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एनसीसी बालिका कैडेटों ने अपराजिता परांग ला ट्रेक पूरा किया

एनसीसी की 20 बालिका कैडेटों ने अपराजिता परांग ला 2026 ट्रेक पूरा किया और हिमाचल तथा लद्दाख को जोड़ने वाला 5,578 मीटर ऊंचा परांग ला दर्रा पार किया।

लेखक प्रकाशित · 2 मिनट
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एनसीसी बालिका कैडेटों ने अपराजिता परांग ला ट्रेक पूरा किया

चर्चा में क्यों

16 सितंबर 2026 को एनसीसी के अखिल भारतीय बालिका अधिक ऊंचाई वाले ट्रेक अपराजिता - परांग ला 2026 का समापन लद्दाख के करजोक में हुआ, जिसमें 20 बालिका कैडेटों ने 5,578 मीटर ऊंचा परांग ला दर्रा पार किया।

राष्ट्रीय कैडेट कोर का एक अखिल भारतीय साहसिक अभियान 16 सितंबर 2026 को पूरा हुआ। इसे अखिल भारतीय बालिका अधिक ऊंचाई वाला लंबा ट्रेक कहा जाता है, नाम है अपराजिता - परांग ला 2026। समापन समारोह लद्दाख के करजोक में हुआ। एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने दल का स्वागत किया। रक्षा मंत्रालय की अपर सचिव दीप्ति मोहिल चावला भी साथ रहीं।

दल में कौन था

दल में 20 एनसीसी बालिका कैडेट शामिल थीं। इनका चयन देश भर से हुआ था। उनके साथ अधिकारी, प्रशिक्षक, चिकित्सा कर्मी और सहायक कर्मचारी भी थे। यह अभियान एनसीसी की प्रमुख साहसिक गतिविधियों में गिना जाता है।

कौन सा दर्रा पार किया

दल ने परांग ला दर्रा पार किया। यह दर्रा 5,578 मीटर की ऊंचाई पर है। यह हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है। मार्ग हिमाचल प्रदेश के किब्बर से लद्दाख के करजोक तक रहा।

दूरी और अवधि

कैडेटों ने लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय की। अभियान में 30 दिन लगे। रास्ता ग्लेशियरों से होकर गुजरा। बर्फ के मैदान और नदी घाटियां भी मार्ग में पड़ीं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से इसे हरी झंडी दिखाई थी।

आयोजन का उद्देश्य

घोषित उद्देश्य युवा महिलाओं को साहसिक गतिविधियों से जोड़ना था। कठिन ऊंचाई वाली परिस्थितियों का अनुभव दूसरा उद्देश्य रहा। राष्ट्रीय एकता तीसरा लक्ष्य था, क्योंकि कैडेट देश के अलग-अलग हिस्सों से आई थीं। लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने अभियान पूरा करने पर कैडेटों और स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां युवाओं में नेतृत्व, आत्मविश्वास, टीम भावना और सहनशक्ति बढ़ाती हैं।

एक नजर में

अभियानअपराजिता - परांग ला 2026, अखिल भारतीय बालिका ट्रेक
आयोजकराष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी)
प्रतिभागी20 एनसीसी बालिका कैडेट
दर्रापरांग ला दर्रा, 5,578 मीटर
मार्गकिब्बर, हिमाचल प्रदेश से करजोक, लद्दाख
दूरीलगभग 250 किलोमीटर, 30 दिनों में
हरी झंडी18 अगस्त 2026, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
स्वागत16 सितंबर 2026, महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स

महत्वपूर्ण तथ्य

अभियानअपराजिता - परांग ला 2026
आयोजकराष्ट्रीय कैडेट कोर
कैडेटदेश भर से 20 बालिका कैडेट
दर्रापरांग ला दर्रा, 5,578 मीटर
जोड़ता हैस्पीति घाटी (हिमाचल प्रदेश) और चांगथांग (लद्दाख)
मार्गकिब्बर से करजोक
दूरी एवं अवधिलगभग 250 किलोमीटर, 30 दिन
हरी झंडी18 अगस्त 2026, राजनाथ सिंह, नई दिल्ली
समापन16 सितंबर 2026, लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स, करजोक

परीक्षा की दृष्टि से

अभियान का नाम (अपराजिता - परांग ला 2026), आयोजक (एनसीसी), कैडेटों की संख्या (20), दर्रे की ऊंचाई (5,578 मीटर), मार्ग किब्बर से करजोक, दूरी 250 किलोमीटर और राजनाथ सिंह द्वारा हरी झंडी याद रखें।

अभ्यास प्रश्न

Q1.रक्षामध्यम

अपराजिता - परांग ला 2026 ट्रेक में पार किया गया परांग ला दर्रा कितनी ऊंचाई पर है?

  1. A.4,578 मीटर
  2. B.5,578 मीटर
  3. C.6,578 मीटर
  4. D.5,050 मीटर
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. 5,578 मीटर

व्याख्या

सही उत्तर 5,578 मीटर है। अखिल भारतीय बालिका अधिक ऊंचाई वाले लंबे ट्रेक के दौरान 20 एनसीसी बालिका कैडेटों के दल ने इसी ऊंचाई पर स्थित परांग ला दर्रा पार किया। यह दर्रा हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है, इसीलिए मार्ग हिमाचल प्रदेश के किब्बर से शुरू होकर लद्दाख के करजोक में समाप्त हुआ। विकल्प A, C और D ऐसी ऊंचाइयां बताते हैं जो देखने में विश्वसनीय लगती हैं पर अभिलेख के आंकड़े से मेल नहीं खातीं, और अभियानों पर बनने वाले प्रश्न प्रायः दर्रे या चोटी की सटीक ऊंचाई पर ही केंद्रित होते हैं। ऊंचाई के साथ लगभग 250 किलोमीटर की दूरी और 30 दिन की अवधि भी याद रखें, क्योंकि ये तीन आंकड़े मिलकर पूरे अभियान का सार बनाते हैं।

Q2.रक्षाकठिन

अपराजिता - परांग ला 2026 ट्रेक को नई दिल्ली से हरी झंडी किसने दिखाई थी?

  1. A.एनसीसी के महानिदेशक
  2. B.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
  3. C.थल सेनाध्यक्ष
  4. D.अपर सचिव, रक्षा मंत्रालय
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

व्याख्या

सही उत्तर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हैं, जिन्होंने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से इस ट्रेक को रवाना किया था। विकल्प A सबसे बड़ा जाल है, क्योंकि एनसीसी महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स समारोहों में शामिल अवश्य थे, पर उन्होंने अभियान के अंत में लद्दाख के करजोक में दल का स्वागत किया था, शुरुआत में हरी झंडी नहीं दिखाई। विकल्प D इसी कारण गलत है, रक्षा मंत्रालय की अपर सचिव दीप्ति मोहिल चावला समापन समारोह में उपस्थित थीं, प्रस्थान के समय नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि इस अभियान में थल सेनाध्यक्ष की कोई घोषित भूमिका नहीं थी। अभ्यर्थी दोनों समारोह अलग-अलग याद रखें, प्रस्थान 18 अगस्त 2026 और समापन 16 सितंबर 2026। यह भी ध्यान रखें कि प्रस्थान नई दिल्ली से हुआ था जबकि समापन लद्दाख के करजोक में हुआ, इसलिए स्थान भी अलग-अलग पूछे जा सकते हैं।

Q3.रक्षाकठिन

परांग ला दर्रा स्पीति घाटी को किस क्षेत्र से जोड़ता है?

  1. A.जांस्कर
  2. B.चांगथांग
  3. C.नुब्रा
  4. D.लाहौल
उत्तर देखें

सही उत्तर: B. चांगथांग

व्याख्या

सही उत्तर चांगथांग है। 5,578 मीटर ऊंचा परांग ला दर्रा हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है, और इसीलिए यह ट्रेक हिमाचल प्रदेश के किब्बर से लद्दाख के करजोक तक चला। विकल्प A, C और D लद्दाख तथा आसपास के पर्वतों के अन्य प्रसिद्ध क्षेत्रों के नाम हैं, इसलिए जिस अभ्यर्थी को दर्रा याद है पर जुड़े क्षेत्र नहीं, उसके लिए ये स्वाभाविक अनुमान बन जाते हैं। मार्ग ग्लेशियरों, बर्फ के मैदानों और नदी घाटियों से होकर गुजरा और दल के साथ अधिकारी, प्रशिक्षक, चिकित्सा कर्मी तथा सहायक कर्मचारी भी थे। अभियान का उद्देश्य युवा महिलाओं को साहसिक गतिविधियों से जोड़ना, कठिन ऊंचाई की परिस्थितियों का अनुभव देना और अलग-अलग राज्यों की कैडेटों को साथ लाकर राष्ट्रीय एकता मजबूत करना था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परांग ला दर्रे की ऊंचाई कितनी है?

5,578 मीटर। यह हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है और एनसीसी की 20 बालिका कैडेटों ने इसे पार किया।

इस अभियान को हरी झंडी किसने दिखाई और समापन किसने किया?

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से रवाना किया और महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स ने 16 सितंबर 2026 को करजोक में स्वागत किया।

यह ट्रेक कितना लंबा था?

लगभग 250 किलोमीटर, जो 30 दिनों में हिमाचल प्रदेश के किब्बर से लद्दाख के करजोक तक ग्लेशियरों, बर्फ के मैदानों और नदी घाटियों से होकर तय किया गया।

स्रोत

इनके लिए उपयोगी:SSCSSC CGLSSC GD कांस्टेबल