के अंत तक शुरू होने वाले हरित हाइड्रोजन तथा हरित अमोनिया संयंत्रों को पच्चीस वर्ष तक अंतर-राज्यीय पारेषण प्रणाली के शुल्क से छूट है, जिससे ऐसे संयंत्रों तक नवीकरणीय बिजली पहुँचाने की लागत घटती है। विकल्प A गलत है क्योंकि दस वर्ष दी गई छूट से कम है। विकल्प B दूसरे नियम से बना भ्रम है, क्योंकि हरित हाइड्रोजन एवं हरित अमोनिया नीति के तहत ओपन एक्सेस पंद्रह दिन में देना है। विकल्प C गलत है क्योंकि बीस वर्ष छूट की अवधि से मेल नहीं खाता। इसी नीति के तहत अतिरिक्त नवीकरणीय बिजली तीस दिन तक बैंक की जा सकती है और अकेले चलने वाले इलेक्ट्रोलिसिस संयंत्रों को पूर्व पर्यावरणीय मंजूरी से छूट मिली है।
पूरा लेख पढ़ें: हरित हाइड्रोजन मिशन: 19,744 करोड़, 2030 तक 5 एमएमटी लक्ष्य
अभ्यास प्रश्न
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के लिए कितने परिव्यय को मंजूरी दी?
- A.9,744 करोड़ रुपये
- B.17,490 करोड़ रुपये
- C.19,744 करोड़ रुपये
- D.24,000 करोड़ रुपये
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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी 2023 में इस परिव्यय के साथ मिशन को मंजूरी दी, और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय इसे इस उद्देश्य से लागू कर रहा है कि भारत हरित हाइड्रोजन तथा उसके उत्पादों का वैश्विक केंद्र बने।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत के हरित हाइड्रोजन मानक के अनुसार हाइड्रोजन को हरित कहलाने के लिए अधिकतम उत्सर्जन कितना हो सकता है?
- A.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 1 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- B.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 2 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- C.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 5 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
- D.प्रति किलोग्राम हाइड्रोजन पर 9 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य
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यह मानक नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने अगस्त 2023 में अधिसूचित किया, इसे वेल-टू-गेट आधार पर मापा जाता है और बारह महीने के औसत के रूप में आँका जाता है, जिससे भारत हरित हाइड्रोजन की औपचारिक परिभाषा तय करने वाले पहले कुछ देशों में आ गया।
पूरी व्याख्या पढ़ें →चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर दिए गए हैं। इनमें से कौन एक है?
- A.जोधपुर
- B.कांडला
- C.तूतीकोरिन
- D.पारादीप
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मिशन के तहत दिए गए चार हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर जोधपुर, ओडिशा, पुणे और केरल हैं। ये क्लस्टर उत्पादन, खपत तथा अधोसंरचना को एक ही क्षेत्र में लाते हैं, जिससे परियोजना की व्यवहार्यता बढ़ती है और पैमाने का लाभ मिलता है, क्योंकि हाइड्रोजन का परिवहन कठिन होता है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए लेखों के अनुसार स्वच्छ ऊर्जा बदलाव में किन क्षेत्रों में विस्तार और निवेश हो रहा है?
- A.रूफटॉप सोलर, भंडारण और ट्रांसमिशन
- B.अपतटीय तेल खनन और शोधन
- C.कोयला गैसीकरण और धुलाई
- D.परमाणु ईंधन पुनर्संसाधन
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केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी और माइक ब्लूमबर्ग के जिस लेख को प्रधानमंत्री ने साझा किया, उसमें नवीकरणीय ऊर्जा की कुल बढ़त, रूफटॉप सोलर के विस्तार तथा भंडारण और ट्रांसमिशन में हो रहे निवेश का ब्योरा है।
पूरी व्याख्या पढ़ें →भारत में सौर ऊर्जा की बढ़त का श्रेय किस जोड़ी को दिया गया है?
- A.पीएम सूर्य घर और पीएम-कुसुम
- B.पीएम उज्ज्वला और पीएम गति शक्ति
- C.पीएम आवास और पीएम मुद्रा
- D.पीएम विश्वकर्मा और पीएम पोषण
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प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए लेख में देश में सौर ऊर्जा की बढ़त का श्रेय इन्हीं जैसी पहलों को दिया गया है, जो क्रमशः घरों और खेतों के स्तर पर सौर बिजली से जुड़ी हैं।
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