अपराजिता - परांग ला 2026 ट्रेक में पार किया गया परांग ला दर्रा कितनी ऊंचाई पर है?
- A.4,578 मीटर
- B.5,578 मीटर
- C.6,578 मीटर
- D.5,050 मीटर
सही उत्तर
B. 5,578 मीटर
व्याख्या
सही उत्तर 5,578 मीटर है। अखिल भारतीय बालिका अधिक ऊंचाई वाले लंबे ट्रेक के दौरान 20 एनसीसी बालिका कैडेटों के दल ने इसी ऊंचाई पर स्थित परांग ला दर्रा पार किया। यह दर्रा हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है, इसीलिए मार्ग हिमाचल प्रदेश के किब्बर से शुरू होकर लद्दाख के करजोक में समाप्त हुआ। विकल्प A, C और D ऐसी ऊंचाइयां बताते हैं जो देखने में विश्वसनीय लगती हैं पर अभिलेख के आंकड़े से मेल नहीं खातीं, और अभियानों पर बनने वाले प्रश्न प्रायः दर्रे या चोटी की सटीक ऊंचाई पर ही केंद्रित होते हैं। ऊंचाई के साथ लगभग 250 किलोमीटर की दूरी और 30 दिन की अवधि भी याद रखें, क्योंकि ये तीन आंकड़े मिलकर पूरे अभियान का सार बनाते हैं।
पूरा लेख पढ़ें: एनसीसी बालिका कैडेटों ने अपराजिता परांग ला ट्रेक पूरा किया
अभ्यास प्रश्न
अपराजिता - परांग ला 2026 ट्रेक को नई दिल्ली से हरी झंडी किसने दिखाई थी?
- A.एनसीसी के महानिदेशक
- B.रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
- C.थल सेनाध्यक्ष
- D.अपर सचिव, रक्षा मंत्रालय
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
व्याख्या
सही उत्तर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह हैं, जिन्होंने 18 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से इस ट्रेक को रवाना किया था। विकल्प A सबसे बड़ा जाल है, क्योंकि एनसीसी महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स समारोहों में शामिल अवश्य थे, पर उन्होंने अभियान के अंत में लद्दाख के करजोक में दल का स्वागत किया था, शुरुआत में हरी झंडी नहीं दिखाई। विकल्प D इसी कारण गलत है, रक्षा मंत्रालय की अपर सचिव दीप्ति मोहिल चावला समापन समारोह में उपस्थित थीं, प्रस्थान के समय नहीं। विकल्प C गलत है क्योंकि इस अभियान में थल सेनाध्यक्ष की कोई घोषित भूमिका नहीं थी। अभ्यर्थी दोनों समारोह अलग-अलग याद रखें, प्रस्थान 18 अगस्त 2026 और समापन 16 सितंबर 2026। यह भी ध्यान रखें कि प्रस्थान नई दिल्ली से हुआ था जबकि समापन लद्दाख के करजोक में हुआ, इसलिए स्थान भी अलग-अलग पूछे जा सकते हैं।
परांग ला दर्रा स्पीति घाटी को किस क्षेत्र से जोड़ता है?
- A.जांस्कर
- B.चांगथांग
- C.नुब्रा
- D.लाहौल
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. चांगथांग
व्याख्या
सही उत्तर चांगथांग है। 5,578 मीटर ऊंचा परांग ला दर्रा हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है, और इसीलिए यह ट्रेक हिमाचल प्रदेश के किब्बर से लद्दाख के करजोक तक चला। विकल्प A, C और D लद्दाख तथा आसपास के पर्वतों के अन्य प्रसिद्ध क्षेत्रों के नाम हैं, इसलिए जिस अभ्यर्थी को दर्रा याद है पर जुड़े क्षेत्र नहीं, उसके लिए ये स्वाभाविक अनुमान बन जाते हैं। मार्ग ग्लेशियरों, बर्फ के मैदानों और नदी घाटियों से होकर गुजरा और दल के साथ अधिकारी, प्रशिक्षक, चिकित्सा कर्मी तथा सहायक कर्मचारी भी थे। अभियान का उद्देश्य युवा महिलाओं को साहसिक गतिविधियों से जोड़ना, कठिन ऊंचाई की परिस्थितियों का अनुभव देना और अलग-अलग राज्यों की कैडेटों को साथ लाकर राष्ट्रीय एकता मजबूत करना था।
बैठक में बताया गया कि भारत-मोरक्को द्विपक्षीय सहयोग की 70वीं वर्षगांठ किस वर्ष पड़ेगी?
- A.2026
- B.2027
- C.2028
- D.2030
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. 2027
व्याख्या
सही उत्तर 2027 है। बैठक में दोनों पक्षों ने कहा कि भारत और मोरक्को के द्विपक्षीय सहयोग की सत्तरवीं वर्षगांठ उसी वर्ष आ रही है और इसी पड़ाव से पहले रक्षा संबंधों को व्यापक बनाने पर सहमति बनी। विकल्प A उस वर्ष को बताता है जिसमें बैठक हुई, क्योंकि बैठक 8 सितंबर 2026 को हुई थी; जल्दबाजी में पढ़ने वाला अभ्यर्थी यही चुन सकता है, जबकि बैठक का वर्ष और वर्षगांठ का वर्ष अलग तथ्य हैं। विकल्प C और विकल्प D ऐसे वर्ष हैं जिनका उल्लेख इस बैठक की विज्ञप्ति में है ही नहीं। इस समाचार को दोहराते समय तीन वर्ष अलग-अलग याद रखें: रक्षा समझौता ज्ञापन सितंबर 2025 में, समिति की पहली बैठक 2026 में और सहयोग की सत्तरवीं वर्षगांठ 2027 में।
भारत-मोरक्को संयुक्त रक्षा समिति जिस समझौता ज्ञापन से बनी, वह किसकी मोरक्को यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था?
- A.प्रधानमंत्री
- B.रक्षा मंत्री
- C.विदेश मंत्री
- D.प्रमुख रक्षा अध्यक्ष
उत्तर देखें
सही उत्तर: B. रक्षा मंत्री
व्याख्या
सही उत्तर रक्षा मंत्री है। रक्षा सहयोग का समझौता ज्ञापन सितंबर 2025 में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की मोरक्को यात्रा के दौरान हस्ताक्षरित हुआ था और संयुक्त रक्षा समिति उसी समझौते से बना संस्थागत तंत्र है। विकल्प A यानी प्रधानमंत्री गलत है, क्योंकि विज्ञप्ति इस समझौते को रक्षा मंत्री की यात्रा से जोड़ती है। विकल्प C यानी विदेश मंत्री भ्रमित करने वाला विकल्प है, क्योंकि बैठक में भारतीय दल में विदेश मंत्रालय के अधिकारी शामिल थे; परंतु बैठक में शामिल होना और मूल समझौते पर हस्ताक्षर करना अलग-अलग बातें हैं। विकल्प D यानी प्रमुख रक्षा अध्यक्ष गलत है, क्योंकि ऐसे समझौते राजनीतिक स्तर पर होते हैं। याद रखने का क्रम सरल है: 2025 की यात्रा से समझौता ज्ञापन और समझौता ज्ञापन से यह समिति बनी।
भारत-मोरक्को संयुक्त रक्षा समिति की पहली बैठक किस शहर में हुई?
- A.रबात
- B.कासाब्लांका
- C.नई दिल्ली
- D.मुंबई
उत्तर देखें
सही उत्तर: C. नई दिल्ली
व्याख्या
सही उत्तर नई दिल्ली है। भारत और मोरक्को की संयुक्त रक्षा समिति की पहली बैठक 8 सितंबर 2026 को भारत की राजधानी में हुई और मोरक्को का प्रतिनिधिमंडल इसी उद्देश्य से 7 से 10 सितंबर 2026 तक भारत के दौरे पर रहा। विकल्प A यानी रबात मोरक्को की राजधानी है, इसलिए यह सबसे आकर्षक गलत विकल्प है, परंतु इस बैठक की मेजबानी भारत ने की थी, मोरक्को ने नहीं। विकल्प B यानी कासाब्लांका मोरक्को का प्रसिद्ध व्यावसायिक शहर है और इस बैठक से इसका कोई संबंध नहीं है। विकल्प D यानी मुंबई इसलिए गलत है कि प्रतिनिधिमंडल का पूरा कार्यक्रम राष्ट्रीय समर स्मारक, डीपीएसयू भवन और आर्मी हॉस्पिटल तक सीमित था, जो सभी राजधानी में हैं। यह भी याद रखें कि समिति स्वयं सितंबर 2025 में मोरक्को में हुए समझौता ज्ञापन से बनी थी।